कोरोना: दिल्ली में 24 घंटे में 357 मौतें, 24,103 नए मामले
राजधानी दिल्ली में कोरोना संक्रमण से अभी तक कुल 13,898 लोग दम तोड़ चुके हैं और अभी भी कई मरीज़ अपनी ज़िंदगी की सबसे बड़ी जंग लड़ रहे हैं.
लाइव कवरेज
कोरोना के दौर में खाने-पीने से जुड़े काम के टिप्स
कोविड-19 की महामारी के इस दौर में कई चीज़ें बदल रही हैं. कामकाज, साफ़-सफ़ाई से लेकर खान-पान के तौर-तरीक़े, उन्हीं बदलती चीज़ों में शामिल है.
लोगों की प्राथमिकता में स्वास्थ्य और ख़ासकर खान-पान और स्वच्छता का मुद्दा अचानक से काफ़ी ऊपर आ गया है.
ऐसा नहीं है कि पहले लोगों की प्राथमिकता में ये चीज़ें नहीं हुआ करती थीं.
हां, ये ज़रूर था कि खान-पान और स्वच्छता हमारे जीवन-शैली की वो बात थी, जिसमें पसंद-नापसंद को ज़्यादा तरजीह दी जाती थी.
इन दिनों कुछ लोग इस बात को लेकर चिंतिंत हैं कि क्या कोविड-19 की बीमारी खाने-पीने की चीज़ों से भी फैलती है?
स्टोरी: टीम बीबीसी / आवाज़: प्रज्ञा सिंह / वीडियो एडिट: केंज़-उल-मुनीर
वीडियो कैप्शन, कोरोना के दौर में खाने-पीने से जुड़े ये पांच टिप्स बेहद काम के हैं
कोरोना की दवाओं से भरे बैग 'चोर' ने लौटाए, हरियाणा की घटना
देश भर में कोरोना के बढ़ते मामलों के बीच हरियाणा के जींद में 'चोर' ने इंसानियत दिखाई. घटना जींद के पीपी सेंटर में हुई.
चोर ने कुछ बैग चुराए लेकिन जब बता चला कि उनमें कोरोना वैक्सीन है तो लौटा गया.
बैग में कोरोना वैक्सीन के 1710 डोज़ थे. पुलिस मामले की जांच कर रही है.
वीडियो कैप्शन, कोरोना की दवाओं से भरे बैग चोर ने लौटाए, हरियाणा की घटना
राजधानी दिल्ली में तेज़ी से बढ़ रहे हैं ब्रितानी वेरिएंट के मामले
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कोरोना वायरस के हाल में
किए गए जीनोम सैंपलिंग से पता चला है कि दिल्ली में ब्रितानी वेरिएंट के संक्रमण
के मामलों में मार्च के मुक़ाबले तेज़ी आई है.
शुक्रवार को हुए एक
वेबिनार में नेशनल सेंटर ऑफ़ डिज़ीज़ कंट्रोल के निदेशक डॉक्टर सुजीत सिंह ने कहा
कि दिल्ली में कोविड-19 के जो मामले दर्ज किए गए हैं, उनमें मार्च के दूसरे सप्ताह
में जहाँ ब्रितानी वेरिएंट (B.1.1.7) के कारण संक्रमण के 28
फीसदी मामले थे, वहीं मार्च के आख़िर में इस वेरिएंट के कारण संक्रमण के मामले 50
फीसदी हो गए. ये जानकारी संक्रमितों में पाए गए वायरस की जीनोम सैंपलिंग से मिली है.
डॉक्टर सुजीत के अनुसार
ब्रितानी वायरस वेरिएंट में N501Y नाम का म्यूटेशन है
जिसके कारण ये वेरिएंट पहले के वायरस के मुक़ाबले अधिक संक्रामक हैं. इस म्यूटेशन
के कारण न केवल संक्रमण के मामलों में बढ़ोतरी देखी जा रही है बल्कि लोगों की
स्थिति गंभीर हो रही है और कोविड के कारण मृत्यु दर भी बढ़ी है.
डिपार्टमेंट ऑफ़
बायोटेक्नोलॉजी द्वारा आयोजित इस वेबिनार में उन्होंने कहा कि हाल में दिनों मे भारतीय
कोरोना वायरस वेरिएंट (B.1.617) के कारण संक्रमण के मामलों में भी तेज़ी आई है. इस वायरस
में दो म्यूटेशन देखे जा रहे हैं जिसके कारण ये अधिक संक्रामक है और ये वैक्सीन के
असर को कम कर सकता है.
हालांकि उनका कहना था कि जांच
में पता चला है कि संक्रमण के मामलों में दक्षिण अफ्रीकी और ब्राज़ील वेरिएंट का
हिस्सा क़रीब 11 फीसद है. इन वेरिएंट के कारण बीमारी कितनी गंभीर स्थिति अख्तियार
कर सकती है इस बारे में अभी जांच जारी है.
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राजधानी दिल्ली फ़िलहाल
कोरोना महामारी की चौथी लहर से जूझ रही है. यहाँ अस्पतालों में संक्रमितों की
संख्या तेज़ी से बढ़ी, कोविड-19 के कारण सांस न ले पाने के पहले के कहीं अधिक
मामले दर्ज किए जा रहे हैं और अस्पतालों में ऑक्सीजन की भी कमी देखी जा रही है.
दिल्ली में कोरोना वायरस
के 438 नमूनों की सिक्वेसिंग की गई थी जिनमें से 415 नमूने ब्रितानी
वेरिएंट थे जबकि 23 दक्षिण अफ़्रीकी वायरस वेरिएंट थे.
दिल्ली उन राज्यों में से
एक है जहां विदेश से आए और उनके संपर्क में आए लोगों के मुक़ाबले स्थानीय समुदाय
में कहीं अधिक ब्रितानी कोरोना वायरस वेरिएंट के मामले पाए गए हैं.
दिल्ली के अलावा पंजाब,
छत्तीसगढ़ और गुजरात में भी समुदाय में ब्रितानी वेरिएंट के अधिक मामले देखे जा
रहे हैं.
दिल्ली में ब्रितानी वेरिएंट
के कारण संक्रमण के 324 मामले हैं जबकि विदेश से आए और उनके संपर्क में आए लोगों
की संख्या केवल 91 है. वहीं गुजरात में इस वेरिएंट से 42 संक्रमित जबकि विदेश से
आए लोगों और उनके संपर्क में आए लोगों की संख्या 18 है. छत्तीसगढ़ में इस वेरिएंट
से संक्रमित हो कर एक ही व्यक्ति आए हैं जबकि यहां इस वेरिएंट के संक्रमण के
मामलों की संख्या 14 है.
इन राज्यों में दक्षिण
अफ़्रीकी और ब्राज़ील के कोरना वायरस वेरिएंट के मामले कम पाए गए हैं और यहां संक्रमण
के रिकॉर्ड मामले दर्ज किए जा रहे हैं.
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सीएसआईआर- इंस्टीट्यूट
ऑफ़ जीनोमिक्स एंड इन्टीग्रेटिव बायोलॉजी के निदेशक डॉक्टर अनुराग अग्रवाल ने कहा
भारतीय कोरोना वायरस वेरिएंट के बारे में ये चिंता जताई जा रही थी कि इसमें E484K और L245R नाम के दो म्यूटेशन देखे गए हैं, जिस कारण इस बात की
संभावना बढ़ गई थी कि एक साथ दोनों म्यूटेशन के होने पर, एंटीबॉडीज़ शायद इसका
मुक़ाबला न कर पाएं.
हालांकि उनका कहना था कि शरीर
कोशिका के स्तर पर भी संक्रमण का मुक़ाबला करता है और इस कारण उम्मीद की जा सकती
है कि एंटीबॉडी इसका मुक़ाबला कर सकेंगे और इस कारण अलग वेरिएंट होने पर भी
वैक्सीन वायरस के ख़िलाफ़ कारगर साबित होगी.
वहीं आईसीएमआर-नेशनल इंस्टीट्यूट
ऑफ़ वायरोलॉजी की निदेशक डॉक्टर प्रिया अब्राहम ने कहा कि ये वायरस आने वाले दिनों
में भी म्यूटेट करता रहेगा और इससे बचने के लिए लिए प्रभावी तरीका यही है कि लोग इससे
बचाव से तरीकों का ठीक से पालन करें.
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