भारतीय मूल के वेदांत पटेल बने बाइडन के सहायक प्रेस सचिव

अमेरिका के प्रेसीडेंट इलेक्ट जो बाइडन ने शु्क्रवार को व्हाइट हाउस के संचार और प्रेस स्टाफ़ के 16 अतिरिक्त सदस्यों की घोषणा की.

लाइव कवरेज

  1. किसान आंदोलन: कड़ाके की ठंड से निपटने की तैयारी में जुटे किसान

    किसान विरोध प्रदर्शन

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    सिंघु बॉर्डर पर पिछले 23 दिनों से किसान विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं. यहां हर बीतते दिन के साथ ठंड भी बढ़ती जा रही है.

    लेकिन, किसान और केंद्र सरकार के बीच कोई सहमति ना बन पाने के कारण गतिरोध की स्थिति बनी हुई है. ऐसे में किसान भी बढ़ती ठंड का सामना करने के लिए अपनी तैयार में लगे हुए हैं. ठंड से निपटने के लिए धरना स्थल पर टेंट की संख्या बढ़ाई जा रही है.

    धरना स्थल पर मौजूद एक किसान ने बताया, ‘‘हम लंबे समय के लिए अपने आपको तैयार कर रहे हैं क्योंकि काले क़ानूनों के ख़िलाफ़ हमारी लडाई जारी है. यहां ठंड बढ़ रही है इसलिए हम और टेंट लगा रहे हैं.’’

    किसान मज़दूर संघर्ष समिति के दयाल सिंह ने कहा, ‘‘प्रधानमंत्री को किसानों से बात करनी चाहिए और कृषि क़ानूनों को वापस लेना चाहिए.’’

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  2. ब्रेकिंग न्यूज़, देश में कोरोना के 22,889 नए मामले, 338 की मौत

    कोरोना वायरस के लिए जांच

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    भारत में बीते 24 घंटों में कोरोना वायरस के 22,889 मामले सामने आए हैं. इसके बाद भारत में कोरोना वायरस के कुल मामलों की संख्या 99,79,447 हो गई है.

    कोरोना से होने वाली मौतों के 338 नए मामलों के साथ मरने वालों की कुल संख्या 1,44, 789 पर पहुंच गई है.

    देश में कोरोना वायरस के कुल सक्रिय मामले 3,13,831 हैं और अब तक 95,20,827 लोग ठीक हो चुके हैं.

    वहीं, आईसीएमआर के मुताबिक 17 दिसंबर को कुल 11,13,406 सैंपल की जांच की गई. अब तक 15,89,18,646 सैंपल की जांच हो चुकी है.

  3. किसान आंदोलन के समर्थन में डीएमके के नेताओं का उपवास

    तमिलनाडु में द्रविड़ मुन्नेत्र कड़गम (डीएमके) और उसकी सहयोगी पार्टियों के नेताओं ने किसानों के विरोध प्रदर्शन के समर्थन में एक दिन का उपवास रखने का फैसला किया है.

    डीएमके अध्यक्ष एमके स्टालिन ने कहा कि केंद्र सरकार ने कहा कृषि क़ानूनों का विरोध करने वालों को राष्ट्रविरोधी कह रही है. हम इसकी निंदा करते हैं. हम किसानों के समर्थन में खड़े हैं.

    नए कृषि क़ानूनों के ख़िलाफ़ बड़ी संख्या में किसान 23 दिनों से दिल्ली की सीमाओं पर विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं.

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  4. किसान आंदोलन में शामिल एक और किसान की मौत

    किसान विरोध प्रदर्शन

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    इमेज कैप्शन, गाज़ियाबाद में विरोध प्रदर्शन करते किसान

    पुलिस के मुताबिक टिकरी बॉर्डर पर धरना स्थल के पास पंजाब के एक 38 साल के किसान की मौत हो गई.

    न्यूज़ एजेंसी पीटीआई के मुताबिक भारतीय किसान यूनियन (एकता उगराहां) के नेता शिंगारा सिंह ने बताया कि मृतक जय सिंह बठिंडा ज़िले में तुंगवाली गांव के निवासी थे. वो और उनके भाई हरियाणा-दिल्ली सीमा पर किसानों के विरोध प्रदर्शन में शामिल थे.

    जय सिंह गुरुवार सुबह मृत पाए गए. हरियाणा में बहादुरगढ़ के एक अधिकारी ने बताया कि किसान की मौत के कारणों का पता लगाया जा रहा है.

    जय सिंह के भाई की आशंका है कि उन्हें दिल का दौरा पड़ा है. उनके शव को झझर ज़िले में बहादुरगढ़ सिविल अस्पताल में भेजा गया है.

    शिंगारा सिंह ने मृतक के परिवार को 10 लाख का मुआवज़ा और सरकारी नौकरी दिए जाने की मांग की है.

    शिंगारा सिंह के मुताबिक अब तक किसान विरोध प्रदर्शन में 20 किसानों मौत हो चुकी है. उनमें से अधिकतर पंजाब से हैं.

    नए कृषि क़ानूनों के ख़िलाफ़ बड़ी संख्या में किसान दिल्ली की सीमाओं पर विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं. 26 नवबंर से किसान धरने पर बैठे हैं और किसान व केंद्र सरकार के बीच कई स्तर की बातचीत के बाद भी कोई सहमति नहीं बन पाई है.

  5. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आज मध्य प्रदेश के किसानों को करेंगे संबोधित

    प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी

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    किसानों और सरकार में जारी गतिरोध के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आज एक ‘किसान कल्याण सम्मेलन’ में मध्य प्रदेश के किसानों को वर्चुअल माध्यम से संबोधित करेंगे.

    बताया जा रहा है कि इस कार्यक्रम को देश के 23,000 गांवों और मध्य प्रदेश के सभी ज़िला मुख्यालयों में दिखाया जाएगा.

    मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के कार्यालय की ओर से गुरुवार को जारी एक बयान के मुताबिक़, ये कार्यक्रम दोपहर दो बजे वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के ज़रिए शुरू होगा.

    सरकार का कहना है कि वो इस तरह के सम्मेलनों के ज़रिए किसानों को कृषि क़ानूनों के तहत मिलने वाले फायदे की जानकारी देगी.

    वहीं आकाशवाणी के मुताबिक़, रायसेन में आयोजित राज्‍यस्‍तरीय मुख्‍य कार्यक्रम में मध्‍यप्रदेश के मुख्‍यमंत्री शिवराज सिंह चौहान भी हिस्सा लेंगे. बताया गया है कि दूसरे ज़िलों में राज्‍य के मंत्री इस कार्यक्रम के दौरान किसानों को राहत राशि वितरित करेंगे और ब्‍लॉक और ग्रामीण स्‍तर पर भी इस तरह के कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे.

    दावा किया गया है कि हर ज़िले से क़रीब एक-एक हज़ार किसान इस सम्‍मेलन में भाग लेंगे.

  6. किसान आंदोलन: सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई से लेकर राजनीतिक हमलों तक

    किसान आंदोलन

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    कृषि क़ानूनों के ख़िलाफ़ हो रहा किसानों का विरोध प्रदर्शन 23वें दिन भी जारी है. किसानों और सरकार के बीच कई स्तर की बातचीत के बाद भी कोई सहमति नहीं बन पाई है.

    किसानों के विरोध प्रदर्शन का मसला सिर्फ़ सड़क तक नहीं रहा बल्कि इस पर सुप्रीम कोर्ट में भी सुनवाई जारी है. गुरुवार को किसान आंदोलन से जुड़ी एक याचिका पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई जिसमें कोर्ट ने केंद्र सरकार से कहा है कि मामले की सुनवाई पूरी न होने तक वो कृषि क़ानूनों को अस्थाई तौर पर अमल में न लाने पर विचार करें.

    इसके जवाब में केंद्र सरकार के वकील ने कहा कि ऐसा नहीं किया जा सकता. ऐसे में चीफ़ जस्टिस ने कहा, “पहले से कुछ भी न कहें और जो सलाह है उस पर ग़ौर करें. इस बीच किसानों के संगठनों को भी नोटिस जारी किया जाए.”

    सुप्रीम कोर्ट में किसान आंदोलन को लेकर कई याचिकाएं दायर की गई हैं, जिनमें दिल्ली की सीमाओं पर विरोध प्रदर्शन कर रहे किसानों को तुरंत हटाने की मांग की गई है. याचिकाओं में कहा गया है कि किसानों के विरोध प्रदर्शन के चलते राजधानी दिल्ली में रहने वाले लोगों के मूलभूत अधिकारों का हनन हो रहा है.

    इस पर सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि विरोध-प्रदर्शन करना किसानों का मौलिक अधिकार है जब तक कि वो संपत्ति या जीवन को नुक़सान ना पहुंचाए. मामले की सुनवाई अब अगले सप्ताह सर्दी की छुट्टियों के दौरान होगी. कोर्ट ने कहा है कि याचिकाकर्ता चाहें तो कोर्ट की वेकेशन बैंच के पास जा सकते हैं.

    कृषि क़ानूनों को लेकर हो रहे विरोध के चलते केंद्र सरकार भी अपनी बात लोगों तक पहुंचाने की पूरी कोशिश कर रही है. गुरुवार को देश के कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने किसानों के नाम एक खुला पत्र लिखा है, जिसमें उन्होंने नए कृषि कानून की खूबियां गिनाते हुए पंजाब-हरियाणा के किसानों से ‘फैलाए जा रहे भ्रम’से बचने की अपील की है.

    किसान आंदोलन

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    आठ पन्नों के इस पत्र को ट्वीटर पर जारी करते हुए कृषि मंत्री ने लिखा,"मैं लगातार आपके संपर्क में हूं. बीते दिनों मेरी अनेक राज्यों के किसान संगठनों से बातचीत हुई है. कई किसान संगठनों ने इन कृषि सुधारों का स्वागत किया है. वे इससे बहुत खुश है, किसानों को एक नई उम्मीद जगी है."

    प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी किसानों से कृषि मंत्री के इस पत्र को पढ़ने की अपील की. उन्होंने ट्वीट किया, "कृषि मंत्री नरेंद्र तोमर जी ने किसान भाई-बहनों को पत्र लिखकर अपनी भावनाएं प्रकट की हैं, एक विनम्र संवाद करने का प्रयास किया है. सभी अन्नदाताओं से मेरा आग्रह है कि वे इसे जरूर पढ़ें."

    गुरुवार का दिन कृषि क़ानूनों पर राजनीतिक बयानबाज़ियों से भी भरा रहा. दिल्ली से लेकर पंजाब तक नेता एक-दूसरे पर निशाना साधते दिखे. एक तरफ दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने विधानसभा में कृषि क़ानूनों की प्रतियां फाड़ दीं, तो दूसरी तरफ़ शिरोमणि अकाली दल की नेता और पूर्व मंत्री हरसिमरत कौर ने इसे ‘सस्ते हथकंडे’ बताया.

    किसान आंदोलन के बीच दिल्ली सरकार ने विधानसभा के एक दिन के विशेष सत्र का आयोजन किया. इस दौरान उन्होंने अपना विरोध ज़ाहिर करने के लिए दिल्ली विधानसभा में कृषि क़ानूनों की प्रतियां फाड़ीं. केजरीवाल ने विरोध प्रदर्शन के दौरान जान गंवाने वाले किसानों को ‘शहीद’कहा और केंद्र सरकार से पूछा कि आख़िर वो कब किसानों की बात सुनेगी.

    इसके कुछ घंटों बाद बीजेपी सांसद मीनाक्षी लेखी ने अरविंद केजरीवाल पर अवसरवादी राजनीति करने का आरोप लगाया. उन्होंने कहा, ‘‘केंद्र के कृषि क़ानूनों को 23 नवंबर के दिल्ली राजपत्र में अधिसूचित किया गया है. अब वो दिल्ली विधानसभा में इसी क़ानून की प्रतियां फाड़ रहे हैं. ये अवसरवादी राजनीति है.’’

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    वहीं, पूर्व केंद्रीय मंत्री हरसिमरत कौर ने भी अरविंद केजरीवाल पर हमला बोला. उन्होंने कहा कि केजरीवाल ‘कृषि क़ानूनों की प्रतियां फाड़कर सस्ते हथकंडों’के ज़रिए किसानों का अपमान कर रहे हैं. उन्होंने कहा कि सीएम केजरीवाल को ‘‘ड्रामेबाज़’के तौर पर जाना जाता है लेकिन 23 नवंबर को अधिसूचित किए गए क़ानूनों को विधानसभा में फाड़कर उन्होंने गजब का ढोंग रचा है.

    कृषि क़ानूनों को लेकर बड़ी संख्या में किसान 26 नवंबर से दिल्ली की सीमाओं पर धरना प्रदर्शन कर रहे हैं. इनमें मुख्यत: पंजाब और हरियाणा के किसान शामिल हैं. केंद्र सरकार और किसानों के बीच कोई सहमति नहीं बन पा रही है. केंद्र सरकार का कहना है कि वो बातचीत के लिए तैयार है लेकिन किसानों का कहना है कि बातचीत तभी संभव है जब तीनों कृषि क़ानूनों को रद्द किया जाए.

  7. नमस्कार

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