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अल-अक़्सा मस्जिद: जुमे की नमाज़ के बाद फ़लस्तीनियों और इसराइली सुरक्षाबलों के बीच झड़प
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार सुरक्षाबलों ने लोगों पर आंसू गैस के गोले छोड़े और स्टन ग्रैनेड का इस्तेमाल किया.
लाइव कवरेज
'भारत के साथ-साथ पाकिस्तान, नेपाल, बांग्लादेश, श्रीलंका भी झेल रहे हैं कोरोना की मार'

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जॉन्स हॉप्किन्स युनिवर्सिटी ने हाल में भारत में कोरोना महामारी की दूसरी लहर की स्थिति को लेकर एक पब्लिक सेमिनार का आयोजन किया था.
इस दौरान जॉन्स हॉप्किन्स मैटर्नल एंड चाइल्ड हेल्थ सेंटर इंडिया की निदेशक डॉक्टर अनीता शेठ ने कहा कि ऐसा नहीं है कि भारत अकेला कोरोना महामारी की घातक लहर का क़हर झेल रहा है.
उन्होंने कहा, "भारत अकेला कोरोना की मार नहीं झेल रहा. नेपाल, पाकिस्तान, बांग्लादेश और श्रीलंका भी इसी तरह की स्थिति का सामना कर रहे हैं. हम मौजूदा हालात को नज़रअंदाज़ करने का ख़तरा नहीं मोल ले सकते."
"भारत के मामले में ये बात अच्छी रही कि उसके पास वैक्सीन है और फ़िलहाल वो एक दिन में 18 लाख लोगों को वैक्सीन की डोज़ दे रहा है. हालांकि इस बात से इनकार नहीं है कि भारत को रोज़ाना क़रीब 40 लाख लोगों को वैक्सीन देने की ज़रूरत है क्योंकि अब तक वहां की मात्र तीन फ़ीसद आबादी को ही वैक्सीन मिली है."
डॉक्टर अनीता शेठ ने चेतावनी दी "लेकिन भारत में जो कुछ हो रहा है वो और कहीं भी हो सकता है. हमें और सतर्क रहने की ज़रूरत है. ये देख कर दुख होता है कि लोगों की मौत इलाज के बिना हुई है."

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उन्होंने चिंता जताई कि कोरोना के कारण भारत में बच्चों का स्वास्थ्य और उसकी स्थिति कोरोना से पहले के मुक़ाबले और बिगड़ी है.
उन्होंने कहा, "महामारी के कारण स्कूल बंद हैं और बच्चों को मिड-डे मील नहीं मिल पा रहा है. साथ ही सामान्य तौर पर होने वाला बच्चों का टीकाकरण भी प्रभावित हुआ है. इसका असर 50 फ़ीसद बच्चों पर पड़ा है."
वैक्सीन के लिए हिचक के बारे में उन्होंने कहा कि कुछ धार्मिक समुदायों में इसे लेकर हिचक देखने को मिली है लेकिन यूरोप के मुक़ाबले भारत में वैक्सीन को लेकर हिचक कम है.
उन्होंने कहा कि, "भारत में वैक्सीन देने की मुहिम इसी साल जनवरी में शुरू हुई है और अब यहां संक्रमण के मामले कम होने लगे हैं. वैक्सीन के बारे में जानकारी का अभाव था, आशंकाएं थीं, लेकिन हालिया सर्वे में पता चला है कि वैक्सीन को लेकर हिचक कम हुई है."
डॉक्टर अनीता शेठ ने कहा कि वायरस जैसे-जैसे फैलता है वो म्यूटेट करता है और ऐसा होना वायरस के लिए सामान्य बात है.
उन्होंने कहा, "लेकिन चीन ने जीनोम सीक्वेन्सिंग की तकनीक में काफ़ी काम किया है और वो दुनिया का पाँचवा देश है जो सार्स वायरस का जीनोम सीक्वेन्सिंग कर चुका है. अब तक पॉज़िटिव मामलों में से केवल 0.5 फ़ीसद में ही वायरस का जीनोम सीक्वेन्सिंग किया गया है. इसे और बढ़ाने की ज़रूरत है. इससे वायरस पर नज़र रखने में मदद मिलती है."

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वहीं जॉन्स हॉप्किन्स स्कूल ऑफ़ पब्लिक हेल्थ के डॉक्टर डेविड पीटर्स ने कोरोना की संभावित तीसरी लहर के बारे में कहा कि कोई भी मॉडल ऐसा नहीं जो इसकी भविष्यवाणी कर सके.
उन्होंने कहा, "मुझे नहीं लगता कि हमारे पास फेफड़ों में होने वाले संक्रमण को लेकर कोई भी मॉडल ऐसा है जो दो से चार सप्ताह पहले किसी तरह की महामारी की भविष्यवाणी कर सके. हम स्थिति के बदलने और उसके असर को लेकर आंकड़े देख सकते हैं लेकिन हमें बचाव के तरीकों पर ही अधिक ध्यान देना चाहिए."
"दूसरी महामारी की असर झेल रहे भारत के लिए ये बेहद ज़रूरी साबित हो सकता है. यहां धार्मिक त्योहारों पर, राजनीतिक रैलियों में और शादी समारोहों में लोगों के मास्क न पहनने जैसी घटनाएं हुई हैं."
सुप्रीम कोर्ट ने 'राम भरोसे' टिप्पणी को रद्द करने से किया इनकार
सुप्रीम कोर्ट ने इलाहाबाद हाईकोर्ट की उस टिप्पणी को रद्द करने से इनकार कर दिया है जिसमें हाईकोर्ट ने कहा था कि उत्तरप्रदेश में स्वास्थ्य सेवा 'राम भरोसे' है.
राज्य में कोरोना मामलों से निपटने के लिए सरकार की तैयारियों के बारे में सुनवाई के दौरान इलाहाबाद हाईकोर्ट ने यह तल्ख़ टिप्पणी की थी.
राज्य सरकार ने सुप्रीम कोर्ट से अपील की थी कि वो इस टिप्पणी को रद्द कर दें लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने इससे इनकार कर दिया.
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि राज्य को इसे हाईकोर्ट के आदेश के बजाए सलाह के रूप में लेना चाहिए.
लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने इलाहाबाद हाईकोर्ट के उस आदेश को रोक दिया जिसमें हाईकोर्ट ने राज्य सरकार से कहा था कि वो कोरोना के मामले में कुछ ख़ास इंतज़ाम करे.
17 मई को इलाहाबाद हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को निर्देश दिया था कि नर्सिंग होम में कोविड-19 के उपचार के लिए आरक्षित सभी बिस्तरों पर ऑक्सीजन की सुविधा होनी चाहिए. इसके अलावा अदालत ने कहा था कि बी ग्रेड और सी ग्रेड वाले शहरों में कम से कम 20 एम्बुलेंस की सुविधा होनी चाहिए.
साथ ही एक महीने के भीतर हर गांव में कम से कम दो एम्बुलेंस (आईसीयू की सुविधा के साथ) उपलब्ध कराने के लिए कहा गया था.
यूपी सरकार ने इस आदेश के ख़िलाफ़ सुप्रीम कोर्ट से राहत की अपील की थी. राज्य सरकार की तरफ़ से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि वो अदालत की चिंता को समझते हैं लेकिन राज्य सरकार के लिए यह कर पाना संभव नहीं है.
सुप्रीम कोर्ट में जस्टिस विनीत शरण और जस्टिस बीआर गवई की बेंच ने इलाहाबाद हाईकोर्ट के इस फ़ैसले पर रोक लगाते हुए कहा कि उच्च न्यायालयों को आदेश देने से पहले यह ज़रूर सोचना चाहिए कि उन आदेशों का पालन करना संभव है या नहीं.
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि वो ना तो हाईकोर्ट को हतोत्साहित करना चाहता है और ना ही राज्य सरकारों को.
सॉलिसिटर जनरल ने सुप्रीम कोर्ट से अपील की थी कि वो हाईकोर्ट को निर्देश दें कि वो कोरोना से जुड़े उन्हीं मामलों की सुनवाई करें जिस बेंच की अध्यक्षता हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश करें.
लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने तुषार मेहता की इस अपील को यह कहते हुए ख़ारिज कर दिया कि हाईकोर्ट में बेंच के गठन का अधिकार हाईकोर्ट के चीफ़ जस्टिस का है और सुप्रीम कोर्ट सभी हाईकोर्ट के लिए कोई आदेश नहीं दे सकता है.
पश्चिम बंगाल: नारदा मामले में गिरफ़्तारी पर हाईकोर्ट ने पाँच जजों की बेंच बनाई

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पश्चिम बंगाल के नारदा स्टिंग मामले में गिरफ़्तार टीएमसी नेताओं के मामले की सुनवाई के लिए कलकत्ता हाईकोर्ट ने पाँच जजों का बेंच बनाया है.
कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश, न्यायमूर्ति राजेश बिंदल ने शुक्रवार को इसकी घोषणा करते हुए कहा कि इस बेंच में उनके अलावा जस्टिस आईपी मुखर्जी, जस्टिस हरीश टंडन, जस्टिस सौमेन सेन और जस्टिस अरिजीत बनर्जी शामिल होंगे.
इसकी अगली सुनवाई 24 मई को होगी.
सीबीआई ने टीएमसी के चार नेताओं, फ़िरहाद हकीम, सुब्रत मुखर्जी, मदन मित्रा और सोवन चटर्जी को 17 मई की सुबह गिरफ़्तार किया था.
सीबीआई की एक विशेष अदालत ने उन्हें ज़मानत दे दी थी लेकिन फिर उसी शाम सीबीआई कलकत्ता हाईकोर्ट के दरवाज़े पहुँच गई और उच्च न्यायालय ने ज़मानत के आदेश पर रोक लगा दी थी.
हाईकोर्ट ने कहा है कि सभी अभियुक्तों को न्यायिक हिरासत में जेल में बंद करने के बजाय घर में नज़रबंद रखा जाए.
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पत्रकार और फ़िल्म समीक्षक राजकुमार केसवानी का कोरोना से निधन
जाने-माने पत्रकार और फ़िल्म समीक्षक राजकुमार केसवानी का भोपाल में निधन हो गया है. वो कोरोना संक्रमित थे.
केसवानी को एक बेहतरीन फ़िल्म समीक्षक के अलावा भोपाल गैस त्रासदी पर लिखने वाले पत्रकार की हैसियत से जाना जाता है.
उन्होंने त्रासदी से पहले उस पर ख़बर लिखकर सरकार को आगाह भी किया था. बाद में भोपाल गैस कांड पर उन्होंने पहली किताब लिखी थी.
बीबीसी के लिए भी उन्होंने कई लेख लिखे थे.
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तस्वीरें - अल-अक़्सा: फ़लस्तीनी प्रदर्शनकारियों और इसराइली सुरक्षाबलों के बीच झड़प

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इसराइल-फ़लस्तीनी विवाद के मूल मुद्दे को सुलझाना होगा: अशरवी

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फ़लस्तीनियों की जानीमानी नेता हनान अशरवी ने बीबीसी से बातचीत में चेतावनी दी है कि अगर इसराइल और फ़लस्तीनियों के बीच के विवाद के सभी मुद्दों को नहीं सुलझाया जाता तो ये संघर्षविराम केवल अस्थाई ही रहेगा.
बीबीसी से न्यूज़आवर कार्यक्रम में शामिल हुई अशरवी ने कहा कि "इससे पहले भी दोनों के बीच कथित युद्धविराम हुए हैं, लेकिन ये शब्द केवल भ्रामक हैं क्योंकि ये दो सेना या दो देशों के बीच का संघर्ष नहीं है. ये बार-बार होने वाला क्रूर हमला है."
उन्होंने कहा, "अब जब कथित तौर पर संघर्षविराम हो गया है तो मुझे लगता है कि हमें इस संघर्ष के मूल विवाद को सुलझाना होगा. जब तक मूल विवाद का हल नहीं निकलेगा तब तक उत्पीड़न और आक्रामक स्थिति बनी रहेगी और इतिहास ख़ुद को दोहराता रहेगा."
बीबीसी हिन्दी का डिजिटल बुलेटिन दिनभर
बीबीसी हिन्दी का डिजिटल बुलेटिन दिनभर, 21 मई 2021, सुनिए मोहनलाल शर्मा के साथ.
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फ़लस्तीनियों को लेकर डेमोक्रेटिक पार्टी के रुख़ में बदलाव की वजह क्या है?
ब्रेकिंग न्यूज़, अल-अक़्सा: जुमे की नमाज़ के बाद फ़लस्तीनियों और इसराइली सुरक्षाबलों के बीच झड़प

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इसराइल और हमास के बीच संघर्षविराम के लागू होने के बाद इसराइल के क़ब्ज़े वाले पूर्वी यरूशलम में फ़लस्तीनी प्रदर्शनकारी और इसराइली सुरक्षाबलों के बीच शुक्रवार को नमाज़ के बाद एक बार फिर झड़प हुई है.
शुक्रवार को नमाज़ के वक्त सैंकड़ों की संख्या में फ़लस्तीनी मस्जिद के पास इकट्ठा हुए. प्रदर्शनकारी नारे लगे रहे थे और फ़लस्तीनी झंडे फहरा रहे थे.
इसराइली पुलिस द्वारा जारी एक बयान में कहा गया है कि नमाज़ के ख़त्म होने के बाद वहां "दंगे" जैसी स्थिति पैदा हो गई.
बयान में कहा गया है कि वहां जमा सैंकड़ों फ़लस्तीनी युवाओं ने सुरक्षाबलों पर पत्थर फेंकने शुरू किए जिसके बाद पुलिस कमांडर ने स्थिति पर क़ाबू पाने के लिए "दंगाइयों से निपटने" का आदेश दिया.
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार सुरक्षाबलों ने लोगों पर आंसू गैस के गोले छोड़े और स्टन ग्रैनेड का इस्तेमाल किया.

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अल-अक़्सा मस्जिद के परिसर में हुई झड़पों के बाद इसराइल और फ़लस्तीनी गुट हमास के बाच ग़ज़ा में संघर्ष 10 मई को शुरू हुआ था. यहूदी और मुसलमान दोनों ही इस जगह को बेहद पवित्र मानते हैं. यहूदी इसे टेम्पल माउंट कहते हैं जबकि मुसलमान इसे हरम अल-शरीफ़ कहते हैं.
इधर हमास ने इसराइल को पीछे हटने की चेतावनी देते हुए उस पर रॉकेट के हमले शुरू किए, तो उधर इसराइल ने ग़ज़ा में हमास के ठिकानों को निशाना बनाने की बात करते हुए ताबड़तोड़ हवाई हमले किए.
11 दिनों के संघर्ष को बाद दोनों पक्षों के बीच शुक्रवार को संघर्षविराम लागू हुआ. मिस्र की मध्यस्थता में हुए इस संघर्षविराम के लिए राज़ी होने के बाद दोनों पक्षों ने अपनी जीत का ऐलान किया.
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बिहार: सेनारी नरसंहार मामले में पटना हाईकोर्ट ने सभी दोषियों को बरी किया
सीटू तिवारी
पटना से, बीबीसी हिंदी के लिए

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पटना हाईकोर्ट ने 18 मार्च 1999 को हुए सेनारी नरसंहार में सभी 13 दोषियों को बरी कर दिया है. निचली अदालत ने साल 2016 में इन 13 दोषियों में से 10 को फाँसी की सज़ा और तीन को उम्रक़ैद की सज़ा सुनाई थी.
बिहार राज्य बनाम दुखन कहार केस में मामले की सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट में जस्टिस अश्विनी कुमार सिंह और अरविन्द श्रीवास्तव की डबल बेंच ने साक्ष्यों के अभाव में सभी दोषियों को बरी कर दिया है.
अधिवक्ता अंशुल राज ने बीबीसी को बताया, “साक्ष्यों के अभाव में कोर्ट ने दोषियों को बरी किया है. कोर्ट ने माना कि जब ये रात की घटना थी, रोशनी का कोई स्रोत नहीं था और सभी लोग अपनी जान बचाने के लिए भाग रहे थे तो दोषियों की पहचान कैसे की जा सकती थी. अनुसंधान में कमियों और शुरूआती एफ़आईआर में दोषियों के नामित नहीं होने के चलते हाईकोर्ट ने सभी दोषियों को बरी कर दिया.”
बिहार के अरवल ज़िले के सेनारी गांव में 18 मार्च 1999 की रात को एक ख़ास अगड़ी जाति के 34 लोगों की गला रेत कर हत्या कर दी हई थी.उस वक़्त रात तक़रीबन आठ बजे के आसपास गांव के 34 लोगों को ठाकुरबाड़ी मंदिर के पास बुलाकर हत्या की गई थी.
ठाकुरबाड़ी में जहां ये नरसंहार अंजाम दिया गया था वहां की वीभत्स तस्वीर का अंदाज़ा इसी बात से लगाया जा सकता है कि गांव के ही ज़िला एवं सत्र न्यायाधीश पद्म नारायण सिंह की घटनास्थल पर पहुँचने के बाद वहां की तस्वीर देखकर ही हार्ट अटैक से मौक़े पर मौत हो गई थी.
सेनारी गांव के पंकज कुमार ने अपने चाचा अवध किशोर शर्मा और भाई अविनाश कुमार को इस नरसंहार में खोया था.
बीबीसी से हाईकोर्ट के फ़ैसले पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए उन्होने कहा, “ ये जाँच एजेंसियों की विफलता ही कही जाएगी, बाक़ी अब और क्या कहा जा सकता है.”
वहीं 60 साल की ब्रहॉ देवी ने इस नरसंहार में अपने पति रामश्लोक शर्मा और बेटे संजीव कुमार को खोया है.

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इस नरसंहार के बाद अपने बड़े से घर में अकेले रहने को मजबूर हैं.
नरसंहार के बारे में पूछने पर वो बस इतना कहती है, “हृदय सूख गया और इस गांव में औरतें या तो अकेले रहने को मजबूर हैं या फिर घर में ताला लगाकर सब परिवार चला गया. गांव की रौनक़ कभी नहीं लौटेगी.”
माना जाता है कि सेनारी नरसंहार, दिसंबर 1997 में हुए लक्ष्मणपुर बाथे नरसंहार और 25 जनवरी 1999 को हुए शंकरबिगहा नरसंहार का बदला था. शंकरबिगहा में 22 और 58 दलित पिछड़ों की हत्या हुई थी.
लक्ष्मणपुर बाथे नरसंहार में सबसे ज़्यादा महिलाओं की हत्या हुई थी.
58 दलितों में से 32 महिलाएं थी जिसमें 1.5 साल की एक बच्ची भी थी.
दलित चिंतक प्रेम कुमार मणि की किताब ‘ख़ूनी खेल के इर्द गिर्द’ में दिए गए ब्यौरे के मुताबिक़ बिहार में तक़रीबन 57 नरसंहार हुए.
इसमें से 19 नरसंहार को अंजाम देने का आरोप रणवीर सेना पर था. सबसे आख़िरी नरसंहार साल 2000 में राज्य के औरंगाबाद ज़िले के मियापुर गांव में हुआ था.
ब्रेकिंग न्यूज़, कोविड से हुई मौतों का असल आंकड़ा दो या तीन गुना अधिक- WHO

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विश्व स्वास्थ्य संगठन ने कहा है कि कोविड के कारण होने वाली मौतों का असल आंकड़ा जितना आधिकारिक तौर पर बताया जा रहा है उससे दो या तीन गुना अधिक है.
संगठन के अनुसार आधिकारिक तौर पर दुनिया भर में अब तक कोरोना के कारण 34 लाख लोगों की मौत हो चुकी है.
वैश्विक स्वास्थ्य के आंकड़ों पर अपनी सालाना रिपोर्ट में संगठन ने कहा है कि ये आंकड़ा असल में 60 से 80 लाख के बीच हो सकता है.
रिपोर्ट के अनुसार साल 2020 में कम से कम तीस लाख या फिर जितना बताया गया उससे 12 लाख अधिक मौतें इस कारण हुई हैं.
रिपोर्ट के अनुसार, "प्रत्यक्ष तौर पर हो या फिर अप्रत्यक्ष तौर पर कोविड-19 से होने वाली मौतों के आंकड़े असल मौतों के आंकड़ों से काफी कम हैं."
संगठन की सहायक प्रबंध निदेशक समीरा अस्मा ने कहा, "असल में मौतों का आंकड़ा दो या तीन गुना अधिक होगा. मैं साफ़ कह सकती हूं कि आकलन किया जाए तो ये आंकड़ा 60 से 80 लाख के बीच होगा."
वीडियो कैप्शन, COVER STORY: कोरोना ने दिया सबक, हेल्थ सिस्टम में बड़े सुधार की ज़रूरत आंकड़े के कम होने के बारे में संगठन का कहना है कि इसके कई कारण हो सकते हैं.
संगठन के अनुसार महामारी के शुरू होने के वक्त कई लोगों की मौत उन्हें कोविड-19 की पुष्टि होने से पहले हो गई थी.
वहीं कई देशों के पास उस वक्त कोविड-19 के कारण होने वाली मौतों से जुड़ा डेटा रिकॉर्ड करने के लिए उचित प्रक्रिया तक नहीं थी.
दिल्ली में ब्लैक फ़ंगस के 197 मामले: सत्येंद्र जैन
दिल्ली के स्वास्थ्य मंत्री सत्येंद्र जैन ने शुक्रवार को बताया कि दिल्ली में सरकारी और निजी अस्पतालों में अब तक ब्लैक फ़ंगस के 197 मामले दर्ज किए गए हैं.
आज एक संवाददाता सम्मेलन में उन्होंने कहा कि प्रदेश में ब्लैक फ़ंगस के मामले बढ़ने के दो कारण हैं- पहला ब्लड में शुगर लेवल का बढ़ना और दूसरा स्टेरॉयड के इस्तेमाल के कारण शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता का कम हो जाना.
उन्होंने कहा कि बिना डॉक्टरों की सलाह के स्टेरॉयड का इस्तेमाल नहीं किया जाना चाहिए और कोविड-19 के इलाज के लिए स्टेरॉयड का इस्तेमाल जितना हो सके कम किया जाना चाहिए.
उन्होंने कहा, "अगर डॉक्टर ने सलाह दी है तभी स्टेरॉयड का इस्तेमाल करें, बिना सलाह के इसे न लें क्योंकि ये आपकी रोग प्रतिरोधक शक्ति को कम कर सकता है."
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उनका कहना था कि 18 से 44 साल की उम्र के लोगों के लिए प्रदेश में कोरोना की वैक्सीन उपलब्ध नहीं है इसलिए कई वैक्सीनेशन सेंटर शुक्रवार को बंद रहेंगे.
उन्होंने कहा, "हमारे पास 18 से 44 साल की उम्र के लोगों के लिए कोविशील्ड नहीं है और कोवैक्सीन का जो स्टॉक हमारे पास उपलब्ध है वो भी जल्दी ख़त्म हो जाएगा. इसलिए आज कुछ वैक्सीनेशन सेंटर बंद रहेंगे."
वीडियो कैप्शन, कोरोना के कहर के बीच मुश्किलें बढ़ाने वाली ब्लैक फंगस कितनी ख़तरनाक?
