ओलंपिक पदक विजेताओं का भारत में भव्य स्वागत

भारत के ओलंपिक पदक विजेताओं का केंद्र सरकार ने सोमवार को भव्य स्वागत किया. इस मौके पर मौजूद खेल मंत्री अनुराग ठाकुर और विधि मंत्री किरेन रिजीजू भी वहां मौजूद थे.

लाइव कवरेज

संदीप सोनी, विभुराज, सिंधुवासिनी and अपूर्व कृष्ण

  1. ब्रेकिंग न्यूज़, टोक्यो से लौटे भारतीय एथलीट, दिल्ली हवाई अड्डे पर जश्न का माहौल

    दिल्ली हवाई अड्डे पर भारतीय खिलाड़ी

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    टोक्यो ओलंपिक के समापन के एक दिन बाद भारतीय खिलाड़ी दिल्ली लौट आए हैं जहाँ हवाई अड्डे पर उनका ज़ोरदार स्वागत हो रहा है.

    हवाई अड्डे पर भारतीय खिलाड़ियों के परिवार व उनके प्रशंसक जुटे हैं और वहाँ बाजे-गाजे के साथ खिलाड़ियों की कामयाबी का जश्न मनाया जा रहा है.

    टोक्यो में भारत ने ओलंपिक इतिहास में अब तक का सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन किया है. भारत ने वहाँ कुल 7 पदक जीत हैं.

    दिल्ली के अशोक होटल में शाम को खेल मंत्रालय की ओर से एक समारोह में भारतीय खिलाड़ियों का सम्मान किया जाएगा.

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  2. फ्लिपकार्ट और अमेज़ॉन को सुप्रीम कोर्ट ने नहीं दी राहत, जारी रहेगी जाँच

    फ्लिपकार्ट और अमेज़न

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    ऑनलाइन ई-कॉमर्स कंपनी फ्लिपकार्ट और अमेज़ॉन के ख़िलाफ़ प्रतिस्पर्धा आयोग की जाँच जारी रहेगी.

    सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को फ्लिपकार्ट और अमेज़ॉन की उस याचिका पर सुनवाई करने से इनकार कर दिया जिसमें प्रतिस्पर्धा आयोग की जांच को इन दोनों कंपनियों ने चुनौती दी थी.

    दोनों कंपनियों पर प्रतिस्पर्धा क़ानूनों के उल्लंघन का आरोप है और प्रतिस्पर्धा आयोग इसकी शुरुआती जांच कर रहा है.

    चीफ़ जस्टिस एनवी रमन्ना की अगुवाई वाली तीन जजों की बेंच ने कहा कि जांच को चुनौती देने का मतलब एफ़आईआर दर्ज किए जाने से पहले ही नोटिस पाने की इच्छा जताना है.

    सुप्रीम कोर्ट ने फ्लिपकार्ट और अमेज़ॉन को प्रतिस्पर्धा आयोग की जांच में सहयोग करने के लिए भी कहा है. इस बेंच में चीफ़ जस्टिस के अलावा जस्टिस विनीत सरन और जस्टिस सूर्य कांत भी शामिल हैं.

    सुनवाई के दौरान फ्लिपकार्ट की पैरवी कर रहे सीनियर एडवोकेट अभिषेक मनु सिंघवी ने कोर्ट को बताया कि प्रतिस्पर्धा आयोग के सवालों के जवाब देने की मियाद 9 अगस्त को ख़त्म कर रही है.

    इसके बाद बेंच ने फ्लिपकार्ट को दी गई मोहलत चार हफ़्तों के लिए बढ़ा दी. हालांकि सीसीआई का पक्ष रख रहे सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने इसका विरोध किया.

    तुषार मेहता ने कहा कि इन कंपनियों को एक हफ़्ते का वक़्त दिया जाना चाहिए क्योंकि कोरोना काल में ज़्यादातर लोग इन्हीं कंपनियों के प्लेटफॉर्म पर ऑनलाइन खरीदारी कर रहे थे.

    कर्नाटक हाई कोर्ट ने 23 जुलाई को अमेज़ॉन और फ्लिपकार्ट की सीसीआई जांच को रुकवाने के लिए दायर की गई याचिका खारिज कर दी थी. हाई कोर्ट ने इन कंपिनयों को ये कहा था कि अगर उन्होंने क़ानून का कोई उल्लंघन नहीं किया है तो उन्हें जांच से घबराना नहीं चाहिए.

  3. जलवायु परिवर्तन: आईपीसीसी की रिपोर्ट मानवता के लिए 'ख़तरे की घंटी'

  4. चीनी कंपनी अलीबाबा के एक बॉस पर रेप का आरोप, कंपनी करेगी बर्ख़ास्त

    अलीबाबा

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    पीटर हॉस्किन्स

    बीबीसी संवाददाता

    चीन की मशहूर कंपनी अलीबाबा ने बलात्कार के अभियुक्त अपने एक मैनेजर को बर्ख़ास्त करने का फ़ैसला किया है. बीबीसी को इस फ़ैसले से जुड़ा एक मेमो हासिल हुआ है.

    कंपनी के चीफ़ एग्ज़िक्यूटिव डैनियल चांग ने कर्मचारियों को भेजी एक चिट्ठी में लिखा है कि इस मामले में कार्रवाई करने में असफल रहे दो अन्य अधिकारियों ने भी इस्तीफ़ा दे दिया है.

    अलीबाबा में काम करने वाली एक महिला ने आरोप लगाया है कि उनके बॉस ने होटल के कमरे में उनसे बलात्कार किया जब वो शराब के नशे में बेहोश हो गई थीं.

    महिला के आरोपों पर चीनी सोशल मीडिया में बहुत चर्चा हो रही है.

    चांग ने कहा कि मैनेजर बलात्कार के अभियुक्त हैं और उन्होंने कबूला है कि महिला जब नशे में थी तब उन्होंने कुछ ‘अंतरंग हरकतें’ की थीं.

    अलीबाबा

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    'अधिकारियों ने शराब पीने का दबाव बनाया'

    कंपनी को भेजी इस चिट्ठी में कहा कहा गया है, “उन्हें बर्ख़ास्त कर दिया जाएगा और फिर कभी नियुक्त नहीं किया जाएगा. उन्होंने बलात्कार या क़ानून का उल्लंघन करने वाला कोई काम किया है या नहीं, इसका फ़ैसला क़ानून करेगा.”

    मेमो में इस ओर भी ध्यान दिलाया गया है कि अलीबाबा पीड़िता की देखभाल की ज़िम्मेदारी लेगी. चिट्ठी में कहा गया है, “हम उनका ख़याल रखने के लिए सबकुछ करेंगे.”

    पुलिस का कहना है कि वो मामले की जाँच कर रही है और अलीबाबा जाँच में सहयोग कर रही है.

    महिला ने अपने साथ हुए अपराध के बारे में 11 पन्नों में लिखकर बताया है और इस बारे में चीनी सोशल मीडिया प्लैटफ़ॉर्म वीबो पर बहुत चर्चा हो रही है.

    महिला का कहना है कि उनके बॉस ने उन्हें एक क्लाइंट से मिलने की बात कहकर अलीबाबा के मुख्यालय से करीब 900 किलोमीटर दूर जिनान शहर में जाने पर राज़ी किया.

    महिला का आरोप है कि डिनर के दौरान उनके सीनियर अधिकारियों ने उन पर शराब पीने का दबाव बनाया.

    महिला का कहना है कि 27 जुलाई की क्लाइंट ने उन्हें किस किया और फिर अगले दिन जब वो होटल के कमरे में उठीं तो उनके शरीर पर कपड़े नहीं थे.

    महिला ने बताया कि सीसीटीवी फ़ुटेज में देखा जा सकता है कि मैनेजर शाम को चार बार उनके कमरे में गए थे.

    'एचआर और अधिकारियों ने पीड़िता का ख़याल नहीं रखा'

    अलीबाबा ने मेमो में कहा है कि कंपनी किसी को जबरन शराब पिलाने के चलन के सख़्त खिलाफ़ है.

    पीड़िता का कहना है कि लौटने के बाद उन्होंने कंपनी के एचआर विभाग और सीनियर अधिकारियों को इस बारे में बताया.

    महिला ने अभियुक्त बॉस को बर्ख़ास्त करने करने की गुज़ारिश भी की थी.

    महिला का कहना है कि एचआर विभाग शुरू में उनकी शिक़ायत पर राज़ी हो गया था लेकिन बाद में इस बारे में कोई कार्रवाई नहीं हुई.

    अब कंपनी ने मेमो में कहा है, “इस पूरे मामले में एचआर ने पर्याप्त ध्यान नहीं दिया और न ही लोगों का पर्याप्त ख़याल रखा.”

    कर्मचारियों को भेजी इस चिट्ठी में कहा गया है, “एचआर और अधिकार तर्कपूर्ण थे लेकिन उनमें पीड़िता को समझने और उनका ख़याल रखने की भावना की कमी थी. इस मामले में सही निर्णय नहीं लिया गया और न ही तत्काल कोई कदम उठाने का इंतज़ाम किया गया.”

  5. पीएम-किसान योजना के तहत 9.75 करोड़ किसानों को 19,500 करोड़ रुपये दिए गए

    सांकेतिक तस्वीर

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    प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोमवार को पीएम-किसान योजना के तहत 9.75 करोड़ से भी अधिक किसानों को लगभग 19,500 करोड़ रुपये का अनुदान दिया.

    इसके साथ ही भारत सरकार अब तक प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना की नौ किश्तें जारी कर चुकी है और इसके तहत लगभग 1.57 करोड़ रुपये किसान परिवारों को दिए गए हैं.

    इस रकम के जारी किए जाने के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश भर में पीएम-किसान योजना के लाभार्थियों को संबोधित किया. पीएम-किसान योजना के तहत हर साल किसान परिवारों को 6000 रुपये की रकम हर चौथे महीने 2000 रुपये के तीन बराबर किश्तों में दिए जाते हैं.

    फरवरी, 2019 के बजट में केंद्र सरकार ने इस योजना की घोषणा की थी. इसकी पहली किश्त दिसंबर 2018-मार्च 2019 की अवधि के लिए जारी की गई थी. पीएम-किसान योजना का पैसा लाभार्थियों के बैंक खाते में भारत सरकार द्वारा सीधे ट्रांसफर किया जाता है.

    प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी

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    प्रधानमंत्री ने क्या कहा

    इस मौके पर प्रधानमंत्री ने कहा, "अब से कुछ दिन बाद ही 15 अगस्त आने वाला है. इस बार देश अपना 75वां स्वतंत्रता दिवस मनाने जा रहा है. ये महत्वपूर्ण पड़ाव हमारे लिए गौरव का तो है ही, ये नए संकल्पों, नए लक्ष्यों का भी अवसर है. इस अवसर पर हमें तय करना है कि आने वाले 25 वर्षों में हम भारत को कहां देखना चाहते हैं."

    "देश जब आज़ादी के 100 वर्ष पूरे करेगा, 2047 में तब भारत की स्थिति क्या होगी, ये तय करने में हमारी खेती, हमारे किसानों की बहुत बड़ी भूमिका है. ये समय भारत की कृषि को एक ऐसी दिशा देने का है, जो नई चुनौतियों का सामना कर सके और नए अवसरों का लाभ उठा सके."

    "सरकार ने खरीफ हो या रबी सीज़न, किसानों से MSP पर अब तक की सबसे बड़ी खरीद की है. इससे, धान किसानों के खाते में लगभग 1 लाख 70 हज़ार करोड़ रुपये और गेहूं किसानों के खाते में लगभग 85 हज़ार करोड़ रुपये डायरेक्ट पहुंचे हैं."

    "कुछ साल पहले जब देश में दालों की बहुत कमी हो गई थी, तो मैंने देश के किसानों से दाल उत्पादन बढ़ाने का आग्रह किया था. मेरे उस आग्रह को देश के किसानों ने स्वीकार किया. परिणाम ये हुआ कि बीते 6 साल में देश में दाल के उत्पादन में लगभग 50 प्रतिशत की वृद्धि हुई है."

    "इस मिशन के माध्यम से खाने के तेल से जुड़े इकोसिस्टम पर 11 हज़ार करोड़ रुपये से अधिक का निवेश किया जाएगा. सरकार ये सुनिश्चित करेगी कि किसानों को उत्तम बीज से लेकर टेक्नॉलॉजी, हर सुविधा मिले."

    "खाने के तेल में आत्मनिर्भरता के लिए अब राष्ट्रीय खाद्य तेल मिशन-ऑयल पाम यानी एनएमईओ-ओपी का संकल्प लिया गया है. आज जब देश भारत छोड़ो आंदोलन को याद कर रहा है, तो इस ऐतिहासिक दिन ये संकल्प हमें नई ऊर्जा से भर देता है."

    "आज भारत कृषि निर्यात के मामले में पहली बार दुनिया के टॉप-10 देशों में पहुंचा है. कोरोना काल में देश ने कृषि निर्यात के नए रिकॉर्ड बनाए हैं. आज जब भारत की पहचान एक बड़े कृषि निर्यातक देश की बन रही है तब हम खाद्य तेल की अपनी ज़रूरतों के लिए आयात पर निर्भर रहें, ये उचित नहीं है."

    "अब देश की कृषि नीतियों में इन छोटे किसानों को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जा रही है. इसी भावना के साथ बीते सालों में छोटे किसानों को सुविधा और सुरक्षा देने का एक गंभीर प्रयास किया जा रहा है. पीएम किसान सम्मान निधि के तहत अब तक 1 लाख 60 करोड़ रुपए किसानों को दिए गए हैं."

  6. अफ़ग़ानिस्तान में आगे बढ़ते तालिबान ने कहा अब कोई समझौता नहीं

    तालिबान को हेरात से बाहर करने के बाद सरकार समर्थक एक हथियारबंद मिलिशिया सदस्य

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    अफ़गानिस्तान में बिगड़ते हालात के बीच तालिबान ने युद्धविराम की अंतरराष्ट्रीय अपीलों को ठुकरा दिया है.

    तालिबान इन दिनों अफ़गानिस्तान के बड़े हिस्से पर क़ब्ज़ा करता जा रहा है.

    मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक़ तालिबान ने प्रमुख उत्तरी शहरों कुंदूज़, सर-ए-पुल और तालोक़ान पर भी क़ब्ज़ा कर लिया है.

    यानी पिछले कुछ समय के ही भीतर तालिबान ने अफ़गानिस्तान की पाँच प्रांतीय राजधानियों पर क़ब्ज़ा कर लिया है जिनमें से कुंदूज़ सबसे अहम है.

    इस बीच अमेरिकी और अफ़गान विमानों ने लड़ाकों पर कई और हवाई हमले किए हैं.

    अफ़गान अधिकारियों का कहना है कि हालिया हमलों में दर्जनों तालिबान लड़ाके मारे गए हैं.

    वहीं, तालिबान के एक प्रवक्ता ने रविवार को अलजज़ीरा टीवी से बात करते हुए अमेरिका को आगे कोई कार्रवाई न करने की चेतावनी दी है.

    रविवार को उत्तरी अफ़गान के तीन शहरों पर महज कुछ घंटों में तालिबान का क़ब्ज़ा हो गया.

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    कुंदूज़ के एक निवासी वहाँ के हालात को ‘पूरी तरह अराजक’ बताया.

    सोशल मीडिया पर पोस्ट किए गए वीडियो में देखा जा सकता है कि तालिबान के लड़ाके कुंदूज़ और सर-ए-पुल के सरकारी इमारतों में घुस गए हैं.

    हालाँकि इन वीडियो की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं की जा सकी है.

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    अब बग़लान की राजधानी निशाने पर: बीबीसी से तालिबान प्रवक्ता

    इस बीच अफ़गान सरकार का कहना है कि विशेष सुरक्षाबल अब भी कुंदूज़ के अंदर तालिबान के लड़ाकों से लड़ रहे हैं.

    तालिबान के एक प्रवक्ता ने बीबीसी को बताया कि अब वो बग़लान प्रांत की राजधानी पुल-ए-ख़ुमरी को निशाना बना रहे हैं.वहीं, पश्चिम के हेरात प्रांत में भी भीषण लड़ाई जारी है.

    सोमवार सुबह दक्षिणी शहर लश्करगाह के पुलिस मुख्यालय के बाहर एक बड़ा धमाका भी सुना गया.

    लश्करगाह में रहने वालों ने बताया कि पिछले दो दिनों के भीतर वहाँ 20 लोग मारे गए हैं. इतना ही नहीं, युद्ध में स्कूल और अस्पाल भी नष्ट हो गए हैं.

    अमेरिका ने जब से अफ़गानिस्तान से अपने सैनिकों को वापस बुलाने का ऐलान किया है, तब से वहाँ तालिबान की आक्रामकता बढ़ती जा रही है.

    तालिबान के लड़ाकों ने हाल के हफ़्तों में अफ़गानिस्तान में तेज़ी से अपना क़ब्ज़ा बढ़ाया है. गाँवों पर हमला करने के बाद अब वो कस्बों और शहरों को निशाना बना रहे हैं.

    अफ़ग़ानिस्तान
  7. योगी सरकार ने 'काकोरी कांड' का नाम बदला, कहा 'काकोरी ट्रेन ऐक्शन'

    योगी आदित्यनाथ

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    उत्तर प्रदेश सरकार ने भारत के स्वाधीनता संग्राम के इतिहास के एक अहम अध्याय "काकोरी कांड" का नाम बदलकर "काकोरी ट्रेन ऐक्शन" कर दिया है.

    समाचार एजेंसी एएनआई के अनुसार उत्तर प्रदेश के अधिकारियों ने बताया कि कांड शब्द से इस घटना को लेकर एक अपमानजनक भावना बनती है इस वजह से नाम बदलने का निर्णय किया गया.

    उन्होंने कहाकि कुछ ब्रिटिश इतिहासकारों ने इस घटना को कांड का नाम दे दिया था.

    राज्य के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सोमवार को इस घटना की वर्षगांठ पर काकोरी स्मारक समिति पर आयोजित एक समारोह में काकोरी षडयंत्र के नेताओं राम प्रसाद बिस्मिल, रोशन सिंह और राजेंद्र लाहिड़ी की प्रतिमाओं पर श्रद्धांजलि दी.

    उन्होंने कहा, "काकोरी एक्शन की कहानी हमें सदैव इस बात का अहसास कराती है कि देश की स्वाधीनता से बढ़कर कुछ नहीं."

    मुख्यमंत्री योगी ने कहा,"काकोरी ट्रेन ऐक्शन के मामले में कहा जाता है कि जो क्रांतिकारी थे उन्होंने जिस घटना को अंजाम दिया था उसमें उनके हाथ लगे थे मात्र 4600 रुपये मगर अंग्रेज़ों ने उनके ख़िलाफ़ मुक़दमा करने से लेकर फांसी पर लटकाने तक की कार्रवाई में 10 लाख रुपये ख़र्च किये थे."

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    क्या हुआ था काकोरी में?

    काकोरी ट्रेन ऐक्शन या काकोरी षडयंत्र एक ट्रेन लूट की घटना थी जिसमें 9 अगस्त 1925 को भारत को स्वाधीनता दिलाने के लिए हथियार उठानेवाले 10 क्रांतिकारियों ने लखनऊ के निकट काकोरी गांव के पास एक ट्रेन को रोक ब्रिटिश सरकार के ख़ज़ाने को लूटा था.

    इस षडयंत्र के बाद लूट में शामिल क्रांतिकारियों में से चंद्रशेखर आज़ाद को छोड़ सबको गिरफ़्तार कर लिया गया था. उनकी मदद करने वाले और भी कई लोगों को गिरफ़्तार कर लिया गया.

    कुल 29 लोगों के ख़िलाफ़ मुक़दमे चले और डेढ़ साल बाद चार लोगों को फांसी की सज़ा और एक को आजीवन कारावास की सज़ा दी गई.

    अन्य लोगों को 14 साल तक की सज़ा दी गई. दो लोग बरी हो गए और दो की सज़ा माफ़ कर दी गई.

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  8. मोदी सरकार को ओबीसी संशोधन विधेयक पर मिला विपक्ष का साथ

    विपक्षी नेताओं ने अपनी रणनीति पर विचार के लिए पिछले सप्ताह भी बैठक की थी

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    राज्यसभा में नेता विपक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने कहा है कि विपक्षी पार्टियाँ संसद में आज पेश किए गए संविधान संशोधन विधेयक का समर्थन करेंगे.

    इसके तहत राज्यों को एक बार फिर से सामाजिक और आर्थिक रूप से कमज़ोर तबकों की पहचान करने का अधिकार मिल जाएगा.

    केंद्रीय समाज कल्याण मंत्री वीरेंद्र कुमार ने सोमवार को लोकसभा में हंगामे के बीच संविधान में 127वाँ संशोधन पेश कर दिया है. हालाँकि इसके ठीक बाद हंगामे की वज से सदन को स्थगित करना पड़ा.

    इससे पहले विपक्षी पार्टियों ने आज एक बैठक कर इस बिल को पारित करने में सरकारी के साथ सहयोग का निर्णय किया.

    खड़गे ने कहा, "इस संशोधन से राज्यों को दोबारा ये अधिकार मिल जाएगा. सुप्रीम कोर्ट ने इस साल मई में फ़ैसला दिया था कि ये काम केवल केंद्र कर सकता है.

    उन्होंने कहा, "इस देश की आधी से ज़्यादा आबादी पिछड़े वर्ग की है. ये बिल प्रस्तुत होगा, उस पर विचार होगा और इसी दिन पास हो जाएगा."

    खड़गे ने कहा, "बाकी के मुद्दे अपनी जगह हैं लेकिन ये मुद्दा पिछड़े वर्ग के लोगों और देश के हित में है. हम सबका फर्ज है कि गरीबों और पिछड़ों के हित में जो कानून आता है हम उसका समर्थन करें."

    संसद के मॉनसून सत्र का ये आख़िरी सप्ताह है और इससे पहले विपक्षी नेताओं ने राज्यसभा में विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खड़गे के कक्ष में बैठक कर केंद्र सरकार को किसानों के मुद्दे, पेगासस, महँगाई और कोरोना महामारी जैसे मुद्दों पर घेरने की रणनीति पर चर्चा की.

    कांग्रेस नेता राहुल गांधी के अलावा डीएमके, टीएमसी, सपा, एनसीपी, सीपीएम, आरजेडी, आप और कई अन्य दलों ने इस बैठक में हिस्सा लिया.

    संसद का मॉनसून सत्र 19 जुलाई को शुरू हुआ था और पहले दिन से ही दोनों सदनों में हंगामा खड़ा हो गया जब विपक्षी सांसदों ने प्रधानमंत्री मोदी को नए मंत्रियों को सदन में परिचय करने से रोक दिया.

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  9. राजीव गांधी ने हॉकी स्टिक नहीं उठाई तो मोदी ने क्रिकेट में क्या किया हैः शिवसेना

    शिवसेना

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    शिवसेना ने भारत के सर्वोच्च खेल पुरस्कार का नाम बदलने को लेकर बीजेपी की अगुआई वाली केंद्र सरकार को आड़े हाथों लिया है. पार्टी ने अपने मुखपत्र 'सामना' में केंद्र सरकार पर राजनीति करने और बदले की भावना और विद्वेष रखने का आरोप लगाया है.

    केंद्र सरकार ने पिछले सप्ताह राजीव गांधी खेल रत्न पुरस्कार का नाम मेजर ध्यानचंद खेल रत्न पुरस्कार कर दिया था.

    सामना ने अपने संपादकीय में लिखा है, "मेजर ध्यानचंद का सम्मान राजीव गांधी के बलिदान का अपमान किए बिना भी किया जा सकता था. हिन्दुस्तान अपनी वो परंपरा और संस्कृति खो चुका है. आज ध्यानचंद भी वही महसूस कर रहे होंगे."

    उसने आगे लिखा है, "आज ऐसे समय जब पूरा देश टोक्यो ओलंपिक मे भारत के प्रदर्शन से स्वर्णिम घड़ी का उत्सव मना रहा है, केंद्र सरकार ने एक राजनीतिक खेल खेला है. इस खेल की वजह से बहुत लोगों का दिल दुखा है."

    सामना ने अपने संपादकीय में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह पर सीधा हमला बोला है.

    उसने लिखा है कि सरकार ने दावा किया है कि नाम बदलने का फ़ैसला जनभावना के तहत किया गया है, मगर इसे लेकर तो कोई विवाद ही नहीं है क्योंकि कांग्रेस भी यही किया करती थी.

    सामना ने लिखा है, "अमित शाह की बात सौ फ़ीसदी सही है. उनके बयान पर बहस करने का कोई मतलब नहीं क्योंकि पिछले 70 सालों में कांग्रेस सरकारों ने नेहरू, गांधी, राव, मनमोहन, मोरारजी, देवेगौड़ा, गुजराल, चंद्रशेखर के किए गए कामों को चमकाने का काम किया है."

    उसने आगे लिखा है, "सरकारें बदले और विद्वेष की भावना से नहीं चलतीं, और ये भी एक जनभावना है जिसका ध्यान रखा जाना चाहिए."

    नाम बदलने पर और सवाल उठाते हुए शिवसेना ने आगे लिखा है, "बीजेपी के राजनीतिक खिलाड़ी कह रहे हैं कि राजीव गांधी ने क्या कभी अपने हाथ में हॉकी उठाई थी? सवाल वाजिब है, पर अहमदाबाद में सरदार पटेल स्टेडियम का नाम बदलकर जब नरेंद्र मोदी पर रखा गया तो क्या उन्होंने भी क्रिकेट में कुछ कमाल किया था. और जब दिल्ली में स्टेडियम का नाम अरूण जेटली पर रखा गया. वहाँ भी यही मापदंड लागू हो सकता है. लोग ये सवाल पूछ रहे हैं."

    सामना ने लिखा है, "इंदिरा गांधी की हत्या आतंकवादियों ने की. राजीव गांधी की जान भी आतंकवादी हमले में गई. उनके साथ विचारों में मतभेद हो सकता है. लोकतंत्र में मतभेद की जगह होती है, मगर दोनों प्रधानमंत्रियों के बलिदान को, जिन्होंने इस देश की प्रगति में बड़ा योगदान दिया, मज़ाक नहीं बनाया जा सकता."

    उसने आगे लिखा है, "राजीव गांधी खेल रत्न पुरस्कार का नाम मेजर ध्यानचंद खेल रत्न पुरस्कार रखना एक राजनीतिक खेल है, जनभावना नहीं."

  10. कोरोना: 24 घंटे में 35,499 मामले और 447 लोगों की मौत

    कोरोना अपडेट

    इमेज स्रोत, Satish Bate/Hindustan Times

    पिछले 24 घंटे में भारत में कोरोना वायरस संक्रमण के कुल 35,499 दर्ज किए गए और 447 लोगों की मौत हुई.

    इस दौरान 43,910 लोग कोविड-19 से ठीक भी हुए हैं.

    आईसीएमआर के मुताबिक़ बीते 24 घंटों में 13,17,871 सैंपल्स का कोरोना टेस्ट किया गया.

    देश में मौजूदा रिकवरी रेट 97.40% है.

    कोरोना अपडेट

    स्वास्थ्य मंत्रालय के आँकड़ों के अनुसार अब संक्रमण के कुल 3,10,99,771 मामले हैं जिनमें 4,02,188 मामले एक्टिव हैं.

    संक्रमण की चपेट में आकर अब तक चार लाख 28 हज़ार से ज़्यादा लोगों ने जान गँवाई है.

    वहीं, 3,10,99,771 लोग इलाज के बाद ठीक भी हुए हैं.

    देश में 50 करोड़ 86 लाख से ज़्यादा लोगों को कोरोना का टीका लगाया जा चुका है

  11. 'मिस्टर मोदी, आकर हमारी बात सुनिए'- विपक्षी पार्टियों की माँग

    मल्लिकार्जुन खड़के

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    ‘मिस्टर मोदी, आकर हमारी बात सुनिए’

    यह वो माँग है जो देश की विपक्षी पार्टियाँ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से कर रही हैं.

    यह संसद के मॉनसून सत्र का आख़िरी हफ़्ता है और ऐसे में विपक्षी पार्टियाँ एकजुट होकर पेगासस जासूसी समेत कई अन्य मुद्दों पर चर्चा की माँग कर रही हैं.

    राज्यसभा में विपक्ष और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता मल्लिकार्जुन खड़ने ने इस मद्देनज़र ट्विटर पर तीन मिनट का एक वीडियो शेयर किया है.

    इस वीडियो में अलग-अलग पार्टियों के नेता कई मुद्दों पर अपना विरोध जता रहे हैं.

    इस वीडियो को ट्वीट करते हुए मल्लिकार्जुन खड़गे ने लिखा है, “ऐसा लगता है प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी डर गए हैं. वो संसद में सवालों के जवाब क्यों नहीं देना चाहते हैं? विपक्षी पार्टियाँ संसद में चर्चा के लिए तैयार हैं लेकिन बीजेपी सरकार कार्यवाही ठप कर रही है ताकि सच लोगों तक न पहुँचे.''

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    इस वीडियो में जिन पार्टियों और नेताओं को शामिल किया गया है, उनमें से कुछ हैं:

    जिस चर्चा के लिए हम 15 दिन से तड़प रहे हैं, आप उसकी इजाज़त नहीं दे रहे हैं और जिसको हम बाद में कर सकते हैं, वो बिल लाकर आप पास कर रहे हैं.

    (मल्लिकार्जुन खड़गे, कांग्रेस)

    राष्ट्र की सुरक्षा के नाम पर जो ज़हर घोला जा रहा है- पेगासस. एक ऐसा उपकरण जो सबके घर तक पहुँचा दिया गया है.

    आज इस सदन में लोकतंत्र ख़तरे में है. हम क़ानून की गुणवत्ता पर बात करें, इससे पहले हमें लोकतंत्र की गुणवत्ता पर बात करनी होगी.

    (आरएस भारती, डीएमके)

    हमारे देश में जनता की हालत बहुत ख़राब है. किसान, मज़दूर, औरत....नौ साल की बच्ची को रेप करके मार दिया.

    (झरना दास वैद्य, सीपीआईएम)

    संसद में अभिव्यक्ति की आज़ादी होगी.

    (सुखेंदु शेखर रॉय, टीएमसी)

    नरेंद्र मोदी

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    इस सत्र में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सिर्फ़ एक बार संसद में नए मंत्रियों का परिचय कराने के लिए आए थे.

    इस दौरान सदन में काफ़ी हंगामा हुआ था जिस पर प्रधानमंत्री ने अपनी नाराज़गी जताई थी.

    हाल ही में आई एक रिपोर्ट के अनुसार मॉनसून सत्र में संसद में रोज़-रोज़ होने वाले हंगामे और सदन की कार्यवाही बाधित होने के कारण देश के करदाताओं को 133 करोड़ रुपये से ज़्यादा नुक़सान हुआ है.

    लगातार होने वाले हंगामे के कारण अब तक संसद तय 107 घंटों में से महज 18 घंटे ही चल पाई है.

    विपक्षी दलों ने सरकार पर चर्चा, बहस और जवाबदेही से बचने का आरोप लगाया है तो सरकार ने विपक्षी पार्टियों पर सदन न चलने देने का आरोप.

    संसद का मॉनसून सत्र 19 जुलाई से शुरू हुआ था और 13 अगस्त तक चलेगा.

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  12. किसान और मज़दूरों का प्रदर्शन, सरकार से रखी कई माँगें

    फ़ाइल फ़ोटो

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    आज 9 अगस्त को अगस्त क्रांति दिवस के मौके पर संयुक्त किसान संगठन और देश के कई मज़दूर संगठनों ने ‘देश बचाओ’ दिवस का आह्वान किया है.

    इसी मद्देनज़र सुबह 11 बजे दिल्ली के मंडी हाउस से संसद मार्ग तक विरोध प्रदर्शन का आह्वान भी किया गया है.

    किसान और मज़दूर संगठनों का आरोप है कि मौजूदा सरकार ने पूँजीपतियों के पक्ष में नीतियाँ बनाई हैं जिसका ख़ामियाजा समाज के निचले तबके को भुगतना पड़ रहा है.

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    संगठनों ने सरकार के सामने कई माँगें भी रखी हैं. जैसे:

    • पेट्रोल, डीज़ल, रसोई गैस और खाने-पीने की चीज़ों के दाम नियंत्रित किए जाएं. आवश्यक वस्तु अधिनियम को जनहितैषी बनाया जाए.
    • लेबर कोड-4, कृषि क़ानून और आवश्यक प्रतिरक्षा सेवा अध्यादेश 2021 को रद्द किया जाए.
    • घरों में काम करने वालों और कूड़ा बीनने वाले सफ़ाईकर्मियों को कामगर का दर्जा दिया जाए.
    • असंगठित क्षेत्रों में काम करने वाले मज़दूरों की पहचान कर उनका रजिस्ट्रेशन किया जाए.
  13. प्रधानमंत्री मोदी करेंगे संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में खुली बहस की अध्यक्षता

    पीएम मोदी

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    प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आज वीडियो कॉन्फ़्रेंसिंग के ज़रिए संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में एक उच्च स्तरीय खुली बहस की अध्यक्षता करेंगे.

    इस बहस का विषय समुद्री सुरक्षा और सहयोग होगा.

    भारतीय विदेश मंत्रालय ने एक बयान जारी करके बताया है कि पीएम मोदी सुरक्षा परिषद में किसी चर्चा की अध्यक्षता करने वाले पहले भारतीय प्रधानमंत्री हैं.

    पीएम मोदी ने इस बारे में ट्वीट करके कहा, “इस खुली बहस में समुद्री अपराधों से निबटने के लिए प्रभावी तरीके ढूँढने और वैश्विक शांति के लिए समुद्री सहयोग मज़बूत करने पर ध्यान केंद्रित किया जाएगा.”

    प्रधानमंत्री कार्यालय ने एक विज्ञप्ति जारी कर बताया कि इस बैठक में सुरक्षा परिषद के सदस्य देशों के राष्ट्राध्यक्षों और सरकारों के शामिल होने की उम्मीद है.

    बैठक में संयुक्त राष्ट्र के प्रमुख क्षेत्रीय अधिकारी भी शामिल होंगे.

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    इस महीने सुरक्षा परिषद की अध्यक्षता कर रहा है भारत

    पीएमओ की विज्ञप्ति में कहा गया है कि सुरक्षा परिषद में वैसे तो समुद्री सुरक्षी और अपराधों के विभिन्न पहलुओं पर पहले भी चर्चा हुई है लेकिन यह पहली बार है जब इस मुद्दे पर एक उच्च स्तरीय खुली बहस में चर्चा होगी.

    प्रधानमंत्री कार्यालय के मुताबिक़, “कोई भी देश अकेले समुद्री सुरक्षा से जुड़े सभी मसलों पर बात नहीं कर सकता इसलिए सुरक्षा परिषद का इस विषय पर विस्तार से चर्चा करना महत्वपूर्ण है.

    भारत इस साल अगस्त महीने में संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की अध्यक्षता कर रहा है.

    भारत संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद का अस्थायी सदस्य है. अमेरिका, चीन, फ़्रांस, ब्रिटेन और रूस इसके स्थायी सदस्य हैं.

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