किसान आंदोलन के समाधान के लिए सुप्रीम कोर्ट की ओर से बनाई गई चार सदस्यीय
समिति में शामिल अनिल घनवत ने कहा है कि “प्रदर्शनकारी किसानों को न्याय
मिलेगा.”
सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को तीनों कृषि क़ानूनों पर
रोक लगा दी और विशेषज्ञों की एक समिति गठित की, जो कृषि क़ानूनों को लेकर किसानों
की शिकायतों और सरकार की बात सुनेगी और दो महीने के अंदर अदालत में अपनी रिपोर्ट
पेश करेगी.
महाराष्ट्र के प्रमुख किसान संगठन शेतकारी संगठन के अध्यक्ष
अनिल घनवत ने समाचार एजेंसी एएनआई से कहा, “ये
आंदोलन कहीं जाकर रुकना चाहिए और किसानों के हित में एक क़ानून बनाया जाना चाहिए.
पहले हमें किसानों को सुनना पड़ेगा, अगर उन्हें न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) और
कृषि उपज बाज़ार समित (एपीएमसी) को लेकर कोई ग़लतफ़हमी है, तो हम उसे दूर करेंगे,
उन्हें ये भरोसा दिया जाना ज़रूरी है कि जो भी हो रहा है वो उनके हित में ही हो
रहा है.”
उन्होंने कहा, “कई किसान
नेता और संगठन एपीएमसी के एकाधिकार से आज़ादी चाहते हैं, इसे रोकने की ज़रूरत है
और किसानों को अपनी फसल बेचने की आज़ादी दी जानी चाहिए. बीते 40 सालों से ये मांग
की जा रही थी. जिन किसानों को एमएसपी चाहिए, उन्हें वो मिले और जिन्हें इससे
आज़ादी चाहिए, उनके पास भी विकल्प होना चाहिए.”
इस बीच प्रदर्शनकारी किसान नेताओं ने साफ़ किया कि वो समिति बनाने के अदालत के फ़ैसले को स्वीकार नहीं करेंगे.
किसान नेताओं के मुताबिक़, केंद्र सरकार सुप्रीम कोर्ट के ज़रिए इस समिति को ला रही है. उनका दावा है कि इस समिति के सभी सदस्य सरकार के समर्थन में हैं और ये सदस्य क़ानूनों को ही सही बात रहे हैं.
घनवत कहते हैं कि किसानों का ये मानना बिल्कुल ग़लत है.
उन्होंने कहा, “ये पूरी तरह से एक ग़लतफ़हमी है. अशोक गुलाटी कोई राजनीतिक नेता नहीं है या ना ही किसी समूह का हिस्सा हैं. वो एक कृषि अर्थशास्त्री हैं. मैं भी इसपर निष्पक्ष रहा हूं, मैंने कभी किसी राजनीतिक पार्टी के लिए काम नहीं किया, बल्कि हमेशा किसानों के लिए काम किया, और आने वाले दिनों में जो कुछ भी होगा, हम पूरी कोशिश करेंगे कि हम पूरे देश के किसानों के हित को देखते हुए मसले का हल निकालेंगे, ना कि सिर्फ महाराष्ट्र या पंजाब के किसानों को ध्यान में रखकर.”
घनवत के अलावा सुप्रीम कोर्ट की समिति में भारतीय किसान संगठन के मान धड़े के अध्यक्ष भूपिंदर सिंह मान, इंटरनैशनल फ़ूड पॉलिसी रिसर्च इंस्टिट्यूट के निदेशक प्रमोद कुमार जोशी और कृषि अर्थशास्त्री अशोक गुलाटी को शामिल किया गया है.
घनवत ने कहा कि समिति तब तक अपना काम शुरू नहीं कर सकती, जब तक कि उसे सुप्रीम कोर्ट की ओर से दिशा-निर्देश ना मिल जाएं.
उन्होंने कहा, “जैसे ही ये मिलेंगे, हम सभी किसान नेताओं से मुलाक़ात करेंगे और उनकी मांगों को लेकर उनकी राय लेंगे और पूछेंगे कि ये कैसे किया जा सकता है.”
घनवत ने साथ ही कहा, “मैं अपने निजी विचारों को किनारे रखूंगा, प्रदर्शनकारी किसान नेताओं को समिति के साथ मिलकर काम करना चाहिए और अपने विचार व्यक्त करने चाहिए.”