अमेरिकी अधिकारियों ने घोषणा की है कि अब कैपिटल बिल्डिंग को सुरक्षित कर लिया गया है.
लाइव कवरेज
तीसरे टेस्ट के लिए भारतीय टीम घोषित, रोहित शर्मा कर सकते हैं ओपनिंग
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भारत ने ऑस्ट्रलिया
के ख़िलाफ़ अपने तीसरे टेस्ट मैच के 11 खिलाड़ियों की सूची जारी कर दी है.
सिडनी में खेले
जाने वाले तीसरे टेस्ट में ओपनर बल्लेबाज़ के तौर पर मयंक अग्रवाल की जगह रोहित
शर्मा को लाया गया है.
रोहित शर्मा आख़िरी
दो टेस्ट में टीम इंडिया के उप-कप्तान भी होंगे.
उमेश यादव को चोट
लगने के बाद उनकी जगह नवदीप सैनी को टीम में लिया गया है जो कि अपना पहले टेस्ट डेब्यू करेंगे.
बाक़ी खिलाड़ी वहीं है जो मेलबर्न टेस्ट में थे.
इस टेस्ट मैच के
लिए प्लेइंग-11 में ये नाम हैं- रोहित शर्मा, शुभमन गिल, चेतेश्वर पुजारा, अजिंक्य
रहाणे, हनुमा विहारी, ऋषभ पंत, रवींद्र जडेजा, रविचंद्रन आश्विन, मोहम्मद सिराज,
जसप्रीत बुमराह, नवदीप सैनी.
सुप्रीम कोर्ट ने धर्म-परिवर्तन से जुड़े क़ानूनों पर यूपी और उत्तराखंड को दिया नोटिस
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मुख्य न्यायाधीश
एसए बोबडे की बेंच ने उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड के धर्म-परिवर्तन संबंधित क़ानूनों
की संवैधानिक वैधता को चुनौती देने वाली याचिका पर नोटिस जारी किया है.
लाइव लॉ वेबसाइट के
मुताबिक़, जस्टिस एसए बोबडे, जस्टिस वी रामासुब्रमणियन और एएस बोपन्ना की बेंच ने विशाल
ठाकरे एवं अन्य और तीस्ता सीतलवाड़ के एनजीओ ‘सिटिज़न फॉर जस्टिस एंड पीस’ की याचिकाओं पर बुधवार को सुनवाई की.
हालांकि बेंच ने उस
प्रावधान पर स्टे देने से मना कर दिया जिसमें शादी के लिए धर्म-परिवर्तन से पहले
इजाज़त लेने की बात है.
नवंबर में उत्तर
प्रदेश सरकार ‘विधि विरुद्ध धर्म संपरिवर्तन प्रतिषेध अध्यादेश 2020’ लेकर आई जिसके मुताबिक़ कोई व्यक्ति
महज़ धर्म-परिवर्तन के लिए शादी करता है या ज़बरदस्ती धर्म-परिवर्तन करवाता है तो
उसे दस साल की सज़ा हो सकती है.
इस क़ानून में ये
भी कहा गया है कि अगर कोई व्यक्ति अपनी मर्ज़ी से अपना धर्म परिर्वतन करना चाहता
है तो उसे डीएम या एडीएम को 60 दिन पहले लिख कर देना होगा.
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वहीं, उत्तराखंड के फ्रीडम ऑफ रिलीजन एक्ट 2018 में भी प्रावधान है कि अगर धर्म परिवर्तन के लिए शादी की जाए या ज़बरदस्ती धर्म-परिवर्तन करवाया जाए तो उसे अवैध माना जाएगा.
लाइव लॉ के मुताबिक़ बुधवार को सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई में पहले तो बेंच ये मामला नहीं सुनना चाहती थी और याचिकाकर्ताओं को अपने-अपने हाई कोर्ट जाने को कहा.
लेकिन इन याचिकाओं से जुड़े वकीलों ने ज़ोर दिया कि वे दो राज्यों के क़ानून को चुनौती दे रहे हैं जिनकी वजह से समाज में व्यापक समस्या खड़ी हो रही है. वकीलों ने कहा कि मध्य प्रदेश और हरियाणा भी इसी तरह के क़ानून ला रहे हैं.
वकीलों ने कहा कि जब एक से ज़्यादा हाई कोर्ट में मामला चल रहा हो तो बेहतर है कि सुप्रीम कोर्ट उस मामले का संज्ञान ले.
इसके बाद बेंच ने नोटिस जारी किया जिस पर राज्यों को चार हफ़्ते में जवाब देना है.
कोरोना वैक्सीन के बारे में वो सब, जो आप जानना चाहते हैं
ब्रेकिंग न्यूज़, कृषि क़ानूनों के ख़िलाफ़ विरोध प्रदर्शन के मामले को बातचीत से सुलझाया जाए: सुप्रीम कोर्ट
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नए कृषि क़ानूनों को लेकर सुप्रीम कोर्ट
में हो रही सुनवाई के दौरान मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि कृषि क़ानूनों के ख़िलाफ़ हो रहे विरोध प्रदर्शन के मामले को बातचीत से
सुलझाया जाए.
सुप्रीम कोर्ट ने विरोध प्रदर्शन को लेकर
चिंता भी जताई है.
केंद्र सरकार की ओर से सुप्रीम कोर्ट में
कहा गया था कृषि क़ानूनों को लेकर स्वस्थ चर्चा चल रही है. इस पर कोर्ट ने कहा, “हम बातचीत को
बढ़ावा देते हैं.”
एक वकील ने
सुप्रीम कोर्ट में तीनों कृषि क़ानूनों को रद्द करने की अपील दायर की थी. सुनवाई
के दौरान कोर्ट ने कहा कि हम किसानों की स्थिति को समझते हैं.
सुप्रीम कोर्ट ने
सुनवाई को 11 जनवरी तक के लिए स्थगित कर दिया है.
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'पिछड़ी जाति' के पुजारी, जिन्होंने इबादत के लिए लड़ी हक़ की लड़ाई
किसान आंदोलन: बारिश और ठंड से बचने के लिए किसान कर रहे इंतज़ाम
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कृषि क़ानूनों के ख़िलाफ़ दिल्ली की
सीमाओं पर विरोध प्रदर्शन कर रहे किसानों को बारिश और कड़ाके की ठंड का सामना करना
पड़ रहा है.
दिल्ली और आसपास के इलाक़ों में कुछ दिनों
से लगातार बारिश हो रही है और ठंड बढ़ गई है. ऐसे में विरोध प्रदर्शन की जगह पर सड़क
पानी से बार-बार भर जाती है.
लेकिन, अब बारिशों और ठंड से बचने के लिए
किसानों ने भी इंतज़ाम करने शुरू कर दिए हैं. कहीं, टैंट में बिस्तर ऊंचे किए जा
रहे हैं तो कहीं वॉटरप्रूफ टेंट लगाकर भीगने से बचने की तैयारी चल रही है.
सिंघु बॉर्डर पर भी वॉटरप्रूफ टेंट लगाकर लोगों के रुकने का इंतज़ाम किया गया है.
दिल्ली की अलग-अलग सीमाओं पर एक महीने से
भी ज़्यादा समय से बड़ी संख्या में किसानों का विरोध प्रदर्शन जारी है.
किसान संगठनों की मांग है कि सरकार तीनों
कृषि क़ानूनों को रद्द कर दे लेकिन सरकार का कहना है कि क़ानून के जिन
प्रावधानों में आपत्ति है उनमें वो बदलाव के लिए तैयार है.
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रिश्वत लेने के आरोपी उद्योगपति को चीन की कम्युनिस्ट सरकार दे रही मौत की सज़ा
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चीन के एक बड़े उद्योगपति रहे लाई
शिओमिन को सुनाई गई मौत की सज़ा पर कई मानवाधिकार कार्यकर्ताओं ने चिंता ज़ाहिर की
है. इनका कहना है कि ‘शिओमिन के जुर्म के लिए यह बहुत ही ज़्यादा कड़ी सज़ा
है.’
लाई शिओमिन को साल 2018 में
गिरफ़्तार किया गया था. उन पर आरोप है कि उन्होंने लगभग दस साल के अंतराल में 280
मिलियन अमेरिकी डॉलर की रिश्वत ली. चीनी करेंसी युआन में यह रक़म और भी ज़्यादा
होती है.
कहा जा रहा है कि लाई शिओमिन को
सुनाई गई सज़ा, राष्ट्रपति शी जिनपिंग के ‘भ्रष्टाचार विरोधी अभियान’ का हिस्सा है और इस अभियान के तहत
किसी को सुनाई गई ‘अब तक की सबसे कठोर सज़ा’ भी है.
चीनी अधिकारियों के अनुसार, लाई शिओमिन
ने ह्युआरोंग एसेट मैनेजमेंट कंपनी का चेयरमैन रहते हुए अपराध किया. उन्होंने 1999
में इस वित्तीय कंपनी की स्थापना की थी.
मंगलवार को, चीनी शहर तियानजिन की
एक अदालत ने लाई को सज़ा सुनाते हुए कहा कि ‘उनके अपराध से देश के हितों को भारी क्षति पहुँची है.’
लेकिन मानवाधिकार संगठनों का कहना
है कि लाई को सुनाई गई सज़ा अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार मानकों का सम्मान नहीं करती.
ह्यूमन राइट्स वॉच में एशिया के
डिप्टी डायरेक्टर फ़िल रॉबर्टसन ने बीबीसी से बातचीत में कहा, “रिश्वत लेने जैसे आर्थिक अपराध के लिए लाई को मौत की सज़ा साफ़तौर पर चीन
द्वारा किये गए अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार मानकों के वायदे की अवहेलना है. उनकी मौत की सज़ा को कारावास में
बदला जाना चाहिए.”
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मानवाधिकार संगठनों का कहना है कि चीनी सरकार इस सज़ा के ज़रिये व्यापारी समुदाय में भय पैदा करना चाहती है ताकि सभी एक ख़ास तरीक़े से अनुशासित रहें.
ह्यूमन राइट्स वॉच, एक संगठन के तौर पर सज़ा-ए-मौत के ख़िलाफ़ रहा है और उसका विश्वास है कि मौत की सज़ा जीवन के अधिकार के ख़िलाफ़ होती है.
लाई शिओमिन चीनी सेंट्रल बैंक के लिए काम कर चुके हैं. वे चीन के बैंकिंग नियामक से भी जुड़े रहे. लाई के नेतृत्व में उनकी कंपनी ह्युआरोंग एसेट मैनेजमेंट ने बहुत तेज़ी से प्रगति की थी. कंपनी में तेज़ी से निवेश हुआ था.
चीन एक फ़ाइनेंस मैग्ज़ीन ने लाई के बारे में लिखा था कि उन्होंने सौ से ज़्यादा संपत्तियाँ बनाईं और अपनी पत्नी समेत अपनी प्रेमिकाओं में बाँट दीं.
चीन की कम्युनिस्ट पार्टी ने पिछले कुछ वर्षों में भ्रष्टाचार को लेकर सरकारी अधिकारियों और कंपनी के बड़े अधिकारियों के ख़िलाफ़ कड़ा रुख़ अपनाया है और स्थानीय मीडिया में प्रकाशित रिपोर्टों के अनुसार, अब तक दस लाख से ज़्यादा लोगों के ख़िलाफ़ कार्रवाई हो चुकी है.
अमेरिका ने आठ चीनी एप्स के साथ लेन-देन पर लगाया प्रतिबंध
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अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने आठ
चीनी एप्स के साथ लेन-देन पर प्रतिबंध लगा दिया है. इस संबंध में राष्ट्रपति ने एक
कार्यकारी आदेश पर हस्ताक्षर किए हैं.
इन एप्स में प्रचलित ऑनलाइन पेमेंट प्लेटफॉर्म्स अलिपे, क्यूक्यू वॉलेट और वीचैट भी शामिल हैं.
आदेश में कहा गया है कि राष्ट्रीय सुरक्षा
को ख़तरे के चलते इन ऐप्स पर प्रतिबंध लगाया गया है. ये आदेश 45 दिनों में प्रभावी
हो जाएगा.
इन एप्स को लेकर आशंका जताई गई है कि इनका
अमेरिकी सरकारी कर्मचारियों को ट्रैक करने और उनके ख़िलाफ़ दस्तावेज़ तैयार करने के
लिए इस्तेमाल किया जा सकता है.
इस आदेश में टेंसेंट क्यूक्यू, कैमस्कैनर,
शेयरइट, वीमैट और डब्ल्यूपीएस ऑफ़िस जैसे एप्स भी शामिल हैं.
राष्ट्रपति के आदेश में कहा गया है, “अमेरिका हमारी
राष्ट्रीय सुरक्षा के बचाव के लिए उनके ख़िलाफ़ आक्रामक कार्रवाई करेगा जो चीन से
जुड़े सॉफ्टवेयर एप्लिकेशंस को विकसित या नियंत्रित करते हैं.”
इसराइल के उन लोगों की कहानी, जिनकी ज़िंदगी कोरोना ने बदल दी
ब्रेकिंग न्यूज़, एक दिन में भारत में कोरोना के 18,088 नये मामले
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भारत में बीते 24 घंटों में कोरोना
संक्रमण के 18,088 नए मामले सामने आए हैं जबकि 264 लोगों की मौत हुई है.
इसके साथ ही भारत में कोरोना
संक्रमण के कुल मामलों की संख्या 1 करोड़ 3 लाख से अधिक हो गई है जबकि मौतों का
आंकड़ा 1,50,114 है.
वहीं, बीते 24 घंटों में कोरोना से
21,314 लोग ठीक भी हुए हैं.
भारतीय अर्थव्यवस्था में 9.6 प्रतिशत गिरावट का अनुमान: विश्व बैंक
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विश्व बैंक की एक रिपोर्ट के मुताबिक़, भारत
की अर्थव्यवस्था में वित्त वर्ष 2020-21 में 9.6 प्रतिशत की गिरावट आने का अनुमान
है. यह परिवार के स्तर पर ख़र्च और निजी निवेश में आई कमी को दिखाता है.
वहीं, विश्व बैंक ने अगले वित्त वर्ष 2021-22
में भारतीय अर्थव्यवस्था में 5.4 प्रतिशत की वृद्धि होने का अनुमान लगाया है.
विश्व बैंक ने अपनी वैश्विक आर्थिक
संभावना रिपोर्ट में कहा है कि कोरोना वायरस महामारी के कारण असंगठित क्षेत्र में
काम करने वाले लोगों की आय बुरी तरह प्रभावित हुई है.
रिपोर्ट में कहा गया है, “भारत में
अर्थव्यवस्था पर महामारी का प्रभाव ऐसे समय पर पड़ा जब उसमें पहले ही गिरावट आ रही
थी. वित्तीय वर्ष 2020-21 में उत्पादन में 9.6 प्रतिशत की गिरावट आने का अनुमान है
जो परिवार के ख़र्च और निजी निवेश में आई कमी को दिखाता है.”
विश्व बैंक ने
पाकिस्तान को लेकर भी अनुमान जारी किये हैं. बैंक के मुताबिक़ पाकिस्तान में सुधार
धीमा रहेगा और 2020-21 में वृद्धि दर 0.5 प्रतिशत रहने का अनुमान है. राजस्व की मज़बूती को लेकर लगातार पड़
रहे दबाव और सेवा क्षेत्र में कमज़ोरियों को देखते हुए वृद्धि पर असर पड़ने की
आशंका है.
दक्षिण एशिया के अन्य देशों में कोविड-19 का आर्थिक असर अपेक्षाकृत कुछ कम रहा है लेकिन उसके बावजूद भी वो बहुत प्रभावित
हुए हैं. जिन देशों में अर्थव्यवस्था पर्यटन पर आधारित है वहां कोरोना
वायरस महामारी का प्रतिकूल प्रभाव पड़ा है.
कोरोना वैक्सीन का भारत में टीकाकरण कितने दिनों में होगा शुरू
चीन के अख़बार ने भारत को दी घरेलू मसलों पर ध्यान देने की नसीहत
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भारत और चीन के बीच वास्तविक नियंत्रण
रेखा पर चले रहे सीमा विवाद के बीच चीन ने भारत को अपने घरेलू मसलों पर ज़्यादा
ध्यान देने की नसीहत दी है.
चीन के सरकारी अख़बार ग्लोबल टाइम्स के मुताबिक़ भले ही भारत और चीन के बीच सीमा गतिरोध को ख़त्म करने के लिए अभी तक बातचीत
नहीं हुई है लेकिन भारतीय सेना भी सीमा गतिरोध को जल्द से जल्द समाप्त करना चाहती है.
मौजूदा गतिरोध भारत के घरेलू संसाधनों और
सैन्य ऊर्जा को ख़र्च कर रहा है.
कुछ विशेषज्ञों का मानना है कि भारत में
सीमा के मसले को लेकर लोगों की राय की जगह अब 2021 में वैक्सीन की प्राथमिकताओं ने
ले ली है.
अख़बार ने लिखा है कि मोदी सरकार के लिए
घरेलू मामलों पर सरकार और लोगों के बीच हो रहे विवाद को सुलझाना सबसे ज़्यादा महत्वपूर्ण
मुद्दे हैं. इन मुद्दों में कृषि क़ानून और भूमि का वितरण शामिल है.
इस संदर्भ में भारत को सीमा पर तनाव
बढ़ाने की बजाय अपने घरलू मामलों पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए.
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अख़बार ने लिखा कि भारत की निरंतर मुखरता सीमा मुद्दे को हल करने के लिए अनुकूल नहीं है. ये ध्यान देने वाली बात है कि भारत की चीन नीति उलझन भरी है और अपनी ही बातों का खंडन करती है.
अपनी ताक़त दिखाते हुए भारत सीमा मुद्दे को सक्रियता और शांति से हल करना चाहता है. लेकिन, भारत कूटनीतिक अवसरों पर जो कहता है वो उसके कार्यों के उलट होता है और इससे सीमा गतिरोध को शांतिपूर्ण तरीक़े से हल करने की प्रक्रिया बाधित होती है.
वर्तमान अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था के तहत, चीन और भारत के लिए अपने टकराव के शांतिपूर्ण समाधान के लिए काम करना ज़्यादा महत्वपूर्ण है.
हालांकि, सीमा गतिरोध के पूरी तरह सुलझे बिना अल्पावधि में द्विपक्षीय संबंधों में सुधार होना मुश्किल होगा.
नमस्कार!
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