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किसान आंदोलन: 12 तारीख़ को दिल्ली-जयपुर हाईवे होगा जाम और 14 को पूरे देश में प्रदर्शन

अमित शाह और किसानों के बीच मंगलवार रात को हुई बातचीत के बाद सरकार ने बुधवार को किसानों को एक लिखित प्रस्ताव भेजा था जिसे किसानों ने ख़ारिज कर दिया है.

लाइव कवरेज

  1. मोदी सरकार और किसानों के बीच बढ़ा गतिरोध, ट्रैफिक में कई बदलाव

    सरकार और किसान नेताओं के बीच छठे चरण की बातचीत रद्द हो गई है. केंद्र और किसानों के बीच बातचीत गतिरोध के साथ ख़त्म हुई है. हज़ारों किसान सिंघु बॉर्डर जमे रहेंगे और वे नए कृषि क़ानून को रद्द करने की मांग से पीछे नहीं हटेंगे.

    आठ दिसंबर की रात गृह मंत्री अमित शाह ने 13 किसान नेताओं को बातचीत के लिए बुलाया था लेकिन बात नहीं बनी. किसान नेताओं का कहना है कि सरकार क़ानून वापस लेने के लिए तैयार नहीं है और किसान संशोधन भर से नहीं मानेंगे.

    सरकार और किसानों के बीच 9 नवंबर को छठे चरण की बात होनी थी लेकिन अब रद्द हो गई है. कई किसान नेताओं ने मंगलवार को अमित शाह से अनौपचारिक मुलाक़ात का विरोध किया है. इन्होंने बातचीत के बहिष्कार की भी धमकी दी थी.

    किसानों के प्रदर्शन के कारण बॉर्ड पॉइंट सिंघु, टिकरी और ग़ाज़ीपुर में ट्रैफिक व्यवस्था प्रभावित हुई है. दिल्ली पुलिस ने ट्विटर पर कहा है कि टिकरी, झरोदा, ढांसा बॉर्डर बंद रहेंगे.

    हालांकि झटिकारा बॉर्डर दोपहिए और पैदल चलने वालों के लिए खुले रहेंगे. दिल्ली पुलिस ने कहा है कि जिन्हें हरियाणा जाना है वे दौराला, कापसहेड़ा, बादुसराय, राजकोरी एनएच 8, बिजवासन, पालम विहार और डुंडाहेरा बॉर्डर से जाएं. सिंघु, औचांदी, पिआओ मनियारी और मंगेश बॉर्डर बंद रहेंगे.

    इसके अलावा NH-44 दोनों तरफ़ से बंद रहेंगे. दिल्ली पुलिस ने वैकल्पिक रूट लांपुर, साफ़ियाबाद, साबोली, NH8/भोपरा / अप्सरा बॉर्डर से जाने की सलाह दी है. दिल्ली पुलिस ने अपने ट्वीट में कहा है कि मुकार्बा और जीटीके से भी ट्रैफिक डायवर्ट किया गया है. लोगों को आउटर रिंग रोड, जीटीके रोड और NH-44 से बचने की सलाह दी गई है.

  2. ब्रेकिंग न्यूज़, किसान नेताओं ने कृषि क़ानून में संशोधन के प्रस्ताव को नकारा

    केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के साथ बैठक के बाद किसान नेताओं ने कृषि क़ानून में सशोधन के प्रस्ताव को ख़ारिज कर दिया है. किसान नेता कह रहे हैं कि मोदी सरकार संशोधन का प्रस्ताव भेजती है तो वे तैयार नहीं होंगे.

    ऑल इंडिया किसान सभा के महासचिव हनन मुल्ला ने अमित शाह के साथ हुई बैठक पर कहा है, ''सरकार ने हमें कुछ लिखित में भेजने के लिए कहा है. हमने उनसे कहा था कि अगर वे कुछ लिखित में देते हैं तो हम विचार करेंगे. आज 12 बजे दिन में हमलोग की बैठक है. हम सरकार के प्रस्ताव पर चर्चा करेंगे. अगर लिखित आश्वासन में संशोधन की बात होगी तो हमारा रुख़ स्पष्ट है. बिना क़ानून को रद्द किए हम नहीं मानेंगे. अगर सरकार के पत्र में कुछ सकारात्मक रहा तो हम अगली बैठक के लिए तैयार होंगे.''

  3. सरकार इस समय हड़बड़ाहट में है: सुखविंदर सिंह सभरा

    गृह मंत्री अमित शाह से मंगलवार देर शाम 13 किसान नेताओं ने मुलाक़ात की थी. यह मुलाक़ात किसान यूनियन के बीच विवाद का विषय बन गया है. भारती किसान यूनियन (उगराहां) के अध्यक्ष जोगिंदर सिंह उगराहां के बाद अब किसान मज़दूर संघर्ष कमिटी के सुखविंदर सिंह सभरा ने कहा है कि मंगलवार की मुलाक़ात से कुछ हासिल नहीं हुआ. उन्होंने समाचार एजेंसी एएनआई से कहा है, ''सरकार इस समय हड़बड़ाहट में है. मंगलवार शाम बुलाई गई बैठक बेफ़ायदा थी. प्रस्ताव भेजना था तो 6 या 7 दिसंबर को भेजते. अगर प्रस्ताव में संशोधन की बात आती है तो उससे बात नहीं बनेगी.''

  4. मोदी सरकार ने क़ानून रद्द भी कर दिया तो किसका भला होगा?

  5. कोरोना: बीते 24 घंटों में 32,080 संक्रमित, 402 मौतें

    स्वास्थ्य मंत्रालय ने कहा है कि बीते चौबीस घंटों में देश में कोरोना संक्रमण के 32,080 नए मामले दर्ज किए गए हैं. इसके साथ ही देश में कोरोना संक्रमितों का कुल आंकड़ा अब 97,35,850 हो गया है.

    वहीं बीते चौबीस घंटों में इस वायरस के कारण देश में 402 मौतें हुई हैं. अब तक ये वायरस भारत में कुल 1,41,360 लोगों की जान ले चुका है.

    स्वास्थ्य मंत्रालय का कहना है कि अब देश में कोरोना के कुल 3,78,909 एक्टिव मामले हैं. अब तक 92,15,581 लोगों को ठीक होने के बाद अस्पताल से छुट्टी दी जा चुकी है.

    आईसीएमआर के अनुसार बीते कल देश में 10,22,712 नमूनों के कोरोना टेस्ट किए गए. इसके साथ 8 दिसंबर तक देश में कोरोना के लिए 14,98,36,767 सैम्पल्स की जांच की जा चुकी है.

    जॉन्स हॉप्किन्स यूनिवर्सिटी के डौशबोर्ड के अनुसार अब तक पूरी दुनिया में कोरोना संक्रमण के 68,223,713 मामले दर्ज किए जा चुके हैं, वहीं कुल 1,556,817 लोगों की मौत इस वायरस के कारण हो चुकी है.

    मौतों के मामले में सबसे आगे अमेरिका है जहां ये वायरस 286,232 जानें ले चुका है. ब्राज़ील में ये वायरस 178,159 लोगों को मौत दे चुका है जबकि मेक्सिको में 110,874 लोगों की जान इस वायरस से गई है.

  6. अमित शाह से किसान नेताओं की अचानक मुलाक़ात के बाद एक विवाद

    गृह मंत्री अमित शाह से मंगलवार की शाम संयुक्त किसान मोर्चा के 13 सदस्यों की मुलाक़ात किसान यूनियन के बीच विवादित बन गई. जोगिंदर सिंह उगराहां पंजाब में भारती किसान यूनियन (उगराहां) के अध्यक्ष हैं.

    यह पंजाब का सबसे बड़ा किसान यूनियन है. जोगिंदर सिंह उगराहां ने कहा है कि किसान नेताओं को सरकार से बुधवार को तयशुदा औपचारिक बैठक से पहले अमित शाह से अनौपचारिक रूप से नहीं मिलना चाहिए था.

    उगराहां ने नई दिल्ली में पत्रकारों से बातचीत में कहा, ''कुछ किसान यूनियनों को अमित शाह ने अनौपचारिक बातचीत के लिए बुलाया था. अमित शाह से अनौपचारिक मुलाक़ात करने किसान यूनियनों को नहीं जाना चाहिए था. नवंबर में जब किसानों का आंदोलन दिल्ली में शुरू ही हुआ था तभी मुझे बीजेपी नेता सुरजीत जयनी ने अमित शाह से मिलने के लिए बुलाया था लेकिन मैंने मिलने से इनकार कर दिया था और कहा था कि जब सभी यूनियनों को बुलाया जाएगा तभी वो मिलने आएंगे.''

    उगराहां ने कहा कि इस बार उन्हें अमित शाह ने नहीं बुलाया. उन्होंने कहा कि बिना आधिकारिक बातचीत के मिलना शक पैदा करता है. बीकेयू (उगराहां) और किसान मज़दूर संघर्ष कमिटी (केएमएससी) पंजाब में 30 किसान यूनियनों के संयुक्त मोर्चे का हिस्सा नहीं हैं. हालांकि ये अलग से समन्वय कर रहे हैं.

    जब विरोध-प्रदर्शन दिल्ली शिफ़्ट हो गया और पाँच दिसंबर को भारत के कई किसान यूनियनों ने मिलकर संयुक्त मोर्चा बनाया तब भी बीकेयू (उगराहां) और केएमएससी अलग रहे. इंडियन एक्सप्रेस के अनुसार गृह मंत्री ने संयुक्त मोर्चा से पाँच-सात सदस्यों को बातचीत के लिए बुलाया था लेकिन बाद में 13 सदस्यों को भेजने पर सहमति बनी थी.

  7. शारीरिक सीमाओं के बावजूद आंदोलन के साथ

  8. अचानक बैठक से पहले अमित शाह ने किसान नेताओं को क्यों बुलाया?

    मोदी सरकार कोशिश कर रही है कि किसी तरह से किसानों के आंदोलन को ख़त्म किया जाए तो दूसरी तरफ़ विपक्षी पार्टियों ने मंगलवार को कहा कि भारत बंद व्यापक रूप से सफल रहा.

    भारत बंद उन राज्यों में ज़्यादा प्रभावी रहा जहां बीजेपी की सरकारें नहीं हैं. कुछ विपक्षी नेताओं को गिरफ़्तार किया गया तो कुछ ने आरोप लगाया कि उन्हें घर से बाहर नहीं निकलने दिया जा रहा है.

    विपक्षी पार्टियों की नज़र इस पर भी बनी रही कि अचनाक गृह मंत्री अमित शाह ने बुधवार को किसान और सरकार की बीच होने वाली अगले चरण की बातचीत से पहले किसान यूनियन के कुछ प्रतिनिधियों को बुला लिया. कई लोगों को लगा कि यह किसानों की एकता को तोड़ने की कोशिश है.

    अब तक किसानों से बातचीत में कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर और रेल मंत्री पीयूष गोयल शामिल हो रहे थे लेकिन मंगलवार को अचानक गृह मंत्री अमित शाह सक्रिय हो गए.अमित शाह से मिलने के बाद किसान नेताओं ने कहा कि सरकार कृषि क़ानून वापस लेने को तैयार नहीं है लेकिन बुधवार को क़ानून में संशोधन के लिए लिखित आश्वासन देगी.

    ये भी कहा जा रहा है कि अमित शाह गृह मंत्री हैं और वो किसान नेताओं को इस एंगल से भी समझाने की कोशिश कर रहे हैं कि अगर आंदोलन ऐसे ही चलता रहा तो इसका फ़ायदा अलगाववादी ताक़तें उठा सकती हैं.

    किसान यूनियन के कुछ नेताओं ने कहा कि सरकार के आश्वासन पर विचार करने के लिए किसान नेता सिंघु बॉर्डर पर बुधवार को दिन में बैठक करेंगे. इस बीच 11 विपक्षी पार्टियों के नेता बुधवार शाम में राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद से मुलाक़ात करेंगे. इस मुलाक़ात में मोदी सरकार के नए कृषि क़ानून को रद्द करने मांग करेंगे. एनसीपी प्रमुख शरद पवार राष्ट्रपति से मिलने के लिए दिल्ली आ गए हैं.

    इकनॉमिक टाइम्स के मुताबिक़ शरद पवार की रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह से मुलाक़ात हुई है. राजनाथ सिंह और शरद पवार दोनों भारत के कृषि मंत्री रह चुके हैं. शरद पवार ने कहा कि पाँच से छह राजनीतिक दलों की कृषि क़ानून को लेकर बैठक होने जा रही है और कोई सामूहिक रणनीति तैयार की जाएगी. पवार ने कहा कि राष्ट्रपति से पाँच बजे मुलाक़ात के लिए टाइम मिला है.

    पवार ने कहा कि विपक्षी दल कृषि क़ानून को लेकर अपनी चिंताओं से राष्ट्रपति को अवगत कराएंगे. शरद पवार यूपीए सरकार में कृषि मंत्री थे. बीजेपी ने एक पत्र सार्वजनिक किया है जिसे पवार ने कृषि मंत्री रहते हुए राज्यों को लिखा था. इस पत्र में एग्रीकल्चरल प्रोड्यूस मार्केटिंग कमिटी यानी एपीएमसी एक्ट में सुधार की बात कही गई है.

    पवार ने इसे लेकर सफ़ाई दी है. उन्होंने कहा है, ''मैंने कहा था कि एपीएमसी में सुधार की ज़रूरत है. एपीएमसी एक्ट को जारी रखना चाहिए लेकिन सुधार के साथ. इसमें कोई शक नहीं है कि मैंने पत्र लिखा था लेकिन मोदी सरकार के इन तीन नए क़ानूनों का उसमें कोई ज़िक्र नहीं था. बीजेपी मुद्दे को भटकाना चाहती है. इस बात को कोई तवज्जो देने की ज़रूरत नहीं है.''

  9. मोदी सरकार के नए कृषि क़ानूनों से किसे फ़ायदा, किसे नुक़सान

  10. मोदी सरकार का कृषि क़ानून रद्द करने से इनकार, अब क्या करेंगे किसान?

    गृह मंत्री अमित शाह ने मंगलवार देर शाम किसान यूनियनों के एक समूह से कहा कि सरकार तीन नए कृषि क़ानूनों को वापस नहीं ले सकती. केंद्र सरकार ने किसानों से उस दिन ये बात कही जब किसान संगठनों ने सरकार पर दबाव बनाने के लिए भारत बंद का आयोजन किया था.

    ऑल इंडिया किसान सभा के नेता हनन मुल्ला ने गृह मंत्री के साथ बैठक के बाद कहा कि अमित शाह बुधवार सुबह कृषि क़ानूनों में संशोधन करने के लिए लिखित आश्वासन देंगे. मुल्ला ने कहा कि बुधवार दोपहर आंदोलनकारी किसान सिंघु बॉर्डर पर सरकार के प्रस्ताव को लेकर चर्चा करेंगे.

    उन्होंने कहा कि किसान संशोधन नहीं बल्कि चाहते हैं कि ये तीनों क़ानून रद्द किए जाए. हालांकि कुछ किसान नेता चाहते हैं कि सरकार के प्रस्ताव को ख़ारिज करने से पहले इस पर चर्चा होनी चाहिए. मंगलवार को किसानों के भारत बंद को 25 राजनीतिक पार्टियों ने समर्थन किया था. इनमें ट्रेड यूनियन, रीटेल और ट्रांसपोर्ट असोसिएशन और कई पेशवर निकाय शामिल थे.

    बुधवार को प्रस्तावित वार्ता रद्द

    मंगलवार को देर रात अमित शाह के साथ किसान यूनियन के नेताओं की हुई अनौपचारिक मुलाक़ात के बाद बुधवार को सरकार के साथ किसानों की प्रस्तावित वार्ता स्थगित कर दी गई है.

    अभी तक किसान यूनियनों का रुख़ साफ़ नहीं है कि वो अब क्या करेंगे. अमित शाह और केंद्रीय कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने 14 किसान नेताओं से मुलाक़ात की. राष्ट्रीय किसान महासंघ के दो नेता भी गृह मंत्री के साथ हुई बैठक में शामिल थे.

    इस संघ के प्रवक्ता अभिमन्यु कोहार ने कहा, ''सरकार के लिखित प्रस्ताव मिलने के बाद किसान नेता अपनी आगे की रणनीति तय करेंगे. किसान नेता अपनी सभी मांगों को लेकर प्रतिबद्ध हैं. इनमें तीन नए कृषि क़ानूनों को रद्द करना, एमएसपी गारंटी लॉ अनिवार्य करना, बिजली बिल माफ़ करना और पराली जलाने पर लगने वाले जुर्माने को वापस लेना शामिल है.''

    अब क्या करेंगे किसान?

    अब भी सरकार और किसानों के बीच सहमति नहीं बन पाई है. किसान नेताओं के मुताबिक़ अमित शाह ने मंगलवार को इंडियन काउंसिल ऑफ एग्रीकल्चर रिसर्च पुसा कॉम्पलेक्स में हुई बैठक में कहा कि बुधवार को कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर एक ठोस प्रस्ताव पेश करेंगे. इसमें तीनों नए कृषि क़ानून में संशोधन की बात होगी.

    क्रांतिकारी किसान यूनियन के दर्शन पाल ने कहा है कि उन्हें केंद्र सरकार का संशोधन प्रस्ताव स्वीकार नहीं है. उन्होंने कहा कि तीनों क़ानूनों को वापस लेने के बाद ही गतिरोध ख़त्म होगा. हालांकि बुधवार को सिंघु बॉर्डर पर केंद्र सरकार के प्रस्ताव पर संयुक्त किसान मोर्चा की बैठक होगी और आगे की रणनीति तय की जाएगी.

    यह बैठक आज दस बजे होनी है. राष्ट्रीय किसान महासंघ के नेता शिव शर्मा काकाजी ने कहा है कि किसान अपनी मांग फिर से दोहरा रहे हैं कि तीनों क़ानून वापस लेना होगा. उन्होंने कहा, ''सरकार संशोधन के लिए कह रही है लेकिन हमारी मांग है कि तीनों क़ानून रद्द किए जाएं.''

  11. नमस्कार, बीबीसी हिन्दी के इस लाइव पेज में आप सबका स्वागत है. हम यहांँ दिन भर किसान आंदोलन और देश दुनिया की अन्य सभी बड़ी ख़बरों से आपको अवगत कराते रहेंगे. पिछले 24 घंटो के अपडेट्स के लिए यहां क्लिक करें.