पंजाब के मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह ने केंद्र सरकार
पर किसानों के विरोध प्रदर्शन का समर्थन करने वाले आढ़तियों को ‘डराने’ का आरोप लगाया है.
आधिकारिक तौर पर जारी एक बयान के मुताबिक मुख्यमंत्री ने आढ़तियों
के ख़िलाफ़ आयकर के छापों को उनके लोकतांत्रिक अधिकारों पर रोक के लिए दबाव की
रणनीति बताया है.
बयान में कहा गया है कि पंजाब में 14 आढ़तियों को आयकर
विभाग से नोटिस मिला है. जिनमें विजय कालरा (अध्यक्ष, पंजाब आढ़ती एसोसिएशन), पवन
कुमार गोयल (अध्यक्ष, सामान मंडी) और जसविंदर सिंह राणा (पटियाल ज़िला अध्यक्ष) शामिल
हैं.
मुख्यमंत्री ने कहा, ‘’यह साफ है कि लंबे समय से विरोध
प्रदर्शन कर रहे किसानों को मनाने, गुमराह करने और बांटने में असफल होने के बाद केंद्र सरकार ने
अब उनके संघर्ष को कमजोर करने के लिए आढ़तियों को निशाना बनाना शुरू कर दिया है, जो पहले ही दिन से पूरी सक्रियता से
विरोध प्रदर्शन का समर्थन कर रहे हैं.’’
अमरिंदर सिंहने कहा कि पंजाब के कई बड़े आढ़तियों के ठिकानों
पर नोटिस जारी करने के सिर्फ़ चार दिनों के अंदर ही छापे मारे गए हैं.नोटिस पर उनके जवाब का इंतजार भी नहीं किया गया.
सीएम ने कहा,’’इसमें तय कानूनी प्रक्रिया का पालन नहीं किया गया. यहां तक कि स्थानीय पुलिस को
भी सूचना नहीं दी गई या उन्हें भरोसे में नहीं लिया गयाजो सामान्य प्रक्रिया का हिस्सा
है. आयकर विभाग की टीमों के छापे के दौरान सुरक्षा देने के लिए सीआरपीएफ की मदद ली
गई.’’
मुख्यमंत्री ने पूछा कि क्या ये बदला लेने की राजनीति नहीं है जो किसी भी तरह किसानों के विरोध प्रदर्शन को ख़त्म करना चाहती है.
उन्होंने केंद्र सरकार से अपील करते हुए कहा कि सरकार को अपना अहंकार छोड़कर किसानों और अन्य हितधारकों के साथ बातचीत शुरू करनी चाहिए.
नए कृषि क़ानूनों के ख़िलाफ़ दिल्ली की अलग-अलग सीमाओं पर किसान विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं. आज (रविवार) उनके विरोध प्रदर्शन का 25वां दिन है.
कई स्तर की बातचीत के बाद भी केंद्र सरकार और किसानों के बीच सहमति नहीं बन पाई है. किसानों की मांग है कि तीनों कृषि क़ानूनों को रद्द किया जाए.
हालांकि, कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने हाल ही में दिए एक साक्षात्कार में कहा है कि किसान संगठनों के साथ अनौपचारिक बातचीत जारी है और नए साल की शुरुआत से पहले कोई समाधान निकल सकता है.