पाकिस्तान: होटल में ज़बर्दस्त धमाका, कम से कम चार की मौत 11 घायल

संवाददाताओं के मुताबिक, हो सकता है कि पाकिस्तान में चीन के राजदूत इस हमले का निशाना रहे हों.

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  1. सऊदी अरब और ग्रीस में हुआ अहम रक्षा समझौता

    सऊदी अरब

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    सऊदी प्रेस एजेंसी के अनुसार, सऊदी अरब के क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन-सलमान और ग्रीस के विदेश मंत्री निकोस डेंडियास के बीच मंगलवार को बातचीत हुई है.

    बैठक के दौरान दोनों नेताओं ने दोनों देशों के द्विपक्षीय संबंधों की समीक्षा की ताकि दोनों देशों के बीच कई क्षेत्रों में संयुक्त सहयोग बढ़ाया और मज़बूत किया जा सके.

    दोनों नेताओं ने मौजूदा क्षेत्रीय मुद्दों और उनके समाधान की दिशा में किए गए प्रयासों पर भी चर्चा की है. इस बैठक में सऊदी अरब के उप-रक्षा मंत्री प्रिंस खालिद बिन-सलमान और विदेश मंत्री प्रिंस फ़ैसल बिन-फ़रहान ने ग्रीस के रक्षा मंत्री निकोलाओस पनाजियोटोपोलोस ने भी भाग लिया.

    इससे पहले मंगलवार को सऊदी अरब और ग्रीस ने रियाद में कई मंत्रिस्तरीय बैठकों के बाद रक्षा सहयोग से संबंधित एक समझौते पर हस्ताक्षर किए. बैठक की शुरुआत में, सऊदी अरब और ग्रीस के विदेश मंत्रियों ने सऊदी अरब की रक्षा क्षमताओं को मज़बूत बनाने में भाग लेने वाले सशस्त्र बलों की क़ानूनी दर्जा देने के एक मसौदे पर हस्ताक्षर किए.

    सऊदी विदेश मंत्रालय के अनुसार, इसके बाद प्रिंस फ़ैसल ने दोनों मेहमान मंत्रियों के साथ द्विपक्षीय संबंधों पर चर्चा करने के लिए आधिकारिक बातचीत की.

    उन्होंने दोनों देशों से जुड़े क्षेत्रीय और अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर भी बातचीत की. बैठक ख़त्म होने के बाद रक्षा मंत्री निकोलाओस पनाजियोटोपोलोस ने कहा कि, ''ग्रीस और सऊदी अरब की दोस्ती काफ़ी मज़बूत है और वर्तमान भू-रणनीतिक चुनौतियों और भविष्य के लिए दोनों की एक सामान्य दृष्टि है.''

    विदेश राज्य मंत्री अदेल अल-ज़ुबैर ने भी डेंडियास और उनके साथ आए प्रतिनिधिमंडल के साथ बातचीत की.

    गल्फ़ कोऑपरेशन काउंसिल यानी जीसीसी के महासचिव नायफ़ अल-हज़रफ ने ग्रीस के दोनों मंत्रियों से मुलाक़ात की. इस मुलाक़ात के दौरान उन्होंने खाड़ी-ग्रीक संबंधों को और मज़बूत बनाने पर ज़ोर दिया.

    अल-हज़रफ़ और डेंडियास ने जीसीसी के महा-सचिवालय और ग्रीस सरकार के बीच आम हित के मुद्दों पर बातचीत करने के लिए एक समझौता पर हस्ताक्षर किए.

    अल-हज़रफ़ ने कहा कि समझौते में राजनीतिक, आर्थिक, वाणिज्यिक और निवेश के क्षेत्रों में सहयोग और परामर्श के करने के लिए एक तंत्र की व्यवस्था की गई है.

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  5. चीनी राष्ट्रपति बोले- केवल एक-दो देश वैश्विक नियम तय नहीं कर सकते

    चीन

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    चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने मंगलवार को कहा कि एक-दो देश वैश्विक नियम तय नहीं कर सकते हैं. चीनी राष्ट्रपति ने कहा कि ऐसा करने की कोशिश की जाएगी तो किसी को फ़ायदा नहीं होगा. चीनी राष्ट्रपति सालाना बोआओ फोरम में बोल रहे थे. इसे चीनी दाओस भी कहा जाता है.

    इस बार यह बैठक वर्चुअली हुई, जिसमें कई एशियाई नेता शामिल हुए. चीनी मीडिया के अनुसार इस फोरम की बैठक में दक्षिण कोरियाई राष्ट्रपति मून जा-इन, इंडोनेशिया के जोको विदोदो, श्रीलंकाई राष्ट्रपति गोटाभाया राजपक्षे और बांग्लादेश की प्रधानमंत्री शेख हसीना भी मौजूद थीं.

    चीनी राष्ट्रपति ने अमेरिका पर बिना नाम लिए निशाना साधा. चीनी राष्ट्रपति ने कहा, ''संयुक्त ताक़तें और एक महामारी ने दुनिया को अस्थिर किया है और दोनों दिखती नहीं हैं. इनसे पूरी दुनिया में अस्थिरता और अनिश्चितता बढ़ी हैं. बहुध्रुवीय दुनिया को लेकर कोई मौलिक बदलाव नहीं हुआ है. आर्थिक वैश्वीकरण में अब उदारता दिख रही है और बहुध्रुवीय दुनिया को लेकर भी संचार-समन्वय बढ़ रहा है. हमें बहुध्रुवीय दुनिया की तरफ़ बढ़ने की ज़रूरत है और संयुक्त राष्ट्र केंद्रित अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था ही मान्य हो सकती है.''

    इससे पहले जनवरी में शी जिनपिंग ने दावोस में वर्ल्ड इकनॉमिक फोरम में अमेरिकी नेतृत्व को 'छोटा गुट' कहा था. चीन ने हाल के दिनों में जापान, ऑस्ट्रेलिया, भारत और अमेरिका वाले क्वॉड समूह को लेकर भी नाराज़गी जताई है.

    मंगलवार को चीनी राष्ट्रपति ने कहा कि दुनिया एक-दो देशों के तय किए गए नियम के हिसाब से नहीं चल सकती. राष्ट्रपति जिनपिंग ने कहा, ''आज ज़रूरत इस बात की है कि हमें इंसाफ़ मिले न कि एकाधिकार बोलबाला हो. बड़े देशों की यह ज़िम्मेदारी है कि जवाबदेही की उपेक्षा न करें.''

    शी जिनपिंग ने कहा, ''हम बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव यानी बीआरआई को लेकर प्रतिबद्ध हैं. हमने बीआरआई पार्टनर्स के बीच संयुक्त रूप से वैक्सीन का उत्पादन शुरू कर दिया है. इस प्रक्रिया में इंडोनेशिया, ब्राज़ील, यूएई, मलेशिया, पाकिस्तान और तुर्की शामिल हैं.''

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