किसान आंदोलन: सिंघु बॉर्डर पर एक किसान ने आत्महत्या की कोशिश की: आज की बड़ी ख़बरें
पंजाब के तरनतारन के रहने वाले निरंजन सिंह नाम के इस शख्स को रोहतक के पीजीआईएमएस में भर्ती कराया गया है. अभी उनकी हालत स्थिर बताई जा रही है.
लाइव कवरेज
नेपाल के प्रधानमंत्री ओली बोले, पार्टी के भीतर अंदरूनी संघर्ष ने संसद को शर्मिंदा किया है
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नेपाल के प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली ने राष्ट्र
को संबोधित करते हुए कहा कि उनके पास लोगों के सामने जाने के अलावा कोई विकल्प नहीं
था.
उन्होंने कहा कि, "कुछ
नेताओं की असंगत, विकृत और उल्टी गतिविधियों के कारण यह स्थिति बनी है."
प्रचंड और माधव कुमार नेपाल
पर निशाना साधते हुए, ओली ने कहा कि नेताओं ने सरकार बनने के एक साल से भी कम समय में देश छोड़ दिया
था. देश तब अस्थिरता की स्थिति में था जब वे देश में नहीं थे.
ओली ने कहा कि सरकार काम और पार्टी में एकजुटता दोनों ही काम को एक साथ आगे नहीं बढ़ा सकती.
उन्होंने कहा, "सरकार के काम को नकारात्मक
रूप से प्रचारित किया गया, इस काम में तो विपक्ष को भी पीछे छोड़ दिया गया."
"पार्टी के भीतर अंदरूनी संघर्ष ने संसद को शर्मिंदा किया है."
ओली ने कहा, "यह उनका अपमान था.
वो सम्मेलन के लिए चार महीने भी इंतज़ार नहीं कर सकते थे."
ओली ने अपने संबोधन में विकास
सूचकांक में प्रगति, नए नक्शों के प्रकाशन, समस्याओं के समाधान के रूप में भारत के साथ बातचीत और अपनी सरकार
की उपलब्धियों के रूप में अंतरराष्ट्रीय छवि में सुधार का हवाला दिया.
ओली ने कहा कि इस तरह का फैसला
इसलिए लेना पड़ा क्योंकि पार्टी के भीतर कलह ने संसद को भी शर्मिंदा कर दिया था.
"ताजा घटनाक्रम ने उन
लोगों के लिए एक विकल्प दिया है जो प्रधानमंत्री बनने का बेसब्री से इंतजार कर रहे
हैं."
ओली ने कहा, "मुझे लगता है कि लोगों
का निर्णय लेना सबसे लोकतांत्रिक तरीका है."
ओली ने कहा कि देश को अभी
सरकार के बिना नहीं माना जाना चाहिए क्योंकिराज्य और स्थानीय सरकारें
अभी भी कायम हैं.
नेपाल की राष्ट्रपति बिद्या देवी भंडारी ने ओली सरकार की सिफारिश के अनुसार देश की संसद यानी प्रतिनिधि सभा को भंग कर दिया और मध्यावधि चुनावों की घोषणा की है.
कोरोना वायरस: नए वैरिएंट के कारण भारत ने रोकी ब्रिटेन की उड़ानें, क्या कहते हैं जानकार
ब्रिटेन में कोरोना वायरस के नए वैरिएंट मिलने के बाद सेंसेक्स बुरी तरह गिरा
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ब्रिटेन में कोरोना वायरस
के नए वैरिएंट के मिलने से पैदा हुए दहशत के बीच सेंसेक्स में 1407 अंकों की
गिरावट दर्ज की गई है.
बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज तीन
फ़ीसद की गिरावट के साथ 45,553.96 पर बंद हुआ और नेशनल स्टॉक एक्सचेंज 432.15
फ़ीसद की गिरावट के साथ 13,328 अंकों पर बंद हुआ. इसमें 3.14 की गिरावट दर्ज की गई.
सेंसेक्स के सभी इंडेक्स
लाल रंग पर जाकर रुके. इसमें सबसे ज्यादा ओएनजीसी के शेयर में 9 फ़ीसद की गिरावट
आई.
कई
यूरोपीय देशों जैसे फ्रांस, जर्मनी, नीदरलैंड, बेल्जियम, ऑस्ट्रिया और इटली ने कोरोना
वायरस के नए वेरिएंट के मिलने के बाद ब्रिटेन से उड़ान भरने वाले विमानों पर
पाबंदी लगा दी है. ब्रिटेन की सरकार ने भी रविवार से लंदन और दूसरे इलाकों में घर
में रहने की चेतावनी जारी की है.
भारत
ने भी ब्रिटेन से 23 दिसंबर से लेकर 31 दिसंबर तक उड़ाने भरने वाले विमानों को
स्थगित कर दिया है.
किसान आंदोलन: बीजेडी ने एमएसपी पर किसानों की मांग का समर्थन किया
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ओडिशा की सत्तारूढ़ बीजू
जनता दल (बीजेडी) ने किसानों के न्यूनतम समर्थन मूल्य की मांग का समर्थन किया है. बीजेडी
ने इसके साथ ही एमएस स्वामीनाथन कमेटी की रिपोर्ट लागू करने की भी मांग उठाई है.
बीजेडी ने कहा है कि
किसानों का सर्वांगीण विकास हमेशा उनकी प्राथमिकता रही है. राज्य कार्यकारिणी की
बैठक में पार्टी ने प्रस्ताव पारित किया कि, "हमारी पार्टी न्यूनतम समर्थन मूल्य के मुद्दे पर किसानों के
साथ है और हम इस मुद्दे पर स्वामीनाथन कमेटी की रिपोर्ट लागू करने को लेकर संघर्ष
करेंगे."
हाल ही में ओडिशा की
कैबिनेट में इस प्रस्ताव पर मुहर लगी कि राज्य सरकार केंद्र सरकार से स्वामीनाथन कमेटी रिपोर्ट की सिफारिशों को लागू करने की मांग करेगी.
बीजेडी ने संसद में नए
कृषि क़ानूनों का विरोध किया था. हालांकि 8 दिसंबर को हुए भारत बंद में बीजेडी
शामिल नहीं हुआ था. 26 दिसंबर को पार्टी का 24वाँ स्थापना दिवस है. इसकी तैयारियों
के मद्देनजर हुई कार्यकारिणी की बैठक में नौ राजनीतिक प्रस्ताव पारित किए गए हैं.
किसानों ने अब लोगों से थालियां बजाने की अपील की
नेपाली पीएम ओली आज तीन बजे करेंगे देश को संबोधित
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नेपाल के प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली आज शाम में तीन बजे देश को संबोधित करेंगे. वो संसद भंग करने और कई मुद्दों पर बात करेंगे.
प्रधानमंत्री ऑफिस ने बताया है कि प्रधानमंत्री का संबोधन नेपाली टेलीविजन पर लाइव प्रसारित होगा. प्रधानमंत्री के प्रेस सलाहकार सूर्य थापा ने ट्वीट कर कहा है, ''प्रधामंत्री हालिया राजनीतिक घटनाक्रम को लेकर अपना पक्ष रखेंगे.''
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नेपाली पीएम ओली के संसद भंग करने का फ़ैसला अंसवैधानिक: प्रचंड
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नेपाल में प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली ने संसद भंग कर फिर से चुनाव कराने का फ़ैसला किया है. इस फ़ैसले को लेकर नेपाल की राजनीति में अचानक से सरगर्मी पैदा हो गई है.
ओली के फ़ैसले से उनकी नेपाल कम्युनिस्ट पार्टी भी हैरान है.
नेपाल कम्युनिस्ट पार्टी प्रमुख और पूर्व प्रधानमंत्री पुष्प कमल दहाल प्रचंड ने ओली के फ़ैसले को असंवैधानिक और अलोकतांत्रिक करार दिया है.
ट्विटर पर जारी किए गए अपने बयान में प्रचंड ने कहा है, ''हमारी पार्टी के प्रमुख और प्रधानमंत्री ओली का संसद भंग करने का फ़ैसला पूरी तरह से असंवैधानिक, अलोकतांत्रिक, निरंकुश और स्वेच्छाचारी है. ओली के इस फ़ैसले की की पार्टी की स्टैंडिंग कमिटी विरोध करती है.
यह पार्टी के लिए पूरी तरह से अस्वीकार्य है. पार्टी ओली के ख़िलाफ़ अनुशासनात्मक कार्रवाई करेगी. उनसे इस संदर्भ में स्पष्टीकरण की माँग की गई है. ओली के इस फ़ैसले को लेकर पार्टी एकजुट है. नेपाल की जनता ने अपने संघर्ष के दम पर लोकतंत्र स्थापित किया था और उस जनादेश का अपमान नेपाल की जनता का अपमान है.''
नेपाल कम्युनिस्ट पार्टी की स्टैंडिंग कमिटी ने ओली के ख़िलाफ़ अनुशासनात्मक कार्रवाई करने के लिए प्रस्ताव लाने का फ़ैसला किया है. प्रधानमंत्री ओली की कुर्सी जाने का डर था इसी कारण उन्होंने संसद भंग करने का फ़ैसला किया है. राष्ट्रपति ने भी इस फ़ैसले को मंज़ूरी दे दी है और फिर से चुनाव कराने की घोषणा की है.
ओली के फ़ैसले के ख़िलाफ़ लोग सड़कों पर विरोध-प्रदर्शन भी कर रहे हैं.
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प्रशांत किशोर ने पश्चिम बंगाल में बीजेपी को दी चुनौती- कहा छोड़ देंगे अपना काम
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राजनीतिक पार्टियों के लिए चुनावी कैंपेन का काम करने वाले प्रशांत किशोर ने दावा किया है कि पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में बीजेपी दोहरे अंक में भी सीट पाने के लिए संघर्ष करेगी.
प्रशांत किशोर ने ट्वीट कर कहा कि बीजेपी को लेकर उनके समर्थक मीडिया में हवा बनाई जा रही है जबकि हक़ीक़त कुछ और है.
प्रशांत किशोर ने ट्वीट कर कहा, ''मीडिया के कुछ हलकों में पश्चिम बंगाल चुनाव में बीजेपी को बढ़ाचढ़ाकर दिखाया जा रहा है. सच यह है कि बीजेपी दोहरे अंक में भी सीट जीतने के लिए संघर्ष करेगी. प्लीज़ मेरे इस ट्वीट को सेव कर लें और अगर बीजेपी ने इससे बेहतर किया तो मैं अपना काम छोड़ दूंगा.''
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प्रशांत किशोर के इस ट्वीट पर बीजेपी नेता और पश्चिम बंगाल में बीजेपी के प्रभारी कैलाश विजयवर्गीय ने ट्वीट कर जवाब दिया. विजयवर्गीय ने अपने ट्वीट में कहा है, ''भाजपा की बंगाल में सुनामी चल रही है, सरकार बनने के बाद इस देश को एक चुनाव रणनीतिकार खोना पड़ेगा.''
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प्रशांत किशोर ममता बनर्जी का चुनावी कैंपेन देख रहे हैं. तृणमूल कांग्रेस की चुनावी रणनीति का पूरा ज़िम्मा प्रशांत किशोर के हाथों में ही है.
प्रशांत इससे पहले 2014 के आम चुनाव में नरेंद्र मोदी के लिए भी काम कर चुके हैं. अब उनकी बीजेपी से नहीं बनती है और अक्सर प्रधानमंत्री की नीतियों को लेकर हमलावर रहते हैं.
थाईलैंड के सीफूड मार्केट में फैला कोरोना, सैकड़ों लोग कोरोना संक्रमित
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थाईलैंड में कोरोना वायरस का संक्रमण अचानक से बढ़ गया है. थाईलैंड में दसियों हज़ार लोगों का कोरोना टेस्ट किया गया है. इनमें से सैकड़ों संक्रमण का संबंध थाईलैंड के सबसे बड़े सीफूड मार्केट से है.
नए मामले आने के बाद थाईलैंड ने राजधानी बैंकॉक के पास तटीय प्रांत समुत सखोन में लॉकडाउन लगा दिया है. इसी प्रांत में सीफूड मार्केट है और यहीं से कोरोना के सैंकड़ों मामले सामने आए हैं.
यहाँ काम करने वाले ज़्यादातर प्रवासी हैं और इनमें से भी सबसे ज़्यादा लोग म्यांमार के हैं. कामागारों को घरों में रहने के लिए कहा गया है. थाईलैंड चीन के बाहर का पहला देश था जहाँ कोविड 19 के केस मिले थे. लेकिन यहाँ अब तक स्थिति नियंत्रण में थी. इससे पहले वहां 4000 ही कोरोना के केस मिले थे और कुल 60 लोगों की मौत हुई थी.
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अचानक मामले कैसे बढ़े? पिछले हफ़्ते गुरुवार को प्रॉन (झींगा मछली) बेचने वाली एक थाई महिला कोरोना संक्रमित पाई गई थी. यह केस महाचई मार्केट का है. यह थाईलैंड का अहम इलाक़ा है, जहाँ अरबों डॉलर की सीफूड इंडस्ट्री है.
उस महिला के कोविड संक्रमित पाए जाने के बाद यहं बड़ी संख्या में कोविड टेस्ट को अंजाम दिया गया. थाईलैंड के स्वास्थ्य मंत्री ने कहा कि यहाँ अगले दिन चार केस और मिले. रविवार तक कुल 689 केस दर्ज किए गए. स्वास्थ्य मंत्री ने कहा कि वो महिला विदेश नहीं गई थी. उन्होंने कहा कि संक्रमण के स्रोत की जाँच की जा रही है. इसके बाद पूरे इलाक़े में बड़ी संख्या में लोगों का कोविड टेस्ट किया गया.
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समाचार एजेंसी एएफ़पी के अनुसार मार्केट के आसपास रहने वाले म्यांमार के कामगारों से कहा गया है कि वे अपनों घरों से बाहर नहीं निकलें. स्वास्थ्य मंत्री ने कहा कि लोगों की आवाजाही प्रतिबंधित की जा रही है.
मंत्रालय ने कहा कि कामगारों को घर पर ही खाना-पानी भेजा जा रहा है. समाचार एजेंसी रॉयटर्स के अनुसार ज़्यादातर मामले बिना लक्षण वाले हैं. समुत सखोन में तीन जनवरी तरक लॉकडाउन लगा दिया गया है. प्रशासन का कहना है कि यहाँ और आसपास के इलाक़ों में 40 हज़ार लोगों का टेस्ट किया जाएगा.
क्या मनमोहन सिंह भी नए कृषि क़ानून के पक्ष में थे?
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कृषि क़ानून को लेकर कांग्रेस के वर्तमान रुख़ की भी आलोचना हो रही है. कहा जा रहा है कि जब मनमोहन सिंह प्रधानमंत्री थे तो उनकी सरकार भी इसी तरह के सुधार की वकालत कर रही थी. लेकिन ये क़ानून अब बन गया और किसान संगठन सड़क पर विरोध करने लगे तो कांग्रेस ने भी अपना रुख़ बदल लिया.
मोदी सरकार के कृषि क़ानून का समर्थन करते हुए योजना आयोग के पूर्व उपाध्यक्ष अरविंद पनगढ़िया ने कांग्रेस समर्थित अर्थशास्त्रियों पर सवाल उठाए हैं. उनका कहना है कि राजनीतिक पार्टियों का रुख़ तो समझ में आता है लेकिन जिन अर्थशास्त्रियों ने यूपीए सरकार में मुख्य आर्थिक सलाहकार रहते हुए कृषि में नए बदलावों का समर्थन किया था वो भी अब कृषि क़ानून का विरोध कर रहे हैं.
हालाँकि कांग्रेस नेता इस पर कई बार सफ़ाई दे चुके हैं. पूर्व वित्त मंत्री पी चिदंबरम भी कह चुके हैं कि उनकी सरकार इस तरह के कृषि क़ानून के पक्ष में कभी नहीं थी.
अरविंद पनगढ़िया ने मनमोहन सिंह सरकार में मुख्य आर्थिक सलाहकार रहे कौशिक बासु और रघुराम राजन पर सवाल उठाए हैं. उन्होंने कहा कि सरकार में रहते हुए इन दोनों अर्थशास्त्रियों ने नए कृषि क़ानून की वकालत की थी.
अरविंद पनगढ़िया को अर्थशास्त्री कौशिक बासु ने जवाब दिया है. इन्होंने लिखा है कि भारतीय कृषि में सुधार की ज़रूत है लेकिन छोटे किसानों की आजीविका की क़ीमत पर नहीं. कौशिक बासु ने ट्वीट कर कहा है, ''हमें राजनीति किनारे रख देनी चाहिए और नए सिरे से क़ानून बनाने पर विचार करना चाहिए, जिसमें व्यापक पैमाने पर विमर्श हो.''
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अरविंद पनगढ़िया के जवाब में कौशिक बासु ने टाइम्स ऑफ इंडिया में लिखा है, ''ये सही बात है कि मैंने और रघुराम राजन ने कहा था कि भारत के कृषि क़ानून पुराने पड़ गए हैं और एपीएमसी एक्ट में सुधार की ज़रूरत है. किसानों को विकल्प देने की ज़रूरत है लेकिन उससे पहले हमें ये सुनिश्चित करने की ज़रूरत है कि छोटे किसानों को शोषण से बचाया जा सके. मुक्त बाज़ार में छोटे किसानों की जो मुश्किलें हैं उनको गंभीरता से देखने की ज़रूरत है.''
''सरकार ने इसकी कोई मुकम्मल व्यवस्था नहीं है जिससे किसानों के शोषण को रोका जा सकेगा. एपीएमसी एक्ट में वर्तमान संशोधन बहुत प्रभावी नहीं है. इस सुधार में बड़े कॉर्पोरेट घरानों को व्यापक पैमाने पर स्टोर करने की अऩुमति दे दी गई है. इससे बड़े कॉर्पोरेट घराने सामने आएंगे और स्टोर व्यापक पैमाने पर करेंगे. इसके मार्केट पर इनका नियंत्रण बढ़ेगा. अगर कॉन्ट्रैक्ट फार्मिंग में किसानों के साथ किसी भी तरह का कोई विवाद होता है कि उनके मसले को सुलझाने के लिए कोई प्रभावी व्यवस्था है.''
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बिहारी किसानों की ग़रीबी और पंजाबी किसानों की अमीरी की वजह क्या?
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अरविंद पनगढ़िया मोदी सरकार के पहले कार्यकाल में नीति आयोग के उपाध्यक्ष थे. वो अभी कोलंबिया यूनिवर्सिटी में अर्थशास्त्र के प्रोफ़ेसर हैं और एशियान डिवेपलमेंट बैंक के चीफ़ इकनॉमिस्ट भी रहे हैं. अरविंद पनगढ़िया ने मोदी सरकार के कृषि क़ानूनों का समर्थन किया है. उन्होंने टाइम्स ऑफ इंडिया में एक लेख लिखकर कृषि क़ानूनों के समर्थन में कई तर्क दिए हैं.
अरविंद ने लिखा है, ''कृषि बाज़ार को लेकर जो सुधार किए हैं उसके विरोध में किसानों आंदोलन को भारत की सभी विपक्षी पार्टियों ने समर्थन किया है. हालाँकि यह हैरान करने वाला नहीं है. लोकतंत्र में विपक्षी पार्टियां तब भी विरोध करती हैं जब वो सत्ता रहते हुए ऐसे बदलावों की वकालत करती हैं. लेकिन हैरान करने वाली कुछ चीज़ें हैं. यहाँ तक कि हाल के घटनाक्रम में शीर्ष के अर्थशास्त्री भी इस विरोध-प्रदर्शन में शामिल हैं. यूपीए सरकार में आख़िर के दो प्रमुख आर्थिक सलाहकार भी किसानों के आंदोलन का समर्थन कर रहे हैं जबकि ये दोनों भारतीय कृषि में इस तरह बदलावों का समर्थन करते थे.''
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अरविंद पनगढ़िया ने लिखा है, ''2011-12 के आर्थिक सर्वे को तब के आर्थिक सलाहकार कौशिक बासु ने तैयार किया था. उसमें साफ़ लिखा है कि जिन किसानों को अपनी उपज की एग्रिक्लचरल प्रोड्यूस मार्केटिंग कमिटी यानी एपीएमसी से बाहर अच्छी क़ीमत मिलती है उन्हें बेचने की अनुमति मिलनी चाहिए. 2011-12 के आर्थिक सर्वे में साफ़ लिखा है कि फसल तैयार होने के बाद बाज़ार और उसके रख-रखाव को लेकर कृषि में ब़ड़े निवेश की ज़रूरत है. कृषि में संगठित कारोबार और मल्टि ब्रैंड रीटेल में एफडीआई को लागू करना चाहिए. सर्वे में यहाँ तक लिखा है कि कृषि उत्पादों के सीमित आयात के लिए भी अनुमति दी जानी चाहिए.''
योजना आयोग के पूर्व उपाध्यक्ष ने लिखा है, ''रघुराम राजन ने भी 2012-13 के आर्थिक सर्वे में ऐसे ही बदलावों की सिफ़ारिश की थी. इसमें साफ़ लिखा था कि प्राइवेट सेक्टर को कृषि बाज़ार को विकसित करने में आगे करना चाहिए. यूपीए सरकार के दोनों मुख्य आर्थिक सलाहकारों ने केवल कृषि में प्राइवेट सेक्टर की एंट्री का ही समर्थन नहीं किया था बल्कि कृषि में विदेशी मल्टि ब्रैंड रीटेलर्स को भी आने देने का सुझाव दिया था. अब दोनों कह रहे हैं कि मोदी सरकार के नए कृषि क़ानून के कारण निजी कंपनियाँ किसानों का शोषण करेंगी. यह संभव है कि आर्थिक सर्वे में सरकार की नीति या निर्देश के कारण इस तरह की सिफ़ारिशें इन्होंने की होंगी जबकि इनकी अपनी सोच कुछ और रही होगी. लेकिन मुझे जहाँ तक जानकारी है कि इन्होंने अब तक ऐसा कोई स्पष्टीकरण नहीं दिया है.''
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पनगाढ़िया ने लिखा है, ''जो कह रहे हैं कि इस क़ानून से निजी कंपनियों को किसानों का शोषण करने की छूट मिल जाएगी उन्हें बताना चाहिए ये कैसे होगा? शोषण निजी कंपनियाँ करेंगी या एपीएमसी के भारी-भरकम एजेंट कर रहे हैं जो थोक होलसेलर्स मिले होते हैं और बिना कोई परामर्श के क़ीमत तय करते हैं. इसके साथ ही वो भारी कमिशन भी खाते हैं. ये तर्क दे रहे हैं कि कॉर्पोरेट घराना एपीएमसी मंडियों को ख़त्म कर देगा और फिर किसानों से वे औने-पौने दाम पर अनाजों की ख़रीदारी करेंगे. अर्थशास्त्री रमेश चाँद और अशोक गुलाटी जैसे अर्थशास्त्रियों ने बताया कि नेस्ले जैसी कंपनियाँ सालों से सरकारी सहकारी संगठनों के साथ मिलकर छोटे दूध उत्पादकों से दूध ख़रीद रही हैं. इन्होंने दूध उत्पादकों का शोषण करने के बजाय उनके दूध की माँग बढ़ाने और मार्केट को बड़ा बनाने में मदद की.''
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अरविंद पनगाढ़िया लिखते हैं कि कृषि सुधार कोई नई बात नहीं है और न ही उसकी आलोचना. प्रधानमंत्री अटल बिहार वाजपेयी ने पहली बार इसकी शुरुआत मोडल-एपीएमसी एक्ट, 2003 से की थी. इसके बाद की सभी केंद्र सरकारों ने इन सुधारों को प्रोत्साहित किया. 20 राज्यों ने एपीएमसी एक्ट में संशोधन किया. इनमें से 16 राज्यों ने एक क़ानून लागू किया जिसमें कई और चीज़ें जोड़ी गईं. बिहार ने तो 2006 में एपीएमसी से ख़ुद को अलग कर लिया. आंध्र प्रदेश, बिहार, गुजरात और मध्य प्रदेश ने मोडल एक्ट को अपनाया और इसका नतीजा कृषि वृद्धि दर में भी देखने को मिला. 2006-07 और 2018-19 के बीच इन राज्यों में औसत कृषि वृद्धि दर क्रमशः 7.1%, 5.3%, 3.9% और 6.8% रही जबकि पंजाब में वृद्धि दर महज़ 1.8% रही. कृषि क़ानून की आलोचना करने वाले बिहारी किसानों की ग़रीबी और पंजाबी किसानों की अमीरी के लिए एपीएमसी एक्ट को ज़िम्मेदार बता रहे है. इनका कहना है कि बिहारी किसान इसलिए ग़रीब हुए क्योंकि वहाँ की सरकार ने एपीएमसी एक्ट से ख़ुद को अलग कर लिया.''
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पनगढ़िया कहते हैं, ''कृषि में उच्च वृद्धि दर के बावजूद बिहारी किसान पंजाबी किसानों की तुलना में इसलिए ग़रीब हैं क्योंकि बिहारी किसान पहले से ही बहुत ग़रीब थे और उन्होंने अपनी शुरुआत बहुत निचले स्तर से की है. 1992-93 तक पंजाब सकल घरेलू उत्पाद में भारत के सभी राज्यों में दूसरे नंबर था जो 2018-19 में दसवें नंबर पर आ गया.
अरविंद पनगाढ़िया के जवाब में कौशिक बासु ने लिखा है कि हाँ, उन्होंने आर्थिक सर्वे में ऐसे बदलावों की वकालत की थी लेकिन मोदी सरकार के नए कृषि क़ानून में छोटे किसानों को शोषण से बचाने के लिए पर्याप्त उपाय नहीं किए गए हैं. कौशिक बासु का कहना है कि नए क़ानून से छोटे किसानों का शोषण हो सकता है और सरकार को इस पर ध्यान देना चाहिए.
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पंजाब की खेती गेहूं, धान और MSP से आबाद हो रही है या बर्बाद?
आज भूख हड़ताल पर किसान नेता और एनडीए नेताओं की करेंगे घेराबंदी किसान
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संगठनों के संयुक्त किसान मोर्चा (एसकेएम) ने कहा है कि मोदी सरकार के तीनों कृषि क़ानूनों के ख़िलाफ़ किसान प्रदर्शन स्थल पर भूख हड़ताल शुरू करेंगे और एनडीए के सांसदों से संपर्क करेंगे.
दिल्ली-हरियाणा बॉर्डर के पास अहम प्रदर्शन स्थल सिंघु में रविवार को प्रेस कॉन्फ़्रेंस कर एसकेएम के नेताओं ने कहा कि 26 और 27 दिसंबर को एनडीए के नेताओं से संपर्क कर कहेंगे कि वे बीजेपी को कृषि क़ानून वापस लेने के लिए मजबूर करें.
भारतीय किसान यूनियन के अध्यक्ष राकेश टिकैत ने कहा, ''हम इस हफ़्ते के अंत में एनडीए नेताओं के आवास पर जाएंगे और उनसे किसानों के आंदोलन को समर्थन देने के लिए कहेंगे. एनडीए के नेता अपने समर्थन को लेकर जो कुछ भी कहेंगे उसे हम जनता को बताएंगे.''
टिकैत ने कहा कि अगर एनडीए के नेता किसानों का समर्थन नहीं करेंगे तो उनका भी विरोध किया जाएगा. दूसरी तरफ़ स्वराज इंडिया नेता योगेंद्र यादव ने कहा है कि सोमवार से किसान नेता भूख हड़ताल भी शूरू करेंगे.
योगेंद्र यादव ने कहा, ''11 किसान नेता हर दिन 24 घंटे की भूख हड़ताल पर बैठेंगे. मैं देश के अन्य हिस्सों में आंदोलनरत किसानों से भी अपील करूंगा कि वो भी भूख हड़ताल पर बैठें.''
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योगेंद्र यादव ने कहा कि हरियाणा की सरकार किसानों को प्रदर्शन स्थल पर आने से रोक रही है. एसकेएम के नेताओं ने 23 दिसंबर को किसान दिवस के मौक़े पर इस आंदोलन के समर्थन में एक वक़्त का खाना नहीं खाने की अपील की है.
क्रांतिकारी किसाना यूनियन के अध्यक्ष दर्शन पाल ने कहा कि जिन परिवार के सदस्य या दोस्त किसानों के इस आंदोलन के समर्थन में विदेशों से पैसे भेज रहे हैं उनके ख़िलाफ़ मोदी सरकार फॉरन कंट्रिब्यूशन (रेग्युलेशन) एक्ट के तहत कार्रवाई कर रही है.
दर्शन पाल ने कहा कि किसान संगठन सरकार के इस रुख़ की कड़ी निंदा करते हैं.
इसके साथ ही उन्होंने पंजाब में आढ़तियों के घरों पर कथित रेड की भी निंदा की. उन्होंने कहा कि इसके ख़िलाफ़ इनकम टैक्स अधिकारियों के घरों के बाहर विरोध-प्रदर्शन किया जाएगा.
रविवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अचानक से ऐतिहासिक रकाबगंज साहिब गुरुद्वार दर्शन के लिए पहुँच गए थे. यहीं पर गुरु तेगबहादुर की अंत्येष्टि हुई थी.
दर्शन के बाद पीएम मोदी ने ट्वीट कर कहा था, ''आज सुबह ऐतिहासिक गुरुद्वारा रकाबगंज साहिब में मत्था टेकने का सौभाग्य मिला. यहीं श्री गुरु तेगबहादुर जी के पार्थीव शरीर का अंतिम संस्कार किया गया था. दुनिया भर में लाखों लोगों की तरह श्री गुरु तेगबहादुर जी के विचार और जीवन मुझे सदैव प्रेरित करते हैं.''
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भारत और विदेशों में बसे सिखों ने मोदी सरकार के तीनों कृषि क़ानूनों का जमकर विरोध किया है. सिख किसान सबसे मुखर होकर विरोध-प्रदर्शन कर रहे हैं. इनका कहना है कि मोदी सरकार के नए कृषि क़ानून से उन्हें भी बिहार के किसानों की तरह ग़रीब बना दिया जाएगा.
विरोध-प्रदर्शन का सबसे ज़्यादा ज़ोर सिख प्रभुत्व वाले राज्य पंजाब और पड़ोसी राज्य हरियाणा में है. पिछले तीन हफ़्तों से यहाँ के किसानों ने दिल्ली बॉर्डर को विरोध स्वरूप बंद कर रखा है.
पिछले हफ़्ते बुधवार को 65 साल के एक सिख पुजारी ने आत्महत्या कर ली थी. समचार एजेंसी रॉयटर्स ने अपनी रिपोर्ट में लिखा है कि सुरक्षा कारणों से मोदी आम पब्लिक से हमेशा दूर रहते हैं लेकिन बुधवार को रकाबगंज गुरुद्वारे में मोदी ने सिखों के धार्मिक नेताओं से बात की और बाहर से आए लोगों ने उनके साथ तस्वीर भी खींची.
सोशल मीडिया पर कई लोगों ने पीएम मोदी की इस बात के लिए तारीफ़ की कि वो गुरुद्वारा आम श्रद्धालु की तरह गए.
ऑल इंडिया किसान संघर्ष को-ऑर्डिनेशन कमिटी (AIKSCC) ने कहा है कि आंदलोन में अब तक 40 किसानों की मौत हुई है और इनके सम्मान में देश भर में 90 हज़ार से ज़्यादा कार्यक्रम के आयोजन किए जाएंगे. AIKSCC ने कहा कि अब विरोध-प्रदर्शन में और तेज़ी आएगी.
इमेज स्रोत, Getty Images
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