इसराइल-फ़लस्तीनी संघर्ष: अमेरिका पर बरसा चीन, यूएन की राह में रोड़े अटकाने का आरोप

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इसराइल-फ़लस्तीनी संघर्ष के मुद्दे पर चीन एक बार फिर अमेरिका पर बुरी तरह बरसा है.
चीनी विदेश मंत्री वांग यी ने रविवार को कहा कि उन्हें इसका बहुत खेद है कि अमेरिका संयुक्त राष्ट्र को इस हिंसा के ख़िलाफ़ खुलकर नहीं बोलने दे रहा है.
वांग यी ने एक वर्चुअल सेशन में कहा, “यह दुखद है कि सिर्फ़ एक देश (अमेरिका) की वजह से सुरक्षा परिषद एक स्वर में अपनी बात नहीं रख पा रहा है. हम अमेरिका से अपील करते हैं वो अपनी ज़िम्मेदारियाँ उठाए.”
चीन ने कहा कि गज़ा में हो रहे ख़ून-खराबे को रोकने के लिए अंतरराष्ट्रीय समुदाय की ओर से और ज़्यादा कोशिशों की ज़रूरत है.

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अमेरिका ने क्या किया था?
दरअसल इसराइल के सहयोगी देश अमेरिका ने पिछले हफ़्ते इसराइल-फ़लस्तीनी संघर्ष के मुद्दे पर होने वाली एक बैठक को टाल दिया था और इस बारे में कोई बयान देने में भी कोई उत्साह नहीं दिखाया था.
वहीं, बाइडन प्रशासन का कहना है कि वो गज़ा में जारी हिंसा रोकने के लिए‘पर्दे के पीछे से’ काम कर रहा है और इस मसले पर सुरक्षा परिषद् का आधिकारिक बयान का प्रतिकूल असर हो सकता है.
इतना ही नहीं, अमेरिका राष्ट्रपति बाइडन यहाँ तक कह चुके हैं कि हमास के हमलों के जवाब में इसराइल को आत्मरक्षा का अधिकार है.
दूसरी तरफ़, फ़लस्तीनी समर्थक देशों का कहना है कि आत्मरक्षा का मतलब बेगुनाह फ़लस्तीनी नागरिकों पर हमला नहीं है.

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सुरक्षा परिषद ने क्या कहा?
इस बीच संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेश ने चेतावनी दी है कि संघर्ष नहीं थमा तो ये पूरा क्षेत्र एक "बेक़ाबू संकट" में घिर जाएगा.
संयुक्त राष्ट्र महासचिव ने इस बैठक की शुरुआत में कहा, “गज़ा में हो रही हिंसा बेहद भयानक है और यह संघर्ष तुरंत रुकना चाहिए.”
संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद ने गज़ा में सीज़फ़ायर (युद्धविराम) लागू करवाने के लिए अंतरराष्ट्रीय मध्यस्थों के साथ एक बैठक भी की.
हालाँकि इस बैठक में कुछ भी ठोस निष्कर्ष सामने नहीं आ सका.

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पहले भी अमेरिका पर भड़का था चीन
इससे पहले भी चीन ने इसराइल-फ़लस्तीनी मुद्दे को लेकर अमेरिका पर निशाना साधा था.
चीन ने कटाक्ष करते हुए कहा था, “ख़ुद को मानवाधिकारों का संरक्षक और 'मुसलमानों का शुभचिंतक' बताने वाले अमेरिका ने इसराइल के साथ टकराव में मारे जा रहे फ़लस्तीनियों (मुसलमानों) से आँखें फेर ली हैं.
चीन ने कहा था, “अमेरिका को सिर्फ़ शिनजियांग (चीन) के वीगर मुसलमानों की चिंता होती है. फ़लस्तीनी मुसलमानों को लेकर वो खामोश है.फ़लस्तीनियों को किस तरह युद्ध और आपदा की स्थिति में धकेल दिया गया है, वो अमेरिका को दिखाई नहीं दे रहा.”
चीन और अमेरिका दोनों ही संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के स्थायी सदस्य हैं जिन्हें वीटो अधिकार हासिल है.









