किसानों के आंदोलन के मद्देनज़र हरियाणा में सरकार ने 17 ज़िलों में 30 जनवरी तक इंटरनेट सेवाएं बंद करने की घोषणा की है.
लाइव कवरेज
बजट 2021: बजट सेशन आज होगा शुरू, 18 पार्टियों ने लिया राष्ट्रपति अभिभाषण के बहिष्कार का फ़ैसला
देश का बजट एक फरवरी को पेश होगा, जिससे पहले आज संसद का बजट सत्र शुरू होने वाला है.
इससे पहले 18 राजनीतिक पार्टियों ने कहा है कि वे आज होने वाले राष्ट्रपति के अभिभाषण का बहिष्कार करेंगी.
ये पार्टियां हैं- कांग्रेस,राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी, जम्मू कश्मीर नेशनल कॉन्फ्रेंस, डीएमके, तृणमूल कांग्रेस, शिव सेना, समाजवादी पार्टी, राष्ट्रीय जनता दल, मार्क्सवादी कम्यूनिस्ट पार्टी, भारतीय कम्यूनिस्ट पार्टी, इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग, रिवॉल्यूशनरी सोशलिस्ट पार्टी, पीपल्स डेमोक्रेटिक पार्टी, एमडीएमके, केरल कांग्रेस (मनी), एआईयूडीएफ़.
इन पार्टियों ने एक साझा बयान जारी कर कहा है कि केंद्र सरकार के पास किए गए तीनों क़ानून राज्यों और संविधान की संघीय भावना का
उल्लंघन है.
बयान में कहा गया है कि इन क़ानूनों को पास करने से पहले न तो राज्यों के साथ चर्चा की गई, न तो किसान नेता और न ही इसके लिए देश के लोगों से बात की गई थी.
बयान में कहा गया है कि ये तीनों क़ानून अगर रद्द ने किए गए तो ये न्यूनतम समर्थन मूल्य, सरकार की ख़रीद व्यवस्था को प्रभावित कर सकते हैं.
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ब्रेकिंग न्यूज़, किसान देश को बनाने वाले लोग हैं, देशद्रोही और अपराधी नहीं - जयंत चौधरी
कृषि क़ानूनों के विरोध में प्रदर्शन कर रहे किसानों से मुलाक़ात करने के लिए राष्ट्रीय लोक दल के नेता जयंत चौधरी गाज़ीपुर बॉर्डर पहुंचे.
किसानों से मुलाक़ात के बाद जयंत चौधरी ने कहा कि "26 जनवरी को जो कुछ हुआ उसकी सारी तस्वीरें सामने नहीं आईं. प्रदर्शन कर रहे लोगों की मंशा ये थी कि लोकतंत्र हमसे है, गणतंत्र हमसे है और एक आम नागरिक होने के नाते हमारा भी अधिकार है कि हम राजधानी जाएं. उस भावना के साथ वहां किसान लोग गए. उजाड़ने की नियत से कोई नहीं गया."
उन्होंने कहा "जो किसान लोग यहां बैठे हैं वे बहुत ही समझदार लोग हैं. वे बनाने वाले लोग है. परिवार बनाने वाले, देश को बनाने वाले लोग हैं. ये देशद्रोही और अपराधी नहीं हैं."
हिंसा में घायल हुए पुलिसकर्मियों पर उन्होंने कहा कि वो भी हमारे ही अपने लोग हैं. उनके प्रति हमारी संवेदना है.
जब उनसे पूछा गया कि क्या किसान आंदोलन कमज़ोर पड़ गया है, तो जयंत चौधरी ने कहा कि आंदोलन कमज़ोर नहीं पड़ा, पड़ाव आते हैं. ऊंच-नीच होती रहती है. कई दौर की बातचीत हुई लेकिन हल नहीं निकल सका.
उन्होंने कहा कि "मेरा तो मानना है कि अगर आंदोलन छेड़ना है तो ऐसा करो की वो राजनीतिक लोग जो किसान विरोधी हैं उन्हें बाहर का रास्ता दिखा दो."
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किसान आंदोलन: प्रदर्शन स्थलों पर भारी सुरक्षाबल मौजूद
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किसान नेताओं और प्रदर्शन कर रहे किसानों ने स्पष्ट कर दिया है कि वे प्रदर्शन जारी रखेंगे.
किसान प्रदर्शन स्थलों पर डटे हुए हैं. वहीं सिंघु, गाज़ीपुर और टिकरी बॉर्डर पर सुरक्षाबल भी तैनात है.
देखें तस्वीरें...
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इमेज कैप्शन, टिकरी बॉर्डर पर बड़ी संख्या में सुरक्षाबल तैनात है
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इमेज कैप्शन, टिकरी बॉर्डर पर बड़ी संख्या में सुरक्षाबल तैनात है. कृषि क़ानूनों के ख़िलाफ़ यहां किसानों का विरोध-प्रदर्शन जारी है.
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इमेज कैप्शन, टिकरी बॉर्डर
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इमेज कैप्शन, सिंघु बॉर्डर पर भारी संख्या में सुरक्षाबल तैनात किया गया है.
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इमेज कैप्शन, सिंघु बॉर्डर पर भारी संख्या में सुरक्षाबल तैनात
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इमेज कैप्शन, गाज़ीपुर बाॅर्डर पर किसानों का विरोध प्रदर्शन जारी है.
किसान नेता जगतार सिंह बाजवा ने एएनआई न्यूज़ एजेंसी से कहा, "हमारे पास अभी ऐसा(प्रदर्शन स्थल खाली करने का) कोई आदेश नहीं आया है. कल शाम को डीएम की तरफ से एक नोटिस आया था, उस पर चर्चा करने के बाद उसका जवाब देंगे."
किसान नेता जोगिंदर सिंह उगराहां ने हिंसा के लिए किसे ज़िम्मेदार ठहराया?
बीबीसी संवाददाता अरविंद छाबड़ा से बात करते हुए किसान नेता जोगिंदर सिंह उगराहां ने लाल क़िला हिंसा को सरकार की चाल बताया है.
जोगिंदर सिंह कहते हैं, "ये तो कोई सामान्य से सामान्य व्यक्ति भी जानता है. कि गणतंत्र दिवस के दिन लाल क़िला पर कितनी सुरक्षा होगी. और वहां कोई मज़े से जाकर झंडा चढ़ा दे, ऐसा कैसे हो सकता है. मेरी 75 साल की उमर हो गई. मैंने तो पहली बार ऐसी चीज़ देखी."
"इतने बड़ा देश जिसके अंदर इतने सुरक्षा प्रबंध हों कि चींटी भी नहीं आ सकती, वहां लाल क़िले पर जाकर झंडा लगा दिया. और बाद में लाइव होकर व्यक्ति ने बात भी की."
दीप सिद्धू ने इस घटना के बाद एक वीडियो में बताया था कि ये घटना किस तरह घटित हुई. लेकिन रैली के लिए जल्दी निकलने को लेकर उगराहां का बयान, दिल्ली पुलिस के बयान से अलग है.
वीडियो कैप्शन, किसान नेता जोगिंदर सिंह उगराहां ने हिंसा के लिए किसे ज़िम्मेदार ठहराया?
गाज़ीपुर, सिंघु और टिकरी बॉर्डर पर किसान मौजूद, जवान तैनात
26 जनवरी को दिल्ली में हुई हिंसा के बाद से किसान आंदोलन को लेकर कई तरह की अटकलें लगाई जा रही थीं लेकिन दिल्ली की अलग-अलग सीमाओं पर किसान प्रदर्शनकारी डटे हुए हैं.
किसानों की ओर से स्पष्ट कर दिया गया है कि उनका प्रदर्शन तब तक जारी रहेगा जब तक सरकार कृषि क़ानूनों को वापस नहीं ले लेती.
गुरुवार 28 जनवरी को प्रशासन की ओर से गाज़ीपुर बॉर्डर पर प्रदर्शन कर रहे किसानों से हटने की अपील की गई थी लेकिन किसान नेता राकेश टिकैत ने साफ़ तौर पर हटने से मना कर दिया.
कुछ किसान जो लौट गए थे उन्हें लेकर टिकैत ने कहा कि किसान अपने ट्रैक्टरों से वापस आएंगे और ऐसा हुआ भी.
देर रात वापस लौट गए कई किसान वापस लौटे. गाज़ीपुर बॉर्डर पर पुलिस की तैनाती फिलहाल कम कर दी गई है.
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गाज़ीपुर के अलावा टिकरी बॉर्डर पर भी किसानों का प्रदर्शन जारी है.
यहां भी बड़ी संंख्या में सुरक्षाबलों की तैनाती की गई है.
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सिंघु बॉर्डर पर भी किसान अपनी मांगों को लेकर डटे हुए हैं.
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गाज़ीपुर बॉर्डर पर बीती रात कैसा था माहौल?
राजदीप सरदेसाई और शशि थरूर के ख़िलाफ़ राष्ट्रदोह का केस
उत्तर प्रदेश की नोएडा पुलिस ने गणतंत्र दिवस के दिन हिंसा फैलाने के मामले में कांग्रेस नेता शशि थरूर समेत कई वरिष्ठ पत्रकारों के ख़िलाफ़ राष्ट्रदोह का केस दर्ज किया है.
सोशल मीडिया पर वायरल हो रही एफ़आईआर संख्या 0076 की कॉपी के मुताबिक़, इस मामले में वरिष्ठ पत्रकार राजदीप सरदेसाई, मृणाल पांडेय, जफ़र आग़ा, परेशनाथ, अनंतनाथ और विनोद के जोस समेत एक अज्ञात व्यक्ति का नाम शामिल किया गया है.
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गाज़ीपुर बॉर्डर: ट्रॉली के बजाय सड़कों पर ही सोए किसान - तस्वीरें
भारतीय किसान यूनियन के राकेश टिकैट अपने समर्थकों के साथ ग़ाज़ीपुर बॉर्डर पर धरना-प्रदर्शन पर बैठे हैं.
गुरुवार देर रात संवाददाताओं से बातचीत में राकेश टिकैट ने कहा है कि किसान अपने ट्रैक्टरों से वापस आएंगे. उन्होंने फिर दोहराया कि वो अपने समर्थकों के साथ ग़ाज़ीपुर बॉर्डर से हटने वाले नहीं है.
एक सवाल के जबाव में उन्होंने कहा कि दिल्ली पुलिस ने उन्हें जो नोटिस दिया है, उस नोटिस का जबाव दिया जाएगा.
इसके बाद से ही बॉर्डर पर किसानों का लौटना शुरू हो गया. गाज़ीपुर बॉर्डर पर कल की रात किसानों ने ट्रॉलियों के बजाय सड़क पर सोकर गुज़ारी.
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इमेज कैप्शन, शुक्रवार तड़के सुबह की तस्वीर
दिल्ली हिंसा में जिस नौजवान की मौत हुई थी, उसका अंतिम संस्कार हुआ
दिल्ली में ट्रैक्टर परेड में शामिल होने गए नौजवान नवरीत का अंतिम संस्कार कर दिया गया. वो उत्तर प्रदेश में रामपुर ज़िले के बिलासपुर के गांव डिबडिबा के रहने वाले थे.
दिल्ली के आईटीओ इलाक़े में उनकी मौत हो गई थी.
प्रदर्शनकारियों ने गोली लगने से मौत होने का आरोप लगाया था. लेकिन पुलिस का कहना है कि ट्रैक्टर पलटने से हुए हादसे में वो मारे गए.
इससे जुड़ी सीसीटीवी फ़ुटेज भी जारी की गई.
नवरीत हाल ही में ऑस्ट्रेलिया से आए थे और किसान आंदोलन में शामिल होने दिल्ली गए थे.
वीडियोः गुलज़ार, शहबाज़ अनवर, बीबीसी हिंदी के लिए
वीडियो कैप्शन, दिल्ली हिंसा में जिस नौजवान की मौत हुई थी, उसका अंतिम संस्कार हुआ
गाज़ीपुर बॉर्डर पर किसानों का लौटना शुरू
गुरुवार देर रात से ही
दिल्ली-मेरठ एक्सप्रेसवे पर बड़ी संख्या में किसान जुटना शुरू हो गए हैं.
बुधवार रात को यहां किसानों के कैंप की
बिजली काट दी गई थी और गाज़ीपुर बॉर्डर पर सुरक्षाबलों की तैनाती बढ़ा दी गई थी, जिससे
किसानों में नाराज़गी थी.
केंद्र सरकार के कृषि क़ानूनों का विरोध कर रहे किसान बीते साल के नवंबर माह के अंतिम सप्ताह से ही दिल्ली-उत्तर प्रदेश के गाज़ीपुर बॉर्डर पर
विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं. यहां मौजूद अधिकतर किसान भारतीय किसान यूनियन के सदस्य हैं जो अपने नेता राकेश
टिकैत के नेतृत्व में प्रदर्शन कर रहे हैं.
समाचार एजेंसी एएनआई के मुताबिक शुक्रवार आधी रात के बाद स्थिति का जायज़ा
लेने के लिए गाज़ियाबाद ज़िला मजिस्ट्रेट और वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक ने गाज़ीपुर में किसानों के प्रदर्शनस्थल का दौरा किया.
स्थानीय प्रशासन ने वहां धारा
144 लागू कर दी है और इसके तहत वहां पर लोगों के इकट्ठा होने पर पाबंदी है.
रात के करीब एक बजे तक किसान नेता राकेश
टिकैत अपने समर्थकों के साथ वहां मंच पर बैठे रहे.
इससे पहले मीडिया से बात करते हुए वो भावुक हो गए थे और कहा था कि वो प्रदर्शन स्थल से पीछे नहीं हटेंगे और
वे अपना अनशन शुरू कर रहे हैं.
टिकैत ने रोते हुए कहा कि अगर कृषि
क़ानून वापस नहीं हुए तो वह आत्महत्या कर लेंगे.
उन्होंने कहा कि जो किसान वापिस चले गए
हैं वो अपने ट्रैक्टरों
के साथ वापस आएंगे.
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इस बीच गाज़ीपुर
में पश्चिमी उत्तर प्रदेश के कई इलाकों से किसानों का आना लगातार जारी है.
गाज़ियाबाद
पुलिस के एक अधिकारी के हवाले से समाचार एजेंसी पीटीआई ने कहा है कि प्रदर्शनस्थल
से सुरक्षाबलों को हटाया जा रहा है और सीमित संख्या में ही वहां सुरक्षाबलों की
तैनाती की जाएगी.
उनका कहना था कि
गुरुवार को सुरक्षाबलों की तैनाती बढ़ाने के बाद से ही गाज़ीपुर सीमा पर तनाव
बढ़ाना शुरू हो गया था.
बीते दो महीनों से
दिल्ली की सीमाओं पर केंद्र के कृषि क़ानूनों का विरोध कर रहे किसानों का कहना है
कि ये क़ानून एमएसपी की व्यवस्था को खत्म कर कृषि के क्षेत्र में बड़ी कंपनियों के
प्रवेश का रास्ता साफ करेंगे.
हालांकि सरकार का कहना है कि ये क़ानून अच्छे दाम पर
अपनी फसल बेचने के लिए किसानों के लिए बेहतर मौक़े बनाएगी.
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यूपी सरकार ने दिया किसान आंदोलन ख़त्म कराने का आदेश
उत्तर प्रदेश सरकार ने सभी ज़िलाधिकारियों और पुलिस अधीक्षकों को राज्य में अलग-अलग जगहों पर चल रहे किसान-आंदोलन को समाप्त कराने का आदेश दिया है.
न्यूज़ एजेंसी एएनआई ने यह ख़बर सरकारी अधिकारियों के हवाले से दी है. आधिकारिक सूत्रों के हवाले से एजेंसी ने ख़बर दी है कि 28 जनवरी गुरुवार को गाज़ियाबाद ज़िला प्रशासन ने एक आदेश जारी कर कहा था कि जो भी लोग गाज़ीपुर सीमा पर बिना अनुमति के बैठे हुए हैं और प्रदर्शन कर रहे हैं वे शाम तक उस जगह को खाली कर दें.
गाज़ीपुर उन कई सीमाओं में से एक है जहां किसान और कामगार नए कृषि क़ानून के विरोध में प्रदर्शन कर रहे हैं.
यह आदेश 26 जनवरी को राजधानी दिल्ली में किसानों की ट्रैक्टर रैली के दौरान भड़की हिंसा के बाद जारी किया गया है. 26 जनवरी को भड़की इस हिंसा में क़रीब 400 पुलिसकर्मी घायल हुए हैं और सार्वजनिक संपत्ति को भी नुकसान हुआ है.
बीबीसी संवाददाता दिलनवाज़ पाशा ने इस आदेश की पुष्टि के लिए जब गाज़ियाबाद के आला अधिकारी से बात की तो उनका कहना था कि ऐसा कोई लिखित आदेश जारी नहीं किया गया है, यह मौखिक तौर पर है.
नमस्कार! ये बीबीसी हिंदी का लाइव पन्ना
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