चीन का चांग ई-5 यान चंद्रमा के नमूने लेकर धरती पर लौटा

चीन का चांग ई-5 चंद्रमा की सतह से क़रीब दो किलोग्राम पत्थर और मिट्टी के नमूने लेकर धरती पर लौटा है.

लाइव कवरेज

  1. देश के किसान कृषि क़ानून से ख़ुश बस पंजाब में कुछ बेचैनी: तोमर

    केंद्रीय कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने बुधवार को ग्वालियर में कहा कि देशभर के अलग-अलग हिस्सों से आकर किसान कृषि क़ानूनों का समर्थन कर रहे हैं लेकिन पंजाब में कुछ बेचैनी दिखाई देती है जिसके अनेक कारण हैं लेकिन वहां के किसान यूनियन से भी हमारी बात चल रही है, जल्द ही कोई समाधान निकलेगा इसकी उम्मीद है.

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    ग्वालियर में किसान सम्मेलन को संबोधित करने से पहले उन्होंने कहा, “तीन नए कृषि सुधार बिल किसान की हर समस्या का समाधान है. जहां तक आंदोलन का प्रश्न है किसान यूनियन के साथ सरकार बातचीत कर रही है जल्द ही समाधान निकलेगा.”

    “विपक्षी दल पूरे देश में किसानों को गुमराह करने का असफल प्रयास कर रहे हैं. पूरे देश के किसानों को मैं आश्वस्त करना चाहता हूं कि जो मोदी जी के नेतृत्व में कृषि सुधार की कोशिश शुरू हुई है वो किसानों के जीवन में क्रांतिकारी परिवर्तन लाने वाली है.”

    तोमर ने किसान सम्मेलन के दौरान मंच से कहा, “2014 में सत्ता में आने के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी ने कहा था कि देश की जनता ने हमें ये बहुमत देश बदलने के लिए दिया है. हमें इसके लिए कुछ कठोर निर्णय भी लेने होंगे.”

  2. मोदी किसानों से बात करेंगे तो मसला हल हो जाएगा- संजय राउत

    शिव सेना नेता संजय राउत ने कहा है कि किसान प्रधानमंत्री मोदी की बात सुनेंगे, उन्हें किसानों से बात करनी चाहिए.

    उन्होंने कहा "प्रधानमंत्री जी खुद हस्तक्षेप करेंगे तो यह पांच मिनट में हल हो जाएगा."

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  3. दिल्ली से सटे टिकरी बॉर्डर पर किसान परिवारों से बातचीत

    दिल्ली से सटे टिकरी बॉर्डर पर क्या है किसान परिवारों से बात कर रहे हैं बीबीसी संवाददाता अरविंद छाबड़ा

    कैमरा- गुलशन.

  4. दिल्ली-जयपुर हाईवे किनारे ट्रकों की कतार

    मोहर सिंह मीणा

    जयपुर से, बीबीसी हिंदी के लिए

    राजस्थान हरियाणा बॉर्डर बंद होने से (शाहजहांपुर से क़रीब 50 किलोमीटर) पहले हाईवे किनारे ट्रकों की कतार लगी हुई है.

    बॉर्डर पर किसान आन्दोल शुरू होने के साथ ही इनके चक्के जाम हैं.

    ट्रकों की कतारें

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  5. दिल्ली-यूपी के चिल्ला बॉर्डर पर जुटे किसान आगे क्या करने वाले हैं?, पिछले कुछ दिनों से खुला हुआ दिल्ली यूपी सीमा पर नोएडा स्थित चिल्ला बॉर्डर एक बार फिर बंद कर दिया गया है। प्रशासन ने सुबह से ही लोगों को उस रास्ते से आगे जाने पर रोक लगा दी है। वहाँ मौजूद किसानों और कुछ आम लोगों से बात कर रहे हैं समीरात्मज मिश्र

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  6. दिल्ली से सटे चिल्ला बॉर्डर पर क्या है किसानों की रणनीति?, दिल्ली से सटे चिल्ला बॉर्डर पर क्या है किसानों की रणनीति? ज़्यादा जानकारी के साथ बीबीसी के सहयोगी समीरात्मज मिश्र (कैमरा- पीयूष नागपाल)

  7. ब्रेकिंग न्यूज़, प्रदर्शनकारियों को हटाने के मामले में किसानों को भी सुनेगा सुप्रीम कोर्ट

    सुप्रीम कोर्ट

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    दिल्ली और आसपास के इलाकों में हो रहे किसान आंदोलन के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि ये जल्द ही “राष्ट्रीय मुद्दा बन सकता है.”

    कोर्ट ने कहा कि मामले में फ़ैसला लेने से पहले उन्हें किसानों का पक्ष भी सुनना होगा.

    मुख्य न्यायाधीश जस्टिस एस.ए. बोबड़े, जस्टिस एसए बोपन्ना और जस्टिस वी. रामासुब्रमण्यन की बेंच ने किसान संगठनों को भी इस मामले में एक पक्ष बनाने की अनुमति दी है और कहा है कि इस पर गुरुवार को सुनवाई होगी.

    सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि ये मुद्दा जल्द ही राष्ट्रीय मुद्दा बन सकता है और इसलिए कोर्ट का मानना है कि मुद्दे को शांतिपूर्ण तरीके से हल करने के लिए एक कमिटी बनाई जाए जिसमें भारतीय किसान यूनियन, भारत सरकार और अन्य किसान संगठनों के सदस्य होंगे.

    मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि हम चाहेंगे कि किसान संगठन कमिटी के सदस्य बनें क्योंकि यह बहुत जल्द ही राष्ट्रीय मुद्दा होगा.

    केंद्र सरकार की तरफ से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कोर्ट को बताया कि सरकार ऐसा कोई काम नहीं करेगी जिससे किसानों को नुक़सान होगा. उन्होंने बताया कि सरकार के साथ किसानों की बातचीत नाकाम रही क्योंकि किसान मुद्दे का हल हां या ना में चाहते हैं और इसके अलावा कोई और बात नहीं करना चाहते.

    इस पर कोर्ट ने कहा कि किसानों के साथ सरकार जो बातचीत कर रही है वो काम नहीं कर रही है और 'फिर नाकाम हो जाएगी.'

    वहीं दिल्ली सरकार का पक्ष रख रहे वकील राहुल मेहरा ने ने याचिका का विरोध करते हुए कहा कि किसान कड़ाके की ठंड में सड़कों पर हैं, लेकिन ये उनकी इच्छा नहीं बल्कि मजबूरी है.

    दिल्ली की अन्य राज्यों से लगी सीमाओं पर प्रदर्शन कर रहे किसानों को हटाने से जुड़ी याचिका पर बुधवार को सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई की.

    याचिकाकर्ता ने सुप्रीम कोर्ट के शाहीन बाग़ में हुए सीएए विरोधी प्रदर्शनों पर आए फ़ैसले के आधार पर इस मामले में अपील की थी और गुहार लगाई थी कि सड़कों के बंद होने के कारण कोरोना काल में आपात सेवाओं में लोगों को परेशानी हो रही है. सुप्रीम कोर्ट ने शाहीन बाग़ में प्रदर्शनकारियों के सड़क को बंद करने पर रोक लगाई थी.

    याचिका में कहा गया है कि शाहीन बाग़ में हो रहे प्रदर्शनों में भी तीन-चीर लाख लोग शामिल थे और उस वक्त भी अभी जैसी स्थिति थी. इसके जवाब में कोर्ट ने कहा कि "क़ानून व्यवस्था के मामले में पहले के उदाहरण नहीं दिए जा सकते."

    याचिका में ये भी कहा गया था कि कोरोना महामारी के मद्देनज़र बड़ी संख्या में लोगों के सीमाओं पर इकट्ठा होने से संक्रमण का ख़तरा बढ़ सकता है.

    कोर्ट ने कहा कि याचिका में कहा गया है कि किसानों ने रास्ते बंद किए हैं लेकिन इस बात से इनकार नहीं किया जा सकता कि किसान को शहर में प्रवेश करने से रोकने के लिए सरकार ने रास्ते बंद किए हैं.

  8. किसान संगठनों ने कृषि क़ानून में संशोधन के प्रस्ताव को किया ख़ारिज

    किसान

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    केंद्र के कृषि क़ानूनों के ख़िलाफ़ प्रदर्शन कर रहे 30 से अधिक किसान संगठनों के फ़ोरम ने केंद्र सरकार को पत्र लिखकर क़ानून में संशोधन करने के सरकार के प्रस्ताव को ख़ारिज कर दिया है.

    संयुक्त किसान मोर्चा ने बुधवार को केंद्रीय कृषि और किसान कल्याण के संयुक्त सचिव विवेक अग्रवाल को पत्र लिखकर सरकार के प्रस्ताव को ख़ारिज कर दिया.

    मोर्चे का कहना है कि उसने इस प्रस्ताव को 9 दिसंबर को ही ख़ारिज कर दिया था.

    ग़ौरतलब है कि केंद्र सरकार का कहना था कि उसने पांच चरण की बातचीत के बाद कोई हल न निकलने पर उसने किसान संगठनों को तीन कृषि क़ानूनों में संशोधन का प्रस्ताव भेजा था लेकिन उस प्रस्ताव का लिखित में जवाब नहीं दिया गया.

    मोर्चे के सदस्य दर्शन पाल ने केंद्र सरकार को लिखित जवाब में कहा कि सभी किसान संगठनों ने सरकार के भेजे प्रस्ताव पर चर्चा की थी और इसको उसी दिन एकमत से ख़ारिज कर दिया था.

    इस पत्र में किसान संगठनों ने सरकार को किसान आंदोलन को कलंकित न करने और दूसरे किसान संगठनों से बात न करने की अपील की है.

    दर्शन पाल ने पत्र में लिखा है कि उन्होंने पिछली बातचीत में यह साफ़ कर दिया था कि उन्होंने लिखित जवाब क्यों नहीं भेजा था.

    मंगलवार को भारतीय किसान यूनियन (किसान) के उत्तर प्रदेश के प्रतिनिधियों ने केंद्रीय कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर से मुलाक़ात करके कृषि क़ानूनों और न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) को लेकर सुझाव दिए थे.

    इसके बाद इस संगठन ने यूपी में ज़िला स्तरों पर चल रहे प्रदर्शनों को समाप्त करने का फ़ैसला किया था.

  9. केरल के स्थानीय निकाय चुनावों की मतगणना जारी

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    केरल में स्थानीय निकाय चुनावों की मतगणना जारी है. समाचार एजेंसी एएनआई के मुताबक़ि, तिरुवनंतपुरम नगर निगम में एनडीए 13 वार्ड में आगे चल रही है.

    वहीं, एलडीएफ़ की ओर से मेयर पद की उम्मीदवार एस. पुष्पलता एनडीए के उम्मीदवार से 145 वोटों से हार गई हैं.

    शुरुआती रुझानों में ग्रामीण और शहरी निकायों में सीपीएम के नेतृत्व वाला एलडीएफ़ गठबंधन आगे चल रहा है.

    11 बजे तक आए रुझानों में 941 पंचायतों में से 442 में एलडीएफ़, 344 में यूडीएफ़ और 33 में एनडीए आगे चल रहा था.

  10. प्रदर्शनकारी किसानों ने चिल्ला बॉर्डर ब्लॉक किया

    समाचार एजेंसी एएनआई के मुताबिक़, कृषि कानूनों के विरोध में प्रदर्शन कर रहे किसानों ने चिल्ला बॉर्डर पर दिल्ली की तरफ जा रहे नोएडा लिंक रोड को ब्लॉक कर दिया है.

    चिल्ला बॉर्डर से भारतीय किसान यूनियन (भानु) के प्रदेश अध्यक्ष योगेश प्रताप सिंह ने कहा, “हम यहां शांतिपूर्वक बैठे थे लेकिन हमारे लोगों को डीएनडी पर रोका जा रहा है इसलिए अभी रोड ब्लॉक करेंगे. जब तक सारे लोग नहीं आ जाते हम किसी को नहीं जाने देंगे.”

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    वहीं एडीसीपी नोएडा, रणविजय सिंह का कहना है कि किसानों को कोई कन्फ्यूज़न था ‘जिसे दूर कर दिया गया है.’

    उन्होंने कहा,“किसान शांतिपूर्ण धरना दे रहे हैं. दोनों तरफ से ट्रैफिक की व्यवस्था सुचारू रूप से चल रही है. संगठन के लोग यहां आते-जाते रहते हैं. उनके नेतृत्व से बात करने के बाद चीजें मैनेज हो जाती हैं.”

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  11. ब्रेकिंग न्यूज़, सुप्रीम कोर्ट में आज किसानों को हटाने पर सुनवाई

    सुप्रीम कोर्ट में बुधवार को दिल्ली सीमा पर विरोध करने के लिए डटे किसानों को हटाने की याचिकाओं पर सुनवाई होगी.

    तीन नए कृषि क़ानूनों के विरोध में दिल्ली और पड़ोसी राज्यों की सीमा पर 26 नवंबर से ही किसान धरने पर बैठे हैं.

    उनके प्रदर्शन पर आपत्ति जताते हुए सुप्रीम कोर्ट में कुछ याचिकाएँ दायर की गई हैं. इनमें किसानों को तत्काल हटाए जाने की माँग की गई है.

    इन सम्मिलित याचिकाओं पर भारत के मुख्य न्यायाधीश एसए बोबड़े की अगुआई वाली खंडपीठ सुनवाई करेगी.

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  12. भारत में संक्रमण के 26 हज़ार नए मामले, 387 मौतें

    भारत में 26 हज़ार संक्रमण के नए मामले, 387 मौतें

    इमेज स्रोत, SANDEEP RASAL/SOPA IMAGES/LIGHTROCKET/GETTY IMAGES

    भारत में बीते 24 घंटे में कोविड-19 संक्रमण के 26,382 नए मामले सामने आए हैं और 387 लोगों की मौत हुई है.

    इसी के साथ देश में संक्रमण के कुल मामलों की संख्या बढ़कर 99 लाख 32 हज़ार 548 हो गई है और इस बीमारी से मरने वालों की कुल संख्या 1 लाख 44 हज़ार 96 पहुंच गई है.

    कुल सक्रिय मामलों की संख्या 3 लाख 32 हज़ार 2 है. वहीं कुल 94 लाख 56 हज़ार 449 इस बीमारी से ठीक हो गए हैं. बीते 24 घंटे में 33,813 लोग डिस्चार्ज हुए हैं.

  13. किसान संगठनों का दावा, आंदोलन के दौरान अब तक 20 किसानों की मौत

    किसान संगठनों का दावा, आंदोलन के दौरान अब तक 20 किसानों की मौत

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    दिल्ली की सीमाओं पर डटे किसानों ने सरकार पर उनके समुदाय के लिए सहानुभूति में कमी होने का आरोप लगाया है और उन किसानों के लिए एक दिन के शोक की घोषणा की है, जिनकी वो आंदोलन के दौरान मृत्यु होने का दावा कर रहे हैं.

    35 किसान संगठनों ने कहा है कि 26 नवंबर से शुरू हुए किसान आंदोलन के दौरान जान गंवाने वाले 20 किसानों के लिए रविवार को देश भर के गांवों में शोक मनाया जाएगा.

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    भारतीय किसान यूनियन (सिद्धपुर) के अध्यक्ष जगजीत सिंह ने कहा, “26 नवंबर से शुरू हुए इस आंदोलन के बाद से हर दिन औसतन एक किसान की मौत हुई है. हम देश के सभी गांवों में 20 दिसंबर को इस दौरान शहीद हुए सभी किसानों को श्रद्धांजलि देंगे. जब उनके नाम और तस्वीरें गांवों में पहुंचेगी तो हमारे संघर्ष में जुड़ने के लिए और लोग सामने आएंगे.”

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    मंगलवार को पंजाब के मोहाली और पटियाला जिलों में और उसके आसपास दो अलग-अलग सड़क दुर्घटनाओं में चार किसानों की मौत हो गई. इन किसानों की मौत का मामला मंगलवार को सिंघु बॉर्डर पर चर्चा का विषय बना रहा, जहां गुजरात, मध्य प्रदेश, तमिलनाडु और उत्तराखंड के किसान भी आंदोलन में शामिल होने पहुंचे.

    मंगलवार को जिस दिन किसान संगठनों ने अपनी योजनाओं की घोषणा की, उसी दिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि किसान संगठन और कभी ख़ुद ही इन क़ानूनों की मांग करने वाला विपक्ष किसानों को भ्रमित कर रहा है. इसकी प्रतिक्रिया में किसानों ने सरकार पर किसान समुदाय के लिए सहानुभूति की कमी होने का आरोप लगाया.

    किसान नेताओं ने ये भी कहा कि केंद्र पर उनके बनाए दबाव का ही नतीजा है कि सरकार ने संसद के शीतकालीन सत्र को रद्द करने का फ़ैसला किया है. उन्होंने कहा कि सत्र रद्द कर सरकार विपक्ष के सवालों से बचना चाहती है.

    भारतीय किसान संघ (टिकैत) के महासचिव युधवीर सिंह सेहरावत ने कहा, “हमने प्रधानमंत्री को चुनकर उन्हें बोलने की शक्ति दी और पिछले 20 दिनों में अब तक उन्होंने हमारे लिए कुछ नहीं कहा.”

  14. किसान आंदोलन का असर सरकार, सड़क से लेकर उद्योग धंधों तक

    किसान आंदोलन

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    द हिन्दू की रिपोर्ट के अनुसार हरियाणा के बहादुरगढ़ में सैकड़ों औद्योगिक इकाइयां टिकरी में किसानों के आंदोलन का खामियाज़ा भुगत रही हैं. बहागुरगढ़ भारत में चमड़े के अलावा दूसरे तरह के फुटवियर निर्माताओं का केंद्र है.

    दिल्ली को बहागुरगढ़ से जोड़ने वाले कई अंदरूनी रास्ते या तो बंद हैं या वहां ट्रैफिक की स्थिति बेहद ख़राब है. हालांकि यहां ज़्यादातर औद्योगिक इकाइयां फ़िलहाल अपनी क्षमता से आधे से भी कम पर चल रही हैं.

    वहीं कुछ कच्चे माल और प्रोसेस्ड सामानों के ट्रांसर्पोटेशन में बाधा की वजह से अस्थायी रूप से बंद हैं. बहादुरगढ़ चेंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री के वरिष्ठ उपाध्यक्ष, नरेंद्र छिकारा ने द हिंदू अख़बार से बातचीत में कहा कि मॉडर्न इंडस्ट्रियल स्टेट (एमआईई) के ‘पार्ट बी’ में क़रीब 1600 इकाइयां हैं, जिनमें फुटवियर, इलेक्ट्रॉनिक्स, प्लास्टिक, ऑटो-पार्ट्स और केमिकल की इकाइयां सबसे बुरी तरह से प्रभावित हुई हैं.

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    उन्होंने बताया, “बहादुरगढ़ में अलग-अलग क्षेत्रों की क़रीब 10,000 छोटी और बड़ी औद्योगिक इकाइयां हैं और क़रीब सभी प्रभावित हुई हैं, क्योंकि कच्चे माल और प्रोसेस्ड सामानों के परिवहन पर असर पड़ा है. लेकिन प्रदर्शनकारियों और दिल्ली से घिरा एमआईई का ‘पार्ट बी’ खामियाज़ा भुगत रहा है. इस हिस्से की इकाइयां या तो अस्थायी रूप से बंद हैं या 30%-35% की क्षमता के साथ चल रही हैं.”

    माना जा रहा है कि अगर आंदोलन लंबा चलता है तो बहादुरगढ़ की फुटवेयर इंडस्ट्री को बड़ा नुक़सान उठाना पड़ेगा और सर्दी के मौसम में पहने जाने वाले फुटवेयर के ट्रांसपोर्टेशन में और देरी होगी. हालांकि उद्योगपति अपने तैयार उत्पादों को कुंडली-मानेसर एक्सप्रेसवे के माध्यम से दिल्ली के संजय गांधी ट्रांसपोर्ट नगर और पंजाबी बाग क्षेत्रों में गोदामों तक पहुंचाने के लिए अतिरिक्त भुगतान करने के लिए तैयार हैं, लेकिन ट्रांस्पोर्टर माल लेने के लिए तैयार नहीं हैं, क्योंकि उनके गोदाम भरे हुए हैं.

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  15. संशोधन को लेकर मैं गृह मंत्री से कई बार मिल चुका हूं: नरेंद्र तोमर

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    कई किसान यूनियन कृषि क़ानून के समर्थन केंद्रीय कृषि मंत्री नरेंद्र तोमर ने मंगलवार को कई किसान संगठनों से मुलाक़ात की. कृषि मंत्री ने एक बार फिर से दोहराया कि उनकी सरकार बातचीत के लिए तैयार है. उन्होंने कहा कि तीनों कृषि क़ानून खेती-किसानी के हक़ में हैं. उन्होंने कहा कि कुछ किसान यूनियन ही नए क़ानून का विरोध कर रहे हैं और उन्हें भी समझाने की कोशिश की जा रही है.

    इकनॉमिक टाइम्स के अनुसार कृषि मंत्री ने कहा कि वे असली किसान यूनियनों से बात करने की कोशिश कर रहे हैं. तोमर ने कहा कि न्यूनतम समर्थन मूल्य यानी एमएसपी एक प्रशासनिक फ़ैसला है और इसे हमेशा जारी रखा जाएगा.

    तोमर ने कहा कि बीकेयू (किसान) ने तीनों क़ानूनों का समर्थन किया है ये हर ज़िले में इन क़ानूनों के प्रति किसानों को जागरूक करने का फ़ैसला किया है. तोमर ने कहा कि कृषि क़ानून में संसोधन को लेकर उनकी बातचीत गृह मंत्री अमित शाह से भी कई बार हुई है.

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  16. नमस्कार

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