सरकार से आगे की बातचीत पर किसान संगठन आज करेंगे फ़ैसला

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नए कृषि क़ानूनों का विरोध कर रहे किसान संगठन केंद्र सरकार से आगे की बातचीत के प्रस्ताव पर आज फ़ैसला ले सकते हैं.
कल किसान यूनियनों ने इस बैठक को बुधवार तक के लिए टाला दिया था.
समाचार एजेंसी पीटीआई के मुताबिक़, दरअसल केंद्रीय कृषि मंत्रालय के संयुक्त सचिव विवेक अग्रवाल ने 40 यूनियनों के नेताओं को रविवार को एक पत्र भेजा था जिसमें पूछा गया था कि प्रदर्शनकारी किसान नेता क़ानूनों में संशोधन के लिए दिन गए पिछले प्रस्ताव को लेकर अपनी चिंताओं को साफ़ करें और अगले दौर की वार्ता के लिए अपनी सहूलियत से एक तारीख़ चुन लें, ताकि आंदोलन जल्द से जल्द ख़त्म हो सके.
इस पत्र पर पंजाब के किसान यूनियनों की को-ऑर्डिनेशन कमेटी में चर्चा की गई थी. लेकिन समय की कमी के चलते संयुक्त किसान मोर्चा की बैठक टाल दी गई थी.
दिल्ली के सिंघु बॉर्डर पर एक प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए किसान नेता कुलवंत सिंह संधु ने मंगलवार को कहा कि पंजाब की 32 किसान यूनियनों ने बैठक की और आगे की रणनीति पर चर्चा की.
उन्होंने कहा कि देश भर के किसान नेताओं की एक बैठक बुधवार को होगी, जिसमें सरकार के वार्ता के प्रस्ताव पर फ़ैसला लिया जाएगा.
संधु ने कहा कि किसान ब्रिटेन के सांसदों को पत्र लिखकर अपील करेंगे कि वो अपने प्रधानमंत्री बोरिस जॉनसन पर 26 जनवरी की गणतंत्र दिवस की परेड में शामिल ना होने का दबाव बनाएं. जॉनसन अगले महीने होने वाले आयोजन के मुख्य अतिथि होंगे.
इस बीच केंद्रीय कृषि मंत्री नरेंद्र तोमर ने प्रदर्शनकारी संगठनों के सरकार के साथ फिर से जल्द वार्ता शुरू करने की उम्मीद जताई. उन्होंने मंगलवार को कहा कि उन्हें उम्मीद है कि प्रदर्शनकारी किसान संगठन जल्द अपनी आंतरिक चर्चा पूरी करेंगे और संकट के समाधान के लिए सरकार के साथ फिर से वार्ता शुरू करेंगे. मंगलवार को तोमर ने एक बार फिर ये भी दोहराया कि कृषि सुधार कानून भारतीय कृषि के क्षेत्र में नए युग की शुरुआत करेंगे. हालांकि किसान किसान तीनों कृषि क़ानूनों को वापस लिए जाने की मांग पर अडिग हैं.
वहीं कांग्रेस ने मंगलवार को कहा कि राहुल गांधी की अगुवाई में पार्टी के वरिष्ठ नेता और सांसद 24 दिसंबर को राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद को दो करोड़ हस्ताक्षरों के साथ ज्ञापन सौंपेंगे जिसमें केंद्रीय कृषि क़ानूनों को निरस्त करने की अपील की जाएगी.

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