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सिंघु बॉर्डर से LIVE: अभी क्या है माहौल?
ब्रेकिंग न्यूज़, मैं किसानों से कहना चाहूंगा कि आप एक इंच पीछे मत हटिए: राहुल गांधी
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कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने शुक्रवार को प्रेस
कॉन्फ़्रेंस करते हुए किसान आंदोलन पर अपनी बात रखी.
उन्होंने कहा, “प्रधानमंत्री पांच लोगों के लिए काम करते हैं. उनके लिए नोटबंदी की, जीएसटी लाए. किसान बिल लाए. मैं किसानों से कहना चाहूंगा कि आप एक इंच पीछे मत हटिए. हम आपके साथ हैं. आपका जो भविष्य चोरी करना चाह रहे हैं, आप वो मत करने दीजिए.”
उन्होंने कहा, “ये जो तीन क़ानून है इन्हें समझने की ज़रूरत है. पहला क़ानून मंडी को ख़त्म कर देगा. दूसरा क़ानून देश के गिने-चुने बड़े व्यापारियों को लाखों टन अनाज जमा करने की इजाज़त देगा. तीसरा क़ानून किसानों को कोर्ट जाने से रोकने वाला है.”
उन्होंने कहा कि जिस तरह से सरकार किसानों के साथ पेश आ रही
है ये पूरी तरह से एक आपराधिक कार्य है, वो उन्हें पीट रही है, धमका रही है. सरकार
को ये तीन क़ानून रद्द करने चाहिए.
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राहुल गांधी ने कहा कि किसानों से सरकार को बात करनी चाहिए, समाधान
निकालना चाहिए, सरकार को ये नहीं सोचना चाहिए कि किसान घर जा रहे हैं.
उन्होंने कहा, “मेरी
चिंता ये है कि ये हालात और बिगड़ेंगे.”
राहुल गांधी ने कहा, ''लालक़िले
के अंदर जो लोग गए, उसके लिए कौन ज़िम्मेदार है? गृह
मंत्री से जाकर पूछिए.''
उन्होंने कहा, "ये
आंदोलन रुकेगा नहीं. यह आंदोलन गांव से शहरों की ओर जाएगा अब. मैं प्रधानमंत्री से
कहता चाहता हूँ कि वो बात कर के समाधान निकालें, नहीं तो देश को नुक़सान होगा.यह
आंदोलन बाकी प्रदेशों में भी जाएगा. आप इसे दबा नहीं सकते."
उन्होंने सवालिया लहजे में कहा,
"आपके घर में चोर घुसेगा तो क्या आप नहीं बोलेंगे. किसान
क्या चुप रहेंगे. ये चोरी सिर्फ़ किसानों के साथ नहीं हो रही है बल्कि मज़दूरों और
छोटे व्यापारियों के साथ भी हो रही है."
उन्होंने कृषि क़ानूनों को चोरी बताते हुए कहा कि ये जो हो
रहा है, ये चोरी है और कुछ नहीं. हम भी इस बात पर सहमत हैं कि कृषि क्षेत्र में
सुधार की आवश्यकता है लेकिन ज़बरदस्ती नहीं.
सिंघु बॉर्डर पर हिंसक झड़प, आंसू गैस के गोले और लाठीचार्ज
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सिंघु और टिकरी बॉर्डर पर स्थिति तनावपूर्ण, भारी पुलिस बल तैनात
सिंघु बॉर्डर पर किसान प्रदर्शनकारियों और कथित स्थानीय
लोगों के बीच हिंसक झड़प के बाद टिकरी बॉर्डर पर भी स्थिति तनावपूर्ण बन गई है.
टिकरी बॉर्डर पर मौजूद बीबीसी संवाददाता दलीप कुमार सिंह
ने बताया है कि वहां पर भी सिंघु बॉर्डर की तरह कथित स्थानीय लोग इकट्ठा हैं और वे
नारा लगा रहे हैं ‘तिरंगे का अपमान नहीं सहेगा हिंदुस्तान.’
दलीप ने बताया कि स्थानीय लोगों का कहना है कि इन
प्रदर्शनों के कारण उनका कामकाज ठप्प पड़ा है और अब वे इन प्रदर्शनों को चलने नहीं
देंगे.
वहीं, सिंघु बॉर्डर पर मौजूद बीबीसी संवाददाता अरविंद
छाबड़ा ने बताया है कि वहां पर भी तनावपूर्ण
स्थिति बनी हुई है और पुलिसकर्मी काफ़ी मुस्तैद हैं. हालांकि, वहां पर कुछ लोग और
पुलिसकर्मी घायल हुए हैं.
सिंघु बॉर्डर पर 'स्थानीय लोगों' ने किया विरोध प्रदर्शन
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सिंघु बॉर्डर पर किसान प्रदर्शनकारियों और कथित स्थानीय लोगों के बीच पत्थरबाज़ी से पहले उन्होंने विरोध प्रदर्शन भी किया था और प्रदर्शनकारियों को हटाने की मांग की थी.
प्रदर्शन के दौरान पत्थरबाज़ी हुई जिसके बाद सुरक्षाबलों को आंसू गैस और लाठीचार्ज का सहारा लेना पड़ा था. एएनआई ने लोगों के विरोध प्रदर्शन का वीडियो भी जारी किया है.
मुद्दे नहीं सुलझे तो आंदोलन चलता रहेगा- नरेश टिकैत
मुज़फ़फ़रनगर में हो रही महापंचायत में पहुंचे किसान नेता नरेश
टिकैत ने गाज़ीपुर में हुए घटनाक्रम का ज़िक्र किया और कहा कि, "रात-रात में इतनी बातचीत हो गई, किसानों से सम्मान को ठेस पहुंचाई
गई, ऐसे में इस तरह की महापंचायत होनी थी."
उन्होंने समाचार एजेंसी एएनआई से कहा कि "ये सरकार की हठधर्मिता
है, जिस मुद्दे पर सरकार के साथ बातचीत चल रही है वो नहीं सुलझा तो आंदोलन चलता
रहेगा."
ब्रेकिंग न्यूज़, सिंघु बॉर्डर पर इस समय क्या है स्थिति ?
सिंघु बॉर्डर पर मौजूद बीबीसी संवाददाता अरविंद छाबड़ा ने बताया कि कुछ पुलिसवालों को चोट लगी हुई हैं.
पुलिसवाले सुरक्षा के मद्देनज़र मीडिया को पीछे हटने के लिए कह रहे हैं. धरने पर बैठे प्रदर्शनकारी सतनाम वाहेगुरू जप रहे हैं.
कुछ प्रदर्शनकारियों का कहना है, ''हम तो शांति से प्रदर्शन कर रहे थे पर कुछ लोग आकर पत्थरबाज़ी करने लगे.''
प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि ये सब बीजेपी और केंद्र सरकार करवा कर रही है.
सिंघु बॉर्डर पर मीडिया ने पुलिसवालों से ये सवाल किया कि पुलिस की मौजूदगी में ये हमला कैसे हुआ?
बीबीसी संवाददाता अरविंद छाबड़ा के मुताबिक़, पुलिस ने इस सवाल का जवाब नहीं दिया है. पुलिस अधिकारी ये कहते नज़र आए कि हम जाकर पता कर रहे हैं.
सिंघु बॉर्डर से LIVE: इस वक़्त कैसा है माहौल? ज़्यादा जानकारी के साथ बीबीसी के अरविंद छाबड़ा
ब्रेकिंग न्यूज़, सिंघु बॉर्डर पर स्थिति तनावपूर्ण, पुलिस ने दागे आंसू गैस के गोले
दिल्ली-हरियाणा के सिंघु बॉर्डर पर जहां किसानों का धरना
प्रदर्शन जारी है वहां बड़ी संख्या में स्थानीय लोगों के पहुंचने के बाद स्थिति तनावपूर्ण
हो गई है.
समाचार एजेंसी एएनआई के अनुसार, यहां पुलिस ने आंसू गैस के
गोले दागे हैं.
बीबीसी संवाददाता अरविंद छाबड़ा ने बताया है कि उन्हें किसानों ने कहा है कि पुलिसकर्मियों ने उनसे कहा है कि उन्हें ये जगह खाली करनी होगी.
वहीं प्रदर्शनकारी किसानों का कहना है कि वो ये जगह छोड़ कर जाना नहीं चाहते और आंदोलन जारी रखेंगे.
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राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने किसानों के प्रदर्शन और 26 जनवरी की हिंसा पर क्या कहा?
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संसद में बजट सत्र शुरू होने के पहले दिन राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद का अभिभाषण हुआ. उन्होंने कृषि क़ानून को लेकर हो रहे प्रदर्शन, 26 जनवरी को हुई घटना और सरकार की उपलब्धियों पर विचार रखे. राष्ट्रपति ने कहा कृषि क़ानूनों को फिलहाल सुप्रीम कोर्ट ने स्थगित किया है और...
सरकार कोर्ट के फ़ैसले का सम्मान करेगी. उन्होंने कहा कि 26 जनवरी को दिल्ली में जो कुछ हुआ वो दुर्भाग्यपूर्ण था.
पुलिस का दावा- किसानों के संपर्क में
उत्तर प्रदेश के एडीजी (लॉ एंड ऑर्डर) प्रशांत कुमार के मुताबिक़, पुलिस प्रशासन लगातार किसानों के संपर्क में है.
उन्होंने कहा, "गाज़ीपुर बॉर्डर पर कल और आज सुरक्षा व्यवस्था इसलिए बढ़ाई गई ताकि इस दौरान ऐसे लोग न घुस जाएं जिससे वहां हिंसा फैले. आज पूरे उत्तर प्रदेश में शांति व्यवस्था बनी है और किसानों से लगातार बातचीत चल रही है."
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उन्होंने कहा, "कुछ लोगों ने आधारहीन आशंका ज़ाहिर की और इसे फैलाया भी. हम शुरू से कह रहे हैं कि हम केवल बातचीत के माध्यम से समाधान तलाशेंगे."
उन्होंने दावा किया, "हम सभी को यह भरोसा दिलाना चाहते हैं कि उन्हें विश्वास में लेने के बाद ही अगला क़दम उठाया जाएगा. गाज़ीपुर बॉर्डर पर शांति बनाए रखने के लिए तैनात किये गए सुरक्षा बल और किसानों के बीच बातचीत चल रही है."
"कुछ किसानों ने अपना विरोध वापस ले लिया है. पुलिस कुछ भी ऐसा नहीं करेगी जो क़ानून के दायरे में ना हो. हम सबकुछ बातचीत से कर रहे हैं."
मुजफ्फरनगर के एडीएम ने भी प्रदर्शन कर रहे किसानों के संपर्क में होने की बात कही.
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सबसे कम भ्रष्टाचार कहां है?
भ्रष्टाचार की अवधारणा से जुड़ी ट्रांसपरेंसी इंटरनेशनल की 180 देशों की सूची में भारत 80वें स्थान से छह पायदान लुढककर 86वें स्थान पर आ गया है.
हालांकि इस रिपोर्ट के अनुसार भारत में अपने पड़ोसी देश पाकिस्तान से कम भ्रष्टाचार है.
ट्रांसपरेंसी इंटरनेशनल ने पाकिस्तान को 124वीं रैंकिंग दी है. इस सूची में नेपाल 117, बांग्लादेश 146 और श्रीलंका को 94वीं रैंकिंग दी गई है.
न्यूज़ीलैंड और डेनमार्क इस मामले में अव्वल हैं जहां ट्रांसपरेंसी इंटरनेशनल के मुताबिक़ भ्रष्टाचार बहुत कम है.
इसके बाद फिनलैंड, स्विट्ज़रलैंड, स्वीडन और सिंगापुर वो देश हैं जहां भ्रष्टाचार पर काफी हद तक अंकुश है.
इस सूची में सबसे भ्रष्ट देश के तौर पर सोमालिया और दक्षिण सूडान सबसे नीचे हैं.
शून्य से 100 अंकों वाले इस पैमाने में 0 का मतलब सबसे अधिक भ्रष्टाचार है, जबकि 100 अंक का मतलब है भ्रष्टाचार का नामो-निशान तक नहीं है.
इस हिसाब से ट्रांसपरेंसी इंटरनेशनल के मुताबिक़ कोई देश ऐसा नहीं है जहां ज़रा भी भ्रष्टाचार नहीं है, क्योंकि ट्रांसपरेंसी इंटरनेशनल ने किसी भी देश को 100 स्कोर नहीं दिया है.
ग़ाज़ीपुर बॉर्डर पर राकेश टिकैत रोने क्यों लगे थे?
ग़ाज़ियाबाद से दिल्ली आने वाली सड़क को गुरुवार शाम को बंद कर दिया गया. हालांकि, वहां पर भारतीय किसान यूनियन के नेता राकेश टिकैत का धरना जारी रहा.
उन्होंने देर शाम प्रदर्शनकारियों को संबोधित करते हुए कहा था कि यहां पर कोई गिरफ़्तारी नहीं होगी और प्रदर्शन जारी रहेगा.
उन्होंने आरोप लगाए कि कुछ बीजेपी नेता पहले से इकट्ठा हैं जो प्रदर्शनकारी किसानों पर गोली चला सकते हैं और इसके लिए पुलिस प्रशासन ज़िम्मेदार होगा.
भारतीय किसान यूनियन के नेता राकेश टिकैत ने रोते हुए कहा कि अगर कृषि क़ानून वापस नहीं हुए तो वह आत्महत्या कर लेंगे.
उन्होंने कहा कि वे प्रदर्शन स्थल से पीछे नहीं हटेंगे और वे अपना अनशन शुरू कर रहे हैं.
उन्होंने कहा था कि वे ग़ाज़ियाबाद का पानी नहीं पिएंगे और अपने गांव से पानी आने के बाद ही उसे पिएंगे.
ये लड़ाई अनाज को तिजोरी में बंद नहीं होने देने की है- राकेश टिकैत
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गाज़ीपुर बॉर्डर पर विरोध प्रदर्शन पर बैठे किसान नेता राकेश टिकैत ने कहा कि ये लड़ाई अनाज को तिजोरी में बंद नहीं होने देने की है और ये आम आदमी की लड़ाई है.
उन्होंने कहा कि कॉर्पोरेट चाहता है कि अनाज को तिजोरी में बंद किया जाए लेकिन इसका विरोध होना चाहिए.
उन्होंने कहा, "जब हमारी लड़ाई ख़त्म हो जाएगी तो हम पूरे सम्मान के साथ यहां से चले जाएंगे. किसानों पर ईंट नहीं फूल बरसाए जाएंगे, जब वो हो जाएगा हम यहां से चले जाएंगे."
"हमारे मुद्दे हैं- तीनों कृषि क़ानूनों पर, एमएसपी और दूसरे मुद्दों पर सरकार हमसे बात करें."
उन्होंने प्रशासन से अपील की कि वो किसानों के प्रदर्शन स्थल के लिए सुविधाएं चालू करें.
उन्होंने कहा "हमारी लड़ाई सरकार के साथ है यहां के स्थानीय प्रशासन के साथ नहीं. स्थानीय प्रशासन ने हमारा बहुत साथ दिया."
"हमें सरकार पर कोई भरोसा नहीं है. लेकिन किसानों को गद्दार कहा जा रहा है.
यहां का पानी काटा गया है, यहां कि बिजली काटी गई है. इसके बाद हमने कहा है कि गांव से पानी आएगा और तभी हम पानी पिएंगे."
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वहीं किसानों के लिए की गई व्यवस्था का जायज़ा लेने के लिए गाज़ीपुर पहुंचे दिल्ली के उप-मुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया ने कहा कि "मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल के कहने पर मैं यहां आया हूं. मैं यहां पानी की व्यवस्था और दूसरी व्यवस्था देखने के लिए आया हूं."
उन्होंने कहा, "दिल्ली की आम आदमी पार्टी किसानों की मांगों का समर्थन करती है और किसानों की कोई और ज़रूरत है तो किसान हमें बता सकते हैं."
"दिल्ली में बैठे हम रोटी तभी खाते हैं जब किसान खेतों में काम करता है. इंटरनेट से पेट नहीं भरता न ही तीनों क़ानूनों से, रोटी पहुंच से बाहर हो गई तो पेट कैसे भरेगा."
"चंद पूंजीपतियों के दवाब में देश के किसानों को गद्दार कहा जा रहा है. किसान की पगड़ी उछालने की कोशिश की जा रही है. किसानों की मांगों का हम समर्थन करते हैं."
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वहीं दिल्ली सरकार के कुछ मंत्री दूसरे प्रदर्शन स्थल, सिंघु बॉर्डर पर भी पहुंचे.
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ब्रेकिंग न्यूज़, कोरोना से होने वाली मौतों के मामले में भारत से आगे निकला मेक्सिको
कोरोना वायरस के कारण होने वाली मौतों के मामले में मेक्सिको
ने भारत को पीछे छोड़ दिया है.
अमेरिका और ब्राज़ील के बाद अब मेक्सिको कोरोना से
होने वाली मौतों की लिस्ट में तीसरे पायदान पर आ चुका है.
जॉन्स हॉप्किन्स यूनिवर्सिटी के डैशबोर्ड के अनुसार, अब तक
दुनिया में कोरोना के कारण कुल 21,91,078 मौतें हो चुकी
हैं जिनमें से अधिकांश 4,33,067 मौतें अकेले अमेरिका में हुई हैं.
ब्राज़ील में कोरोना से 2,21,547 और मेक्सिको में अब
तक इससे 1,55,145 मौतें हुई हैं.
भारत में अब तक कोरोना से 1,54,010 मौतें हुई हैं.
दिल्ली के उप-मुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया गाज़ीपुर बॉर्डर पहुंचे
दिल्ली के उप-मुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया गाज़ीपुर बॉर्डर पर किसानों से मिलने प्रदर्शनस्थल पर पहुंचे.
उन्होंने कहा, "किसान नेताओं ने सीएम से पानी, बिजली और टॉयलेट्स की सुविधा के लिए निवेदन किया था. रात को ही यहां व्यवस्था कर दी गई थी. मैं निरीक्षण करने आया हूं कि कोई दिक्कत तो नहीं आ रही."
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ब्रेकिंग न्यूज़, अभिव्यक्ति की आजादी का अधिकार सही लेकिन क़ानून का पालन भी अहम - राष्ट्रपति राम नाथ कोविंद
संसद के बजट सत्र के शुरू होने के पहले दिन राष्ट्रपति राम
नाथ कोविंद ने अपने अभिभाषण में कृषि क़ानून को लेकर हो रहे प्रदर्शन, 26 जनवरी को हुई घटना और सरकार की उपलब्धियों पर विचार रखे.
राष्ट्रपति राम नाथ कोविंद ने कहा कि सरकार के पारित इन कृषि क़ानूनों को फिलहाल सुप्रीम कोर्ट ने स्थगित किया है और सरकार कोर्ट के फ़ैसले का सम्मान करेगी.
उन्होंने कहा कि सरकार शांतिपूर्ण आंदोलन का समर्थन करती है लेकिन 26 जनवरी को जो कुछ हुआ वो दुर्भाग्यपूर्ण था.
पिछले दिनों दिल्ली में हुई हिंसा पर उन्होंने कहा- "पिछले दिनों हुआ तिरंगे और गणतंत्र दिवस जैसे पवित्र दिन का अपमान बहुत दुर्भाग्यपूर्ण है. जो संविधान हमें अभिव्यक्ति की आजादी का अधिकार देता है, वही संविधान हमें सिखाता है कि कानून और नियम का भी उतनी ही गंभीरता से पालन करना चाहिए."
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राष्ट्रपति राम नाथ कोविंद ने कहा कि "मेरी सरकार यह स्पष्ट करना चाहती है कि तीन नए कृषि क़ानून बनने से पहले, पुरानी व्यवस्थाओं के तहत जो अधिकार थे और जो सुविधाएं थीं, उनमें कहीं कोई कमी नहीं की गई है. बल्कि इन कृषि सुधारों के जरिए सरकार ने किसानों को नई सुविधाएं उपलब्ध कराने के साथ-साथ नए अधिकार भी दिए हैं."
"व्यापक विमर्श के बाद संसद ने सात महीने पूर्व तीन महत्वपूर्ण कृषि सुधार, कृषक उपज व्यापार और वाणिज्य (संवर्धन और सरलीकरण) विधेयक, कृषि (सशक्तीकरण और संरक्षण) कीमत आश्वासन और कृषि सेवा करार विधेयक, और आवश्यक वस्तु संशोधन विधेयक पारित किए हैं."
राष्ट्रपति ने कहा- इन कृषि सुधारों का सबसे बड़ा लाभ भी 10 करोड़ से अधिक छोटे किसानों को तुरंत मिलना शुरू हुआ. छोटे किसानों को होने वाले इन लाभों को समझते हुए ही अनेक राजनीतिक दलों ने समय-समय पर इन सुधारों को अपना भरपूर समर्थन दिया था.
कोरोना वायरस टीकाकरण का ज़िक्र करते हुए राष्ट्रपति ने कहा कि "हमारे लिए गर्व की बात है कि आज भारत दुनिया का सबसे बड़ा टीकाकरण अभियान चला रहा है. इस प्रोग्राम की दोनों वैक्सीन भारत में ही निर्मित हैं. भारत ने मानवता के प्रति अपने दायित्व का निर्वाह किया है और अनेक देशों को कोरोना वैक्सीन दी है."
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उन्होंने अपने अभिभाषण में बारत चीन सीमा विवाद का ज़िक्र किया और कहा कि जून 2020 में हमारे 20 जवानों ने गलवान घाटी में शहीद हुए,
उन्होंने कहा, "मेरी सरकार, देश के हितों की रक्षा के लिए पूरी तरह कटिबद्ध है और सतर्क भी है. लाइन ऑफ़ एक्चुअल कंट्रोल पर भारत की संप्रभुता की रक्षा के लिए अतिरिक्त सैन्यबलों की तैनाती भी की गई है."
बजट सेशन के लिए संसद भवन पहुंचे प्रधानमंत्री मोदी
देश का बजट एक फरवरी को पेश होगा, जिससे पहले आज संसद का बजट सत्र शुरू होने वाला है.
संसद भवन पहुंचे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा - "इस दशक का आज पहला सत्र प्रारंभ हो रहा है, भारत के उज्जवल भविष्य के लिए ये दशक बहुत ही महत्वपूर्ण है. आज़ादी के दिवानों ने जो सपने देखे थे उन्हें सिद्ध करने का स्वर्णिम अवसर अब देश के पास आया है."
संसद के बजट अधिवेशन से पहले मोदी ने कहा बीते साल हुए घटनाक्रम के कारण 2020 में वित्त मंत्री को बार-बार मिनी बजट पेश करना पड़ा.
उन्होंने कहा, “2020 में मिनी बजट का सिलसिला चलता रहा. इसलिए ये बजट भी उसी चार-पांच बजट की श्रृंखला में देखा जाएगा मुझे ऐसी उम्मीद है.“
इधर केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह भी संसद भवन पहुंच चुके हैं.
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वहीं दूसरी ओर 18 राजनीतिक पार्टियों ने कहा है कि वे बजट सेशन के पहले दिन होने वाले राष्ट्रपति के अभिभाषण का बहिष्कार करेंगी.
कांग्रेस समेत कई दल राष्ट्रपति के अभिभाषण का बहिष्कार कर रही हैं.
केंद्रीय संसदीय कार्य राज्य मंत्री ने कहा, ऐसा होना दुर्भाग्यपूर्ण है.
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केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह ने भी विपक्ष पर हमला करते हुए कहा- विपक्ष लोकतंत्र की गरिमा को तार-तार कर रहा है.
उन्होंने कहा "संसदीय व्यवस्था में राष्ट्रपति की एक गरिमा है. राष्ट्रपति के अभिभाषण का बहिष्कार करना है यानी राष्ट्रपति का अपमान है."
ब्रेकिंग न्यूज़, किसान नेता राकेश टिकैत बोले, आंदोलन ख़त्म नहीं होगा
भारतीय किसान यूनियन के नेता राकेश टिकैत ने शुक्रवार सुबह पत्रकारों से बातचीत में कहा कि "हम प्रदर्शन स्थल से नहीं जाएंगे. हम भारत सरकार से हमारे मुद्दों पर बात करेंगे."
उन्होंने लोगों से शांति बनाये रखने की अपील की.
उन्होंने कहा कि "आंदोलन ख़त्म नहीं होगा. आज महापंचायत होगी. अगर क्राइम ब्रांच हमें आने को कहती है तो हम जाएंगे."
शुक्रवार सुबह पत्रकारों से मुख़ातिब हुए किसान नेता राकेश टिकैत ने कहा कि यह किसानों का आंदोलन है और इसे कोई नेता नहीं चलाएगा. यह किसानों का आंदोलन है और वही इसे चलाएंगे.
उन्होंने कहा, "कुछ किसान संगठनों के पीछे हटने के सवाल के जवाब में राकेश टिकैत ने कहा कि कुछ लोग होते हैं जो बीच में चले जाते हैं लेकिन इस आंदोलन को कोई नेता नहीं किसान चलाएगा. किसान है किसान चलाएगा. कोई व्यक्ति या संगठन नहीं."
बीते गुरुवार अपने भावुक हो जाने के सवाल पर राकेश टिकैत ने कहा कि "वे हम पर लाठी चलाते कोई दिक़्क़त नहीं लेकिन अगर कोई राजनीतिक दल पुलिस के साथ मिलकर, विधायकों के साथ मिलकर,अपने चुनावी प्रतिनिधि और अपने समर्थकों के साथ मिलकर किसानों पर आरोप लगाए तो ऐसा नहीं होगा. किसानों पर लाठी चलाएं, उन्हें आतंकवादी कहें और किसान पर ऐसे आरोप लगाकर उन्हें यहां से भगाएं तो ऐसा नहीं होगा."
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वहीं गाज़ीपुर बॉर्डर पर अभी बड़ी संख्या में किसान मौजूद हैं.
आज सुबह आरएलडी नेता जयंत चौधरी ने किसान नेता राकेश टिकैत से मुलाकात की और किसानों के प्रदर्शन को अपना समर्थन दिया.
उन्होंने कहा कि सरकार को किसानों का भरोसा जीतना होगा.
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वहीं सिंघु बॉर्डर पर भी किसानों ने वापस जाने से इनकार कर दिया है.
किसान नेता और सिंघु बॉर्डर पर मौजूद किसान मज़दूर संघर्ष समिति के अध्यक्ष सतनाम सिंह पन्नू ने कहा - "सरकार जो भी करे हम सिंघु बॉर्डर नहीं छोड़ेंगे. जब तक क़ानून रद्द नहीं हो जाते और एमएसपी पर नया क़ानून नहीं बन जाता हम यहां से नहीं जाएंगे."
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