गणतंत्र दिवस के मौके पर देश की राज़धानी दिल्ली में आईटीओ,
यमुना ब्रिज जैसी जगहों पर सुरक्षा व्यवस्था बढ़ा दी गई है. यहां भारी पुलिस बल की
तैनाती के साथ ही जगह-जगह पर बैरिकेड लगाए
गए हैं.
इस बार दिल्ली के चप्पे-चप्पे पर बढ़ाई गई सुरक्षा व्यवस्था
का सबसे बड़ा कारण किसानों की ट्रैक्टर रैली है. आज गणतंत्र दिवस की परेड के बाद
किसान तीन विवादित कृषि कानूनों के विरोध में ट्रैक्टर रैली निकालेंगे.
समाचार एजेंसी पीटीआई
के मुताबिक़ सोमवार को तय ट्रैक्टर रैली से पहले ही किसान संगठनों ने ऐलान किया है
कि जब 1 फ़रवरी को देश का बजट पेश होगा तो
अलग-अलग इलाकों से बढ़कर किसान संसद की ओर मार्च निकालेंगे.
कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के बीच किसानों की रैली गणतंत्र दिवस परेड के बाद निकलेगी क्योंकि पुलिस ने ये साफ़ किया है कि रिंग रोड पर होने वाली
गणतंत्र दिवस की परेड के बाद ही किसान रैली निकाल सकेंगे.
इस बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देशवासियों को गणतंत्र दिवस की बधाई दी है.
मंगलवार के लिए पुलिस ने ट्रैफ़िक गाइडलाइन भी जारी की है.
इसमें नेशनल हाइवे 44, सिंघु और टिकरी बॉर्डर जैसे रास्ते लोगों को ना जाने की
सलाह दी गई है. साथ ही गाज़ीपुर बॉर्डर, नेशनल हाइवे 24 पर भी लोगों को यातायात की
समस्या हो सकती है ऐसे में इस रास्ते पर भी ना जाने की सलाह दी गई है.
दिल्ली की सीमा पर दो महीने से कृषि कानून के विरोध में
प्रदर्शन कर रहे किसानों के समर्थन में मुंबई के आज़ाद मैदान में हज़ारों की तादाद
में किसान इकट्ठा हुए हैं.
किसान संगठनों और केंद्र सरकार के बीच इस कानून पर चर्चा के
लिए 11 दौर की बैठक हो चुकी है लेकिन अभी भी किसान
और सरकार दोनों ही पक्ष कानून पर पीछे हटते नज़र नहीं आ रहे.
किसानों का मानना है कि ये तीनों ही कानून किसान विरोधी है
और सरकार को इसे वापस ले लेना चाहिए. वहीं दूसरी ओर सरकार इस कानून को किसानों की
भलाई वाला बता रही है और वापस लेने को तैयार नहीं है.
इस मामले में सुप्रीम कोर्ट ने भी दख़ल दिया है और एक समिति
का गठन किया है जो दोनों पक्षों से बात कर अपनी रिपोर्ट कोर्ट में पेश करेगी.