वैक्सीन संक्रमण से नहीं बचाती है बल्कि बीमारी गंभीर होने से बचाती है: एम्स निदेशक
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एम्स के निदेशक डॉक्टर रणदीप गुलेरिया, नारायणा हेल्थ के चैयरमेन डॉक्टर देवी शेट्टी और मेदांता के चैयरमेन डॉक्टर नरेश त्रेहन ने बुधवार को देश में कोविड-19 की स्थिति को लेकर वीडियो कॉन्फ़्रेंसिंग के ज़रिए बात की.
डॉक्टर देवी शेट्टी ने इस दौरान कहा कि भरोसेमंद डॉक्टर को दिखाना सबसे ज़रूरी है और अगर काफ़ी व्यायाम के बाद ऑक्सीजन का स्तर 94से नीचे नहीं जा रहा है तो डरने की कोई ज़रूरत नहीं है, अपने डॉक्टर से सही समय पर बात करें और ठीक इलाज लें.
डॉक्टर नरेश त्रेहन ने कहा कि ‘अपने शरीर के हिसाब से लक्षणों को पहचानना ज़रूरी है. इलाज घर पर शुरू कर दें और उसके लिए अच्छे डॉक्टर को दिखाना सबसे ज़रूरी है. तुरंत अस्पताल में भर्ती होने को लेकर भगदड़ करने की ज़रूरत नहीं है, प्रोटोकॉल के अनुसार ही आपको अस्पताल में भर्ती किया जा सकता है.’
उन्होंने कहा कि ‘बहुत कम लोगों को ही अस्पताल में भर्ती किए जाने की ज़रूरत पड़ती है. रेमडेसिविर हर किसी को नहीं दी जानी चाहिए. टेस्ट रिज़ल्ट पॉज़िटिव आने के बाद कुछ लक्षणों के बने रहने और उस शख़्स को अलग-अलग बीमारी होने पर ही रेमडेसिविर इंजेक्शन दिया जाना चाहिए. यह कोई रामबाण नहीं है बस वायरल लोड को कम करने में सहायक है. मेरी अपील है कि पॉज़िटिव होने पर अस्पताल न भागें.’
डॉक्टर रणदीप गुलेरिया ने बताया कि आंकड़े बताते हैं कि कोविड-19 से संक्रमित 85% लोग आराम से ठीक हो गए हैं और 15% लोगों को ही अस्पताल और गंभीर इलाज की ज़रूरत पड़ी है.
“रेमडेसिविर मृत्यु दर कम नहीं करती है. घर पर ही ख़ुद को मॉनिटर करें और अपने डॉक्टर से संपर्क करें. बहुत कम लोगों को ही अस्पताल आने की ज़रूरत है क्योंकि सब अस्पताल आ जाएं तो इससे अराजकता की स्थिति बन जाती है.”
“वैक्सीन के बारे में यह बताना चाहता हूं कि वैक्सीन संक्रमण होने से नहीं बचाती है बल्कि वो आपकी बीमारी गंभीर होने से बचाती है. आपको अस्पताल में भर्ती होने से बचाती है. वैक्सीन लगाने के बाद भी मास्क पहनना ज़रूरी है ताकि हम अपने परिजनों को बचा सकें.”
“वैक्सीन महामारी ख़त्म नहीं कर सकती है. हमें इस चेन को तोड़ना होगा और यह कुछ नियमों का पालन करके ही हो सकता है. इसके लिए मास्क पहनें, दो ग़ज़ की दूरी बनाए रखें और लगातार हाथ धोएं.”












