अफ़ग़ान क्रिकेटर राशिद ख़ान की अपील - दुनिया हमें अराजकता के बीच अकेला न छोड़े

अफ़ग़ानिस्तान के क्रिकेट खिलाड़ी राशिद ख़ान ने मंगलवार को दुनिया के नेताओं से अपील की है कि उनके देश को इस हिंसक माहौल में अकेला न छोड़ा जाए.

लाइव कवरेज

अपूर्व कृष्ण, अनंत प्रकाश and सिंधुवासिनी

  1. चुप क्यों हैं पीएम मोदी? - पेगासस मामले में रक्षा मंत्रालय की सफ़ाई पर चिदंबरम ने पूछा

    पी. चिंदंबरम

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    कांग्रेस नेता और पूर्व वित्त मंत्री पी चिदंबरम ने पेगासस जासूसी मामले में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर निशाना साधा है.

    उन्होंने एक ट्वीट में कहा, “रक्षा मंत्रालय ने एनएसओ समूह और इसराइल के साथ किसी भी सौदे से खु़द को 'दोषमुक्त' किया है.अगर रक्षा मंत्रालय सही है तो एक मंत्रालय/विभाग को हटा देते हैं. बाकी आधा दर्जन सामान्य संदिग्धों के बारे में क्या?’’

    चिदंबरम ने कहा,“सभी मंत्रालयों/विभागों की ओर से केवल पीएम ही जवाब दे सकते हैं. वह चुप क्यों हैं?”

    इससे पहले सोमवार को भारत के रक्षा मंत्रालय ने कहा था कि जासूसी सॉफ़्टवेयर पेगासस बनाने वाले इसराइल के एनएसओ ग्रुप के साथ उसने किसी तरह का लेनदेन नहीं किया है.

    पेगासस एक स्पाइवेयर है जिसके ज़रिए भारत में सरकार की ओर से कथित तौर पर मंत्रियों, राजनेताओं, न्यायाधीशों, पत्रकारों और अन्य लोगों की कथित जासूसी किए जाने के आरोप के सामने आने के बाद हंगामा जारी है.

    सुप्रीम कोर्ट में भी इस मामले में कई याचिकाएँ दायर की गई हैं. पश्चिम बंगाल सरकार ने भी इस मामले की जाँच के लिए एक आयोग गठित किया है.

    समाचार एजेंसी पीटीआई के मुताबिक़, सोमवार को राज्यसभा में एक सवाल के जबाव में रक्षा राज्यमंत्री अजय भट्ट ने कहा, ''रक्षा मंत्रालय ने एनएसओ ग्रुप टेक्नॉलॉजीस के साथ किसी तरह का लेनदेन नहीं किया है.''

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    एनएसओ ग्रुप, इसराइल की एक सर्विलांस सॉफ्टवेयर कंपनी है.

    आरोप हैं कि उसके बनाए पेगासस फोन स्पाइवेयर का इस्तेमाल भारत समेत कई देशों में पत्रकारों, कार्यकर्ताओं और नेताओं की जासूसी करने के किया गया.

    हालांकि एनएसओ ने कहा है कि उसने कोई ग़लत काम नहीं किया है.

    भारत में संसद के मॉनसून सत्र में इसी मुद्दे पर बहुत हंगामा हुआ है. विपक्षी दलों ने मोदी सरकार से मांग की है कि संसद में इस मामले पर चर्चा कराई जाए.

    भारत सरकार जासूसी के इन आरोपों से इनकार करती आई है. गृह मंत्री अमित शाह ने इसे ‘अंतरराष्ट्रीय साज़िश’ करार दिया था.

    केंद्रीय आईटी मंत्री अश्विनी वैष्णव भी ने इन ख़बरों को ग़लत बताया था.

  2. अफ़ग़ानिस्तान के लिए पाकिस्तान को बलि का बकरा ना बनाएँ- बोले क़ुरैशी, भारत पर भी बरसे

    पाकिस्तान के विदेश मंत्री शाह महमूद क़ुरैशी

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    पाकिस्तान के विदेश मंत्री शाह महमूद क़ुरैशी ने कहा है कि अंतरराष्ट्रीय समुदाय को अफ़ग़ान सुरक्षाबलों के कमज़ोर पड़ने के कारणों पर विचार करना चाहिए ना कि दूसरों की नाकामियों के लिए पाकिस्तान पर उंगली उठानी चाहिए.

    उन्होंने सोमवार को एक संवाददाता सम्मेलन में कहा,"अफ़ग़ान सेना में लड़ने की इच्छा की कमी, और वो जिस तरह समर्पण करते जा रहे हैं, उसके लिए हमें ज़िम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता. "

    क़ुरैशी ने कहा, "अफ़ग़ानिस्तान में नाकामी के लिए पाकिस्तान को बलि का बकरा बनाना दुर्भाग्यपूर्ण है."

    पाकिस्तानी विदेश मंत्री ने ये टिप्पणी पिछले शुक्रवार को संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की आपात बैठक के सिलसिले में की जिसमें पाकिस्तान पर तालिबान की मदद करने का आरोप लगाया गया था.

    पाकिस्तान को इस बैठक में नहीं बुलाया गया था. क़ुरैशी ने कहा,"हमने औपचारिक दर्ख़्वास्त की थी कि हमें भी मौजूद रहने दिया जाए पर इसे स्वीकार नहीं किया गया.

    उन्होंने इसके लिए भारत की आलोचना की जो अगस्त महीने के लिए सुरक्षा परिषद का अध्यक्ष है.

    उन्होंने कहा,"हमने भारत को आगाह किया था कि वो निष्पक्ष रूप से काम करे मगर मगर दुर्भाग्य से भारत, जो कि सुरक्षा परिषद का स्थायी सदस्य बनना चाहता है, उसने उस ज़िम्मेदारी के अनुरूप बर्ताव नहीं किया."

    अफ़ग़ानिस्तान में पाकिस्तान की भूमिका के बारे में क़ुरैशी ने कहा कि उसने 2020 में अमेरिका और तालिबान के बीच समझौता करवाने में मदद की थी और बाद में अफ़ग़ानिस्तान में वार्ताओं में भी सहयोग किया.

    लेकिन दोहा में अफ़ग़ानिस्तान और तालिबान के बीच पिछले वर्ष सितंबर से शुरू हुई वार्ता में बहुत प्रगति नहीं हुई.

    पाकिस्तानी विदेश मंत्री ने इसे लेकर आगाह करते हुए कहा कि इसकी ज़िम्मेदारी भी पाकिस्तान पर नहीं आनी चाहिए.

    उन्होंने कहा,"अगर अफ़ग़ान वार्ता कामयाब होती है तो कामयाबी का सेहरा अफ़ग़ान नेताओं के सिर पर होगा, पर ख़ुदा-ना-ख़ास्ता अगर ये वार्ता नाकाम होती है तो नाकामी की ज़िम्मेदारी भी अफ़ग़ानिस्तान पर जाती है पाकिस्तान पर नहीं."

    क़ुरैशी ने कहा कि पाकिस्तान ने अफ़़ग़ानिस्तान में शांति प्रक्रिया के लिए एक 'सकारात्मक किरदार निभाया है और निभाता रहेगा'.

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  3. नीरज चोपड़ा ने कहा- अगला लक्ष्य 90 मीटर; 7 अगस्त जेवलिन थ्रो डे घोषित

    नीरज चोपड़ा

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    टोक्यो ओलंपिक समापन के बाद भारत के एथलेटिक्स फ़ेडरेशन ने वतन लौटे खिलाड़ियों के साथ दिल्ली के एक ताज होटल में एक प्रेस कॉन्फ़्रेंस की.

    फ़ेडरेशन ने नीरज चोपड़ा के स्वर्ण पदक जीतने को यादगार बनाने और भारत में जेवलिन थ्रो को बढ़ावा देने के मक़सद से सात अगस्त को जेवलिन थ्रो डे घोषित किया है.

    प्रेस कॉन्फ़्रेंस में गोल्ड मेडल विजेता नीरज चोपड़ा के अलावा डिस्कस थ्रोअर कमलप्रीत कौर, रिले रेस की टीम समेत कई अन्य एथलीट भी मौजूद रहे.

    फ़ेडरेशन ने खिलाड़ियों को सम्मानित किया और ओलंपिक में उनके प्रदर्शन के बेहतरीन लम्हों का वीडियो भी एक बार फिर सबके साथ साझा किया.

    कॉन्फ़्रेंस के दौरान जैवलिन थ्रो में स्वर्ण पदक जीतने वाले नीरज चोपड़ा ने भारतीय सेना, प्रधानमंत्री मोदी, एथलेटिक्स फ़ेडरेशन और अपने स्पॉन्सर्स का शुक्रिया अदा किया.

    उन्होंने कहा, “कोरोना काल में कई तरह की मुश्किलों के बावजूद सबके सहयोग और मेहनत से हमने यहाँ तक का सफ़र तय किया.”

    नीरज ने आगे के लक्ष्य के बारे में पूछे गए एक सवाल के जवाब में कहा, ''इस ओलंपिक में मैं 90 मीटर तक जेवलिन फेंकना चाहता था लेकिन वो नहीं हो सका. मैं प्रैक्टिस में इसके आस-पास जाता रहा हूँ. अगर सही एंगल हो और सही टेक्नीक रहे तो मैं और दो-तीन मीटर आगे जा सकता हूँ. ये मेरा सपना है और मैं इसे ज़रूर पूरा करूंगा.''

    नीरज चोपड़ा ने टोक्यो ओलंपिक में 87.58 मीटर दूर भाला फेंक स्वर्ण पदक अपने और देश के नाम किया था.

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    मिल्खा सिंह को समर्पित किया गोल्ड मेडल

    खिलाड़ियों को मिलने वाले सरकारी समर्थन के बारे में चोपड़ा ने कहा कि यह बहुत बड़ी बात है कि किसी देश का प्रधानमंत्री अपने खिलाड़ियों का इतना सहयोग कर रहा है.

    नीरज चोपड़ा एथलेटिक्स में भारत को ओलंपिक गोल्ड मेडल दिलाने वाले अब तक के पहले खिलाड़ी हैं. इसके अलावा वो टोक्यो ओलंपिक में भारत की तरफ़ से गोल्ड मेडल जीतने वाले अकेले खिलाड़ी हैं.

    साल 2008 के बाद यह पहली बार है जब किसी भारतीय खिलाड़ी ने ओलंपिक में स्वर्ण पदक जीता है. 2008 में अभिनव बिंद्रा ने 10 मीटर एयर राइफ़ल शूटिंग में गोल्ड मेडल हासिल किया था.

    पिछले 100 वर्षों में भारत को एथलेटिक्स में कोई गोल्ड मेडल नहीं मिला था. इससे पहले मिल्खा सिंह, पीटी उषा और अंजू बॉबी जॉर्ज थोड़े ही अंतर से पदक से चूक गए थे.

    चोपड़ा ने अपना गोल्ड मेडल मिल्खा सिंह और उन भारतीय एथलीट्स को समर्पित किया है जो थोड़े अंतर से मेडल हासिल करने से चूकते रहे.

  4. कोरोना: 24 घंटे में 28,204 मामले, 147 दिनों में सबसे कम आँकड़ा

    कोरोना संक्रमण

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    पिछले 24 घंटे में भारत में कोरोना वायरस संक्रमण के कुल 28,204 मामले आए हैं. पिछले 147 दिनों में यह संक्रमण का सबसे कम आँकड़ा है.

    पिछले 24 घंटे में 373 लोगों की मौत हुई है और रिकवरी रेट 97.45% है.

    इस दौरान 41 हज़ार से ज़्यादा लोग इलाज के बाद ठीक भी हुए हैं.

    आईसीएमआर के आँकड़ों के मुताबिक़ बीते 24 घंटों में 15,11,313 सैंपल्स का कोरोना टेस्ट किया गया है.

    इसी के साथ देश में संक्रमण के कुल सक्रिय मामले 3,88,508 हो गए हैं.

    कोविड-19 के कारण अब तक कुल 4,28,682 लोगों की जान गई है और 3,11,80,968 लोगों ने बीमारी को मात दी है.

    अभी तक 51 करोड़ 45 लाख से ज़्यादा लोगों को कोरोना वैक्सीन लगाई जा चुकी है.

    कोरोना संक्रमण
  5. औरतों, मौलवियों और मस्जिदों को निशाना बना रहा है तालिबान: अफ़गान मंत्रालय

    अफ़गानिस्तान

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    अफ़गानिस्तान में तालिबान के हमले और युद्ध की वीभिषिका लगातार गंभीर होती जा रही है.

    अफ़गान गृह मंत्रालय ने अपने एक बयान में बताया है कि तालिबान आम नागरिकों,महिलाओं, बच्चों, मस्जिदों और मौलवियों को भी निशाना बना रहा है.

    मंत्रालय के मुताबिक़ इस साल की शुरुआत से तालिबान ने अब तक कुल 24 मस्जिदों पर हमला किया है जिसमें 30 मौलवी मारे गए हैं और 70 घायल हुए हैं.

    इन हमलों में मस्जिदों को भी भारी नुक़सान पहुँचा है.

    अफ़गानिस्तान

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    तीन महीने में करीब ढाई लाख लोग बेघर हुए

    हमलों की भयावहता के बीच इस साल मई से लेकर अब तक करीब ढाई लाख लोगों कोअपने घर छोड़कर विस्थापित होना पड़ा है.

    संयुक्त राष्ट्र के कोऑर्डिनिशेन ऑफ़ ह्यूमैनिटेरियन अफ़ेयर्स कार्यालय (OCHA) के आँकड़ों के अनुसार अफ़गानिस्तान में पिछले तीन महीने में 2,44,000 लोग विस्थापित हुए हैं.

    अलजज़ीरा की रिपोर्ट के अनुसार पिछले साल इसी अवधि के मुकाबले विस्थापित होने वाले लोगों कीसंख्या में 300% बढ़ोतरी हुई है.

    ओसीएचए की रिपोर्ट के अनुसार सबसे ज़्यादा लोग पूर्वोत्तर और पूर्वी अफ़गानिस्तान से भाग रहे हैं.

    रिपोर्ट में कहा गया है कि इन इलाकों में न तो सिर छिपाने के लिए छत बची है, न जानबचाने के लिए मेडिकल सुविधाएं और न खाने के लिए पर्याप्त खाना.

  6. ग्रेटा थनबर्ग ने फ़ैशन पत्रिका को दिए इंटरव्यू में ही फ़ैशन इंडस्ट्री को लताड़ा

    ग्रेटा थनबर्ग

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    स्वीडन की जानी-मानी पर्यावरण एक्टिविस्ट ग्रेटा थनबर्ग ने मशहूर फ़ैशन पत्रिका ‘वोग’ को दिए इंटरव्यू में जलवायु परिवर्तन के लिए ‘बड़े पैमाने पर ज़िम्मेदार’ फ़ैशन इंडस्ट्री की कड़ी आलोचना की है.

    18 साल की ग्रेटा ने इस इंटरव्यू में कहा है कि फ़ैशन ब्रैंड्स को पर्यावरण पर उत्पादों से पड़ रहे की ज़िम्मेदारी लेने की ज़रूरत है.

    एक ट्वीट में ग्रेटा ने कुछ कंपनियों पर अपने कपड़ों को पर्यावरण के अनुकूल दिखाने के लिए ‘ग्रीनवॉश’ विज्ञापन और मुहिम चलाने का आरोप लगाया.

    वोग ने अपने स्वीडन संस्करण में इस बार ग्रेटा को अपने कवर पेज पर जगह दी है. कवर पेज पर ग्रेटा हरियाली के बीच बैठी एक घोड़े पर हाथ फेरती नज़र आ रही हैं.

    इंटरव्यू में ग्रेटा थनबर्ग ने कहा, “मैंने तीन साल पहले एक कपड़ा ख़रीदा था और वो भी सेकेंड हैंड था. मैं अपने जानने वालों से कपड़े उधार ले लेती हूँ.”

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    'सबसे ज़्यादा प्रदूषण फैलाने वाली फ़ैशन इंडस्ट्री'

    अपने एक ट्वीट में ग्रेटा ने ‘फ़ास्ट फ़ैशन’ के चलन की आलोचना भी की.

    फ़ास्ट फ़ैशन शब्द का इस्तेमाल हर मौसम में अलग-अलग तरह के कपड़ों के कम ख़र्च में धड़ल्ले से होने वाले उत्पादन के लिए किया जाता है.

    ग्रेटा ने इस व्यवस्था को बदले जाने का आह्वान किया है.

    संयुक्त राष्ट्र के मुताबिक़ फ़ैशन इंडस्ट्री को दुनिया में 'सबसे ज़्यादा प्रदूषण फ़ैलाने वाला उद्योग' माना जाता है.

  7. तालिबान के हमले में मारे जा रहे हैं मासूम, तीन दिन में 27 बच्चों की जान गई: रिपोर्ट

    बच्चे

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    संयुक्त राष्ट्र की बच्चों के लिए काम करने वाली संस्था यूनिसेफ़ ने कहा है कि अफ़गानिस्तान में जिस तरह 'बच्चों के ख़िलाफ़ गंभीर हिंसा' हो रही है, उससे वो सदमे में है.

    यूनिसेफ़ ने कहा है कि अफ़गानिस्तान में जारी भीषण हिंसा में पिछले तीन दिन के भीतर 27 बच्चे मारे गए हैं.

    यूनिसेफ ने कहा है कि बच्चों के ख़िलाफ़ हिंसा दिन-प्रतिदिन बढ़ती जा रही है.

    यूनिसेफ का कहना है कि तीन दिन में कंधार, ख़ोस्त और पक्तिया में 27 बच्चे संघर्ष में मारे गए हैं जबकि 136 से अधिक बच्चे इस दौरान घायल हुए हैं.

    यूनिसेफ़ का मानना है कि बच्चों की मौत के ये मामले सिर्फ आंकड़े नहीं हैं बल्कि शारीरिक पीड़ा का हर मामला एक व्यक्तिगत त्रासदी भी है.

    यूनिसेफ़ ने इस बात को भी ज़ोर दिया है कि अंतरराष्ट्रीय मानवीय कानून के तहत इन सभी बच्चों को संरक्षण का अधिकार हासिल था.

    यूनिसेफ ने सभी पक्षों से बच्चों को बचाने की अपील की है.

    बच्चे

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    युद्धविराम के आह्वान को भी ठुकराया

    तालिबान ने संघर्षविराम के लिए अंतरराष्ट्रीय समुदाय के आह्वान को भी नकार दिया है.

    विदेशी सैनिकों की वापसी के साथ ही अफ़ग़ानिस्तान में तालिबान को बढ़त हासिल होती जा रही है.

    वहाँ बीते शुक्रवार से अब तक तालिबान ने कम से कम पांच प्रांतों की राजधानियों पर क़ब्ज़ा कर लिया है

    तालिबान के एक प्रवक्ता ने बीबीसी को बताया कि अब वो बग़लान प्रांत की राजधानी पुल-ए-ख़ुमरी को निशाना बना रहे हैं.वहीं, पश्चिम के हेरात प्रांत में भी भीषण लड़ाई जारी है.

    सोमवार सुबह दक्षिणी शहर लश्करगाह के पुलिस मुख्यालय के बाहर एक बड़ा धमाका भी सुना गया.

    लश्करगाह में रहने वालों ने बताया कि पिछले दो दिनों के भीतर वहाँ 20 लोग मारे गए हैं. इतना ही नहीं, युद्ध में स्कूल और अस्पाल भी नष्ट हो गए हैं.

    अमेरिका ने जब से अफ़गानिस्तान से अपने सैनिकों को वापस बुलाने का ऐलान किया है, तब से वहाँ तालिबान की आक्रामकता बढ़ती जा रही है.

    तालिबान के लड़ाकों ने हाल के हफ़्तों में अफ़गानिस्तान में तेज़ी से अपना क़ब्ज़ा बढ़ाया है. गाँवों पर हमला करने के बाद अब वो कस्बों और शहरों को निशाना बना रहे हैं.

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