महातिर मोहम्मद की क्वाड देशों को चेतावनी, "गुटबाजी की तो भड़क सकता है चीन

इमेज स्रोत, TOMOHIRO OHSUMI/GETTY IMAGES
मलेशिया के पूर्व प्रधानमंत्री महातिर मोहम्मद ने एक इंटरव्यू में चेताया है कि क्वाड के सदस्य देशों को चीन को भड़काने से बचना चाहिए वरना इससे वैश्विक स्तर पर आर्थिक नुक़सान का सामना करना पड़ सकता है.
उन्होंने कहा कि क्वाड के सदस्यों- अमेरिका, जापान, ऑस्ट्रेलिया और भारत के लिए बेहतर होगा कि हिंद-प्रशांत क्षेत्र और दक्षिणी चीन सागर में चीन के प्रभाव पर काबू करने के लिए अपने-अपने स्तर पर बात करें.
महातिर मोहम्मद ने कहा, “क्वाड एक पुरानी नीति का हिस्सा है जिसमें आप गुट बनाकर दुश्मन का सामना करने की कोशिश करते हैं. लेकिन जब आप ऐसा करेंगे तो दुश्मन भी जवाबी कार्रवाई करेगा.”
उन्होंने ये बातें जापान के आर्थिक अख़बार निक्केई एशिया द्वारा आयोजित ‘फ़्यूचर ऑफ़ एशिया’ सम्मलेन में कहीं.
इस लेख में X से मिली सामग्री शामिल है. कुछ भी लोड होने से पहले हम आपकी इजाज़त मांगते हैं क्योंकि उनमें कुकीज़ और दूसरी तकनीकों का इस्तेमाल किया गया हो सकता है. आप स्वीकार करने से पहले X cookie policy और को पढ़ना चाहेंगे. इस सामग्री को देखने के लिए 'अनुमति देंऔर जारी रखें' को चुनें.
पोस्ट X समाप्त
'शांतिपूर्ण तरीक़े से चीन से बात करें क्वाड देश'
महातिर मोहम्मद ने कहा, “कृपया याद रखिए कि जापान को दूसरे विश्व युद्ध का हिस्सा इसलिए बनना पड़ा क्योंकि अमेरिका ने जापान को तेल देने से इनकार कर दिया था. चीन के साथ भी ऐसा ही हो सकता है.”
मलेशिया के पूर्व प्रधानमंत्री इस साल जुलाई में 96 साल के हो जाएंगे. साल 1945 में द्वितीय विश्व युद्ध के समय वो कॉलेज में थे.
महातिर मोहम्मद ने कहा कि क्वाड देशों को स्थिरता और पारस्परिक आर्थिक लाभ को लेकर चीन के साथ शांतिपूर्ण तरीक़े से बातचीत करनी चाहिए.
उन्होंने उम्मीद जताई कि अमेरिका के मौजूदा राष्ट्रपति जो बाइडन चीन के साथ अपने देश के रिश्ते सुधारने में कामयाब होंगे क्योंकि पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की जी शिनपिंग प्रशासन की ओर आक्रामक नीति ने दोनों देशों के रिश्तों में खटास पैदा कर दी थी.
महातिर मोहम्मद ने कहा, “मुझे लगता है कि बाइडन कुछ समय में चीन से तनाव कम करने और बातचीत करने में सफल हो सकेंगे. दोनों देशों के रिश्ते अब पहले से ज़्यादा ख़राब नहीं हो सकते क्योंकि ओबामा प्रशासन में उप राष्ट्रपति रहने के कारण बाइडन को ट्रंप के मुकाबले अंतरराष्ट्रीय मामलों का अनुभव कहीं ज़्यादा है.”

इमेज स्रोत, PIB
चीन ने शुरू से ही किया है क्वाड का विरोध
जापान ने साल 2007 में कूटनीतिक और सैन्य रिश्तों में सुधार के लिए क्वाड की शुरुआत एक अनौपचारिक बातचीत के तौर पर की थी.
इसके बाद इस पर कुछ समय के लिए विराम रहा लेकिन साल 2017 में यह दोबारा सक्रिय हुआ.
इस सक्रियता को हिंद-प्रशांत क्षेत्र में चीन के बढ़ते प्रभाव और ग़रीब देशों में उसके निवेश को लेकर जापान के जवाब के तौर पर देखा गया.
चीनी सरकार ने शुरुआत से ही खुलकर क्वाड का विरोध किया है.
अमेरिका में राष्ट्रपति पद संभालने के बाद जो बाइडन ने इस साल मार्च में क्वाड नेताओं की पहली वर्चुअल बैठक की मेज़बानी की थी.
बैठक में उन्होंने कोरोना महामारी के दौर में चारों देशों के आपसी सहयोग और हिंद प्रशांत क्षेत्र में स्थिरता की ज़रूरत पर ज़ोर दिया था.

इमेज स्रोत, Zahim Mohd/NurPhoto via Getty Images
चीन को भी चेताया
महातिर मोहम्मद ने सिर्फ़ क्वाड देशों को चीन के प्रति ही नहीं चेताया बल्कि उन्होंने चीन को भी चेतावनी दी.
उन्होंने कहा कि चीन को ताइवान पर अपने रवैये को लेकर सावधान रहना चाहिए क्योंकि इससे वो अमेरिका को मज़बूती से जवाब देने पर उकसा सकता है.
उन्होंने ताइवान पर चीन के जबरन आधिपत्य की आशंकाओं पर कहा, “मुझे लगता है कि अगर चीन ने ऐसा किया था तो अमेरिका हिंसक क़दम उठाएगा और इसकी परिणति युद्ध में होगी.”
महातिर मोहम्मद ने कहा, “युद्ध में सिर्फ़ दो देश ही शामिल नहीं होते बल्कि इसमें हर देश को घसीटा जाता है क्योंकि दोनों ही पक्ष अपने-अपने समर्थक जुटाने का प्रयास करते हैं. ऐसे में, एक विश्व युद्ध जैसा माहौल पैदा हो जाता है और पूरी दुनिया इसका ख़ामियाजा भुगतती है.”
महातिर मोहम्मद ने यह भी कहा कि भौगोलिक-राजनीतिक स्थिरता के लिए दक्षिणी चीन सागर में शांति सुनिश्चित करना बेहद महत्वपूर्ण है.
उन्होंने कहा, “चीन का दावा है कि दक्षिण चीन सागर पर उसका हक़ है लेकिन उसके बिना रोक-टोक के यहाँ से जहाज़ गुजरते रहे हैं. अगर चीन अचानक यहाँ से जहाज़ों की आवाजाही रोकने का विचार कर ले तो इससे संकट पैदा हो जाएगा.”
