कोलकाता से बीबीसी हिंदी के लिए
पश्चिम बंगाल के दो दिन के दौरे पर पहुंचे केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने शनिवार को मेदिनीपुर में बीजेपी की रैली में दोहराया कि अगले विधानसभा चुनावों में पार्टी दो सौ से ज्यादा सीटें जीतेगी. उन्होने लोगों से कहा कि एक बार बीजेपी को सरकार बनाने का मौका दें, पार्टी राज्य को सोनार बांगाला बना देगी.
शाह की रैली से पहले शुभेंदु अधिकारी समेत दस विधायकों और पूर्व सांसद के अलावा टीएमसी, कांग्रेस और लेफ्ट के कई लोगों ने बीजेपी का दमन थाम लिया. शाह ने अपने भाषण में कहा कि यह तो अभी शुरुआत है. चुनाव आते-आते दीदी अकेली रह जाएंगी
ममता पर करारा हमला करते हुए बीजेपी नेता ने कहा कि टीएमसी मां, माटी और मानुष के नारे के साथ सत्ता में आई थी. लेकिन उसने अब इस नारे को तोलाबाजी (उगाही), तुष्टिकरण और भतीजावाद में बदल दिया है.
अमित शाह ने आरोप लगाया कि अंफान प्रभावितों के लिए केंद्र की ओर से भेजी गई आर्थिक सहायता और अनाज टीएमसी के गुंडों के पास चला गया. इसलिए कलकत्ता हाईकोर्ट ने इस मामले की जांच सीएजी से कराने का निर्देश दिया है.
उन्होंने कहा कि राज्य सरकार और ममता बनर्जी के असहयोग की वजह से राज्य के लोगों को केंद्रीय योजनाओं का फायदा नहीं रहा है.
बंगाल में बढ़ती हिंसा और कानून व्यवस्था में गिरावट का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि बीजेपी के कार्यकर्ता इससे डरने वाले नहीं हैं.
टीएमसी से बीजेपी में आने वाले शुभेंदु अधिकारी ने अपने भाषण में ममता का नाम लिए बिना जहां टीएमसी सरकार के कामकाज की जमकर खिंचाई की, वहीं शाह की शान में जमकर कसीदे भी पढ़े.
उन्होंने कहा कि विकास के लिए केंद्र और राज्य में एक ही पार्टी की सरकार रहनी चाहिए.
शुभेंदु ने दावा किया कि टीएमसी सरकार सत्ता में नहीं लौटेगी. उन्होंने ममता के भतीजे अभिषेक पर हमला किया और 'तोलाबाज' (उगाही करने वाले) भतीजे को हटाने की अपील की.
टीएमसी कार्यकर्ताओं के नाम शुभेंदु का खुला पत्र, कहा अब बदलाव जरूरी
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह का हाथ थामकर मेदिनीपुर की रैली में मंच पर चढ़ने वाले तृणमूल कांग्रेस के बागी नेता शुभेंदु अधिकारी ने बीजेपी का दामन थामने से कुछ देर पहले टीएमसी कार्यकर्ताओं के नाम एक खुला पत्र जारी किया है. उन्होंने मंच पर अमित शाह के पैर छूकर उनको प्रणाम किया.
दस पेज के अपने पत्र में उन्होंने कहा है कि जमीनी कार्यकर्ताओं ने खून-पसीना बहा कर पार्टी के पैर जमाने में मदद की थी. लेकिन उनको पार्टी में कोई अहमियत नहीं मिली. शुभेंदु ने लिखा है, “टीएमसी में अब निजी हितों को तरजीह दी जा रही है. अब राज्य के लोग ही बंगाल का भविष्य तय करेंगे.”
उनका आरोप है कि बीते दस साल के दौरान राज्य में कोई विकास नहीं हुआ. यही वजह है कि सरकार को अब दरवाजे पर सरकार जैसे कार्यक्रमों का आयोजन करना पड़ रहा है. इसी वजह से उन्होंने पार्टी छोड़ने का फैसला किया है. अब हमें एक साथ नई राह पर चलना होगा. मैंने तीन दशक पहले जो लड़ाई शुरू की थी उसे जारी रखूंगा.
शुभेंदु ने कहा है कि तृणमूल कांग्रेस अब हिंसा और धमकियों पर उतर आई है.
दूसरी ओर, तृणमूल कांग्रेस ने इस पत्र पर कड़ी प्रतिक्रिया जताई है. पार्टी के सांसद कल्याण बनर्जी कहते हैं, “शुभेंदु खुद कोई दूध के धुले नहीं हैं. वे भी भ्रष्टाचार में शामिल हैं. पार्टी उनके चेहरे से भी नकाब हटाएगी. वे टीएमसी की स्थापना के समय पार्टी में नहीं थे.”