मेसी ने तोड़ा पेले का रिकॉर्ड, किए 644 गोल - आज की बड़ी ख़बरें

लियोनल मेसी अब तक 749 मैच खेल चुके हैं और उन्होंने औसतन हर 1.16 मैच में एक गोल दाग़ा है.

लाइव कवरेज

  1. नेपाल: राजनीतिक अस्थिरता, राजशाही की वापसी या जन आंदोलन

  2. ब्रिटेन से भारत आए विमानों में 8 यात्री मिले कोरोना पॉज़िटिव

    एयर इंडिया का विमान

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    लंदन से भारत आई एयर इंडिया की एक फ्लाइट में सोमवार को छह यात्री कोविड पॉज़िटिव पाए गए हैं.

    ये फ्लाइट सोमवार दोपहर 11:30 बजे राजधानी दिल्ली पहुंची. यहां सभी यात्रियों का कोरोना टेस्ट किया गया जिसमें छह यात्री संक्रमित पाए गए.

    लंदन से आने वाला एक दूसरा विमान मंगलवार सुबह छह बजे दिल्ली पहुंचा है. जेनेस्ट्रिंग्स डायग्नॉस्टि सेंटर की संस्थापक डॉक्टर गौरी अग्रवाल के मुताबिक यात्रियों का टेस्ट किया जा रहा है.

    गौरी अग्रवाल ने न्यूज़ एजेंसी पीटीआई को बताया, “अब तक लगभग 100 टेस्ट पूरे हो चुके हैं. कोई पॉज़िटिव नहीं पाया गया है. आज रात दो और यात्री विमान आने वाले हैं.”

    वहीं, ब्रिटेन से कोलकाता पहुंची एक फ्लाइट में भी दो यात्री कोरोना से संक्रमित मिले हैं.

    222 यात्रियों के साथ एक विमान रविवार रात को नेताजी सुभाष चंद्र बोस अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पहुंचा था.

    पश्चिम बंगाल के स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग के एक अधिकारी ने पीटीआई को बताया, “25 यात्रियों के पास उनकी कोविड जांच रिपोर्ट नहीं थी. उन्हें नज़दीकी क्वारंटीन सेंटर में रखा गया और उनका कोरोना वायरस टेस्ट कराया गया. उनमें से दो यात्री कोविड-19 से संक्रमित पाए गए हैं.”

    ब्रिटेन में कोरोना वायरस का एक नया प्रकार पाया गया है जिसे लेकर पूरी दुनिया में चिंता जताई जा रही है.

    भारत ने इस नये प्रकार के ख़तरे को देखते हुए 23 से 31 दिसंबर के बीच ब्रिटेन से भारत आने वाली फ्लाइट्स रद्द कर दी हैं.

    साथ ही कहा गया है कि सोमवार और मंगलवार को ब्रिटेन से भारत आने वाले यात्रियों का अनिवार्य रूप से कोरोना वायरस टेस्ट किया जाएगा.

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  3. किसान आंदोलन पर शाहीन बाग़ की तरह पेश आ रही मोदी सरकार: कांग्रेस

    किसान आंदोलन

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    कांग्रेस नेता अभिषेक मनु सिंघवी ने मोदी सरकार के कृषि क़ानून के ख़िलाफ़ किसानों के प्रदर्शन को जानबूझकर बदनाम करने करने का आरोप लगाया है. सिंघवी ने कहा कि सरकार किसानों के प्रदर्शन को शाहीन बाग़ की तरह ट्रीट कर रही है.

    अभिषेक मनु सिंघवी ने ट्वीट कर कहा है, ''शाहीन बाग़ और किसानों के आंदोलन में कुछ चीज़ें एक सी हैं: जब प्रदर्शनकारी मौजूद नहीं हैं या वे वहां से निकलने का रास्ता दे रहे हैं तब भी एक ख़ास सड़क को बंद करके रखा गया है. चिल्ला बॉर्डर को बंद करने का कोई मतलब नहीं है. क्या किसानों के आंदोलन को जानबूझकर बदनाम करने की यह साज़िश है?''

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    उधर कांग्रेस मीडिया सेल के प्रमुख रणदीप सिंह सुरजेवाला ने भी ट्वीट कर मोदी सरकार पर निशाना साधा है.

    रणदीप ने अपने ट्वीट में लिखा है, ''सूट-बूट वाले फकीर की आँखें कब खुलेंगी? मोदी जी, आप इतिहास के सबसे क्रूर प्रधानमंत्री साबित हुए हैं. आपकी सरकार के हाथ अन्नदाताओं के ख़ून से सने हैं. ज़रा भी नैतिकता बची है तो तीनों काले क़ानून वापस लीजिए.''

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  4. इमरान ख़ान क्या तुर्की के लिए सऊदी अरब को नाराज़ होने देंगे?

    सऊदी पाकिस्तान

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    पाकिस्तान और सऊदी अरब के बीच ख़राब होते द्विपक्षीय संबंधों को फिर से संभालने की कोशिश की जा रही है. सोमवार को पाकिस्तानी प्रधानमंत्री इमरान ख़ान और सऊदी में पाकिस्तान के राजदूत नवाफ़ बिन-सईद अल-माल्की की मुलाक़ात हुई है.

    सऊदी प्रेस एजेंसी के मुताबिक़ इस मुलाक़ात में द्विपक्षीय रिश्तों और कोविड 19 महामारी पर बात हुई. पाकिस्तान के प्रधानमंत्री कार्यालय से भी इस मुलाक़ात को लेकर बयान जारी किया गया है. पाकिस्तानी प्रधानमंत्री कार्यालय के बयान के मुताबिक़ दोनों देशों ने द्विपक्षीय संबंधों को पटरी पर लाने को लेकर बात की.

    बयान में कहा गया है, ''दोनों मुल्कों के बीच गहरे संबंधों का लंबा इतिहास है. हम इस संबंध को और मज़बूत करेंगे.''

    तुर्की पाकिस्तान

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    पिछले हफ़्ते ही पाकिस्तान ने सऊदी अरब से 2018 में लिए तीन अरब डॉलर के क़र्ज़ की दूसरी किस्त चुकाई थी. तब सऊदी अरब ने पाकिस्तान को डिफॉल्टर बनने से बचाया था. कहा जा रहा है कि अगले महीने तक पाकिस्तान बाक़ी रक़म भी चुका देगा.

    सऊदी अरब और पाकिस्तान के बीच ऐतिहासिक संबंधों के बावजूद क़र्ज़ के मामले सऊदी कोई मोहलत नहीं दे रहा है. पाकिस्तान, सऊदी को क़र्ज़ तब अदा कर रहा है जब कोविड-19 महामारी के कारण उसकी अर्थव्यवस्था की हालत बेहद ख़राब है. इसी से पता चलता है कि दोनों देशों के द्विपक्षीय संबंध गंभीर संकट में है.

    कहा जा रहा है कि इस्लामिक दुनिया नई करवट ले रही है. पाकिस्तान अपना झुकाव तुर्की, मलेशिया और ईरान की तरफ़ बढ़ा रहा है और सऊदी इसे बिल्कुल पसंद नहीं कर रहा. पाकिस्तानी विश्लेषकों का कहना है कि पाकिस्तान का हित तुर्की, ईरान और मलेशिया में नहीं है बल्कि सऊदी और यूएई से है क्योंकि इन दोनों देशों में पाकिस्तान के लाखों लोगों को रोज़गार मिला हुआ है.

    सऊदी

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    पाकिस्तानी प्रधानमंत्री का तुर्की के प्रति झुकाव इसी से समझ में आता है कि हाल ही में अमेरिका ने तुर्की पर रूस से रक्षा सौदे के मामले में प्रतिबंध लगाया तो पाकिस्तान ने इसका विरोध किया. दूसरी तरफ़ इमरान ख़ान पाकिस्तानियों से टर्किश टीवी ड्रामा एर्तरुल भी देखने की अपील कर चुके हैं. यह लोकप्रिय टीवी ड्रामा ऑटोमन साम्राज्य की महिमा गाथा है.

    ऑटोमन साम्राज्य से सऊदी की ऐतिहासिक दुश्मनी रही है. पाकिस्तानी अख़बार डॉन के अनुसार पाकिस्तान ने सऊदी अरब को क़र्ज़ चीन से क़र्ज़ लेकर चुकाया है. इस अख़बार का भी कहना है कि सऊदी अरब को यह बात पसंद नहीं है कि पाकिस्तान तुर्की और ईरान के साथ अपना रिश्ता गहरा करे. तुर्की और ईरान के साथ सऊदी अरब के रिश्ते दशकों से ख़राब हैं.

    इसी साल फ़रवरी में जब तुर्की के राष्ट्रपति रेचेप तैय्यप अर्दोआन पाकिस्तान के दौरे पर आए तो पाकिस्तानी प्रधानमंत्री इमरान ख़ान साझा प्रेस कॉन्फ़्रेंस में बड़े गर्व से कहा कि तुर्कों ने हिन्दुस्तान पर 600 सालों तक शासन किया. इमरान ख़ान ने कहा, ''आपके आने से हम सबको इसलिए भी ख़ुशी हुई कि कौम समझती है कि तुर्की से हमारे रिश्ते सदियों से हैं. तुर्कों ने तो 600 साल तक हिन्दुस्तान पर हुकूमत की थी.''

    सऊदी

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  5. एएमयू के 100 साल, पीएम मोदी ने बताया मिनी भारत

    प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी के शताब्दी समारोह में वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के ज़रिए शामिल हुए.

    प्रधानमंत्री ने कहा कि पिछली शताब्दी में मतभेदों के नाम पर बहुत समय पहले ही ज़ाया हो चुका है. उन्होंने कहा कि अब समय नहीं गंवाना है और सभी को एक लक्ष्य के साथ मिलकर नया भारत, आत्मनिर्भर भारत बनाना है.

    पीएम मोदी ने कहा, “हमें समझना होगा कि सियासत सोसाइटी का अहम हिस्सा है. लेकिन सोसाइटी में सियासत के अलावा भी दूसरे मसले हैं. सियासत और सत्ता की सोच से बहुत बड़ा, बहुत व्यापक किसी देश का समाज होता है.”

    प्रधानमंत्री मोदी ने कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि एएमयू कैंपस मिनी इंडिया लगता है.

    उन्होंने कहा, "मुझे बहुत से लोग बोलते हैं कि एएमयू कैंपस अपने आप में एक शहर की तरह है. अनेक विभाग, दर्जनों हॉस्टल, हजारों टीचर-छात्रों के बीच एक मिनी इंडिया नज़र आता है. यहां एक तरफ उर्दू पढ़ाई जाती है, तो हिंदी भी. अरबी पढ़ाई जाती है तो संस्कृति की शिक्षा भी दी जाती है."

    इसके साथ ही प्रधानमंत्री ने कोरोना संकट के दौरान एएमयू के योगदान की सराहना की. उन्होंने कहा कि लोगों का मुफ्त टेस्ट कराना, आइसोलेशन वार्ड बनाना, प्लाज्मा बैंक बनाना और पीएम केयर फंड में एक बड़ी राशि का योगदान देना समाज के प्रति आपके दायित्यों को पूरा करने की गंभीरता को दिखाता है.

    कार्यक्रम में शिक्षा मंत्री रमेश पोखरियाल निशंक और एएमयू के कुलपति सैयदना मुफद्दल सैफुद्दीन भी मौजूद रहे.

    समारोह को संबोधित करने के अलावा प्रधानमंत्री इस मौक़े पर एक डाक टिकट भी जारी किया.

    56 साल बाद भारत के किसी प्रधानमंत्री ने अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी को संबोधित किया है.

    इससे पहले 1964 में तत्कालीन प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री ने एएमयू को संबोधित किया था.

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  6. भारत: संक्रमण में रिकॉर्ड कमी, 24 घंटे में 19,556 नए मामले

    कोरोना

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    भारत में दर्ज किए जा रहे कोरोना वायरस संक्रमण के मामलों में लगातार कमी आ रही है. बीते 24 घंटे में संक्रमण के महज़ 19,556 नए मामले सामने आए हैं. कहा जा रहा है कि 2 जुलाई के बाद से रोज़ाना आ रहे मामलों में ये रिकॉर्ड कमी है.

    वहीं बीते 24 घंटों में 301 लोगों की मौत हुई है.

    ये भी अहम है कि देश में सक्रिय मामलों की संख्या कम होकर 2 लाख 92 हज़ार 518 हो गई है. बीते 24 घंटे में 30,376 लोग इस बीमारी से ठीक हुए हैं. अब तक देश में कुल 96 लाख 36 हज़ार 487 लोग ठीक हो गए हैं.

    भारत में अब तक के संक्रमण के कुल मामलों की संख्या 1 करोड़ 75 हज़ार 116 हो गई है और मरने वालों का आकड़ा बढ़कर 1 लाख 46 हज़ार 111 हो गया है.

    सोमवार को केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने जानकारी दी कि भारत का मौजूदा एक्टिव केसलोड देश के कुल पॉज़िटिव मामलों का महज़ 3.02 है और रिकवरी रेट बेहतर होकर 95.53 प्रतिशत हो गया है.

  7. ट्रंप ने पीएम मोदी को 'लीजन ऑफ मेरिट' अवॉर्ड दिया

    ट्रंप

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    अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सोमवार को भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को प्रतिष्ठित 'लीजन ऑफ मेरिट' अवॉर्ड से सम्मानित किया है. पीएम मोदी को यह सम्मान अमेरिका और भारत के बीच रणनीतिक साझेदारी मज़बूत करने और भारत के वैश्विक ताक़त के रूप में उभरने को लेकर दिया गया है.

    समाचार एजेंसी पीटीआई के अनुसार अमेरिका में भारत के राजदूत तरनजीत सिंह संधु ने प्रधानमंत्री मोदी की तरफ़ से यह सम्मान लिया है. तरनजीत सिंह संधु को यह सम्मान अमेरिका के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार रॉबर्ट ओ'ब्रायन ने व्हाइट हाउस में दिया.

    ओ'ब्रायन ने ट्वीट कर कहा, ''राष्ट्रपति ट्रंप ने भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को भारत और अमेरिका की रणनीतिक साझेदार में अहम भूमिका निभाने के लिए लीजन ऑफ मेरिट अवॉर्ड दिया है.''

    नरेंद्र मोदी भारत के एकमात्र प्रधानमंत्री हैं जिन्हें यह उच्चस्तरीय सम्मान मिला है. ओ'ब्रायन ने अपने अगले ट्वीट में कहा है, ''राष्ट्रपति ट्रंप ने ऑस्ट्रेलियाई पीएम स्कॉट मॉरिसन और जापान के पूर्व प्रधानमंत्री शिंज़ो आबे को भी लीजन ऑफ मेरिट अवॉर्ड दिया है.''

    इन दोनों देशों के राजदूतों ने ही इस सम्मान को स्वीकार किया है. स्कॉट मॉरिसन और शिंज़ो आबे को यह सम्मान इंडो-पैसिफिक में स्वतंत्र आवाजाही को लेकर उठाए गए क़दम पर दिया है. अमेरिका हाल के दिनों में सबसे नया देश है जिसने प्रधानमंत्री मोदी को उच्चस्तरीय सम्मान से नवाजा है. इससे पहले 2016 में सऊदी अरब, यूएई (2019), रूस (2019) और मालदीव भी अपना सर्वोच्च नागरिक सम्मान पीएम मोदी को दे चुके हैं.

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  8. कोरोना को लेकर भारत में क्या चिंता

    भारत में कोरोना

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    ब्रिटेन में मिले कोरोना वायरस के नए स्ट्रेन को लेकर बाक़ी दुनिया की तरह भारत भी चिंतित है.

    भारत सरकार ने ब्रिटेन से आने वाली सभी उड़ानों पर 31 दिसंबर तक रोक लगा दी है. ये प्रतिबंध 22 दिसंबर को रात 12 बजे से शुरू हो जाएगा.

    आज रात तक जितने भी यात्री भारत में पहुंचेंगे, उनका आरटी-पीसीआर टेस्ट किया जाएगा. जो संक्रमित पाए जाएंगे उन्हें क्वारंटीन में भेज दिया जाएगा और बाक़ी को सात दिन के लिए घर पर एकांतवास में रहना होगा.

    इस बीच मुंबई एयरपोर्ट पर ब्रिटेन के लिए उड़ान में सवार यात्रियों को लेने आए लोग परेशान होते रहे. उन्होंने समाचार एजेंसी एएनआई से कहा, “सरकार को हमें पहले बताना चाहिए था. यात्री अधिकारियों की अनुमति के बाद ही विमान में नहीं चढ़े थे.”

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    भारत में डर फैलने की एक वजह यह भी है कि जिन 23 देशों के साथ भारत में एयर बब्बल क़रार है, उसमें से ब्रिटेन भी एक देश है.

    हिंदुस्तान टाइम्स के मुताबिक़, केंद्रीय स्वास्थ्य सचिव राजेश भूषण ने पुष्टि की है कि ये सिर्फ़ एहतियाती क़दम है और भारत में ये स्ट्रेन नहीं मिला है.

    आईसीएमआर के महामारी विज्ञान और संक्रामक रोग के प्रमुख डॉ समीरन पांडा ने भी कहा, “हमें अभी तक अपने सैंपल में ब्रिटेन के स्ट्रेन से मिलता-जुलता कुछ नहीं मिला है. पुणे स्थित नेशनल इंस्टिट्यूट ऑफ़ वायरोलॉजी (एनआईवी) या देश की किसी भी अन्य प्रयोगशाला में जीनोम सिक्वेंसिंग के दौरान हमारे सैंपल में इस म्यूटेशन के कोई सबूत नहीं मिले हैं.”

    भारत में कोरोना

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    महाराष्ट्र में नाइट कर्फ्यू

    तेज़ी से फैलने वाले इस नए वेरिएंट के ख़तरे को देखते हुए महाराष्ट्र सरकार ने सोमवार को मुंबई और दूसरे शहरों में पांच जनवरी तक के लिए रात 11 बजे से अगली सुबह 6 बजे तक का नाइट कर्फ्यू लगा दिया और यूरोपी और मध्य पूर्व से आने वाले यात्रियों के लिए नए क्वारंटीन नियमों की घोषणा की.

    सोमवार शाम राज्य सरकार ने कहा कि यूरोप या मध्य पूर्व से आने वाले यात्रियों को अब 14 दिन के इंस्टीट्यूशनल क्वारंटीन में भेजा जाएगा और अन्य को इतने ही वक़्त के लिए घर में आइसोलेट होकर रहना होगा.

    नाइट कर्फ्यू के दौरान सब्ज़ी-दूध जैसे ज़रूरी सामानों की आपूर्ति बाधित नहीं होगी. हालांकि एक वक़्त पर एक जगह पांच लोगों से ज़्यादा लोग इकट्ठा नहीं हो सकते.

  9. किसान आंदोलन का समर्थन क्यों कर रहे हैं ब्रिटेन के कई सांसद

  10. नेपाल में फिर गहराया सियासी संकट

  11. कोरोना वायरस: नए वैरिएंट से ख़ौफ़

  12. किसानों ने निकाला अपना अख़बार

  13. प्रधानमंत्री आज अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी के शताब्दी समारोह में होंगे शामिल

    प्रधानमंत्री आज अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी के शताब्दी समाहोर में होंगे शामिल

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    प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आज अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी के शताब्दी समारोह में वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के ज़रिए शामिल होंगे.

    कार्यक्रम सुबह 11 बजे शुरू होगा. इसमें शिक्षा मंत्री रमेश पोखरियाल निशंक और एएमयू के कुलपति सैयदना मुफद्दल सैफुद्दीन भी मौजूद रहेंगे.

    समारोह को संबोधित करने के अलावा प्रधानमंत्री इस मौक़े पर एक पोस्टल स्टाम्प भी जारी करेंगे.

    ये सिर्फ दूसरी बार है जब देश का कोई प्रधानमंत्री यूनिवर्सिटी के 100 साल के इतिहास में वहां मौजूद रहेगा. प्रधानमंत्री मोदी का ये पहला एएमयू दौरा होगा, वो भी वर्चुअल माध्यम से.

    एएमयू में प्रधानमंत्री के संबधोन पर शैक्षणिक और राजनीतिक दोनों तरह के लोगों की नज़रें टिकी हैं. ये विश्वविद्यालय कई आंदोलनों का केंद्र बिंदु रहा है और सरकार की नीतियों का कड़ा आलोचक भी रहा है.

    पुराने वाकयों को देखते हुए यूनिवर्सिटी ने छात्रों से अपील की है वो अपना फोकस शैक्षिक और समारोह का आनंद लेने पर रखें.

    हालांकि ख़बरों के मुताबिक़, एएमयू छात्रसंघ के पूर्व उपाध्यक्ष नदीम अंसारी ने संबोधन से ठीक पहले विश्वविद्यालय के लिए मांगों की एक सूची ईमेल की है. जिसमें विश्वविद्यालय के अल्पसंख्यक दर्जे को रीन्यू करने, अतिरिक्त फंड देने के साथ-साथ गैर-शैक्षिक कर्मचारियों की नियुक्ति और आवास जैसे मुद्दे शामिल हैं. इसके साथ ही उन्होंने ऐसे ‘तत्वों के ख़िलाफ़ भी कार्रवाई की मांग की है, जिन्होंने विश्वविद्यालय को बदनाम किया और इसे चरमपंथियों की नर्सरी कहा.'

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  14. नेपाल में पीएम ओली का संसद भंग करने का दांव उन्हीं पर भारी पड़ेगा?

    केपी शर्मा ओली

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    नेपाल के प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली ने संसद भंग कर देश में राजनीतिक अस्थिरता खड़ी कर दी है. इसके साथ ही उन्होंने अपनी पार्टी को भी दोराहे पर ला दिया है. कहा जा रहा है कि ओली ने नेपाली कम्युनिस्ट पार्टी के भीतर ऐसा संकट ला दिया है जिसका अंत पार्टी का टूटना हो सकता है. ओली का अचानक लिया गया फ़ैसला पार्टी के भीतर प्रचंड और प्रधानमंत्री के बीच गहरी होती खाई का नतीजा भी बताया जा रहा है.

    आख़िर ओली ने संसद को भंग क्यों किया?

    दुनिया भर में कोविड 19 महामारी के काराण उथल-पुथल है. सरकारों को लेकर असंतोष है तो सरकारों पर स्वेचछाचारी होने के आरोप भी लग रहे हैं.

    नेपाल में ओली कोविड 19 से जिस तरीक़े से निपट रहे थे उसे लेकर वो अपनी पार्टी के भीतर ही निशाने पर थे. पार्टी की केंद्रीय और स्थायी समिति में ओली को लेकर असंतोष लगातार बढ़ रहा था. ये दोनों समितियाँ कम्युनिस्ट पार्टी में जैसे पोलित ब्यूरो काम करती है उसी तर्ज पर नेपाली कम्युनिस्ट पार्टी में भी इनका काम है.

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    प्रचंड बनाम ओली

    कोविड 19 से निपटने को लेकर पीएम ओली की आलोचना करने वाले पहले शख़्स पुष्प कमल दहाल 'प्रचंड' थे. प्रचंड ने संसद में दिए अपने भाषण में ओली पर सीधा हमला बोला था. उन्होंने कोविड 19 को लेकर सरकार के फ़ैसलों में अनियमितता की जाँच की मांग की थी.

    जब नेपाल की संसद में भारत से कालापानी विवाद को लेकर वोटिंग और बहस हो रही थी तब भी प्रचंड ने कोविड 19 महामारी को लेकर बहस की माँग की थी. ओली अपने आलोचकों को लेकर बहुत सख़्त रहे.

    उन्होंने नेपाल में कोविड 19 के लिए भारत को ज़िम्मेदार बताया. ओली ने कहा था कि भारत के कारण नेपाल में कोरोना संक्रमण के केस बढ़ रहे हैं. ओली की आलोचना करने वाले लोग हेल्थ सेक्टर में कथित घपले की ओर इशारा कर रह थे.

    ओली सरकार पर आरोप था कि महामारी से निपटने के लिए जिन उपकरणों की ख़रीद हुई उनमें पारदर्शिता नहीं थी. नेपाल अब भी वैक्सीन को लेकर कुछ नहीं कर पाया है. ऐसे में वहाँ के कोविड संकट को लेकर लोगों के मन में तमाम तरह की आशंकाएं हैं.

    नेपाल में कोविड 19 के मामले जैसे-जैसे बढ़ते गए, प्रचंड का हमला भी प्रधानमंत्री पर बढ़ता गया. कहा जाता है कि नेपाली पीएम ने हर ऐसे संकट को रणनीतिक तरीक़े से भारत के साथ विवादों की ओर मोड़ा. एक बार तो ओली ने कह दिया कि असली अयोध्या नेपाल में है न कि भारत में.

    नेपाल

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    ओली को लेकर पार्टी के भीतर विवाद बढ़ने लगा. पार्टी की स्टैंडिंग कमिटी में नेपाल के दो पूर्व प्रधानमंत्री प्रचंड और माधव कुमार नेपाल ने प्रस्ताव रखा कि एक व्यक्ति के पास एक ही पद होना चाहिए. ओली से कहा गया कि वो प्रधानमंत्री हैं तो पार्टी की पूरी कमान किसी और के पास होनी चाहिए.

    अभी नेपाल कम्युनिस्ट पार्टी के प्रंचड और ओली दोनों प्रमुख हैं. स्टैंडिंग कमिटी की तरफ़ से माँग की गई कि पार्टी की पूरी कमान प्रचंड के पास होनी चाहिए क्योंकि सरकार ओली के नेतृत्व काम कर रही है.

    इस मुद्दे पर पार्टी की दर्जनों बैठक हुईं लेकिन कोई सहमति नहीं बन पाई. गतिरोध बढ़ता गया. स्टैंडिंग कमिटी में प्रचंड के समर्थन वाले सदस्य ज़्यादा हैं और यह कमिटी प्रधानमंत्री ओली को उनकी कार्यप्रणाली को लेकर स्पष्टीकरण देने के लिए लगातार समन भेजती रही. लेकिन ओली लगातार इसकी उपेक्षा करते रहे.

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    सत्ता की भूख

    नेपाल की राजधानी काठमांडू में इंस्टिट्यूट फोर इंटिग्रेटेड डिवेलपमेंट स्टडीज चलाने वाले स्वर्णिम वाग्ले ने भारत के अंग्रेज़ी अख़बार द हिन्दू से कहा है, ''नेपाल कम्युनिस्ट पार्टी में संवाद बिल्कुल ख़त्म हो गया है और ऐसा ओली की सत्ता की भूख के कारण हुआ है.''

    स्वर्णिम वाग्ले कहते हैं, ''यह पीएम ओली के लिए आत्मघाती क़दम है. ओली ने जो फ़ैसला लिया है उसके लिए कोई संवैधानिक प्रावधान नहीं है. सुप्रीम कोर्ट में कम से कम आठ रिट पीटिशन दाखिल हो चुकी है. कोर्ट में ओली केस जीत पाएंगे, इसकी कोई संभावना नहीं है.''

    ओली के संसद भंग करने के फ़ैसले को राष्ट्रपति संवैधानिक प्रावधानों के आधार पर ख़ारिज कर सकती थीं लेकिन उन्होंने ऐसा नहीं किया. लेकिन संसद भंग और नए सिरे से चुनाव कराने की फ़ैसले को तभी अंतिम माना जाएगा जब न्यायपालिका से भी इसकी मंज़ूरी मिल जाए. इसके अलावा पार्टी का समर्थन भी अहम है. आने वाले दिन ओली के सियासी करियर और नेपाल की राजनीति के लिए काफ़ी अहम हैं.

    ओली

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    ओली ने अपने फ़ैसले का किया बचाव

    दूसरी तरफ़ ओली ने सोमवार को राष्ट्र के नाम संबोधन में अपने फ़ैसले का बचाव किया. ओली ने कहा कि उन्हें नया जनादेश के लिए मजबूर किया गया है. ओली के ख़िलाफ़ संसद में अविश्वास प्रस्ताव लाने की तैयारी चल रही और उससे पहले ही उन्होंने संसद भंग करने का फ़ैसला ले लिया. ओली ने अपने संबोधन में कहा, ''मेरी सरकार को ठीक से काम नहीं करने दिया जा रहा था, ऐसे में नया जनादेश लेने के लिए यह फ़ैसला करना पड़ा.''

    ओली के फ़ैसले को नेपाल में संवैधानिक तख्तापलट कहा जा रहा है.

  15. नमस्कार

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