You’re viewing a text-only version of this website that uses less data. View the main version of the website including all images and videos.

Take me to the main website

कोरोना महामारी से दुनिया भर में मरने वालों की तादाद 20 लाख के पार

जॉन्स हॉपकिन्स यूनिवर्सिटी के ताज़ा आंकड़ों के अनुसार दुनिया भर में कोरोना से 20 लाख से ज़्यादा लोगों की मौत हो चुकी है. सबसे ज़्यादा अमेरिका में तीन लाख 90 हज़ार मौतें हुईं हैं.

लाइव कवरेज

  1. चीन की कोरोना वायरस वैक्सीन के बारे में कितना जानते हैं हम ?

  2. दिल्ली: मध्य प्रदेश सरकार के प्रस्ताव के ख़िलाफ़ प्रदर्शन कर रहीं महिलाएं पुलिस हिरासत में

    नई दिल्ली स्थित ‘मध्य प्रदेश भवन’ के बाहर प्रदर्शन कर रहीं 30 से ज़्यादा महिलाओं को दिल्ली पुलिस ने हिरासत में ले लिया है.

    ये महिलाएं मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के एक प्रस्ताव के ख़िलाफ़ प्रदर्शन कर रही थीं, जिन्होंने कहा है कि ‘एक नयी व्यवस्था लायी जाएगी जिसके तहत काम के लिए अपने घर से बाहर जाने वाली किसी भी महिला को ख़ुद को स्थानीय पुलिस थाने में रजिस्टर कराना होगा और उसकी सुरक्षा के लिए उसे ट्रैक किया जाएगा. एक हेल्पलाइन नंबर दिया जाएगा और सार्वजनिक परिवहन की गाड़ियों में पैनिक बटन लगाया जाएगा.’

    लेकिन महिलाओं के कुछ समूह इसे ‘सिक्योरिटी’ नहीं, बल्कि ‘सर्विलांस’ बता रहे हैं. उनका कहना है कि ‘सरकार लड़कियों के ख़िलाफ़ अपराध रोकने के लिए लड़कों की ट्रैकिंग क्यों नहीं करती?’

    सोशल मीडिया पर पहले ही शिवराज सिंह चौहान के इस प्रस्ताव की काफ़ी आलोचना हो चुकी है.

    शुक्रवार को दिल्ली में महिलाओं के एक समूह ने इस प्रस्ताव के ख़िलाफ़ प्रदर्शन किया जिसे दिल्ली पुलिस ने हटा दिया.

    बताया गया है कि पुलिस ने जिन महिलाओं को हिरासत में लिया है, उनमें सामाजिक कार्यकर्ता शबनम हाशमी, अंजलि भारद्वाज और पूनम कौशिक शामिल हैं.

  3. पाकिस्तान का विमान मलेशिया में किया गया ज़ब्त, विमान की किस्त से जुड़ा है मामला

    पाकिस्तान इंटरनेशनल एयरलाइंस (पीआईए) के ‘बोइंग-777’ विमान को कुआलालंपुर हवाई अड्डे पर मलेशियाई प्रशासन ने कब्ज़े में ले लिया है.

    मलेशिया की एक स्थानीय अदालत के आदेश पर इस पाकिस्तानी विमान को कब्ज़े में लिया गया है.

    मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, पीआईए ने लीज़ की किस्तें अदा नहीं की थीं, जिसकी वजह से यह कार्रवाई की गई है.

    बताया गया है कि पीआईए ने साल 2015 में वियतनाम की एक कंपनी से इस बोइंग-777 विमान समेत दो विमान लीज़ पर लिये थे.

    पाकिस्तानी चैनल जियो टीवी ने सूत्रों के हवाले से अपनी रिपोर्ट में कहा है कि ‘यह विमान कराची से कुआलालंपुर गया था. लेकिन वापसी में जब यात्री इस विमान में सवार हुए, तो उसे उड़ान भरने की इजाज़त नहीं मिली. जिस वक़्त इस विमान को कब्ज़े में लिया गया, तब उसमें यात्री सवार थे. इस कार्रवाई के बाद 18 सदस्यीय चालक दल को भी कुआलालंपुर में ही रुकना पड़ा. कहा जा रहा है कि कोविड-19 के दिशा-निर्देशों के अनुसार, चालक दल के सभी सदस्यों को 14 दिनों के लिए कुआलालंपुर में ही क्वॉरंटीन में रहना होगा.’

    पीआईए ने अपने आधिकारिक ट्विटर हैंडल से ट्वीट कर इस घटना की पुष्टि की है.

    पीआईए ने कहा है कि ‘मलेशियाई अदालत ने बिल्कुल एकतरफ़ा निर्णय सुनाया है, जिसके आधार पर यह कार्रवाई की गई.’

    एक अन्य ट्वीट में पीआईए ने लिखा, “पीआईए और दूसरी पार्टी के बीच लंदन की एक अदालत में मामला लंबित है. यह एक क़ानूनी लड़ाई है जो अभी चल रही है. लेकिन मलेशियाई अदालत ने एकतरफ़ा निर्णय सुना दिया. यह स्थिति स्वीकार करने लायक नहीं है. पीआईए ने इस बारे में पाकिस्तान सरकार से बात की है और इस मामले को राजनयिक स्तर पर उठाने की माँग की है.”

    विमान कंपनी पीआईए ने यह भी कहा है कि कुआलालंपुर में फंसे अपने यात्रियों के लिए उसने ज़रूरी इंतज़ाम कर दिये हैं.

  4. IMF ने कृषि क़ानून की प्रशंसा की, पर आशंका भी जताई

    समाचार एजेंसी पीटीआई के अनुसार, इंटरनेशनल मॉनेटरी फंड यानी आईएमएफ़ ने कहा है कि 'मोदी सरकार ने जिन तीन नए कृषि क़ानूनों को पास किया है, वे कृषि सुधार के लिए अहम क़दम हैं.'

    हालाँकि आईएमएफ़ ने ये भी कहा है कि इस बदलाव के क्रम में जिन पर विपरीत प्रभाव पड़ने की आशंका है, उनके हितों की रक्षा के लिए पर्याप्त क़दम उठाए जाने चाहिए. पीटीआई ने अनुसार वैश्विक क़र्ज़दाता आईएमएफ़ के एक प्रवक्ता ने ये बात कही है. गेरी राइस आईएमएफ़ में संचार निदेशक हैं.

    उन्होंने कहा कि नए कृषि क़ानून से बिचौलियों की भूमिका कम होगी और चीज़ें पारदर्शी होंगी.

    गेरी राइस ने गुरुवार को वॉशिंगटन में एक प्रेस कॉन्फ़्रेंस के दौरान कहा, ''हमलोग का मानना है कि भारत में कृषि सुधार के लिए मोदी सरकार के तीन नए कृषि क़ानून काफ़ी अहम हैं. नए क़ानून के तहत किसान अपनी उपज ख़रीदारों से सीधे बेच सकते हैं. इससे बिचौलियों की भूमिका कम होगी और ग्रामीण विकास में तेज़ी आएगी.''

    गेरी राइस ने ये भी कहा कि नए सिस्टम के आने से जो बदलाव होंगे और उन बदलावों का जिन पर विपरीत प्रभाव पड़ने की आशंका है, उनके हितों की रक्षा के लिए पर्याप्त उपाय किए जाने चाहिए.

    राइस से भारत में चल रहे कृषि क़ानून के विरोध को लेकर सवाल पूछा गया था. राइस ने कहा, ''ज़ाहिर है कि इन सुधारों से होने वाले फ़ायदे इस बात पर निर्भर करते हैं कि इन्हें कितना प्रभावी तरीक़े से लागू किया गया है. ऐसे में हमें इस बात पर भी ध्यान देना चाहिए.''

    मोदी सरकार के तीन नए कृषि क़ानूनों का किसान संगठन पिछले 51 दिनों से दिल्ली की सीमाओं पर विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं.

    किसानों की चिंता है कि नए कृषि क़ानून से न्यूनतम समर्थन मूल्य की व्यवस्था अप्रासंगिक हो जाएगी और उन्हें अपनी उपज औने-पौने दाम पर बेचने होंगे.

    हालांकि सरकार आश्वासन दे रही है कि एमएसपी की व्यवस्था ख़त्म नहीं होगी.

  5. आज किसान नेताओं और सरकार की बैठक में बनेगी बात?

  6. किसान आंदोलन: 9वें दौर की वार्ता से पहले राकेश टिकैत ने कहा- 'कृषि क़ानून वापस लेने पड़ेंगे'

    केंद्र सरकार के साथ होने वाली 9वें चरण की वार्ता के लिए किसान नेता सिंघु बॉर्डर से विज्ञान भवन पहुँच चुके हैं.

    वार्ता से पहले भारतीय किसान यूनियन के राष्ट्रीय प्रवक्ता राकेश टिकैत ने कहा, "क़ानून संसद लेकर आई है और ये वहीं ख़त्म होंगे. क़ानून वापस लेने पड़ेंगे और एमएसपी पर क़ानून लाना पड़ेगा."

    वहीं केंद्रीय कृषि राज्य मंत्री कैलाश चौधरी ने कहा है कि "किसान यूनियन के नेता सुप्रीम कोर्ट से भी बड़े हो रहे हैं. मंत्री जी ने लगातार 8 दौर की वार्ता की, गृहमंत्री जी लगातार उनके संपर्क में हैं, प्रधानमंत्री जी ने भी आश्वासन दिया है, कोर्ट ने क़ानूनों पर रोक लगा दी है. यह उनकी ज़िद है, वो इसे छोड़ें."

    केंद्रीय कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने कहा है कि "भारत सरकार उच्चतम न्यायालय के फ़ैसले का स्वागत करती है और उच्चतम न्यायालय की बनाई समिति जब सरकार को बुलाएगी तो हम अपना पक्ष समिति के सामने रखेंगे. आज वार्ता की तारीख़ तय थी इसलिए किसानों के साथ हमारी वार्ता जारी है. हम लगातार कोशिश कर रहे हैं कि किसानों के साथ चर्चा के माध्यम से कोई रास्ता निकल आए. आज क़ानूनों पर चर्चा होगी."

    अब तक सरकार और किसानों के बीच आठ चरण की वार्ता हुई है जिसमें कोई नतीजा नहीं निकल पाया. किसान चाहते हैं कि तीनों कृषि क़ानून वापस लिये जायें.

    लेकिन केंद्र सरकार कोई बीच का रास्ता निकालने का प्रयास कर रही है. सरकार ने कृषि क़ानूनों में कुछ संशोधनों का प्रस्ताव किसान नेताओं के सामने रखा था, जिसपर किसान संगठन राज़ी नहीं हुए.

    उधर कृषि क़ानूनों के ख़िलाफ़ टिकरी और सिंघु बॉर्डर पर किसानों का विरोध-प्रदर्शन आज 51वें दिन भी जारी है.

    इस बीच भारतीय किसान यूनियन के नेता भूपिंदर सिंह मान ने सुप्रीम कोर्ट द्वारा बनायी गई कमेटी से अपने अलग होने की वजह भी बताई है.

    उनका कहना है, “आंदोलन और किसानों के हितों को देखते हुए मैं समझता हूँ कि कमेटी में जाने का कोई तुक नहीं है. जब किसानों ने कह दिया है कि हम कमेटी के सामने नहीं जायेंगे तो कमेटी का कोई तुक नहीं रह जाता, इसलिए मैंने कमेटी को छोड़ा है.”

    गुरुवार को पूर्व राज्यसभा सांसद भूपिंदर सिंह मान ने किसान आंदोलन को लेकर बनाई गई सुप्रीम कोर्ट की चार सदस्यीय कमेटी से ख़ुद को अलग करने की घोषणा की थी.

    उन्होंने यह भी कहा, "ख़ुद एक किसान होते हुए और किसान नेता होने के नाते, स्थिति और किसान संगठनों की चिंताओं के मद्देनज़र, मैं किसी भी पद की क़ुर्बानी के लिए तैयार हूँ ताकि पंजाब और देश के किसानों के हितों से कोई समझौता न हो. मैं खुद को कमेटी से अलग करता हूँ और मैं हमेशा किसानों और पंजाब के साथ खड़ा हूँ."

    भूपिंदर सिंह मान भारतीय किसान यूनियन से टूट कर बने संगठन बीकेयू (मान) के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं. वे ऑल इंडिया किसान कॉर्डिनेशन कमेटी के भी अध्यक्ष हैं.

    कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर को लिखी अपनी चिट्ठी में उन्होंने कृषि क़ानूनों का समर्थन किया था, लेकिन साथ ही कहा था कि इन्हें कुछ संशोधनों के बाद लाया जाये. एमएसपी को लेकर भी वे सरकार से लिखित में आश्वासन माँग रहे थे कि इसे ख़त्म नहीं किया जाएगा.

  7. जो बाइडन ने जिस पैकेज की घोषणा की वो भारतीय अर्थव्यवस्था के आकार के आधा से भी ज़्यादा

    अमेरिका के नव-निर्वाचित राष्ट्रपति जो बाइडन ने 1.9 ट्रिलियन डॉलर के प्रोत्साहन पैकेज की घोषणा की है. यह राशि भारत की पूरी अर्थव्यवस्था के आकार के आधा से भी ज़्यादा है.

    भारत की अर्थव्यवस्था क़रीब तीन ट्रिलियन डॉलर की है. इससे पहले भी अमेरिका कई ट्रिलियन डॉलर का कोविड पैकेज दे चुका है.

    बाइडन ने ये घोषणा अगले हफ़्ते सत्ता संभालने से पहले की है. यह प्रोत्साहन पैकेज कोविड-19 महामारी से अर्थव्यवस्था में आई सुस्ती से उबरने के लिए है.

    अगर अमेरिकी कांग्रेस की मंज़ूरी मिल जाती है तो एक ट्रिलियन डॉलर अमेरिकी परिवारों के लिए होगा जो सीधे सभी अमेरिकी नागरिकों को 1,400 डॉलर मिलेंगे.

    इस राहत पैकेज में 415 अरब डॉलर कोरोना वायरस से निपटने के लिए है और 440 डॉलर छोटे कारोबारों की मदद के लिए. डेमोक्रेटिक पार्टी के जो बाइडन ने वादा किया था कि वो कोरोना वायरस से जंग जीतेंगे, जिसने तीन लाख 85 हज़ार अमेरिकी नागरिकों की जान ले ली है.

    पिछले साल अपने चुनावी कैंपेन में बाइडन ने कहा था कि वो ट्रंप की तुलना में कोरोना महामारी से ज़्यादा असरदार तरीक़े से निपटेंगे. बाइडन राहत पैकेज लेकर तब आए हैं जब अमेरिका सर्दियों में कोरोना की चपेट में और बुरी तरह से है. हर दिन दो लाख से ज़्यादा नए मामले सामने आ रहे हैं और 4000 से ज़्यादा मौतें हो रही हैं.

    बाइडन ने क्या कहा?

    गुरुवार रात बाइडन ने अपने होम टाउन विलिम्गटन के डेलावर में कहा, ''यह साफ़ दिख रहा है कि मानवीय संकट गहरा है. हम और वक़्त बर्बाद नहीं कर सकते हैं. हमारे मुल्क की सेहत दांव पर लगी है. हमें करना है और अभी तत्काल. ठोकरें मिलेंगी लेकिन हम आपके प्रति ईमानदार रहेंगे.''

    कोरोना वायरस को लेकर क्या प्लान है?

    बाइडन चाहते हैं कि 20 अरब डॉलर अमेरिकी नागरिकों के कोविड टीकाकरण पर खर्च किया जाए. इसके तहत दूर-दराज़ इलाक़ों में वैक्सीन की मोबाइल यूनिट भेजने की योजना है.

    ट्रंप प्रशासन में दो प्रभावी वैक्सीन दी जा रही है लेकिन स्वास्थ्य अधिकारियों का कहना है कि इसमें और तेज़ी लाने की ज़रूरत है. बाइडन ने कहा कि उनकी सरकार 100 दिन में 10 करोड़ वैक्सीन की डिलिवरी करेगी.

    बाइडन की योजना में 50 अरब डॉलर कोरोना टेस्टिंग के विस्तार के लिए है और 130 अरब डॉलर स्कूलों को खुलवाने को लेकर. इसके अलवा एक लाख पब्लिक हेल्थ वर्कर की नियुक्ति की भी योजना है. इन्हें कॉन्टैक्ट ट्रेसिंग में लगाया जाएगा.

    बाइडन अर्थव्यवस्था के लिए क्या करने जा रहे?

    कोविड महामारी में 1.8 करोड़ अमेरिकी बेरोज़गार हुए हैं. बेरोज़गारी भत्ता की राशी प्रति हफ़्ते 300 डॉलर से बढ़ाकर 400 डॉलर करने की योजना है. इसे सितंबर तक बढ़ाया जा सकता है.

    इसमें किसी भी किराएदार से घर ख़ाली नहीं कराने की भी पाबंदी होगी. इस प्रस्ताव के तहत अमेरिकी नागरिकों को सीधे 1,400 डॉलर मिलेंगे. पिछले महीने 600 डॉलर दिए गए थे. इसके अलावा बाइडन कांग्रेस में फेडरल न्यूनतम वेतन प्रति घंटे 15 डॉलर करने का प्रस्ताव लाएंगे.

  8. गणतंत्र दिवस में इस बार दशकों बाद कोई नहीं होगा मुख्य अतिथि

    इस बार गणतंत्र दिवस के मौक़े पर कोई भी विदेशी मेहमान मुख्य अतिथि के तौर पर शामिल नहीं होगा. विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने गुरुवार को कहा कि इस बार किसी भी देश के प्रधानमंत्री या राष्ट्रपति को मुख्य अतिथि के तौर आमंत्रित नहीं किया गया है.

    साप्ताहिक प्रेस कॉन्फ़्रेंस को संबोधित करते हुए विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता अनुराग श्रीवास्तव ने कहा कि कोविड महामारी के कारण यह फ़ैसला लिया गया है. विदेश मंत्रालय ने यह घोषणा ब्रिटिश प्रधानमंत्री बोरिस जॉनसन के भारत दौर रद्द करने के बाद की है.

    इससे पहले बोरिस जॉनसन गणतंत्र दिवस की परेड पर मुख्य अतिथि के तौर पर शामिल होने वाले थे लेकिन उन्होंने अचानक से कोविड महामारी का हवाला देकर दौरा रद्द करने का फ़ैसला किया था.

    यह दशकों में पहली बार होगा जब भारत बिना कोई राष्ट्र प्रमुख को मुख्य अतिथि बनाए गणतंत्र दिवस की परेड संपन्न करेगा. इससे पहले 1966 में ऐसा हुआ था जब गणतंत्र दिवस की परेड में कोई मुख्य अतिथि नहीं था. तब प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री का ताशकंद में निधन हो गया था और भारत के परमाणु वैज्ञानिक होमी भाभा की प्लेन क्रैश में मौत हो गई थी.

    अगर 1952, 1953 और 1966 के गणतंत्र दिवस की परेड को छोड़ दें तो हर परेड में विदेशी राष्ट्राध्यक्ष मुख्य अतिथि के तौर पर शामिल हुए हैं.

    1950 में भारत के पहले गणतंत्र दिवस की परेड में इंडोनेशिया के तत्कालीन राष्ट्रपति सुकर्णो पहले मुख्य अतिथि बने थे. पिछले साल के गणतंत्र दिवस की परेड में ब्राज़ील के राष्ट्रपति जायल बोरल्सोनारो मुख्य अतिथि थे.

  9. अन्ना हजारे इस महीने के आख़िर से जीवन के आख़िरी अनशन पर बैठेंगे

    समाजसेवी अन्ना हजारे ने 14 जनवरी को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को एक पत्र लिखा है. इस पत्र में हजारे ने कहा है कि वे अपने जीवन की आख़िरी भूख हड़ताल दिल्ली में जनवरी महीने के आख़िर में किसानों के मुद्दे पर शुरू करने जा रहे हैं.

    अन्ना हजारे का यह पत्र तब सामने आया है जब दिल्ली की सीमाओं पर किसान संगठन मोदी सरकार के तीन नए कृषि क़ानून के ख़िलाफ़ पिछले 51 दिनों से धरने पर हैं.

    समाचार एजेंसी पीटीआई के अनुसार अन्ना हजारे ने पत्रकारों से कहा कि कृषि क़ानून में लोकतांत्रिक मूल्यों की उपेक्षा हुई है. उन्होंने कहा कि क़ानून बनाने में लोगों की भागीदारी अहम है. 83 साल के अन्ना हजारे ने कहा कि वो इस महीने के आख़िर से दिल्ली में किसानों के लिए भूख हड़ताल शुरू करेंगे.

    हालाँकि हजारे ने भूख हड़ताल शुरू करने की कोई तारीख़ नहीं दी है. इससे पहले 14 दिसंबर को अन्ना हज़ारे ने कृषि मंत्री नरेंद्र तोमर को एक पत्र लिखा था और चेतावनी दी थी कि अगर स्वामीनाथन कमिटी की सिफ़ारिशें और उनकी अन्य माँगें नहीं मानी गईं तो वो अनशन पर बैठ जाएंगे.

    हजारे ने पत्रकारों से कहा, ''मैंने किसानों के मुद्दे पर मोदी सरकार को पाँच पत्र भेजे लेकिन किसी का जवाब नहीं मिला. ऐसे में मैंने जीवन के आख़िरी अनशन पर जाने का फ़ैसला किया है.''

  10. नमस्कार!

    बीबीसी हिन्दी के इस लाइव पेज में आप सबका स्वागत है. हम यहाँ दिन भर देश-दुनिया की बड़ी और ज़रूरी ख़बरों के अपडेट्स से आपको अवगत कराएंगे. पिछले 24 घंटों के अपडेट्स के लिए यहाँ क्लिक करें.