नेतन्याहू ने कहा, किसी क़ीमत पर ईरान को परमाणु हथियार नहीं बनाने देंगे

इसराइल के प्रधानमंत्री बिन्यामिन नेतन्याहू ने कहा है कि वो किसी भी क़ीमत पर ईरान को परमाणु हथियार नहीं बनाने देंगे.

लाइव कवरेज

  1. बीबीसी के इस लाइव पेज से जुड़ने के लिए आपका शुक्रिया. यह लाइव पेज अब यहीं बंद हो रहा है. 25 मई, मंगलवार के अपडेट्स के लिए आप यहाँ क्लिक कर सकते हैं.

  2. ब्रेकिंग न्यूज़, नेतन्याहू का ईरान को लेकर बयान, कहा- परमाणु हथियार नहीं बनाने देंगे

    इसराइली प्रधानमंत्री बिन्यामिन नेतन्याहू ने ट्वीट करके जासूसी एजेंसी मोसाद के नए प्रमुख की घोषणा करने के साथ-साथ ईरान पर निशाना साधा है.

    छोड़िए X पोस्ट
    X सामग्री की इजाज़त?

    इस लेख में X से मिली सामग्री शामिल है. कुछ भी लोड होने से पहले हम आपकी इजाज़त मांगते हैं क्योंकि उनमें कुकीज़ और दूसरी तकनीकों का इस्तेमाल किया गया हो सकता है. आप स्वीकार करने से पहले X cookie policy और को पढ़ना चाहेंगे. इस सामग्री को देखने के लिए 'अनुमति देंऔर जारी रखें' को चुनें.

    चेतावनी: बीबीसी दूसरी वेबसाइट्स की सामग्री के लिए ज़िम्मेदार नहीं है.

    पोस्ट X समाप्त

    मोसाद की ज़िम्मेदारी संगठन के ही उप-प्रमुख 56 वर्षीय डेविड बार्निया को दी गई है जो योसी कोहेन की जगह लेंगे.

    नेतन्याहू ने सालाना कार्यक्रम में मोसाद के अधिकारियों को प्रधानमंत्री पुरस्कार देते वक़्त यह घोषणा की.

    साथ ही उन्होंने कहा कि बार्निया का सबसे बड़ा काम ‘ईरान को परमाणु हथियार प्राप्त करने से रोकना होगा.’

    नेतन्याहू ने अपने अरबी ट्विटर हैंडल से ट्वीट करते हुए कहा, “इसराइल राष्ट्र ईरान को परमाणु हथियार प्राप्त करने से रोकेगा. किसी भी मामले में चाहे समझौता हो या न हो हम ईरान को परमाणु हथियार पाने से रोकेंगे क्योंकि यह हमारे अस्तित्व का सवाल है. यह हमारा पहला मिशन है.”

    इसके साथ ही नेतन्याहू ने अमेरिका का शुक्रिया अदा करते हुए उसे अपना सबसे ख़ास दोस्त बताया है और उसे अपनी राष्ट्रीय सुरक्षा का हिस्सा बताया है.

  3. ब्रेकिंग न्यूज़, टूलकिट मामले में ट्विटर इंडिया के दफ़्तर पहुँची दिल्ली पुलिस

    छोड़िए X पोस्ट, 1
    X सामग्री की इजाज़त?

    इस लेख में X से मिली सामग्री शामिल है. कुछ भी लोड होने से पहले हम आपकी इजाज़त मांगते हैं क्योंकि उनमें कुकीज़ और दूसरी तकनीकों का इस्तेमाल किया गया हो सकता है. आप स्वीकार करने से पहले X cookie policy और को पढ़ना चाहेंगे. इस सामग्री को देखने के लिए 'अनुमति देंऔर जारी रखें' को चुनें.

    चेतावनी: बीबीसी दूसरी वेबसाइट्स की सामग्री के लिए ज़िम्मेदार नहीं है.

    पोस्ट X समाप्त, 1

    दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ने “टूलकिट मैनिपुलेशन मीडिया” मामले की जाँच के सिलसिले में ट्विटर इंडिया को आज दोपहर में नोटिस भेजा था.

    इसके बाद देर शाम स्पेशल सेल की एक टीम दिल्ली में ट्विटर इंडिया के ऑफ़िस पहुँची.

    न्यूज़ एजेंसी एएनआई की ख़बर के अनुसार, इस संबंध में अभी विस्तृत जानकारी सामने नहीं आयी है लेकिन एजेंसी के हवाले से कहा गया है कि दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल टीम ट्विटर इंडिया के लाडो सराय, दिल्ली और गुरुग्राम दफ़्तरों पर पहुँची.

    न्यूज़ एजेंसी एएनआई ने दिल्ली पुलिस की टीम के हवाले से लिखा है कि स्पेशल सेल की टीम नियमित प्रक्रिया के तहत ट्विटर इंडिया को नोटिस देने के लिए कार्यालय गई थी.

    सूत्रों के हवाले से न्यूज़ एजेंसी ने लिखा है कि कार्यालय जाना इसलिए ज़रूरी था ताकि नोटिस सही शख़्स को ही दिया जाए.

    ट्विटर इंडिया के दफ़्तर पर दिल्ली पुलिस की टीम के पहुँचने के बाद कांग्रेस पार्टी के प्रवक्ता रणदीप सिंह सुरजेवाला ने एक के बाद एक ट्वीट करके प्रतिक्रिया दी है.

    छोड़िए X पोस्ट, 2
    X सामग्री की इजाज़त?

    इस लेख में X से मिली सामग्री शामिल है. कुछ भी लोड होने से पहले हम आपकी इजाज़त मांगते हैं क्योंकि उनमें कुकीज़ और दूसरी तकनीकों का इस्तेमाल किया गया हो सकता है. आप स्वीकार करने से पहले X cookie policy और को पढ़ना चाहेंगे. इस सामग्री को देखने के लिए 'अनुमति देंऔर जारी रखें' को चुनें.

    चेतावनी: बीबीसी दूसरी वेबसाइट्स की सामग्री के लिए ज़िम्मेदार नहीं है.

    पोस्ट X समाप्त, 2

    टूलकिट से जुड़ा ताज़ा मामला बीजेपी के राष्ट्रीय प्रवक्ता संबित पात्रा के आरोप से संबंधित है.

    कुछ दिन पहले संबित पात्रा ने कांग्रेस पर टूलकिट इस्तेमाल करके बीजेपी और देश की छवि ख़राब करने का आरोप लगाया था.

    18 मई को बीजेपी प्रवक्ता संबित पात्रा और बीजेपी के महासचिव बीएल संतोष ने चार-चार पेज के अलग-अलग दो डॉक्यूमेंट के स्क्रीनशॉट ट्वीट किए थे. इनमें से एक डॉक्यूमेंट कोविड-19 को लेकर था और दूसरा सेंट्रल विस्टा प्रोजेक्ट को लेकर.

    इन ट्वीट्स में दावा किया गया था कि ये कांग्रेस का टूलकिट है और कांग्रेस ने देश में कोरोना महामारी को लेकर मोदी सरकार को बदनाम करने के लिए ये टूलकिट तैयार किया है.

    आरोप लगाया गया था कि इस टूलकिट के ज़रिए पार्टी ने अपने वॉलिंटियर्स और कार्यकर्ताओं को कहा कि मोदी सरकार को बदनाम करने के लिए उन्हें धर्म विशेष को टारगेट करते हुए 'सुपर स्प्रेडर कुंभ' और वायरस के म्यूटेन्ट स्ट्रेन के लिए 'मोदी स्ट्रेन' जैसे शब्दों का इस्तेमाल सोशल मीडिया पर करें, लेकिन ईद को 'हैप्पी सोशल गैदरिंग' की तरह पेश करना है.

    बाद में ट्विटर ने उनके ट्वीट्स को 'मैनिपुलेटेड मीडिया' की श्रेणी में रखा था.

    मैनिपुलेटेड मीडिया मतलब ऐसी तस्वीर, वीडियो या स्क्रीनशॉट जिसके ज़रिए किए जा रहे दावों की प्रमाणिकता को लेकर संदेह हो और इसके मूल रूप को एडिट किया गया हो या उससे छेड़छाड़ की गई हो.

    संबित पात्रा के आरोपों के जवाब में कांग्रेस रिसर्च डिपार्टमेंट के प्रमुख राजीव गौड़ा ने बीबीसी से कहा था कि "हमने कभी ऐसा कोई डॉक्यूमेंट बनाया ही नहीं. जब देश में इतना बड़ा संकट है और कितना कुछ करने को है तो बीजेपी वो ना करके यूथ कांग्रेस के किए गए काम को बदनाम करने में लगी है और लोगों का ध्यान मूल मुद्दो से भटका रही है.''

    हालांकि टूलकिट मामला कुछ दिन पहले भी चर्चा में आया था. जब स्वीडन की जानी-मानी पर्यावरण कार्यकर्ता ग्रेटा थनबर्ग के एक ट्वीट को लेकर भारत में जाँच शुरू कर दी गई थी.

    ग्रेटा थनबर्ग ने ट्विटर पर शेयर करते हुए लिखा था कि "अगर आप किसानों की मदद करना चाहते हैं तो आप इस टूलकिट (दस्तावेज़) की मदद ले सकते हैं."

    लेकिन दिल्ली पुलिस ने इसे "लोगों में विद्रोह पैदा करने वाला दस्तावेज़" बताया था और इसे जाँच के दायरे में ले लिया था.

    छोड़िए X पोस्ट, 3
    X सामग्री की इजाज़त?

    इस लेख में X से मिली सामग्री शामिल है. कुछ भी लोड होने से पहले हम आपकी इजाज़त मांगते हैं क्योंकि उनमें कुकीज़ और दूसरी तकनीकों का इस्तेमाल किया गया हो सकता है. आप स्वीकार करने से पहले X cookie policy और को पढ़ना चाहेंगे. इस सामग्री को देखने के लिए 'अनुमति देंऔर जारी रखें' को चुनें.

    चेतावनी: बीबीसी दूसरी वेबसाइट्स की सामग्री के लिए ज़िम्मेदार नहीं है.

    पोस्ट X समाप्त, 3

    टूलकिट आख़िर होती क्या है?

    मौजूदा दौर में दुनिया के अलग-अलग हिस्सों में जो भी आंदोलन होते हैं, चाहे वो 'ब्लैक लाइव्स मैटर' हो, अमेरिका का 'एंटी-लॉकडाउन प्रोटेस्ट' हो, पर्यावरण से जुड़ा 'क्लाइमेट स्ट्राइक कैंपेन' हो या फिर कोई दूसरा आंदोलन हो, सभी जगह आंदोलन से जुड़े लोग कुछ 'एक्शन पॉइंट्स' तैयार करते हैं, यानी कुछ ऐसी चीज़ें प्लान करते हैं जो आंदोलन को आगे बढ़ाने के लिए की जा सकती हैं.

    जिस दस्तावेज़ में इन 'एक्शन पॉइंट्स' को दर्ज किया जाता है, उसे टूलकिट कहते हैं.

    'टूलकिट' शब्द इस दस्तावेज़ के लिए सोशल मीडिया के संदर्भ में ज़्यादा इस्तेमाल होता है, लेकिन इसमें सोशल मीडिया की रणनीति के अलावा भौतिक रूप से सामूहिक प्रदर्शन करने की जानकारी भी दे दी जाती है.

    टूलकिट को अक्सर उन लोगों के बीच शेयर किया जाता है, जिनकी मौजूदगी आंदोलन के प्रभाव को बढ़ाने में मददगार साबित हो सकती है.

    ऐसे में टूलकिट को किसी आंदोलन की रणनीति का अहम हिस्सा कहना ग़लत नहीं होगा.

    टूलकिट को आप दीवारों पर लगाये जाने वाले उन पोस्टरों का परिष्कृत और आधुनिक रूप कह सकते हैं, जिनका इस्तेमाल वर्षों से आंदोलन करने वाले लोग अपील या आह्वान करने के लिए करते रहे हैं.

    सोशल मीडिया और मार्केटिंग के विशेषज्ञों के अनुसार, इस दस्तावेज़ का मुख्य मक़सद लोगों (आंदोलन के समर्थकों) में समन्वय स्थापित करना होता है. टूलकिट में आमतौर पर यह बताया जाता है कि लोग क्या लिख सकते हैं, कौन से हैशटैग इस्तेमाल कर सकते हैं, किस वक़्त से किस वक़्त के बीच ट्वीट या पोस्ट करने से फ़ायदा होगा और किन्हें ट्वीट्स या फ़ेसबुक पोस्ट्स में शामिल करने से फ़ायदा होगा.

    जानकारों के अनुसार, इसका असर ये होता है कि एक ही वक़्त पर लोगों के एक्शन से किसी आंदोलन या अभियान की मौजूदगी दर्ज होती है, यानी सोशल मीडिया के ट्रेंड्स में और फिर उनके ज़रिये लोगों की नज़र में आने के लिए इस तरह की रणनीति बनायी जाती है.

    आंदोलनकारी ही नहीं, बल्कि तमाम राजनीतिक पार्टियाँ, बड़ी कंपनियाँ और अन्य सामाजिक समूह भी कई अवसरों पर ऐसी 'टूलकिट' इस्तेमाल करते हैं.

  4. पी. विजयन का पीएम मोदी को पत्र, कहा- वैक्सीन के लिए केंद्र निकाले ग्लोबल टेंडर

    विजयन

    इमेज स्रोत, TWITTER@VIJAYANPINARAYI

    इमरान क़ुरैशी

    बीबीसी हिंदी के लिए

    केरल के मुख्यमंत्री पिनराई विजयन ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर निवेदन किया है कि केंद्र कोविड-19 की लड़ाई में वैक्सीन के लिए ग्लोबल टेंडर निकाले जिससे वैक्सीन के दाम कम करने में भी मदद मिलेगी.

    विजयन ने लिखा है कि महामारी से लड़ने के लिए सबसे बेहतर तरीक़ा ‘हर्ड इम्युनिटी को बनाना है. इसको पाने के लिए हमें एक सार्वभौमिक टीकाकरण अभियान शुरू करना होगा.’

    उन्होंने कहा, “अगर राज्य अलग ग्लोबल टेंडर निकालते हैं और बाज़ार में प्रतिस्पर्धा करते हैं तो इसका परिणाम यह होगा कि वैक्सीन के दाम बढ़ जाएंगे.”

    विजयन ने यह भी दोहराया कि वैक्सीन ‘सभी राज्यों को मुफ़्त उपलब्ध कराई जानी चाहिए और इसको एक सार्वजनिक संपत्ति के तौर पर देखा जाना चाहिए ताकि कोई भी व्यक्ति न छूट जाए.’

    छोड़िए X पोस्ट
    X सामग्री की इजाज़त?

    इस लेख में X से मिली सामग्री शामिल है. कुछ भी लोड होने से पहले हम आपकी इजाज़त मांगते हैं क्योंकि उनमें कुकीज़ और दूसरी तकनीकों का इस्तेमाल किया गया हो सकता है. आप स्वीकार करने से पहले X cookie policy और को पढ़ना चाहेंगे. इस सामग्री को देखने के लिए 'अनुमति देंऔर जारी रखें' को चुनें.

    चेतावनी: बीबीसी दूसरी वेबसाइट्स की सामग्री के लिए ज़िम्मेदार नहीं है.

    पोस्ट X समाप्त

    उन्होंने कहा कि सबसे बड़ी बाधा यह है कि वैक्सीन की माँग जैसे-जैसे बढ़ी वैसे-वैसे इसकी सप्लाई में कमी आई है.

    यूपी, महाराष्ट्र और राजस्थान जैसे राज्यों की तरह केरल ने भी वैक्सीन के लिए एक ग्लोबल टेंडर निकाला है. इस टेंडर में भाग लेने के लिए प्रतिभागियों को दो जून तक का समय दिया गया है.

    हाल ही में पंजाब को अमेरिकी दवा कंपनी मॉडर्ना ने सीधे वैक्सीन देने से इनकार कर दिया था, कंपनी का कहना था कि वह इस विषय में सीधे केंद्र सरकार से ही बात करेगी जिसके बाद विजयन ने यह निवेदन पीएम मोदी से किया है.

  5. प्रवासी कामगारों को राशन मुहैया कराने के लिए सुप्रीम कोर्ट ने जारी किये निर्देश

    कोर्ट

    इमेज स्रोत, REUTERS/ADNAN ABIDI

    सुप्रीम कोर्ट ने कोरोना महामारी में प्रवासी मज़दूरों और श्रमिकों की समस्याओं पर स्वत: संज्ञान लेते हुए इस संबंध में कई निर्देश पारित किये हैं.

    सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को अपने आदेश में कहा है कि असंगठिक श्रमिकों का जल्द से जल्द पंजीकरण पूरा किया जाना चाहिए और पूरे देश में विभिन्न राज्यों में स्थित सभी संगठित श्रमिकों के लिए एक राष्ट्रीय डेटाबेस तैयार किया जाना चाहिए.

    सुप्रीम कोर्ट में दो जजों की बेंच (जिसकी अध्यक्षता जस्टिस अशोक भूषण कर रहे थे और जिसमें न्यायमूर्ति एमआर शाह भी शामिल थे) ने निर्देश देते हुए कहा कि “हमारा विचार है कि असंगठिक श्रमिकों के लिए एक राष्ट्रीय डेटाबेस बनाने के लिए श्रम और रोज़गार मंत्रालय द्वारा शुरू की गई प्रक्रिया को राज्यों के सहयोग और समन्वय के साथ पूरा किया जाना चाहिए.”

    सुप्रीम कोर्ट की दो जजों की पीठ ने अपने आदेश में कहा कि “13 मई 2021 को हमारे द्वारा निर्देशित एनसीआर क्षेत्र में प्रवासी कामगारों और श्रमिकों को राज्यों द्वारा सूखा राशन देने के संबंध में, सभी राज्यों को हलफ़नामा दाख़िल करने दें.”

    सुप्रीम कोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि मई और जून 2020 में प्रवासी श्रमिकों को सूखा राशन देने के लिए लागू की गई केंद्र की आत्मनिर्भर भारत योजना का उपयोग किया जाना है या किसी अन्य योजना का. यह राज्यों को निर्णय लेना है लेकिन सूखे राशन को राज्यों द्वारा पूरे देश में प्रवासी श्रमिकों को वितरित किया जाना है.

    सुप्रीम कोर्ट ने अपने आदेश में कहा, "हम निर्देश देते हैं कि देश भर में कोरोना के कारण फँसे प्रवासी कामगारों को आत्मनिर्भर योजना के तहत सूखा राशन उपलब्ध कराया जाना चाहिए. या फिर किसी भी अन्य योजना के तहत जो उपयुक्त हो. सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि यह राज्यों / केंद्र शासित प्रदेशों की ज़िम्मेदारी है कि वे फँसे हुए प्रवासी कामगारों को सामुदायिक रसोई प्रदान करें."

  6. बीबीसी हिंदी का डिजिटल बुलेटिन 'दिनभर'

    बीबीसी हिंदी का डिजिटल बुलेटिन 'दिनभर' सुनिए संदीप सोनी से.

    छोड़िए YouTube पोस्ट
    Google YouTube सामग्री की इजाज़त?

    इस लेख में Google YouTube से मिली सामग्री शामिल है. कुछ भी लोड होने से पहले हम आपकी इजाज़त मांगते हैं क्योंकि उनमें कुकीज़ और दूसरी तकनीकों का इस्तेमाल किया गया हो सकता है. आप स्वीकार करने से पहले Google YouTube cookie policy और को पढ़ना चाहेंगे. इस सामग्री को देखने के लिए 'अनुमति देंऔर जारी रखें' को चुनें.

    चेतावनी: बीबीसी दूसरी वेबसाइट्स की सामग्री के लिए ज़िम्मेदार नहीं है. YouTube सामग्री में विज्ञापन हो सकते हैं.

    पोस्ट YouTube समाप्त

  7. आपके बच्चों की बोर्ड की परीक्षाएं कैसे होंगी, केंद्र और राज्य सरकारों की क्या है योजना

  8. कोरोना मामलों में कमी ज़रूर लेकिन स्थिति अभी भी नाज़ुक: डब्ल्यूएचओ

    डॉ. टेड्रोस

    इमेज स्रोत, WHO

    डब्ल्यूएचओ के महानिदेशक डॉक्टर टेड्रोस एडहानोम ग़ेब्रेयेसुस ने 74वें वर्ल्ड हेल्थ असेंबली के दौरान दुनियाभर के स्वास्थ्यकर्मियों और फ्रंट लाइन वर्कर्स की सेवा के लिए उन्हें याद किया.

    अपने संबोधन में डॉ. टेड्रोस ने कहा, “बीते 18 महीनों से पूरी दुनिया के हेल्थ और केयर वर्कर्स जीवन और मृत्यु के बीच में खड़े हैं. उन्होंने अनगिनत लोगों की जान बचाई है और दूसरों के लिए संघर्ष किया है. कई बार वो कामयाब रहे हैं लेकिन कई बार लाख कोशिशों के बावजूद वो लोगों की जान नहीं बचा सके.”

    उन्होंने अपने संबोधन में कहा कि “लोगों की सेवा करते हुए उनमें से कई ख़ुद भी संक्रमित हो गए हैं. एक अनुमान के अनुसार दुनियाभर में क़रीब एक लाख 15 हज़ार से अधिक हेल्थ-केयर वर्कर्स ने अपनी सेवा के लिए सर्वोच्च क़ीमत अदा की है.”

    डॉ. टेड्रोस ने कहा कि स्वास्थ्यकर्मियों और देखभाल करने वाले लोगों ने बहुत ही बहादुरी का परिचय दिया है, वे हीरो की तरह बने रहे हैं लेकिन ये भी सच है कि वे सुपरहीरो नहीं हैं. वे भी हम लोगों की ही तरह इंसान हैं. उन्हें भी पसीना आता है. वे भी हंसते और रोते हैं. डर और आशा उनके लिए भी है.

    डॉ. टेड्रोस ने स्वीकार किया कि स्वास्थ्य उपकरणों की कमी के कारण कई जानें नहीं बचायी जा सकीं.

    उन्होंने कहा कि बहुत से लोगों ने निराशा, असहाय और असुरक्षा को महसूस किया है. व्यक्तिगत सुरक्षा उपकरणों और टीकों की कमी के कारण कई लोगों की ज़िंदगी नहीं बचायी जा सकी.

    इस मौक़े पर डॉ. टेड्रोस ने कहा कि यह संस्था बीते 18 महीनों से लगातार वैश्विक स्वास्थ्य के क्षेत्र में मदद के काम में जुटी हुई है और उसके सफलतापूर्वक काम करते रहने के पीछे उसके स्टाफ़ की अहम भूमिका है.

    डॉ. टेड्रोस ने कोरोना महामारी की वैश्विक स्थिति के संदर्भ में कहा, "हमें ख़ुशी है कि लगतार तीन हफ़्तों से कोविड संक्रमण के मामलों और उससे होने वाली मौतों में कमी आयी है. लेकिन अभी भी निश्चिंत नहीं हुआ जा सकता है. स्थिति अभी भी नाज़ुक बनी हुई है."

    उन्होंने कहा कि किसी भी देश को फ़िलहाल यह नहीं मान लेना चाहिए कि वो संकट से उबर गए हैं. भले ही उनके यहां टीकाकरण की दर कुछ भी हो.

  9. कार्टून: यात्रीगण कृपया ध्यान दें

  10. तीसरी लहर बच्चों के लिए अधिक ख़तरनाक, इसके अभी साक्ष्य नहीं- सरकार

    कोरोना

    इमेज स्रोत, ANI

    भारत सरकार के हवाले से न्यूज़ एजेंसी पीटीआई ने ख़बर दी है कि कोरोना महामारी की तीसरी लहर बच्चों के लिए अधिक गंभीर परिणाम वाली होगी, इसका अभी तक कोई संकेत नहीं मिला है.

    न्यूज़ एजेंसी पीटीआई की ख़बर के अनुसार, एम्स प्रमुख डॉ. रणदीप गुलेरिया ने कहा कि मानसिक तनाव, स्मार्टफ़ोन की लत, शिक्षा क्षेत्र में चुनौतियों के कारण बच्चों को काफ़ी नुक़सान हुआ है.

    छोड़िए X पोस्ट, 1
    X सामग्री की इजाज़त?

    इस लेख में X से मिली सामग्री शामिल है. कुछ भी लोड होने से पहले हम आपकी इजाज़त मांगते हैं क्योंकि उनमें कुकीज़ और दूसरी तकनीकों का इस्तेमाल किया गया हो सकता है. आप स्वीकार करने से पहले X cookie policy और को पढ़ना चाहेंगे. इस सामग्री को देखने के लिए 'अनुमति देंऔर जारी रखें' को चुनें.

    चेतावनी: बीबीसी दूसरी वेबसाइट्स की सामग्री के लिए ज़िम्मेदार नहीं है.

    पोस्ट X समाप्त, 1

    उन्होंने कहा कि “हमने कोरोना की पहली और दूसरी लहर में देखा कि बच्चों में संक्रमण बहुत कम देखा गया. इसलिए अब तक ऐसा नहीं लगता है कि आगे जाकर कोविड की तीसरी लहर में बच्चों में कोविड संक्रमण गंभीर तौर पर देखा जाएगा.”

    उन्होंने कहा, "कहा जा रहा है कि तीसरी लहर में बच्चे सबसे ज्यादा संक्रमित होंगे लेकिन बाल रोग संघ ने कहा है कि यह तथ्यों पर आधारित नहीं है. हो सकता है इसका असर बच्चों पर न पड़े इसलिए लोगों को डरना नहीं चाहिए."

    उन्होंने ब्लैक फ़ंगस के बढ़ते प्रकोप पर कहा कि कम प्रतिरक्षा वाले लोगों में ब्लैक फ़ंगस, कैंडिडा और एस्पोरोजेनस संक्रमण के मामले अधिक देखने को मिले हैं.

    उनके मुताबिक़, ये फ़ंगस मुख्य रूप से साइनस, नाक, आंखों के पास की हड्डी में पाये जाते हैं और ये मस्तिष्क में भी प्रवेश कर सकते हैं. कभी-कभी यह फेफड़ों और गैस्ट्रोइंटेंसटाइन में भी हो सकता है.

    छोड़िए X पोस्ट, 2
    X सामग्री की इजाज़त?

    इस लेख में X से मिली सामग्री शामिल है. कुछ भी लोड होने से पहले हम आपकी इजाज़त मांगते हैं क्योंकि उनमें कुकीज़ और दूसरी तकनीकों का इस्तेमाल किया गया हो सकता है. आप स्वीकार करने से पहले X cookie policy और को पढ़ना चाहेंगे. इस सामग्री को देखने के लिए 'अनुमति देंऔर जारी रखें' को चुनें.

    चेतावनी: बीबीसी दूसरी वेबसाइट्स की सामग्री के लिए ज़िम्मेदार नहीं है.

    पोस्ट X समाप्त, 2

    सरकार की ओर से दी गई जानकारी के मुताबिक़, बीते 15 सप्ताह में कोविड टेस्ट बढ़े हैं. यह वृद्धि 2.6 गुना अधिक है. इसके साथ ही बीते दो सप्ताह से साप्ताहिक पॉज़ीटिविटी रेट में भी कमी आयी है.

    बीते 17 दिनों में कोविड संक्रमण के दैनिक मामलों में भी कमी नोट की गई है.

    स्वास्थ्य मंत्रालय के संयुक्त सचिव लव अग्रवाल ने हर शाम होने वाली प्रेस-वार्ता में जानकारी देते हुए कहा कि पिछले 24 घंटे में देश में कोविड के 2,22,000 मामले रिपोर्ट किए गए हैं.

    40 दिन के बाद यह अब तक के सबसे कम मामले दर्ज किए गए हैं.

    ज़िला स्तर पर भी कोरोना के मामलों में कमी आ रही है.

    तीन मई तक रिकवरी दर 81.7% थी, अब यह बढ़कर 88.7% हो गई है.

  11. "कोरोना की दूसरी लहर नियंत्रण में, तीसरी लहर के लिए तैयारी शुरू"

    दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल के ट्विटर हैंडल से एक ट्वीट किया गया है. जिसमें लिखा है- “कोरोना की दूसरी लहर नियंत्रण में, तीसरी लहर के लिए तैयारी शुरू”.

    इस ट्वीट में कोरोना महामारी को लेकर दिल्ली सरकार की तैयारियों का उल्लेख किया गया है.

    इसके अनुसार 6000 ऑक्सी-सिलेंडर्स का आयात किया गया है. इनकी मदद से तीन हज़ार ऑक्सीजन-बेड्स की व्यवस्था की जाएगी.

    इस ट्वीट में एचसीएल, गिव-इंडिया और केंद सरकार (ख़ासतौर पर बीजिंग में भारतीय दूतावास) को इन सिलेंडर्स की मदद के लिए धन्यवाद कहा गया है.

    ट्वीट के मुताबिक़, इसके अलावा और भी कई तरह की तैयारियां जारी हैं.

    छोड़िए X पोस्ट
    X सामग्री की इजाज़त?

    इस लेख में X से मिली सामग्री शामिल है. कुछ भी लोड होने से पहले हम आपकी इजाज़त मांगते हैं क्योंकि उनमें कुकीज़ और दूसरी तकनीकों का इस्तेमाल किया गया हो सकता है. आप स्वीकार करने से पहले X cookie policy और को पढ़ना चाहेंगे. इस सामग्री को देखने के लिए 'अनुमति देंऔर जारी रखें' को चुनें.

    चेतावनी: बीबीसी दूसरी वेबसाइट्स की सामग्री के लिए ज़िम्मेदार नहीं है.

    पोस्ट X समाप्त

    वहीं दूसरी ओर सीएम अरविंद केजरीवाल का कहना है कि दिल्ली में ब्लैक फंगस के लगभग 500 मामले हैं और राजधानी इसके इलाज में इस्तेमाल होने वाले एम्फोटेरिसिन-बी इंजेक्शन की कमी से जूझ रही है.

  12. दिल्ली में बीते 24 घंटे में कोरोना संक्रमण के 1550 नए मामले

    कोरोना

    इमेज स्रोत, Getty Images

    राजधानी दिल्ली में कोरोना वायरस संक्रमण के मामलों में लगातार कमी आ रही है.

    बीते 24 घंटे में राजधानी दिल्ली में कोरोना संक्रमण के 1550 नए मामले सामने आए हैं. वहीं ठीक होने वालों की संख्या 4375 है. लेकिन कोरोना संक्रमण से जूझ रहे मरीज़ों की मौत भी हुई है.

    बीते 24 घंटे में कोरोना संक्रमण के कारण 207 लोगों की मौत हो गई है.

    कुल मामले- 14,18,418

    कुल ठीक हुए लोग- 13,70,431

    मरने वालों की कुल संख्या 23,409

    कुल सक्रिय मामले- 24,578

    छोड़िए X पोस्ट
    X सामग्री की इजाज़त?

    इस लेख में X से मिली सामग्री शामिल है. कुछ भी लोड होने से पहले हम आपकी इजाज़त मांगते हैं क्योंकि उनमें कुकीज़ और दूसरी तकनीकों का इस्तेमाल किया गया हो सकता है. आप स्वीकार करने से पहले X cookie policy और को पढ़ना चाहेंगे. इस सामग्री को देखने के लिए 'अनुमति देंऔर जारी रखें' को चुनें.

    चेतावनी: बीबीसी दूसरी वेबसाइट्स की सामग्री के लिए ज़िम्मेदार नहीं है.

    पोस्ट X समाप्त

  13. स्पुतनिक V: आरडीआईएफ़ और पैनेसिया बायोटेक ने शुरू किया रूस की वैक्सीन का भारत में उत्पादन

    वैक्सीन

    इमेज स्रोत, ADRIANA DUDULEANU / EYEEM

    आरडीआईएफ़ और पैनेसिया बायोटेक ने स्पुतनिक-V कोरोना वैक्सीन का भारत में उत्पादन शुरू कर दिया है.

    रूसी प्रत्यक्ष निवेश कोष (आरडीआईएफ़) और भारत की चुनिंदा अग्रणी वैक्सीन निर्माता और फ़ार्मा कंपनी पैनेसिया बायोटेक ने आज कोरोना वायरस महामारी के ख़िलाफ़ रूस की स्पुतनिक V वैक्सीन के उत्पादन शुरू होने की घोषणा की है.

    हिमाचल प्रदेश के बद्दी शहर में पैनेसिया बायोटेक में इसके पहले बैच का उत्पादन किया गया. इस पहले बैच को गुणवत्ता नियंत्रण के लिए गमलेया केंद्र भेज दिया जाएगा. इन गर्मियों में वैक्सीन का पूरे पैमाने पर उत्पादन शुरू होने वाला है. कंपनी जीएमपी मानकों के तहत है और डब्ल्यूएचओ से प्री-क्वालिफ़ाइड.

    छोड़िए X पोस्ट
    X सामग्री की इजाज़त?

    इस लेख में X से मिली सामग्री शामिल है. कुछ भी लोड होने से पहले हम आपकी इजाज़त मांगते हैं क्योंकि उनमें कुकीज़ और दूसरी तकनीकों का इस्तेमाल किया गया हो सकता है. आप स्वीकार करने से पहले X cookie policy और को पढ़ना चाहेंगे. इस सामग्री को देखने के लिए 'अनुमति देंऔर जारी रखें' को चुनें.

    चेतावनी: बीबीसी दूसरी वेबसाइट्स की सामग्री के लिए ज़िम्मेदार नहीं है.

    पोस्ट X समाप्त

    स्पुतनिक V को 12 अप्रैल को आपातकालीन प्राधिकरण प्रकिया के तहत भारत में रजिस्टर किया गया था और रूस की इस वैक्सीन के साथ भारत में 14 मई से टीकाकरण शुरू किया गया था.

    इससे पूर्व अप्रैल महीने में ही घोषणा की गई थी. आरडीआईएफ़ और पैनेसिया ने हर साल 1000 मिलियन यानी 10 करोड़ ख़ुराक के उत्पादन के लिए सहमति ज़ाहिर की है.

    स्पुतनिक V को आज की तारीख़ तक दुनियाभर के 66 देशों में मान्यता मिल चुकी है. स्पुतनिक V क़रीब 97.6 फ़ीसद तक असरदार है.

    यह प्रतिशत रूस में पाँच दिसंबर 2020 से 31 मार्च 2021 तक स्पुतनिक V के दोनों घटकों के साथ टीकाकरण कराने वालों में कोरोना वायरस संक्रमण दर के आंकड़ों के अध्ययन पर आधारित है.

  14. छत्तीसगढ़: पुलिस कैंप के ख़िलाफ़ उतरे 40 गाँवों के लोग, क्या है पूरा मामला?

  15. अमेरिका ने चीन पर परमाणु हमले का किया था विचार: रिपोर्ट

  16. बीसीसीआई ने की 2000 ऑक्सीजन कंसंट्रेटर देने की घोषणा

    बीसीसीआई

    इमेज स्रोत, ANI

    भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड ने कोविड महामारी से निपटने में देश के प्रयासों में अपना योगदान देते हुए 10 लीटर के दो हज़ार कंसंट्रेटर देने की घोषणा की है.

    सोमवार को बीसीसीआई ने इसकी घोषणा की.

    कोरोना वायरस की दूसरी लहर से भारत बुरी तरह से जूझ रहा है. स्वास्थ्य उपकरणों और जीवन रक्षक ऑक्सीजन के अभाव में ना जानें कितनी ही मौतें हो चुकी हैं.

    आने वाले कुछ महीनों तक बीसीसीआई पूरे भारत में कंसंट्रेटर आवंटित करेगा ताकि ज़रूरतमंद लोगों को इससे लाभ मिल सके और महामारी का क़हर जिस तरह बरसा है उसके असर को थोड़ा कम किया जा सके.

    बीसीसीआई अध्यक्ष सौरव गांगुली ने कोरोना महामारी के इस बुरे दौर में फ्रंटलाइन वर्कर्स ख़ासतौर पर स्वास्थकर्मियों के काम और सेवा की सराहना की.

    उन्होंने कहा कि वे वास्तव में फ्रंट लाइन वॉरियर हैं और लोगों को बचाने के लिए वे लगातार प्रयास कर रहे हैं. उन्होंने कहा कि बोर्ड ने हमेशा स्वास्थ्य और सुरक्षा को तरजीह दी है और इसके लिए वह प्रतिबद्ध भी हैं.

    उन्होंने कहा कि ऑक्सीजन कंसंट्रेटर लोगों को शीघ्र स्वस्थ होने में मदद करेंगे.

    छोड़िए X पोस्ट
    X सामग्री की इजाज़त?

    इस लेख में X से मिली सामग्री शामिल है. कुछ भी लोड होने से पहले हम आपकी इजाज़त मांगते हैं क्योंकि उनमें कुकीज़ और दूसरी तकनीकों का इस्तेमाल किया गया हो सकता है. आप स्वीकार करने से पहले X cookie policy और को पढ़ना चाहेंगे. इस सामग्री को देखने के लिए 'अनुमति देंऔर जारी रखें' को चुनें.

    चेतावनी: बीबीसी दूसरी वेबसाइट्स की सामग्री के लिए ज़िम्मेदार नहीं है.

    पोस्ट X समाप्त

  17. कोरोना से जूझ रहा भारत, उधर चीन 'मास्क डिप्लोमैसी' से हुआ श्रीलंका के करीब

  18. बिहार में फिर बढ़ा लॉकडाउन, 1 जून तक जारी रहेंगी पाबंदियाँ

    छोड़िए X पोस्ट, 1
    X सामग्री की इजाज़त?

    इस लेख में X से मिली सामग्री शामिल है. कुछ भी लोड होने से पहले हम आपकी इजाज़त मांगते हैं क्योंकि उनमें कुकीज़ और दूसरी तकनीकों का इस्तेमाल किया गया हो सकता है. आप स्वीकार करने से पहले X cookie policy और को पढ़ना चाहेंगे. इस सामग्री को देखने के लिए 'अनुमति देंऔर जारी रखें' को चुनें.

    चेतावनी: बीबीसी दूसरी वेबसाइट्स की सामग्री के लिए ज़िम्मेदार नहीं है.

    पोस्ट X समाप्त, 1

    कोरोना संक्रमण के बीच बिहार में लॉकडाउन एक जून तक बढ़ा दिया गया है. मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने ट्वीट कर इसकी जानकारी दी.

    उन्होंने ट्वीट किया, “कोरोना संक्रमण को देखते हुए पाँच मई 2021 से तीन सप्ताह के लिए लॉकडाउन लगाया गया था. आज फिर से सहयोगी मंत्रीगण एवं पदाधिकारियों के साथ स्थिति की समीक्षा की गई.”

    छोड़िए X पोस्ट, 2
    X सामग्री की इजाज़त?

    इस लेख में X से मिली सामग्री शामिल है. कुछ भी लोड होने से पहले हम आपकी इजाज़त मांगते हैं क्योंकि उनमें कुकीज़ और दूसरी तकनीकों का इस्तेमाल किया गया हो सकता है. आप स्वीकार करने से पहले X cookie policy और को पढ़ना चाहेंगे. इस सामग्री को देखने के लिए 'अनुमति देंऔर जारी रखें' को चुनें.

    चेतावनी: बीबीसी दूसरी वेबसाइट्स की सामग्री के लिए ज़िम्मेदार नहीं है.

    पोस्ट X समाप्त, 2

    नीतीश कुमार नेदूसरे ट्वीट में कहा, “लॉकडाउन का अच्छा प्रभाव पड़ा है और कोरोना संक्रमण में कमी दिख रही है. इसलिए बिहार में 25 मई के आगे एक सप्ताह के लिए यानी 1 जून, 2021 तक लॉकडाउन जारी रखने का निर्णय लिया गया है.”

    इससे पहले उत्तर प्रदेश, राजस्थान और दिल्ली ने भी लॉकडाउन बढ़ाने का ऐलान किया था.

    प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा था कि कोरोना संंक्रमण निबटने के लिए लॉकडाउन अंतिम विकल्प होगा लेकिन लगातार बढ़ते हुए मामलों के मद्देनज़र कई राज्य लगातार पाबंदियाँ बढ़ा रहे हैं.

  19. टूलकिट मामला: दिल्ली पुलिस ने ट्विटर को नोटिस भेजा

    बीजेपी नेताओं की ओर से किए गए कांग्रेस की कथित टूलकिट वाले ट्वीट को 'मैनिपुलेटेड' यानी 'तोड़-मरोड़कर पेश किया गया' मीडिया बताने को लेकर दिल्ली पुलिस ने ट्विटर को नोटिस भेजा है.

    मैनिपुलेटेड मीडिया का अर्थ ऐसी सामग्री से है, जिसमें किया जा रहा दावा या तो भ्रामक है, उससे छेड़छाड़ की गई है या फिर जिसे ग़लत संदर्भ में पेश किया जा रहा है. हिंदी में ट्विटर इसे 'तोड़-मरोड़कर दिखाया गया मीडिया' बताता है.

    18 मई को संबित पात्रा समेत बीजेपी के कई नेताओं ने कांग्रेस पर आरोप लगाया था कि वह टूलकिट के ज़रिये मोदी सरकार की छवि बिगाड़ने की कोशिश कर रही है.

    छोड़िए X पोस्ट
    X सामग्री की इजाज़त?

    इस लेख में X से मिली सामग्री शामिल है. कुछ भी लोड होने से पहले हम आपकी इजाज़त मांगते हैं क्योंकि उनमें कुकीज़ और दूसरी तकनीकों का इस्तेमाल किया गया हो सकता है. आप स्वीकार करने से पहले X cookie policy और को पढ़ना चाहेंगे. इस सामग्री को देखने के लिए 'अनुमति देंऔर जारी रखें' को चुनें.

    चेतावनी: बीबीसी दूसरी वेबसाइट्स की सामग्री के लिए ज़िम्मेदार नहीं है.

    पोस्ट X समाप्त

    इन नेताओं ने चार-चार पेज के दो अलग-अलग दस्तावेज़ों के स्क्रीनशॉट ट्वीट किए थे. उन्होंने दावा किया था कि ये कांग्रेस का टूलकिट है जिसे कांग्रेस ने महामारी के बीच मोदी सरकार को बदनाम करने के लिए ये तैयार किया है.

    इन नेताओं ने आरोप लगाया कि इस कथित टूलकिट के ज़रिए कांग्रेस ने अपने कार्यकर्ताओं से कहा था कि वे अपने सोशल मीडिया पर 'सुपर स्प्रेडर कुंभ' और वायरस के स्ट्रेन के लिए 'मोदी स्ट्रेन' जैसे शब्दों का इस्तेमाल करें, साथ ही ईद को 'हैप्पी सोशल गैदरिंग' की तरह पेश करें.

    ट्विटर ने इन बीजेपी नेताओं के इन ट्वीट्स के ऊपर ‘मैनिपुलेटेड मीडिया’ की चेतावनी लगा दी थी.

    समाचार एजेंसी एएनआई के मुताबिक़, दिल्ली पुलिस ने कहा है कि उसके स्पेशल सेल ने 'टूलकिट को मैनिपुलेटेड मीडिया' बताने की जांच के संबंध में ट्विटर को नोटिस भेजा है.

  20. भीड़ में कोविड संक्रमितों की पहचान कर पाएंगे स्निफ़र डॉग

    स्निफ़र डॉग

    इमेज स्रोत, JOHN AKEHURST

    रेचल श्रेयर

    स्वास्थ्य संवाददाता

    वैज्ञानिकों का कहना है कि बंदिशें खुलने के बाद कोरोना संक्रमण का फैलाव रोकने में स्निफ़र डॉग अहम भूमिका निभा सकते हैं.

    एक ट्रायल के तहत कुत्तों को उस ख़ास तरह की गंध को पहचानने की ट्रेनिंग दी जा रही है जो वायरस से संक्रमित लोगों में पैदा होती है. इंसान इस गंध की पहचान नहीं कर सकते.

    अगर यह ट्रायल सफल रहा तो एयरपोर्ट या ज़्यादा भीड़ वाली जगहों पर कोरोना संक्रमितों की पहचान करना आसान हो जाएगा.

    हालांकि, शोधकर्ताओं का कहना है कि कुत्ते जिन लोगों की पहचान करेंगे, वे वाक़ई कोरोना संक्रमित हैं या नहीं, इसकी पुष्टि करने के लिए लैब टेस्टिंग की ज़रूरत होगी.

    इस ट्रायल में शामिल कुत्ते कोरोना से जूझ रहे 88% लोगों की ही पहचान संक्रमित के तौर पर कर पाए. वहीं जब उनके सामने स्वस्थ लोग लाए गए तो उनमें से 14% को उन्होंने वायरस से संक्रमित समझ लिया.

    कुत्तों के सूंघने की क्षमता आम इंसानों की तुलना में एक लाख गुणा ज़्यादा होती है. इसी कारण वे ड्रग्स और विस्फोटकों की पहचान कर पाते हैं.

    हालिया शोध बताते हैं कि स्पैनियल और रिट्रीवर जैसी नस्लों के कुत्तों में कैंसर, पार्किन्सन्स और मलेरिया जैसी बीमारियों की गंध पकड़ने की क्षमता होती है.