कुछ कांग्रेसी नेताओं ने रविवार को भारत बायोटेक की कोविड वैक्सीन – कोवैक्सीन – को आपातकालीन इस्तेमाल की मंज़ूरी मिलने पर सवाल उठाये हैं.
इन नेताओं का कहना है कि भारत बायोटेक की वैक्सीन को जल्दबाज़ी में मंज़ूरी दी गई है जो ख़तरनाक साबित हो सकता है. हालांकि, पार्टी के भीतर ही इस वैक्सीन को मिली मंज़ूरी को लेकर मतभेद हैं.
पार्टी प्रवक्ता रणदीप सिंह सुरजेवाला ने इस देसी वैक्सीन को विकसित करने वाले वैज्ञानिकों को तारीफ़ की है. लेकिन पार्टी के अन्य नेताओं, जैसे आनंद शर्मा, जयराम रमेश और शशि थरूर ने केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय से सवाल किया है कि क्यों इस वैक्सीन को मंज़ूरी देने के लिए ज़रूर प्रोटोकॉल तोड़े गये?
भारतीय दवा नियामक डीसीजीआई ने रविवार को ऑस्कफ़ोर्ड यूनिवर्सिटी द्वारा बनाई गई कोरोना वैक्सीन 'कोविशील्ड' और भारत बायोटेक की 'कोवैक्सीन' के आपातकालीन इस्तेमाल को मंज़ूरी दी है.
कांग्रेस नेता आनंद शर्मा ने सवाल उठाया है कि डीसीजीआई की विशेषज्ञ समिति के समक्ष भारत बायोटेक ने जो ज़रूरी क़ागज़ात पेश किये हैं, उनके अनुसार वैक्सीन के तीसरे फ़ेज़ का ट्रायल पूरा ही नहीं हुआ, जो ज़रूरी है. शर्मा ने कहा है कि वैक्सीन कितनी सुरक्षित है और कोविड को रोकने में यह कितनी सक्षम है, इससे संबंधित डेटा देखा ही नहीं गया.
पार्टी नेताओं का कहना है कि स्वास्थ्य मंत्रालय को बताना चाहिए कि आख़िर क्यों ये ज़रूरी प्रोटोकॉल फ़ॉलो नहीं किये गए. पार्टी नेता शशि थरूर ने कहा है कि वक़्त से पहले ही कोवैक्सीन के इस्तेमाल को मंज़ूरी दे दी गई है, इसलिए इसके इस्तेमाल से बचना चाहिए.
जयराम रमेश ने प्रश्न उठाया है कि "केंद्रीय मंत्री हर्षवर्धन ही देश को बतायें कि टीकों के मामले में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर जिन नियमों का पालन होता है, उन्हें भारत में क्यों बदल दिया गया."
जयराम का इशारा भी तीसरे फ़ेज़ के ट्रायल्स की तरफ ही था.
इस बीच, केंद्रीय मंत्री हरदीप पुरी ने कांग्रेस के नेताओं पर निशाना साधा है. उन्होंने कहा है कि कांग्रेस के नेता ठीक वैसे ही व्यवहार कर रहे हैं, जैसे वो हर मामले में करते आये हैं. वो हमारे जवानों के शौर्य पर सवाल उठाते हैं और अब वो भारत में बने दो टीकों से नाख़ुश हैं.
इससे पहले समाजवादी पार्टी के नेता अखिलेश यादव ने भी इन कोविड वैक्सीनों पर सवाल उठाया था. उन्होंने शनिवार को इन्हें 'बीजेपी की वैक्सीन' बताते हुए कहा था कि 'वे वैक्सीन नहीं लगवाने वाले हैं.'