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अमेरिकी संसद में कॉन्फ़िडरेट फ़्लैग के साथ घुसने वाला व्यक्ति गिरफ़्तार

अमेरिकी संसद पर हुए हमले के मामले में एफ़बीआई ने अब तक 70 लोगों पर मुक़दमा किया है और क़रीब 170 केस दर्ज किए गए हैं.

लाइव कवरेज

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  2. IND VS AUS: ब्रिसबेन में ऑस्ट्रेलिया की ख़राब शुरुआत

    ब्रिसबेन में खेले जा रहे चौथे और आख़िरी टेस्ट में ऑस्ट्रेलिया ने टॉस जीतकर पहले बल्लेबाज़ी करने का फ़ैसला किया है.

    लेकिन उनके इस फ़ैसले से ऑस्ट्रेलिया को शायद ज़्यादा ख़ुशी नहीं हुई होगी क्योंकि तेज़ गेंदबाज़ मोहम्मद सिराज ने अपने पहले ओवर में ही ओपनर डेविड वॉर्नर को पैवेलियन लौटा दिया.

    रोहित शर्मा ने वॉर्नर का कैच पकड़ा.

    उसके बाद शार्दुल ठाकुर ने मार्कस हैरिस को वाशिंगटन सुंदर के हाथों कैच आउट करवा दिया.

  3. कोरोना: फ़्रांस में और ज़्यादा सख़्त कर्फ़्यू की घोषणा

    फ़्रांस के प्रधानमंत्री जीन कैसटेक्स ने कहा है कि स्थानीय समयानुसार शनिवार शाम छह बजे से पूरे फ़्रांस में रात के कर्फ़्यू में बदलाव किया जाएगा.

    दिसंबर से ही फ़्रांस में रात का कर्फ़्यू जारी है लेकिन कोरोना के बढ़ते मामलों को देखते हुए इसमें और सख़्ती की जाएगी.

    अभी रात आठ बजे से सुबह छह बजे तक कर्फ़्यू लगता है लेकिन शनिवार से शाम छह बजे से कर्फ़्यू लागू कर दिया जाएगा. यह नया नियम कम से कम 15 दिनों तक लागू रहेगा.

    प्रधानमंत्री ने देश में कोरोना के हालात को चिंताजनक क़रार दिया.

    पीएम ने विदेशों से आने वालों के लिए नए नियमों की घोषणा की.

    अब ईयू के बाहर से आने वालों को अपनी उड़ान से 72 घंटे पहले तक कोरोना वायरस संक्रमण की जाँच करानी होगी और निगेटिव आने के बाद ही उन्हें फ़्रांस में दाख़िल होने दिया जाएगा.

    फ़्रांस आने के बाद भी उन्हें सात दिनों तक आइसोलेशन में रहना होगा और सातवें दिन टेस्ट कराना होगा और अगर उसमें भी निगेटिव आते हैं तभी उन्हें सामान्य तरीक़े से रहने दिया जाएगा.

    कोरोना के नए वैरिएंट को लेकर भी चिंता बढ़ गई है. फ़्रांस के स्वास्थ्य मंत्री का कहना है कि कोरोना संक्रमितों में कम से कम एक से डेढ़ प्रतिशत मामले कोरोना के नए वैरिएंट के मिल रहे हैं.

  4. अमेरिकी संसद में कॉन्फ़िडरेट फ़्लैग के साथ घुसने वाला व्यक्ति गिरफ़्तार

    छह जनवरी को अमेरिकी संसद पर ट्रंप समर्थकों के हमले में एक तस्वीर सबसे ज़्यादा सोशल मीडिया पर वायरल हुई थी.

    तस्वीर में एक व्यक्ति को अमेरिकी संसद में कॉन्फ़िडरेट फ़्लैग लिए हुए देखा गया था.

    अब एफ़बीआई का कहना है कि उस व्यक्ति की पहचान करके उन्हें गिरफ़्तार कर लिया गया है.

    अमेरिकी मीडिया के अनुसार उन्हें गुरुवार को डेलावेयर से गिरफ़्तार किया गया है.

    उनका नाम केविन सीफ़्राइड बताया गया है और उन्हें गुरुवार दोपहर बाद अदालत में पेश किया जाएगा.

    जोसेफ़ एडलमैन ने इस पर ट्वीट करते हुए लिखा, ''कॉन्फ़िडरेट फ़्लैग अमेरिकी संसद भवन में घुस गया है, जो कि गृह युद्ध के दौरान भी नहीं हो सका था.''

    कॉन्फ़िडरेट फ़्लैग इसलिए विवादित है क्योंकि इसका संबंध अमेरिका में 1861 से लेकर 1865 तक चले गृह युद्ध से है.

    उस समय इसे अमेरिकी संघ से बग़ावत करने वाले दक्षिण के सात राज्यों के प्रतीक के तौर पर देखा जा रहा था.

    यह झंडा गोरों की प्रधानता और काले लोगों के सामाजिक एवं राजनैतिक बहिष्कार का प्रतीक माना जाता है.

    हालांकि यह झंडा गृह युद्ध के दौरान सामने आया था लेकिन 20वीं सदी में यह एक शक्तिशाली राजनैतिक प्रतीक के तौर पर उभरा.

    गोरों की प्रधानता की वकालत करने वाले चरमपंथी संगठन कु कलक्स क्लैन ने भी इस झंडे का ख़ूब इस्तेमाल किया था.

    20वीं सदी में नागरिक अधिकार आंदोलन के दौरान भी इस झंडे का इस्तेमाल किया गया था.

    हाल ही में 2015 में 21 साल के एक गौरे नौजवान ने साउथ कैरोलाइना के चार्ल्सटन में स्थित एक चर्च में गोलीबारी कर नौ काले लोगों को मार दिया था.

    उस नौजवान के हाथ में कॉन्फ़िडरेट फ़्लैग लिए एक तस्वीर बाद में ख़ूब वायरल हुई थी.

  5. ममता के 41 समर्थक विधायक बीजेपी में शामिल होने को तैयार: कैलाश विजयवर्गीय

    बीजेपी महासचिव और पश्चिम बंगाल के प्रभारी कैलाश विजयवर्गीय ने कहा है कि उनके पास ममता बनर्जी सरकार को समर्थन दे रहे ऐसे 41 विधायकों की एक सूची है जो बीजेपी में शामिल होने को तैयार हैं.

    इस साल अप्रैल-मई में पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव होने वाले हैं.

    अपने गृहनगर इंदौर में पत्रकारों से बात करते हुए उन्होंने कहा, "मेरे पास 41 ऐसे विधायकों की सूची है जो बीजेपी में आना चाहते हैं. अगर मैं इन 41 विधायकों को बीजेपी में ले लूं, तो वहां सरकार गिर जाएगी. पर हम देख रहे हैं कि इनमें से किसे लेना है और किसे नहीं.''

  6. डोनाल्ड ट्रंप: क्या सीनेट में बच पाएंगे?

  7. स्वदेशी तेजस लड़ाकू विमान की राह तक रही वायु सेना

  8. गणतंत्र दिवस पर बाहर का कोई चीफ़ गेस्ट नहीं होगा: विदेश मंत्रालय

    समाचार एजेंसी पीटीआई के अनुसार भारतीय विदेश मंत्रालय ने कहा है कि दुनिया भर में फैली कोरोना महामारी के कारण फ़ैसला किया गया है कि इस बार 26 जनवरी को होने वाले गणतंत्र दिवस समारोह में कोई विदेशी राष्ट्राध्यक्ष या सरकार का मुखिया चीफ़ गेस्ट नहीं होगा.

    इससे पहले ब्रिटेन के प्रधानमंत्री बोरिस जॉनसन 26 जनवरी समारोह के चीफ़ गेस्ट थे लेकिन उन्होंने अपने देश में कोरोना के बढ़ते मामलों के कारण भारत आने से मना कर दिया.

    उसके बाद भारत सरकार किसे चीफ़ गेस्ट की हैसियत से इस बार बुलाना चाहती है इसको लेकर कई तरह के क़यास लगाए जाते रहे.

    आख़िरकार गुरुवार को सरकार ने आधिकारिक रूप से घोषणा कर दी कि इस बार कोई विदेशी मेहमान चीफ़ गेस्ट नहीं होगा.

  9. आईएएस की नौकरी छोड़ बीजेपी में जाने वाले अरविंद शर्मा

  10. कोरोना महामारी के बीच कुंभ मेला शुरू

    दुनिया के सबसे बड़े मेले कुंभ की शुरुआत में हज़ारों की संख्या में श्रद्धालु गंगा नदी के तट पर एकत्रित हुए हैं.

    हिंदू धर्म में शुभ माने जाने वाला यह मेला इस बार कोरोनो वायरस महामारी के दौरान आयोजित हो रहा है.

    अधिकारियों का कहना है कि वे महामारी संबंधी दिशानिर्देशों का पालन कर रहे हैं लेकिन स्नान के लिए आए अधिकांश लोगों ने मास्क नहीं पहना है.

    कोरोना के मामलों में भारत अब भी दुनिया में दूसरे स्थान पर है. हालांकि, भारत में कई देशों की तुलना में मृत्यु दर कम है और फ़िलहाल लॉकडाउन भी नहीं है.

    त्योहार के पहले दिन सैकड़ों लोगों ने स्नान किया. हिंदुओं का मानना ​​है कि गंगा स्नान से उन्हें "मोक्ष" प्राप्त करने में मदद मिलेगी, जिससे वे जन्म और मृत्यु के चक्र से मुक्त हो जाएंगे.

    ये मेला उत्तराखंड राज्य के पवित्र कहे जाने वाल शहर हरिद्वार में आयोजित किया जा रहा है.समाचार चैनल एनडीटीवी के अनुसार, तीर्थयात्रियों ने तड़के तीन बजे हरिद्वार में गंगा नदी के एक प्रसिद्ध तट ‘हर की पौड़ी’ पर पहुंचना शुरू कर दिया था और एक घंटे बाद स्नान शुरू हुआ.

    यूं तो ये मेला सामान्य रूप से हज़ारों लोगों को आकर्षित करता है, लेकिन इस बार प्रशासन कोविड-19 की वजह से भीड़ नहीं चाहता है.

    ज़िला अधिकारियों ने लोगों को चेतावनी दी है कि वे नेगेटिव टेस्ट आने के बाद ही यहां आएं, हर समय मास्क पहनें और सोशल डिस्टेंस बनाए रखें लेकिन स्थानीय पत्रकार कहते हैं कि कुछ ही लोग इन नियमों का पालन कर रहे हैं.

    हाल ही में अदालत की सुनवाई में, याचिकाकर्ताओं ने चिंता जताई थी कि अगर मेले में पहुंचने वाले लोगों की संख्या को सख़्ती से नियंत्रित नहीं किया जाता है, तो ये जगह कोविड-19 के मामलों के लिए एक प्रजनन मैदान बन सकती है और इतने बड़े पैमाने पर इकट्ठा हुई भीड़ पर बचाव उपायों को लागू करना मुश्किल होगा.

    समाचार एजेंसी एएनआई के मुताबिक कोरोना वायरस महामारी के कारण अधिकारियों ने पिछले महीने कहा था कि यह आयोजन साढ़े तीन महीने के बजाय 48 दिनों के लिए होगा.

    राज्य पुलिस अधिकारियों ने भी घोषणा की है कि सुरक्षा के लिहाज़ से यहाँ एनएसजी कमांडो तैनात किए जाएंगे.

  11. राहुल गांधी ने पीएम मोदी से पूछा- "आप भारत के लोगों के पीएम हैं या फिर2-3 चुनिंदा व्यापारियों के?"

    राहुल गांधी ने मदुरै में पोंगल के अवसर पर एक समारोह में शिरकत की और स्थानीय लोगों के साथ खाना खाया.

    इस मौके पर उन्होंने कहा, “इस देश के किसान इस देश की रीढ़ की हड्डी हैं. अगर कोई यह सोचता है कि आप किसानों को दबा सकते हैं और यह देश उन्नति करता रहेगा तब आपको पीछे मुड़कर इतिहास देखना होगा. जब कभी भी किसान कमज़ोर हुए हैं तब भारत कमज़ोर हुआ है.”

    उन्होंने कहा कि सरकार सिर्फ़ किसानों को नज़रअंदाज ही नहीं कर रही बल्कि यह उन्हें तबाह करने की साजिश भी है. क्योंकि वो अपने दो-तीन दोस्तों को फ़ायदा पहुँचाना चाहते हैं. वे किसानों के हक की चीज़ अपने दो-तीन दोस्तों को देना चाहते हैं. यह हो रहा है. जो कुछ हो रहा है उसके लिए नज़रअंदाज़ करना एक बहुत हल्का शब्द है.

    उन्होंने कहा, “आप किसानों को दबा रहे हैं. आप कुछ मुट्ठीभर व्यापारियों की मदद कर रहे हैं. जब कोरोना आया तब आपने आम आदमी की मदद नहीं की. किसके प्रधानमंत्री हैं आप? आप भारत के लोगों के प्रधानमंत्री हैं या फिर 2-3 चुनिंदा व्यापारियों के?“

    “मेरे शब्दों को नोट कर लीजिए. सरकार को ये तीनों कृषि क़ानून वापस लेने पर मजबूर होना पड़ेगा. याद रखिएगा जो मैंने कहा है.“

  12. कुलभूषण जाधव मामले में अब 3 फ़रवरी को होगी सुनवाई

    कुलभूषण जाधव के मामले में गुरुवार को इस्लामाबाद हाई कोर्ट ने सुनवाई स्थगित कर दी है. अब इस पर अगली सुनवाई 3 फ़रवरी को होगी.

    पाकिस्तान की क़ैद में मौजूद कुलभूषण जाधव को पाकिस्तानी सरकार भारत का जासूस बताती है जबकि भारत का कहना है कि वो एक पूर्व नौसेना अधिकारी और बिज़नेसमैन हैं.

    जाधव को 2017 में पाकिस्तान की एक फ़ौजी अदालत ने जासूसी और अन्य मामलों में मौत की सज़ा सुनाई थी.

    भारत ने कुलभूषण जाधव के मामले में इंटरनेशनल कोर्ट ऑफ़ जस्टिस से अपील की थी कि वो भारतीय नागरिक को रिहा करे.

    इस फ़ैसले के ख़िलाफ़ भारत ने मई 2017 में अंतरराष्ट्रीय अदालत (आईसीजे) का दरवाज़ा खटखटाया था और माँग की थी कि कुलभूषण जाधव की सज़ा ख़त्म की जाए और उनकी रिहाई के आदेश दिए जाएं.

    आईसीजे ने भारत की इस माँग को ठुकरा दिया था लेकिन पाकिस्तान को आदेश दिया था कि वो जाधव को काउंसुलर ऐक्सेस दे और उनकी सज़ा पर पुनर्विचार करे.

    अदालत ने ये भी कहा था कि जब तक पुनर्विचार याचिका पर फ़ैसला नहीं आ जाता कुलभूषण जाधव को फ़ाँसी न दी जाए.

  13. ब्रेकिंग न्यूज़, डब्लूएचओ की टीम कोविड-19 की शुरुआत का पता लगाने चीन पहुँची

    विश्व स्वास्थ्य संगठन की टीम चीन के वुहान शहर पहुँच चुकी है. यह टीम कोविड-19 की शुरुआत कैसे हुई, इसकी जांच करने पहुँची है. विश्व स्वास्थ्य संगठन और चीन के बीच लंबे समय तक चली बातचीत के बात इस जांच को लेकर सहमति बनी है.

    10 वैज्ञानिकों की यह टीम रिसर्च इस्टीट्यूट, अस्पताल और सीफूड मार्केट के लोगों से इंटरव्यू लेगी.

    साल 2019 के आखिर में वुहान में पहली बार कोविड-19 के मामले पाए गए थे.

    गुरुवार को जब यह टीम वुहान पहुँची है तब वहाँ ज़िंदगी अब लगभग सामान्य हो चुकी है लेकिन उत्तरी चीन में कोरोना के नए मामले देखने को मिल रहे हैं.

    टीम अपनी जांच शुरू करने से पहले दो हफ्ते तक क्वारंटीन में रहेगी. टीम जांच के दौरान चीनी अधिकारियों की ओर से मुहैया कराए गए सैम्पल और प्रमाणों पर भरोसा करेगी.

    यह टीम किस जानवर से कोरोना की शुरुआत हुई है, इसकी जांच भी करेगी.

    चीन लंबे समय से यह कहते आया है कि कोरोना का संक्रमण वहाँ से शुरू नहीं हुआ है.

    विश्व स्वास्थ्य संगठन में वैश्विक संक्रमण और प्रतिक्रिया यूनिट के चेयरमैन प्रोफेसर डेल फ़िशर ने बीबीसी से कहा कि उम्मीद है कि दुनिया इसे एक वैज्ञानिक दौरे के तौर पर लेगी.

    उन्होंने कहा, “यह राजनीति और आरोप-प्रत्यारोप का विषय नहीं है बल्कि यह एक वैज्ञानिक सवाल के तह तक जाने की कोशिश है.”

    प्रोफेसर फ़िशर ने आगे कहा कि ज्यादातर वैज्ञानिक मानते हैं कि यह वायरस ‘प्राकृतिक रूप’से आया है.

    शुरुआत में ऐसा माना गया था कि कोविड-19 की शुरुआत वुहान के मांस बाज़ार से हुई है.

  14. भारत में कोरोना के कुल मरीजों की संख्या एक करोड़ पांच लाख से ज्यादा

    भारत में पिछले 24 घंटों में कोरोना संक्रमण के 16,946 नए मामले सामने आए हैं और 198 लोगों की मौत हुई है.

    इसके साथ ही कुल संक्रमितों की संख्या 1,05,12,093 और मरने वालों की कुल संख्या 1,51,727 हो चुकी है.

    वहीं कोरोना से ठीक होने वालों की कुल संख्या 1,01,46,763 हो चुकी है. देश में अभी कोरोना के एक्टिव मामलों की संख्या 2,13,603 है.

  15. ट्रंप 20 जनवरी से राष्ट्रपति नहीं रहेंगे तब भी महाभियोग क्यों?

    यूएस कैपिटल बिल्डिंग में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के हिसंक समर्थकों के हमले के बाद रिपब्लिकन पार्टी ट्रंप समर्थक और विरोधी खेमे में बँट गई है. समाचार एजेंसी रॉयटर्स के अनुसार नए पोल में ये बात सामने आई है कि इससे पार्टी को नुक़सान होगा.

    अमेरिका के नीचले सदन हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स में रिपब्लिकन पार्टी के 10 सांसदों ने ट्रंप के ख़िलाफ़ महाभियोग प्रस्ताव का समर्थन किया है. राष्ट्रपति ट्रंप पर आरोप है कि उन्होंने अपने भाषण के ज़रिए समर्थकों को उकसाकर छह जनवरी को यूएस कैपिटल बिल्डिंग में हमला कराया.

    यह हमला तब हुआ था जब वहाँ अमेरिकी कांग्रेस की बैठक चल रही थी. इस बैठक में अमेरिका के नव-निर्वाचित राष्ट्रपति जो बाइडन की औपचारिक जीत की पुष्टि होनी थी.

    डेमोक्रेटिक पार्टी के बहुमत वाले हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स में ट्रंप के ख़िलाफ़ महाभियोग प्रस्ताव 232-197 से पारित हो गया है. हालाँकि ट्रंप के ख़िलाफ़ महाभियोग इसी कार्यकाल में दूसरी बार तब लाया गया है जब उनका टर्म इसी 20 जनवरी को ख़त्म हो रहा है.

    सीनेट में रिपब्लिकन नेता मिच मैक्कॉनेल ने तत्काल महाभियोग ट्रायल लाने की माँग को ख़ारिज कर दिया है. उन्होंने कहा है कि ट्रंप के ऑफिस छोड़ने से पहले महाभियोग प्रक्रिया पूरी किए जाने का कोई रास्ता नहीं है.

    लेकिन ट्रंप व्हाइट हाउस से 20 जनवरी को विदा हो जाएंगे और उसके बाद भी उन्हें सीनेट में महाभियोग के लिए दोषी पाया जाता है तो अगले चुनाव में उनके फिर से शामिल होने पर प्रतिबंध लग सकता है.

    सीनेट इस ट्रायल में इस बात पर भी वोट करवा सकता है कि ट्रंप फिर कभी राष्ट्रपति बनने की रेस में शामिल ना हो पाएं. ट्रंप ने संकेत दिया है कि वे 2024 में राष्ट्रपति पद के लिए चुनाव प्रचार करेंगे.

    अमेरिका के नव-निर्वाचित राष्ट्रपति जो बाइडन ने कहा है कि उनके कार्यकाल में सीनेट में महाभियोग की प्रक्रिया और विधायिका की प्राथमिकताएं दोनों साथ-साथ चलें, इसे लेकर सोचना चाहिए ताकि कोई भी काम किसी वजह से लटके नहीं.

    बाइडन का कहना है कि महाभियोग की प्रक्रिया के कारण सरकार के काम रुकने नहीं चाहिए. यानी बाइडन के सत्ता में आने के बाद भी ट्रंप के ख़िलाफ़ महाभियोग की प्रक्रिया चलेगी.

    बाइडन ने कहा है कि दोनों काम एक साथ आगे बढ़ाने के लिए राह खोजनी होगी. बाइडन ने कहा, ''मुझे उम्मीद है कि सीनेट लीडरशीप महाभियोग की संवैधानिक ज़िम्मेदारी और सरकार के कामकाज़ साथ में आगे बढ़ाने के लिए कोई राह खोज लेगी.' ट्रंप ने अब तक चुनाव में अपनी हार नहीं मानी है.

    वो चुनावी नतीजे में धोखाधड़ी का आरोप लगाते हैं. कैपिटल हिल पर हमले से पहले ट्रंप ने अपने समर्थकों को संबोधित करते हुए कहा था, ''चुनावी जीत हमसे चुरा ली गई है और इसे वापस लेना है. हमें मज़बूती दिखानी होगी. हमें लड़ना होगा और बहुत ही अलग तरीक़े से लड़ना होगा.''

    रिपब्लिकन पार्टी के 10 सांसदों ने महाभियोग प्रस्ताव के पक्ष में वोटिंग की. उनके नाम हैं- लिज़ चेनी, एडम किनज़िंगर, जॉन काटको, एंथनी गोनज़ालेज़, टॉम राइस, डैन न्यूहाउस, जेम हेरेरा ब्यूटलर, फ़्रेड उपटन, डेविड वालाडाओ, पीटर माइजर.

    एडम किनज़िंगर ने ट्वीट किया, "आज महाभियोग के पक्ष में वोट डालना मेरे लिए संयत कर देने वाला क्षण था, हमारे लोकतंत्र के प्रतीक संसद भवन तक जाना और सिर्फ़ एक हफ़्ते पहले यहां हम सब ने जो हिंसक विद्रोह देखा था उनको याद करना. इस वोट को मैंने हलके में नहीं लिया बल्कि मैंने बहुत ही आत्मविश्वास के साथ यह वोट डाला है. मैं ख़ुद में शांति महसूस कर रहा हूं."

  16. सुप्रीम कोर्ट के फ़ैसले के बाद 15 जनवरी को लेकर किसान और सरकार में संशय

    सुप्रीम कोर्ट ने भले मोदी सरकार के तीन नए कृषि क़ानूनों पर फ़िलहाल रोक लगा दी है लेकिन आंदोलनकारी किसानों का विरोध-प्रदर्शन अभी थमा नहीं है. बुधवार को लोहड़ी के मौक़े पर आंदोलनकारी किसानों ने विवादित कृषि क़ानून की कॉपियाँ जलाईं.

    इस बीच अब तक साफ़ नहीं हो पाया है कि 15 जनवरी को केंद्र सरकार से तय अगले चरण की बातचीत हो पाएगी या नहीं. बुधवार को दिल्ली से लगी सीमाओं पर किसानों के प्रदर्शन के 50 दिन पूरे हो गए.

    किसान संगठन अपनी माँग पर अडिग हैं कि विवादित कृषि क़ानून रद्द किए जाएं. इसके साथ ही किसान ये भी माँग कर रहे हैं कि उनकी उपज को न्यूनतम समर्थन मूल्य यानी एमएसपी मिले और इसके लिए अनिवार्य क़ानून बनाया जाए. केंद्र सरकार से इन्हीं विवादों को सुलझाने के लिए अब तक आठ चरणों की वार्ता हुई है लेकिन सब नाकाम रही हैं.

    इसी हफ़्ते सुप्रीम कोर्ट ने तीनों कृषि क़ानूनों को फ़िलहाल निलंबित कर दिया है और विवादों को सुलझाने के लिए एक कमिटी का गठन किया है. इसे लेकर केंद्र सरकार भी अपने स्तर पर चीज़ों को नए सिरे से लाने की कोशिश कर रही है.

    15 जनवरी को किसानों से प्रस्तावित बातचीत होगी या नहीं इस पर संशय बना हुआ है. कृषि मंत्रालय का कहना है कि अभी तक कोई फ़ैसला नहीं लिया गया है. किसान यूनियनों का कहना है कि वार्ता रद्द होने को लेकर उन्हें कोई नोटिस नहीं दिया गया है. इनका कहना है कि शुक्रवार को विज्ञान भवन में होने वाली वार्ता पर कोई नया अपडेट नहीं है.

    किसान आंदोलन में सक्रिय भूमिका निभा रहे और स्वराज इंडिया के प्रमुख योगेंद्र यादव ने कहा है कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश में कुछ भी नया नहीं है. योगेंद्र यादव ने कहा, ''कमिटी की रिपोर्ट आने तक कृषि क़ानून दो महीने तक निलंबित रहेगा और बाद में कुछ अलग व्याख्या के साथ लागू कर दिया जाएगा.''

    किसान यूनियन पहले ही कमिटी की प्रक्रिया में शामिल होने से मना कर चुके हैं. किसान यूनियनों का कहना है कि कमिटी के सभी सदस्य मोदी सरकार के तीनों कृषि क़ानूनों की तारीफ़ करते रहे हैं. कमिटी के एक सदस्य प्रमोद कुमार जोशी ने 'द हिन्दू' से कहा है कि पैनल में रहते हुए वो अपनी निजी राय को आड़े नहीं आने देंगे.

    जोशी ने कहा है, ''हम खुले मन से कमिटी में काम करेंगे. इसमें कुछ भी ग़लत नहीं है कि कमिटी के सारे सदस्य कृषि क़ानून का समर्थन करने वाले हैं. जजों की अपनी समझ होती है और वो स्वतंत्र रूप से फ़ैसला दे सकते हैं.''

    गणतंत्र दिवस पर किसानों की ट्रैक्टर परेड को लेकर भी कई तरह के सवाल उठ रहे हैं. क्रांतिकारी किसान यूनियन के अध्यक्ष दर्शन पाल सिंह ने कहा है, ''हम निश्चित तौर पर दिल्ली में गणतंत्र दिवस के मौक़े पर परेड निकालेंगे. लेकिन हमारा इरादा गणतंत्र दिवस पर सरकारी परेड को बाधित करना नहीं है. हमने बहुत कड़ाई से कहा है कि आंदोलन में हिंसा को लिए कोई जगह नहीं है.''

    दर्शन पाल सिंह ने अंग्रेज़ी अख़बार द हिन्दू से कहा, ''हम राष्ट्रध्वज लेकर निकलेंगे. 15 जनवरी को होने वाली बैठक के बाद इस पर और विस्तार से जानकारी दी जाएगी.''

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