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ट्रंप को तत्काल राष्ट्रपति पद से हटाने के लिए संसद में बहस जारी

अमेरिकी संसद के निचले सदन हाउस ऑफ़ रिप्रेज़ेन्टेटिव्स में राष्ट्रपति ट्रंप को हटाने के लिए एक प्रस्ताव पेश किया गया है.

लाइव कवरेज

  1. अभिव्यक्ति की आज़ादी पर आज से पहले इतना हमला कभी नहीं हुआ: ट्रंप

    अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि आज अभिव्यक्ति की आज़ादी पर जितने हमले हो रहे हैं उतना पहले कभी नहीं हुआ.

    टेक्सस में अमेरिका और मेक्सिको के बीच बनी दीवार को देखने के लिए गए ट्रंप ने कहा, "बोलने की आज़ादी पर हमले हो रहे हैं जैसा पहले कभी नहीं हुआ. 25वें संशोधन से मुझे कोई ख़तरा नहीं है, लेकिन इससे बाइडन और बाइडन प्रशासन को ही नुक़सान होगा.''

    ट्रंप ने आगे कहा, महाभियोग का छलावा, इतिहास के सबसे बड़े विच-हंट का हिस्सा है. अब समय है कि हमारे देश के लोगों के ज़ख़्म पर मरहम रखा जाए. शांति और स्थिरता का समय है.

    उन्होंने कहा कि 'मेक अमेरिका ग्रेट अगेन' अभियान की बुनियाद ही क़ानून के सम्मान पर टिकी हुई है.

  2. अमेरिकी संसद पर हमला करने वालों में अब तक 170 की पहचान: एफ़बीआई

    अमेरिका में एफ़बीआई का कहना है कि पिछले हफ़्ते संसद पर हमला करने वालों में से 170 लोगों की पहचान कर ली गई है.

    एफ़बीआई ने कहा है कि 70 लोगों के ख़िलाफ़ मुक़दमा भी दर्ज कर लिया गया है.

    एफ़बीआई के अनुसार उसने संसद पर हुए हमले के अब तक एक लाख से ज़्यादा डिजिटल सुराग़ लोगों ने भेजे हैं.

    इस बीच एफ़बीआई ने संसद पर हमले में शामिल लोगों को सामने आकर सरेंडर करने के लिए कहा है. एफ़बीआई ने कहा है कि अगर आपने वाशिंगटन छोड़ दिया है तो भी राज्यों में हमारे एजेंट आपको ढूंढ निकालेंगे.

  3. डॉयचे बैंक ने ट्रंप से कारोबारी रिश्ता ख़त्म करने का फ़ैसला किया

    जर्मनी के डॉयचे बैंक ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और उनकी कंपनियों से व्यापारिक रिश्ता ख़त्म करने की घोषणा की है.

    डॉयचे बैंक ट्रंप की कंपनियों के लोन का एक बहुत बड़ा स्रोत है और बैंक का यह फ़ैसला ट्रंप के व्यापार के लिए बहुत बड़ा धक्का हो सकता है.

    डॉयचे बैंक ने ऐसे समय में यह फ़ैसला किया है जब कई दूसरे संगठन भी ट्रंप से अपने रिश्ते ख़त्म करक रहे हैं.

    ट्विटर से लेकर प्रोफ़ेशनल गोल्फ़र्स एसोसिएशन तक सभी ने ट्रंप से संबंध तोड़ लिया है. इन सभी कंपनियों ने ट्रंप ब्रैंड को बनाने में अहम भूमिका निभाई थी.

    बैंक ने इस बारे में आधिकारिक रूप से कोई बयान नहीं दिया है लेकिन रिपोर्ट का कहना है कि बैंक अब ट्रंप के साथ कोई भी बिज़नेस नहीं करेगा.

    90 के दशक में जब ट्रंप दिवालिया होने के कगार पर थे तो डॉयचे बैंक अकेला बैंक था जिसने ट्रंप को लोन दिया था.

    ट्रंप समूह को अभी डॉयचे बैंक को अगले कुछ सालों में 34 करोड़ डॉलर का लोन चुकाना है.

    ट्रंप समूह के एक और बैंकर सिग्नेचर बैंक ने कहा है कि वो ट्रंप के दो निजी बैंक खाते को बंद कर रहा है.

  4. अमेरिका: ट्रंप को हटाने के लिए संसद में प्रस्ताव पर बहस जारी

    अमेरिकी संसद के निचले सदन हाउस ऑफ़ रिप्रेज़ेन्टेटिव्स में इस समय राष्ट्रपति ट्रंप को हटाने के लिए एक प्रस्ताव पर बहस जारी है.

    प्रस्ताव में कहा गया है कि ट्रंप ने 'पूरे प्रचार-प्रसार के साथ और खुल कर उस भीड़ को उकसाया' था जिसने पिछले हफ़्ते अमेरिकी संसद पर हमला किया था.

    प्रस्ताव में आगे कहा गया है कि उप-राष्ट्रपति माइक पेन्स को राष्ट्रपति की ज़िम्मेदारी संभाल लेनी चाहिए.

    डेमोक्रैट्स जिनका फ़िलहाल सदन में बहुमत है, वो पेन्स से आग्रह कर रहे हैं कि वो 'फ़ौरन' संविधान के 25वें संशोधन का इस्तेमाल करते हुए राष्ट्रपति ट्रंप को इस पद के अयोग्य घोषित करें.

    25वें संशोधन के तहत उप-राष्ट्रपति को राष्ट्रपति बनने का अधिकार होता है जब राष्ट्रपति अपनी ज़िम्मेदारियों को निभाने में असमर्थ होते हैं, मिसाल के तौर पर अगर वो शारीरिक या मानसिक बीमारी के कारण अयोग्य हो जाते हैं.

    सदन में इस समय 25वें संशोधन के सेक्शन चार पर बहस हो रही है जो उप-राष्ट्रपति को अधिकार देता है कि वो कैबिनेट की बहुमत के साथ मिलकर राष्ट्रपति को अपने ज़िम्मेदारी निभाने के अयोग्य घोषित कर सकते हैं.

    उप-राष्ट्रपति को संसद अध्यक्ष और ऊपरी सदन सीनेट के पीठासीन अधिकारी को एक पत्र लिखकर बताना होगा कि राष्ट्रपति शाषण करने के लिए योग्य नहीं हैं या अपने पद की ज़िम्मेदारी को निभाने के अयोग्य हैं.

    ऐसा करने के बाद उप-राष्ट्रपति तत्काल प्रभाव से राष्ट्रपति बन जाएंगे.

    इन सबके बीच राष्ट्रपति को लिखित जवाब देने का मौक़ा दिया जाता है और अगर वो इस निर्णय को चुनौती देते हैं तो फिर यह संसद को तय करना होता है.

    सीनेट और निचले सदन में राष्ट्रपति को हटाने के किसी प्रस्ताव को पारित करने के लिए दो-तिहाई बहुमत की ज़रूरत होती है. लेकिन जब तक इस मसले का कोई हल नहीं निकलता है तब तक उप-राष्ट्रपति, राष्ट्रपति की जगह पर काम करते रहेंगे.

  5. मैंने जो भी कहा वो बिल्कुल वाजिब थे: ट्रंप

    अमेरिकी संसद पर अपने समर्थकों के हमले के ठीक पहले दिए भाषण का राष्ट्रपति ट्रंप ने बचाव किया है.

    एंड्रयू एयरफ़ोर्स बेस पर पत्रकारों से बात करते हुए ट्रंप ने कहा, "आपको हमेशा हिंसा से बचना चाहिए. हमें बहुत समर्थन है, शायद ऐसा समर्थन है जैसा इससे पहले किसी ने देखा नहीं होगा."

    लेकिन पत्रकारों ने जब उनसे पूछा कि संसद भवन में जो कुछ हुआ उसमें उनकी व्यक्तिगत ज़िम्मेदारी कितनी थी, तो उनका जवाब था, अगर आप मेरा भाषण सुनेंगे और कई लोगों ने सुना है और मैंने अख़बारों और टीवी में देखा है. इसका आकलन किया गया है और लोगों को लगता है कि मैंने जो भी कहा था वो बिल्कुल वाजिब था.

    ट्रंप ने आगे कहा, वरिष्ठ नेताओं समेत कई लोगों ने कहा है कि पुलिस हिरासत में जॉर्ज फ़्लॉयड की मौत के बाद पिछले साल हुए विरोध प्रदर्शन और दंगे वाशिंगटन में हुए दंगों से ज़्यादा चिंताजनक थे.

    ट्रंप के भाषण के बाद जब उनके समर्थकों ने पुलिस पर हमले शुरू कर दिए थे उससे दो घंटे पहले ट्रंप ने भीड़ से कहा था, ''हमलोग जहन्नम की तरह लड़ते हैं. और अगर आप जहन्नम की तरह नहीं लड़ते हैं तो फिर आप इस देश को नहीं बचा पाएंगे.''

    डेमोक्रैट्स का कहना है कि ट्रंप के शब्द बग़ावत की एक कोशिश थी.

  6. सोनू सूद पर बंबई हाई कोर्ट में बीएमसी ने लगाए गंभीर आरोप

    मुंबई बीएमसी ने बॉम्बे हाई कोर्ट में कहा है कि बॉलीवुड अभिनेता सोनू सूद अवैध निर्माण करने के आदी हैं. बीएमसी ने हाई कोर्ट में दाखिल हलफनामे में कहा है कि सोनू सूद पहले दो दफा अवैध निर्माण तोड़े जाने के बावजूद जुहू के इलाके में अपना अवैध निर्माण कार्य जारी रखे हुए हैं.

    बीएमसी ने यह हलफनामा सोनू सूद की ओर से पिछले हफ्ते दायर एक याचिका के जवाब में दिया है. सोनू सूद ने बीएमसी के नोटिस को चुनौती देते हुए याचिका दायर की है. बीएमसी की ओर से यह नोटिस पिछले साल अक्टूबर में उन्हें दी गई थी.

    निचली अदालत ने बीते दिसंबर के महीने में बीएमसी के नोटिस को चुनौती देने वाले मुकदमे को खारिज कर दिया था.

    नोटिस में बीएमसी ने सोनू सूद पर आरोप लगाया है कि सूद रिहायशी इलाके में छह मंजिले ‘शक्ति सागर’ इमारत को एक कमर्शियल होटल में तब्दील कर रहे हैं.

    हलफनामे में बीएमसी ने कहा है,"याचिकाकर्ता अवैध निर्माण करने का आदतन अपराधी है और वो अनधिकृत तरीके से कमर्शियल निर्माण कार्य में लगे हुए है. उसने एक बार फिर से ध्वस्त की गई इमारत पर निर्माण कार्य शुरू किया है ताकि उसमें बिना लाइसेंस विभाग से मंजूरी लिए बिना ग़ैर-क़ानूनी तरीके से होटल बना सके."

  7. केंद्र कानून वापस ले वरना हरियाणा सरकार ख़ामियाज़ा भुगतेगी - जेजेपी विधायक

    जननायक जनता पार्टी के कुछ विधायकों का कहना है कि केंद्र को तीन कृषि कानून वापस ले लेना चाहिए वरना इसका ख़ामियाज़ा हरियाणा में बीजेपी-जेजेपी गठबंधन को भुगतना पड़ेगा.

    जेजेपी प्रमुख और हरियाणा के उपमुख्यमंत्री दुष्यंत चौटाला और मुख्यमंत्री मनोहरलाल खट्टर गृहमंत्री अमित शाह से मुलाकात करने वाले हैं.

    इस मुलाकात से पहले जेजेपी विधायक जोगी राम सिहाग ने समाचार एजेंसी पीटीआई से कहा कि ‘’केंद्र सरकार को ये कानून वापस ले लेना चाहिए क्योंकि हरियाणा, पंजाब और पूरे देश के किसान इस कानून के खिलाफ़ अड़े हुए हैं. हम दुष्यंत जी से निवेदन करते हैं कि वह अमित शाह जी तक हमारी बात पहुंचाएं’’

    हरियाणा की कुल 90 विधानसभा सीटों में से 40 सीटों पर बीजेपी ने जीत हासिल की थी और 10 सीटें जेजेपी के खाते में आई थी. राज्य में दोनों पार्टी के गठबंधन की सरकार है.

  8. किसान आंदोलन : सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बावजूद किसान निकालेंगे 'ट्रैक्टर परेड'

    दिल्ली के बॉर्डर पर आंदोलन कर रहे किसानों का कहना है कि वो सुप्रीम कोर्ट की पहल का स्वागत तो करते हैं मगर उनका आरोप है कि जो कमिटी किसानों की मांगों को लेकर बनाई गई है 'वो सरकार के ही पक्ष' में काम करेगी.

    किसानों के संगठनों के प्रतिनिधि और भारतीय किसान यूनियन के नेता राकेश टिकैत ने बीबीसी से बात करते हुए कहा कि जिन चार लोगों की कमिटी बनाई गई है उनपर किसानों को भरोसा इसलिए नहीं है क्योंकि इनमें से कुछ एक ने कृषि बिल को लेकर सरकार का खुलेआम समर्थन किया है.

    सुप्रीम कोर्ट में चली कार्यवाही के बाद दिल्ली की सरहद से फ़ोन पर बात करते हुए राकेश टिकैत ने कहा कि किसान अपना आंदोलन जारी रखेंगे और अपने आंदोलन के स्थल को भी नहीं बदलेंगे.

    उनका कहना था, "हम सुप्रीम कोर्ट का आभार व्यक्त करते हैं कि माननीय मुख्य न्यायाधीश और बेंच के दूसरे न्यायाधीशों ने कम से कम आंदोलन कर रहे किसानों की मुश्किलों को तो समझा. सर्वोच्च अदालत ने आंदोलन करने के अधिकार का भी बचाव किया है. ये बहुत बड़ी बात है."

  9. ट्रंप को तत्काल राष्ट्रपति पद से हटाने को लेकर पेंस पर बढ़ा दबाव

    मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और उप-राष्ट्रपति माइक पेंस के बीच पिछले हफ्ते कैपिटल हिल पर हुए हमले के बाद पहली बार मुलाकात हुई है.

    कैपिटल हिल में हिंसा की घटना तब हुई थी जब माइक पेंस नवंबर में आए चुनाव नतीजों पर अंतिम मुहर लगाने की प्रक्रिया में लगे हुए थे. इससे पहले ट्रंप ने उन्हें चुनाव नतीजों को खारिज करने को भी कहा था लेकिन पेंस ने ऐसा करने से मना कर दिया था. इसे लेकर ट्रंप ने उनकी आलोचना भी की थी.

    हालांकि एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया है कि दोनों नेताओं के बीच इतने दिनों की खामोशी के बाद आज की मुलाकात के दौरान ‘अच्छी बातचीत’ हुई है.

    समाचार एजेंसी रॉयटर्स के मुताबिक दोनों नेताओं ने हिंसा की घटना को लेकर बातचीत की. बातचीत के दौरान उन्होंने दोहराया कि जिन्होंने क़ानून तोड़ा है और कैपिटल में घुस कर तोड़फोड़ की है, वे अमेरिका फर्स्ट मूवमेंट का प्रतिनिधित्व नहीं करते हैं.

    व्हाइट हाउस के पूर्व अधिकारी ने सीबीएस न्यूज़ को बताया कि पेंस हतोत्साहित, निराश, आहत और स्तब्ध थे.

    हमें ऐसी रिपोर्टें मिल रही हैं कि उप राष्ट्रपति पर डेमोक्रेट्स की ओर से संवैधानिक अधिकारों का इस्तेमाल कर ट्रंप को तत्काल हटाने को लेकर दबाव पड़ रहा है लेकिन माइक पेंस ऐसे कोई संकेत नहीं दिए हैं कि वो ऐसा कुछ करने जा रहे हैं.

  10. नगालैंड: 525 फुट गहरी खाई में गिरा ट्रक, पूरे गांव ने मिलकर बाहर निकाला

    नगालैंड के फेक जिले का कुटसापो गांव अचानक चर्चा में है. 26 दिसंबर को इस गांव में एक ट्रक दुर्घटनाग्रस्त हो गया. ट्रक सड़क से करीब 525 फुट नीचे गिर गया था. कुटसापो ग्राम विकास बोर्ड के तहत बनाया गया भारत का पहला गांव है.

    सड़क की हालत खराब होने के कारण ट्रक को बाहर निकालना आसान नहीं था. ट्रक मालिक जोभेपा ने गांव वालों से मदद मांगी. कुटसापो गांव में चेखेसांग जनजाति के लोग रहते हैं.

    ग्राम सभा अध्यक्ष ज़शीबेजो राखो ने बीबीसी को बताया कि 8 जनवरी को गांव के करीब 400 लोगों ने परंपरागत तकनीकों का इस्तेमाल करके ट्रक को खाई से बाहर निकाला.

    ट्रक के टायर स्लिप ना करें इसके लिए मिट्टी वाले रास्ते पर बांस की पटरियां बिछाई गईं. ट्रक को बाहर की तरफ खींचते वक़्त लोग लोकगीत गा रहे थे.

  11. प्राइवेसी पर ख़तरा, वॉट्सऐप अपनी सफ़ाई में क्या बोला?

    मैसेजिंग ऐप वॉट्सऐप बीते कई दिनों से सवालों के घेरे में है. वॉट्सऐप की नई प्राइवेसी पॉलिसी के चलते लोग इसे अपनी निजता पर हमला बता रहे हैं. इस बीच वॉट्सऐप ने खुद पर उठ रहे सवालों को लेकर स्पष्टीकरण जारी किया है.

    कंपनी की तरफ से कहा है कि "हम कुछ अफवाहों को दूर करना चाहते हैं और शत प्रतिशत साफ करना चाहते हैं कि हम आपके निजी संदेशों को एंड-टू-एंड एन्क्रिप्शन के साथ सुरक्षित रखना जारी रखेंगे.

    प्राइवेसी पॉलिसी में अपडेट से आपके दोस्तों या परिवार के साथ किए गए संचार पर असर नहीं पड़ेगा." इसके साथ ही वॉट्सऐप ने कुछ सवालों के जवाब भी दिए हैं. ये वो सवाल हैं जो बीते कुछ दिनों से वॉट्सऐप इस्तेमाल करने वालों के मन में उठ रहे हैं.

    वॉट्सऐप ने साफ किया है कि उनके पॉलिसी अपडेट से किसी की निजता का हनन नहीं होगा. कंपनी का कहना है कि इस अपडेट का असर सिर्फ बिजनेस अकाउंट पर पड़ेगा, जो कि एक ऑप्शनल विषय होता है.

    साथ ही इस अपडेट के ज़रिए वॉट्सऐप के डेटा कलेक्ट करने उसके इस्तेमाल को लेकर एक तरह की पारदर्शिता भी आएगी.

  12. कृषि क़ानूनों पर सुप्रीम कोर्ट ने लगाई रोक, सिंघु बॉर्डर पर कैसा है माहौल?

    सुप्रीम कोर्ट ने तीनों कृषि क़ानूनों के लागू होने पर अगले आदेश तक रोक लगा दिया है.

    इसके अलावा सुप्रीम कोर्ट ने धरने पर बैठे किसानों से बात करने के लिए चार सदस्यों वाली एक कमिटी का गठन किया है.

    चीफ़ जस्टिस एसए बोबडे ने कहा, "अगले आदेश तक इन तीनों कृषि क़ानूनों के लागू होने पर रोक लगी रहेगी."

    चीफ़ जस्टिस की अगुवाई में तीन जजों की बेंच इस मामले में दाखिल याचिका की सुनवाई कर रही है.

    कृषि क़ानूनों पर SC ने लगाई रोक, सिंघु बॉर्डर पर कैसा है माहौल? ज़्यादा जानकारी के साथ बीबीसी संवाददाता अरविंद छाबड़ा

  13. कृषि कानूनों पर सुप्रीम कोर्ट की रोक के बाद दिल्ली के गाज़ीपुर बॉर्डर का माहौल

    सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि किसानों के मुद्दे का हल निकालने के लिए बनाई गई कमेटी दो महीने के भीतर अपनी रिपोर्ट अदालत के सामने पेश करे.

    इस कमेटी की पहली मीटिंग दस दिनों के भीतर करने का भी आदेश दिया गया है.

    तीन कृषि कानूनों पर सुप्रीम कोर्ट की रोक के बाद दिल्ली के गाज़ीपुर बॉर्डर में कैसा है माहौल?

    ज़्यादा जानकारी के साथ समीरात्मज मिश्र और पीयूष नागपाल.

  14. बाइडन के शपथ ग्रहण समारोह के दिन अमेरिका में हो सकते हैं हथियारबंद प्रदर्शन-FBI

    एफ़बीआई ने चेतावनी दी है कि जो बाइडन के शपथ ग्रहण समारोह से पहले अति-दक्षिणपंथी और डोनाल्ड ट्रंप के समर्थक हथियारबंद प्रदर्शन कर सकते हैं. 20 जनवरी को ट्रंप समर्थकों की ओर से प्रदर्शन का एलान किया गया है.

    रिपोर्ट्स सामने आई हैं कि 20 जनवरी को जो बाइडन इनॉग्रेशन सेरेमनी पर देश के 50 राज्यों की संसद और वॉशिंगटन डीसी में हथियार बंद समूह एकत्रित होने की योजना बना रहे हैं.

    कैपिटल हिल पर हुए हमले के बाद हर आयोजन में सुरक्षा पहले से बढ़ाने का फ़ैसला लिया गया है.

    हाउस डेमोक्रैट्स का कहना है कि गुरूवार को राष्ट्रपति ट्रंप पर महाभियोग चलाने के लिए वोटिंग होगी.

    डेमोक्रेट सांसदों ने उप-राष्ट्रपति माइक पेंस से "हिंसा के लिए उकसाने" के चलते राष्ट्रपति को पद से हटाने की अपील की है.

    पेलोसी ने उप-राष्ट्रपति पेंस से 25वाँ संशोधन लागू करने की मांग की है. हालांकि माइक पेंस इसके लिए तैयार है या नहीं इस बारे में कोई जानकारी सामने नहीं आई है.

  15. किसान आंदोलन: सुप्रीम कोर्ट की बनाई समिति के चार लोग कौन हैं

    केंद्र सरकार के तीन कृषि क़ानूनों पर सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को रोक लगा दी और इसके बाद एक समिति का गठन किया है. कृषि और आर्थिक मामलों के जानकारों की यह समिति विभिन्न पक्षों को सुनेगी और ज़मीनी स्थिति का जायज़ा लेगी.

    हालांकि, सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान यह भी तर्क दिया गया कि किसान संगठन किसी समिति के गठन के पक्ष में नहीं हैं तो सुप्रीम कोर्ट की बेंच ने कहा कि जो भी 'सही मायने में' समाधान खोजने में रुचि रखता होगा वो ऐसा करेगा.

    सुप्रीम कोर्ट ने चार सदस्यों की एक समिति का गठन किया है जिसमें भारतीय किसान यूनियन के भूपिंदर सिंह मान, शेतकारी संगठन के अनिल घनवत, कृषि अर्थशास्त्री अशोक गुलाटी और डॉक्टर प्रमोद कुमार जोशी शामिल होंगे.

    मुख्य न्यायाधीश एसए बोबडे की अध्यक्षता वाली तीन सदस्यीय पीठ ने दिन में सुनवाई के दौरान यह भी कहा कि वह क़ानूनों को रद्द करना चाहती है लेकिन दोनों पक्षों के बीच बिना किसी गतिविधि के इसे अनिश्चितकालीन के लिए नहीं किया जा सकता.

    सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को कहा था कि केंद्र सरकार और किसान प्रतिनिधियों के बीच जिस तरह से बातचीत हो रही है वह 'बहुत निराशाजनक' है. मध्यस्थता के लिए जिस समिति का गठन किया गया है उसमें चार सदस्यों को जगह दी है. आइए जानते हैं कि यह चार लोग कौन हैं.

  16. किसान आंदोलन और कृषि क़ानूनों पर सुप्रीम कोर्ट का फ़ैसला: सात ख़ास बातें

    सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि किसानों के मुद्दे का हल निकालने के लिए बनाई गई कमेटी दो महीने के भीतर अपनी रिपोर्ट अदालत के सामने पेश करे.

    इस कमेटी की पहली मीटिंग दस दिनों के भीतर करने का भी आदेश दिया गया है.

    सुप्रीम कोर्ट के फ़ैसले के प्रमुख बिंदु

    1.तीनों कृषि क़ानूनों के अमल पर रोक दी गई है.

    2.न्यूनतम समर्थन मूल्य की व्यवस्था क़ानून पारित होने से पहले की तरह चलती रहेगी.

    3.इन क़ानूनों के तहत की गई किसी भी कार्रवाई के परिणामस्वरूप किसी भी क़ानून को उसकी ज़मीन से न तो बेदखल किया जाएगा और न ही वंचित.

    4.भूपिंदर सिंह मान, प्रमोद कुमार जोशी, अशोक गुलाटी और अनिल घनवंत की सदस्यता वाली कमेटी कृषि क़ानूनों पर किसानों की शिकायतें और सरकार का नज़रिया सुनेगी और उसके आधार पर अपनी सिफारिशें देगी.

    5.कमेटी को काम करने के लिए सरकार उसे दिल्ली में जगह मुहैया कराएगी और उसके खर्चे का वहन करेगी.

    6.किसान संगठनों के प्रतिनिधि चाहे वे विरोध प्रदर्शन कर रहे हों या नहीं, चाहे वे इन क़ानूनों के समर्थन में हों या विरोध में, वे अपनी बात रखने के लिए कमेटी के सामने पेश होंगे.

    7.कमेटी दो महीने के भीतर सुप्रीम कोर्ट में अपनी रिपोर्ट फाइल करेगी. कमेटी की पहली बैठक दस दिनों के अंदर होगी.

  17. किसान आंदोलन जारी रहेगा, सुप्रीम कोर्ट की कमिटी के सदस्यों पर किसान नेताओं ने संदेह जताया

    किसान नेताओं ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि 26 जनवरी को हमारा आंदोलन ऐतिहासिक होने जा रहा है. हम क़ानून रद्द करवाने को लेकर आंदोलन कर रहे हैं.

    "सरकार की नीति और नियत जैसी रही है, वहीं इस कमिटी के भी मामले में देखने को मिल रही है. कमिटी के जो सदस्य हैं उनकी दलील सरकारों के पक्ष में रही है."

    "हम सभी आंखें सुप्रीम कोर्ट की ओर लगी हुई थी. हमारी लड़ाई सरकार से है ना कि किसी कमिटी से है."

    "हम लोहड़ी में अब भी तीन कृषि क़ानूनों को जलाने जा रहे हैं. 26 जनवरी के प्रदर्शन के बारे में कहा गया कि वो पूरी तरह से शांतिपूर्ण प्रदर्शन होगा. लेकिन जिस तरह की अफवाहें फैलाई जा रही हैं कि हम कोई हमला करने जा रहे हैं तो यह एक गैर-जिम्मेवार हरकत है. हमने कभी भी हिंसा का रास्ता अख्तियार नहीं किया और ना करेंगे."

  18. किसानों को कमेटी मंज़ूर नहीं, ये दलील हमें नामंज़ूर है: सुप्रीम कोर्ट

    सुप्रीम कोर्ट ने तीनों कृषि क़ानूनों के लागू होने पर अगले आदेश तक रोक लगा दिया है.

    इसके अलावा सुप्रीम कोर्ट ने धरने पर बैठे किसानों से बात करने के लिए चार सदस्यों वाली एक कमिटी का गठन किया है.

    चीफ़ जस्टिस एसए बोबडे ने कहा, "अगले आदेश तक इन तीनों कृषि क़ानूनों के लागू होने पर रोक लगी रहेगी."

    चीफ़ जस्टिस की अगुवाई में तीन जजों की बेंच इस मामले में दाखिल याचिका की सुनवाई कर रही है.

    सुप्रीम कोर्ट में दायर इन याचिकाओं में डीएमके के सांसद त्रिची शिवा और आरजेडी के सांसद मनोज झा की याचिकाएँ भी शामिल हैं.

  19. क्या ट्रंप के राजनीति करने पर पाबंदी लग सकती है?

    अमेरिका में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप समर्थकों के संसद पर हमला करने के बाद लगातार मांग उठ रही है कि दंगा 'भड़काने' के चलते राष्ट्रपति को हटाया जाए.

    वैसे भी रिपब्लिकन डोनाल्ड ट्रंप का कार्यकाल अब कुछ ही दिन का बचा है. 20 जनवरी को डेमोक्रेट जो बाइडन राष्ट्रपति के तौर पर उनकी जगह ले लेंगे.

    लेकिन प्रतिनिधि सभा की स्पीकर नैंसी पेलोसी समेत डेमोक्रेट्स चाहते हैं कि ट्रंप को उन क़दमों के लिए ज़िम्मेदार ठहराया जाए, जिनकी वजह से कइयों को लगता है कि 6 जनवरी की हिंसा हुई.

    हालाँकि उनको हटाने में अब बहुत देर हो गई है, क्योंकि उनका कार्यकाल ख़त्म होने ही वाला है. ऐसे में डेमोक्रेट्स चाहेंगे कि उन पर प्रतिबंध लगाया जाए, जिसमें एक पूर्व राष्ट्रपति के तौर पर उन्हें मिलने वाली सुविधाओं और भविष्य में कोई पद मिलने की संभावना को रोकने जैसे प्रतिबंध शामिल हों.

  20. दुष्यंत चौटाला: हरियाणा की खट्टर सरकार में बने रहना मजबूरी या ज़रूरी?

    किसानों के रोष के चलते हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर की करनाल की रैली रद्द होने पर और करीब 900 लोगों पर मामला दर्ज़ होने पर राज्य में बड़ी हलचल होनी शुरू हो गई है.

    एक तरफ इंडियन नेशनल लोक दल के नेता अभय चौटाला ने अपना कंडीशनल (सशर्त) त्याग पत्र विधान सभा अध्यक्ष को भेज दिया है वहीं दूसरी तरफ जननायक जनता पार्टी (जजपा) के सभी विधायक और सीनियर नेता दिल्ली केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से मिलने के रास्ते में हैं.

    बीबीसी से बात करते हुए जजपा के हरियाणा प्रधान निशान सिंह ने कहा कि उनकी मीटिंग का एजेंडा एक ही रहेगा कि किसान आंदोलन के चलते मामला सेंसिटिव होता जा रहा हैं और केंद्र सरकार उसको इस तरीके से आगे से डील करे ताकि किसानों में और ज्यादा रोष उत्पन्न ना हो.

    उन्होंने कहा, "हम सरकार को वस्तुस्थिति बताने जा रहे हैं और आशा है कि किसानों का हल जल्दी ही निकलेगा."