झांसी में केरल की दो ननों के कथित
उत्पीड़न के मामले पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए, कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने
एक ट्वीट किया है, जिसमें उन्होंने लिखा कि “ये घटना संघ परिवार द्वारा एक समुदाय को दूसरे के ख़िलाफ़ खड़ा करने के लिए
चलाए जा रहे दुष्प्रचार और अल्पसंख्यकों को रौंद डालने की सोच का नतीजा है.”
उन्होंने अपने ट्वीट में लिखा कि “ये हमारे लिए एक राष्ट्र के रूप में आत्मनिरीक्षण करने
और ऐसी विभाजनकारी ताक़तों को हराने के लिए सुधारात्मक क़दम उठाने का समय है.”
ख़बरों के अनुसार, 19 मार्च को ट्रेन
से जा रहे ईसाइयों के एक समूह को झांसी (उत्तर प्रदेश) में बजरंग दल के कार्यकर्ताओं
ने कथित तौर पर परेशान किया और उन्हें डराया था.
बताया गया कि बजरंग दल के कार्यकर्ताओं
ने पुलिस से शिकायत की थी कि दो महिलाओं को धर्म परिवर्तन के लिए दो नन ज़बरदस्ती ले
जा रही हैं. इसके बाद पुलिस ने सभी चार महिलाओं को ट्रेन से उतारकर हिरासत में ले लिया
था.
हालांकि, जाँच के बाद पुलिस ने कहा
कि शिकायत निराधार थी. पुलिस के अनुसार, इसके बाद अगली ट्रेन से चारों महिलाओं को ओडिशा
में उनके गंतव्य के लिए रवाना कर दिया गया.
इससे पहले केरल कैथोलिक बिशप काउंसिल ने केंद्र और उत्तर प्रदेश सरकार से दोषी अपराधियों के ख़िलाफ़ कड़ी कार्रवाई करने की माँग की थी.
बुधवार को केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने भरोसा दिलाया कि झांसी में ननों के साथ कथित उत्पीड़न के मामले में शामिल लोगों के ख़िलाफ़ सरकार कड़ी कार्रवाई करेगी.
उन्होंने कहा कि मैं केरल के लोगों को भरोसा देता हूँ कि इस घटना के पीड़ितों को जल्द से जल्द न्याय मिलेगा.
केरल के मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन का कहना है कि ऐसी घटनाएं देश की छवि को धूमिल करती हैं. इस घटना में शामिल लोग संविधान द्वारा दिए गए निजी अधिकारों की आज़ादी को बाधित करते हैं. झांसी में जो हुआ वह इस देश में नहीं होना चाहिए. यह बहुत गंभीर मामला है और ऐसे मामलों के लिए वह राज्य बदनाम है.
विजयन ने दावा किया कि उनकी सरकार केरल में सांप्रदायिक सद्भाव बिगाड़ने की किसी मुहिम को पनपने नहीं देगी.