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अमित शाह और किसान नेताओं की बातचीत बेनतीजा, कृषि क़ानून वापस लेने से इनकार
बुधवार को किसान नेताओं और केंद्र सरकार के बीच होने वाली बैठक स्थगित. सरकार ने कहा, पहले भेजेगी लिखित प्रस्ताव.
लाइव कवरेज
मोदी सरकार के नए कृषि क़ानूनों से किसे फ़ायदा, किसे नुक़सान
कृषि क़ानूनों पर बुधवार की बैठक टली, सरकार भेजेगी लिखित प्रस्ताव
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के साथ 13 किसान नेताओं की बैठक का कोई नतीजा नहीं निकला.
बैठक में मौजूद किसान नेता हनन मुल्ला ने बाहर आकर बताया कि बुधवार 9 नवंबर की बैठक अब नहीं होगी. साथ ही केंद्र सरकार किसान नेताओं को अपना एक लिखित प्रस्ताव भेजेगी.
मंगलवार देर रात ख़त्म हुई बैठक के बाद उन्होंने बताया, “अमित शाह ने कहा है कि किसान नेताओं को कल एक लिखित प्रस्ताव भेजा जाएगा. उन्होंने कहा कि एपीएमसी, एसडीएम की पावर समेत चार-पांच विषय जो उठाए गए हैं, उनपर हम लिखकर दे देंगे. अमित शाह ने कहा आप उसपर चर्चा करो और फिर परसो बात करेंगे.”
हनन मुल्ला के मुताबिक़, सरकार का लिखित प्रस्ताव मिलने के बाद किसान नेता बैठक कर अपनी आगे की रणनीति बनाएंगे.
उन्होंने बताया, “मंत्री ने कहा है कि आप प्रस्ताव पर पहले विचार करें, उसे पढ़कर आएं, फिर बात करेंगे.”
उन्होंने कहा, "अमित शाह ने हमें कहा कि सरकार संशोधनों के बारे में लिखित में देगी. लेकिन हम क़ानून वापस करवाना चाहते हैं. बीच का कोई रास्ता नहीं है."
किसान नेता हनन मुल्ला ने कहा कि सरकार कृषि क़ानून वापल लेने को तैयार नहीं और अब किसान नेताओं के दोबारा बैठक में आने की संभावना कम है.
वहीं बैठक में मौजूद एक अन्य किसान नेता ने समाचार एजेंसी एएनआई से बातचीत में बताया कि बैठक में वही चर्चा हुई, जो पिछली पांच मीटिंग में हुई है. "उनका प्रस्ताव यही है कि इसमें जो सुधार चाहते हैं हम करने को तैयार हैं."
ऑल इंडिया किसान सभा के महासचिव हनन मुल्ला ने बताया कि किसान नेता बुधवार दोपहर 12 बजे सिंघु बॉर्डर पर बैठकर करेंगे.
बैठक स्थल के बाहर की हलचल
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के साथ कुछ किसान नेताओं की बैठक जारी है. ये बैठक पूसा इंस्टीट्यूट के गेस्ट हाउस में हो रही है.
बीबीसी पंजाबी सेवा के पत्रकार सरबजीत धालीवाल लगातार वहां बने हुए हैं और उन्होंने बैठक स्थल के बाहर से ये तस्वीरें भेजी हैं.
अमित शाह की बैठक में नहीं जाने वाले किसान नेता जोगिंदर सिंह उगराहां कौन हैं
अमित शाह से मुलाक़ात के लिए कुछ नेताओं को अकेले नहीं जाने चाहिए था- जोगिंदर सिंह उगराहां
नौ दिसंबर की किसान और केंद्र सरकार की बातचीत से पहले केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की ओर से किसानों नेताओं के अनऔपचारिक बातचीत के लिए दिये आमंत्रण को लेकर किसान नेताओं की ओर से अलग-अलग बयान आ रहे हैं.
बीबीसी पंजाबी सेवा के पत्रकार सरबजीत धालीवाल के मुताबिक़ इस बातचीत के लिए 13 किसान नेताओं को बुलाया गया है.
पंजाब के सबसे बड़े किसान संगठन भारतीय किसान युनियन (उगराहां) के नेता इस बातचीत के लिए नहीं गए.
भारतीय किसान यूनियन (राजेवाल) के नेता बलबीर सिंह राजेवाल ने बीबीसी को बताया कि यह एक अनौपचारिक बातचीत है.
राजेवाल इस बैठक में जा रहे हैं.
इसी दौरान संगठन भारतीय किसान युनियन (उगराहां) के नेता जोगिंदर सिंह उगराहां ने वीडियो बयान जारी कर कहा कि कुछ नेताओं को अकेले बैठक में नहीं जाना चाहिए था, इससे किसान संगठनों की एकता को लेकर शंकाएँ खड़ी हो सकती हैं.
जोगिंदर सिंह उगराहां ने बीबीसी पंजाबी से बताया है कि उन्हें आज की बैठक के लिए सरकार की ओर से कोई निमंत्रण नहीं मिला था.
ऐसे में इस बात की आशंका जताई जा रही है कि क्या किसान संगठनों में विभाजन हो सकता है.
इस आशंका पर आंदोलन में शामिल सामाजिक कार्यकर्ता मेधा पाटकर ने बीबीसी संवाददाता दिव्या आर्या से कहा कि इस बैठक के लिए सभी किसान संगठनों को लूप में नहीं रखा गया है, यह सरकार की ओर से आंदोलन में विभाजन करने की कोशिश हो सकती है.
हालांकि अमित शाह से किसानों की बैठक को लेकर ही असमंजस की स्थिति बनी हुई है.
सबसे पहले भारतीय किसान यूनियन (टिकैत) के प्रवक्ता राकेश टिकैट ने ख़बर दी कि अमित शाह ने किसान नेताओं को शाम सात बजे मिलने के लिए बुलाया है.
इसके बाद शाम साढ़े चार बजे किसान नेताओं की एक प्रेस कॉन्फ़्रेंस हुई जिसमें इस बात की घोषणा हो गई कि 13 लोग गृहमंत्री से मिलने जाएंगे.
उन नेताओं के नाम इस तरह हैं.
1.राकेश टिकैत 2. गुरनाम चढूनी 3. हनन मुल्ला 4. शिवकुमार उर्फ कक्का जी 5. बलबिर सिंह 6. जगजीत सिंह7. रुलदू सिंह मानसा 8. मंजीत सिंह राय 9. बुट्टा सिंह बुरूजगिल 10. हरिंदर सिंह लखोवाल 11. दर्शन पाल 12. कुलवंत सिंह संधू 13. भोग सिंह मानसा
लेकिन शाम सात बजे जब पत्रकारों ने उनसे पूछा कि मीटिंग कहां हो रही है तो उन्होंने कहा कि वो पता करते हैं कि गृहमंत्री से किसानों की बैठक कहां हो रही है.
पहले बताया गया था कि गृह मंत्रालय या अमित शाह के सरकारी आवास पर बैठक होगी.
फिर बताया गया कि बैठक पूसा इंस्टीट्यूट के गेस्ट हाउस में हो रही है.
हालांकि बातचीत से ठीक पहले गृहमंत्री के साथ बातचीत करने आए किसान नेता राकेश टिकैत ने बीबीसी संवाददाता दिव्या आर्या से दावा किया कि 13 किसान नेता बाक़ी सभी समूहों के प्रतिनिधि के तौर पर बैठक में शामिल हो रहे हैं और सब एक साथ हैं.
इमरान ख़ान ने ट्विटर पर सबको अनफ़ॉलो कर दिया
पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान ख़ान ने ट्विटर पर उन तमाम लोगों को अनफ़ॉलो कर दिया है जिन्हें वो पहले फ़ॉलो किया करते थे.
कुछ दिनों पहले तक इमरान ख़ान 18 लोगों को फ़ॉलो किया करते थे लेकिन कल अचानक उन्होंने सबको अनफ़ॉलो कर दिया.
पाकिस्तान के वरिष्ठ पत्रकार हामिद मीर अकेले ऐसे पत्रकार हैं जिन्हें इमरान ख़ान ट्विटर पर फ़ॉलो किया करते थे लेकिन पिछले साल इमरान ख़ान ने उन्हें भी अनफ़ॉलो कर दिया था.
इमरान ख़ान के विशेष सलाहकार (डिजिटल मीडिया) अर्सलान ख़ालिद ने बीबीसी को बताया कि इमरान ख़ान अपना निजी ट्विटर एकाउंट ख़ुद चलाते हैं इसलिए उन्होंने सबको अनफ़ॉलो क्यों किया इसको जवाब वही दे सकते हैं.
इमरान ख़ान ने मार्च 2010 में ट्विटर पर अपना एकाउंट बनाया था और उन्हें इस समय एक करोड़ 29 लाख से ज़्यादा लोग फ़ॉलो करते हैं.
इमरान ख़ान जिन 18 लोगों को ट्विटर पर फ़ॉलो करते हैं उनमें उनकी पूर्व पत्नी जमाइमा गोल्डस्मिथ भी शामिल थीं.
उनके अलावा वो अपनी पार्टी के तीन ट्विटर एकाउंट्स और पार्टी के कुछ कई वरिष्ठ नेताओं को फ़ॉलो करते हैं.
बीबीसी हिंदी का डिजिटल बुलेटिन 'दिनभर', 8 दिसंबर 2020
बीबीसी हिंदी का डिजिटल बुलेटिन 'दिनभर', 8 दिसंबर 2020, सुनिए फ़ैसल मोहम्मद अली के साथ.
केजरीवाल ने कहा- उन्हें किसान आंदोलन में जाने से रोका गया, पुलिस ने ख़ारिज किया दावा
दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने कहा है कि उन्हें अगर नहीं रोका गया होता तो वो किसानों के भारत बंद में जाते और उनका समर्थन करते.
उन्होंने आम आदमी पार्टी के कार्यकर्ताओं को अपने घर पर संबोधित करते हुए ये बातें कही. केजरीवाल ने दिल्ली पुलिस पर घर में नज़रबंद रखने का आरोप लगाया.
अरविंद केजरीवाल ने कहा कि उन्होंने दिल्ली की सीमा पर एक मुख्यमंत्री के तौर पर नहीं बल्कि एक आम आदमी के तौर पर जाकर किसानों को समर्थन देने की योजना बनाई थी लेकिन मुझे लगता है कि उन्हें मेरी योजना के बारे में पता चल गया था और उन्होंने मुझे जाने नहीं दिया.
हालांकि दिल्ली पुलिस ने मुख्यमंत्री केजरीवाल के बयान को ग़लत बताया है.
दिल्ली पुलिस ने कहा है कि दिल्ली के मुख्यमंत्री का घर में नज़रबंद रखने का दावा ग़लत है. वो कहीं भी जाने के अपने अधिकार का इस्तेमाल कर सकते हैं. उनके घर का प्रवेश द्वार इस बात की तस्दीक़ करता है.
बीजेपी ने केजरीवाल के इस आरोप को ख़ारिज करते हुए उन पर झूठ बोलने और प्रौपेगेंडा करने का आरोप लगाया है.
विपक्ष के नेताओं की राष्ट्रपति कोविंद से बुधवार को होगी मुलाक़ात
सीपीएम महासचिव सीताराम येचुरी ने कहा है कि विपक्षी दलों का एक प्रतिनिधिमंडल बुधवार को राष्ट्रपति कोविंद से मुलाक़ात करेगा.
सीतराम येचुरी ने समाचार एजेंसी एएनआई से कहा कि बुधवार शाम पाँच बजे होने वाली मुलाक़ात में कांग्रेस के राहुल गांधी, एनसीपी के शरद पवार समेत कुल पाँच लोग होंगे.
उन्होंने कहा कि कोरोना प्रोटोकॉल के कारण सिर्फ़ पाँच लोगों को ही राष्ट्रपति से मिलने की इजाज़त दी गई है.
यूपी में मिला-जुला असर रहा भारत बंद का
समीरात्मज मिश्र
लखनऊ से बीबीसी हिंदी के लिए
नए कृषि क़ानूनों के ख़िलाफ़ किसान संगठनों की ओर से आहूत भारत बंद का मंगलवार को उत्तर प्रदेश में मिला-जुला असर दिखा.
कांग्रेस, समाजवादी पार्टी, राष्ट्रीय लोकदल, बीएसपी जैसी प्रमुख विपक्षी पार्टियों के अलाव वामपंथी दल भी बंद का समर्थन कर रहे थे.
प्रशासन किसी भी तरह की अप्रिय घटना से निपटने के लिए पूरी तरह मुस्तैद रहा.
कई पार्टियों के प्रमुख नेताओं को या तो घरों से बाहर ही नहीं निकलने दिया गया या फिर उन्हें गिरफ़्तार कर लिया गया.
राज्य के विभिन्न हिस्सों में किसान सुबह से ही सड़कों पर निकल आए थे.
कई जगहों पर रास्तों को जाम किया तो कुछ जगह पुलिस से किसानों और राजनीतिक दलों के नेताओं की झड़पें भी हुईं.
हालांकि किसी भी जगह से किसी अप्रिय घटना की ख़बर नहीं है.
प्रयागराज में सुबह ही समाजवादी पार्टी के कार्यकर्ताओं ने ट्रेन रोककर रेल की पटरियों पर धरना दिया तो लखनऊ में समाजवादी पार्टी के एमएलसी सुनील साजन ने विधानसभा भवन के बाहर कृषि क़ानून के ख़िलाफ़ प्रदर्शन किया.
कांग्रेस पार्टी ने सरकार पर आरोप लगाया कि यूपी कांग्रेस के सभी ज़िलाध्यक्षों, ज़िला कमेटी के पदाधिकारियों, शहर अध्यक्षों को पुलिस ने सुबह से ही नज़रबंद कर रखा है.
आगरा में कई किसान नेताओं को भी नज़रबंद किया गया.
पश्चिमी यूपी के मुज़फ़्फ़रनगर, शामली, मेरठ, सहारनपुर में भी कई जगहों किसानों ने प्रदर्शन किए.
शामली में किसानों के साथ पुलिस की झड़प भी हुई.
यहां मंडियां खुली रहीं और बाज़ारों में भी चहल-पहल रही.
सीएम योगी आदित्यनाथ ने निर्देश दिए थे कि भारत बंद के दौरान क़ानून व्यवस्था हाथ में लेने वालों के ख़िलाफ़ कड़ी कार्रवाई की जाए लेकिन किसानों के साथ दुर्व्यवहार नहीं होना चाहिए.
सभी ज़िलों में बड़ी संख्या में पुलिस बल तैनात किए गए थे.
किसान आंदोलन पर बिहार, ओडिशा, केरल के किसानों ने क्या कहा?
#आज_भारत_बंद_है: विपक्ष के नेताओं ने क्या कुछ कहा
गृहमंत्री से केवल हां या ना की माँग करेंगे: किसान नेता
केंद्र के तीन कृषि क़ानूनों की वापसी की माँग को लेकर विरोध प्रदर्शन कर रहे किसानों का कहना है कि अब इस मामले में बीच का कोई रास्ता नहीं है.
भारत बंद के बाद सिंघु बॉर्डर पर किसान नेताओं ने प्रेस से बातचीत के दौरान कहा कि उनका 13 सदस्यों का एक प्रतिनिधि मंडल आज शाम सात बजे केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह से मुलाक़ात करेगा.
गृहमंत्री ने ख़ुद उन्हें बैठक करने के लिए बुलाया है.
किसानों ने कहा कि गृहमंत्री से मुलाक़ात के दौरान वे लोग केवल मंत्री की हां या ना सुनने की माँग करेंगे. उनके अनुसार अब किसी तरह के बीच-बचाव का कोई रास्ता नहीं है.
इस दौरान किसान नेताओं ने दावा किया कि देश के 25 राज्यों में 10 हज़ार से ज़्यादा जगहों पर भारत बंद सफल रहा.
किसानों ने कहा कि देश व्यापी सफल भारत बंद के बाद सरकार जान गई है कि अब उनके पास कोई रास्ता नहीं है.
उन्होंने कहा कि भारत बंद के बाद सरकार झुक गई है.
कर्नाटक में बंद रहा कामयाब
इमरान कु़रैशी
बेंगलुरू से बीबीसी हिंदी के लिए
कर्नाटक के उत्तरी और दक्षिणी दोनों इलाक़ों के ज़िलों में बंद कामयाब दिखा.
बेंगलुरू और मैसुरू में विरोध प्रदर्शन भी देखने को मिले. हालांकि, बाक़ी क़स्बाई इलाक़ों की अपेक्षा मुख्य शहर में बंद का असर ज़्यादा दिखा.
उत्तरी कर्नाटक के बेलगावी शहर में बंद कामयाब रहा और इसकी बड़ी वजह थी बस सर्विस का बंद होना.
किसानों के बड़े हुजूम ने बेलगावी-बागलकोट हाईवे को जाम कर दिया था.
जयपुर में भिड़े भाजपा-कांग्रेस कार्यकर्ता, बंद का असर
मोहर सिंह मीणा
जयपुर से, बीबीसी हिंदी के लिए
किसानों के भारत बंद का असर राजस्थान के अधिकतर ज़िलों में देखने को मिला.
भारत बंद के समर्थन में राजनीतिक दलों और किसान संगठनों ने सड़कों पर उतर कर विरोध दर्ज कराया.
प्रदेश में राजस्थान रोडवेज़ बसें रात 12 बजे से आज दो बजे तक बंद हैं और कमर्शियल वाहनों के चक्के भी थमे हुए हैं.
राजस्थान की 247 कृषि उपज मंडियां पूरी तरह बंद हैं. कई जगह दो घंटे पेट्रोल पंप बंद कर भारत बंद का समर्थन किया गया.
व्यापारियों ने समर्थन में ख़ुद ही दुकानें बंद रखीं, जबकि कई जगह आंदोलनकारियों के दुकानें बंद कराने की सूचनाएं मिली हैं.
प्रदेश के कई ज़िलों में सड़कें जाम कर पुतले फूंके गए और केंद्र सरकार के विरोध में नारेबाज़ी हुई.
सरकार के परिवहन मंत्री प्रताप सिंह खाचरियावास ट्रैक्टर लेकर ख़ुद सड़कों पर उतरे.
जयपुर में भाजपा मुख्यालय के सामने कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने केंद्र सरकार का पुतला जलाया, जिसके बाद भाजपा और कांग्रेस कार्यकर्ता आमने-सामने हो गए. आपस में खूब धक्का-मुक्की हुई और बात मारपीट व पत्थरबाज़ी तक पहुंच गई. दोनों तरफ के कार्यकर्ताओं को चोटें भी आई हैं.
राजस्थान के मुख्यमंत्री ने भारत बंद से पहले सोमवार को पुलिस प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ कानून व्यवस्ठा बनाए रखने पर चर्चा की थी. भारत बंद के दौरान चिकित्सा सुविधाएं, दूध समेत आवश्यक सेवाओं में बाधा नहीं आने के निर्देश दिए गए थे.
जयपुर में भाजपा और कांग्रेस कार्यकर्ताओं के बीच हुई मारपीट के अलावा प्रदेश भर में भारत बंद के दौरान अभी तक कोई ऐसी घटना होने की सूचना नहीं है.
किसान संगठनों की प्रेस कॉन्फ़्रेंस
सिंघु बॉर्डर से किसानों की प्रेस कॉन्फ़्रेंस. भारत बंद के बाद क्या कह रहे हैं किसान नेता.
पश्चिम बंगाल में कैसा रहा बंद का असर?
प्रभाकर मणि तिवारी
कोलकाता से, बीबीसी हिंदी के लिए
पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने किसानों के भारत बंद की अपील का समर्थन करने के बावजूद राज्य में बंद का समर्थन नहीं करने का एलान किया था.
यह ज़रूर है कि पुलिस और प्रशासन को बंद समर्थकों के साथ कोई ज़बरदस्ती नहीं करने के भी निर्देश दिए गए थे.
लेकिन कांग्रेस और वाममोर्चा समर्थकों ने मंगलवार सुबह से ही बंद के समर्थन में कोलकाता और आस-पास के उपनगरों में रैलियां निकाली और सड़कों और रेलवे की पटरियों पर धरना देकर वाहनों और ट्रेनों की आवाजाही ठप कर दी. ज़्यादातर सरकारी दफ़्तर भी बंद रहे.
बंद के दौरान किसी अप्रिय घटना को रोकने के लिए हज़ारों की तादाद में पुलिसवालों को संवेदनशील इलाक़ों में तैनात किया गया है.
समर्थकों ने कोलकाता के श्यामबाज़ार और धर्मतल्ला समेत कई इलाक़ों में रास्ता रोका. इसी तरह जादवपुर और मध्यमग्राम समेत कई अन्य स्टेशनों पर पटरियों पर धरना आयोजित किया गया.
बंद का राज्य में मिला-जुला असर है. निजी और सरकारी वाहन सड़कों पर आम दिनों के मुक़ाबले कम हैं. सरकारी बसों की तादाद ज़रूर बढ़ाई गई है. लेकिन उनमें यात्री बेहद कम दिखे.
बंद समर्थकों ने कई जगह सरकारी बसों में सवार यात्रियों से उतरने का भी अनुरोध किया. कॉलेज स्ट्रीट इलाक़े में भी प्रदर्शकारियों ने ट्रामों और बसों की आवाजाही रोक दी.
मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने सोमवार को मेदिनीपुर की रैली में कहा था कि 'केंद्र सरकार या तो कृषि कानूनों को वापस ले या फिर इस्तीफ़ा दे. इस मुद्दे पर बंगाल सरकार आंदोलनकारी किसानों के साथ है.'
झारखंड में बंद को मुख्यमंत्री का समर्थन, व्यापक असर
रवि प्रकाश
राँची से, बीबीसी हिंदी के लिए
भारत बंद का झारखंड में व्यापक असर पड़ा है. मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने लोगों से इस बंद को समर्थन देने की अपील की है.
राज्य में सत्ताधारी झारखंड मुक्ति मोर्चा, कांग्रेस व राष्ट्रीय जनता दल के अलावा सभी वामपंथी पार्टियाँ और दर्जनों सामाजिक संगठन बंद के समर्थन में हैं.
इनसे जुड़े कार्यकर्ताओं ने राजधानी राँची के अल्बर्ट एक्का चौक पर प्रदर्शन कर दुकानदारों से दुकानें बंद रखने की अपील की.
जमशेदपुर, दुमका, धनबाद, देवघर, गिरिडीह, बगोदर, डाल्टनगंज, साहिबगंज, पाकुड़, गोड्डा और बोकारो में भी बंद समर्थकों ने जगहों पर प्रदर्शन किए हैं.
राज्य के कृषि मंत्री बादल पत्रलेख भी राँची में सड़क पर उतर कर लोगों से बंद की अपील करते देखे गए.
उन्होंने दुकानदारों को समझाया कि 'केंद्र सरकार ने किसानों के बजाय कॉरपोरेट घरानों के हित के लिए नए कृषि क़ानून बनाए हैं. इसका विरोध किया जाना चाहिए.'
उन्होंने बीबीसी से कहा, "केंद्र सरकार ने जल्दबाज़ी में ये कृषि क़ानून बनाए और बग़ैर किसी मशविरे के इसे ग़लत तरीक़े से लागू करा दिया. यह किसानों के लिए डेथ वारंट की तरह है. केंद्र सरकार को तत्काल ये क़ानून वापस लेने चाहिए ताकि किसानों का आंदोलन सम्मानपूर्वक ख़त्म करवाया जा सके. वरना यह आंदोलन लंबा चलने की गुंजाइश रहेगी."
झारखंड में बसों का परिचालन पूरी तरह ठप रहा. प्राइवेट बस ओनर्स एसोसिएशन ने ऐसा करने का निर्णय लिया था. बसें शाम होने पर चलायी जाएँगी.
कुछ जगहों पर ट्रेनों का आवागमन भी बाधित करने की भी ख़बरें मिली हैं. राँची और हटिया स्टेशनों पर रेलवे प्रोटेक्शन फ़ोर्स के जवानों की तैनाती की गई है.
राँची में सिखों के कुछ संगठन भी बंद के समर्थन में सड़कों पर उतरे. झारखंड जनाधिकार महासभा और ट्राइबल आर्मी के सदस्यों ने भी बंद में हिस्सा लिया.
गिरिडीह में बंद समर्थकों और विरोधियों के बीच मामूली नोंकझोंक हुई. पुलिस ने मौक़े पर पहुँच कर दोनों पक्षों को शांत कराया.
झारखंड ट्राइबल आर्मी के कुणाल शुक्ला ने बीबीसी से कहा कि बंद स्वत:स्फूर्त है, क्योंकि यह अन्नदाताओं की ज़िंदगी और उनकी प्रतिष्ठा से जुड़ा मसला है.
राँची विश्वविद्यालय ने मंगलवार को होने वाले जापानी भाषा के सर्टिफिकेट कोर्स के इंडक्शन कार्यक्रम को बंद के कारण रद्द कर दिया है.
डॉ श्यामा प्रसाद मुखर्जी विश्वविद्यालय में होने वाली यूजी और पीजी की सेमेस्टर परीक्षाएँ भी स्थगित कर दी गई हैं.
छत्तीसगढ़ में बंद का मिलाजुला असर
आलोक पुतुल
रायपुर से, बीबीसी हिंदी के लिए
छत्तीसगढ़ में भारत बंद का मिला-जुला असर रहा. किसानों के बंद को राज्य की सत्ताधारी कांग्रेस पार्टी ने भी अपना समर्थन दिया था.
यही कारण है कि दोपहर तक राज्य के अधिकांश इलाक़ों में निजी और सार्वजनिक प्रतिष्ठानों के बंद रहने की ख़बर है.
राजधानी रायपुर में भी सुबह से अधिकांश दुकानें बंद रहीं लेकिन यातायात पर इसका बहुत असर नज़र नहीं आया.
राजनांदगांव, कबीरधाम जैसे ज़िलों में सैकड़ों की संख्या में किसानों ने सड़कों पर उतर कर विरोध प्रदर्शन किया.
इस बीच छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने कहा कि पहले अंग्रेज़ लूटने का काम करते थे, अब केंद्र में बैठी सरकार के पूंजीपति साथी देश को लूटने की कोशिश कर रहे हैं.
केंद्र सरकार ने सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियों को बेचा, रेलवे स्टेशन बेचा, अब उनकी नज़र किसानों की ज़मीन पर है लेकिन किसान ऐसा नहीं होने देंगे.
देश में एक निर्णायक लड़ाई लड़ी जा रही है. पत्रकारों से बातचीत करते हुए उन्होंने कहा कि पूरे देश में पिछले दो सप्ताह से अभूतपूर्व स्थिति बनी हुई है.
भूपेश बघेल ने कहा, "किसान संगठनों की माँग के बिना तीन काले क़ानून बनाये गये हैं. यह पूंजीपतियों के लाभ के लिए बनाया गया क़ानून है. देश के 62 करोड़ अन्नदाता के ख़िलाफ़ यह क़ानून है. उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार अगर मंडी को निजी क्षेत्र के लिये खोलना चाहती है तो उसे क़ानून में यह प्रावधान भी जोड़ना चाहिए कि मंडी के भीतर या मंडी के बाहर न्यूनतम समर्थन मूल्य से नीचे ख़रीदी नहीं की जाएगी."
उन्होंने कहा, "भारत सरकार कहती है कि देश में केवल 6 प्रतिशत किसानों को समर्थन मूल्य का लाभ मिलता है जबकि हम दावे के साथ कह रहे हैं कि छत्तीसगढ़ में 94 प्रतिशत किसानों को धान का समर्थन मूल्य मिल रहा है, मक्के का समर्थन मूल्य मिल रहा है, गन्ने का समर्थन मूल्य मिल रहा है."
भूपेश बघेल ने पूछा कि जो व्यवस्था छत्तीसगढ़ में की जा सकती है, वह पूरे देश में क्यों नहीं की जा सकती?
उन्होंने कहा कि पूरे देश में जहां दूसरे क्षेत्र में अर्थव्यवस्था उतार पर थी, वहीं एग्रीकल्चर सेक्टर में 3.4 प्रतिशत की बढ़ोत्तरी हुई. भूपेश बघेल ने कहा कि छत्तीसगढ़ में राजीव गांधी किसान योजना के तहत किसानों को पैसे दिए गये. यही कारण है कि जब पूरे देश में मंदी है, तब भी छत्तीसगढ़ में मंदी का कोई असर नहीं है.
इस बीच आज छत्तीसगढ़ में कांग्रेस पार्टी के आरपी सिंह नामक एक प्रवक्ता का ट्वीट भी चर्चा में बना रहा.
आरपी सिंह ने अपने ट्वीट में लिखा- "जो हिंदुस्तान के अन्नदाताओं का दिया हुआ अनाज खाते हैं वो आंदोलन के साथ हैं, जो पाकिस्तान का दिया हुआ खाते हैं, वो आंदोलन के ख़िलाफ़ हैं."
कांग्रेस प्रवक्ता के बयान पर विपक्षी दल ने कड़ी आपत्ति दर्ज की है. भाजपा प्रवक्ता संजय श्रीवास्तव ने कहा कि कांग्रेस पार्टी संक्रमण के दौर से गुज़र रही है और किसान आंदोलन का समर्थन नहीं करने वाले को पाकिस्तानी कहना नशायुक्त बयान है. उन्होंने कांग्रेस प्रवक्ता पर तंज़ कसते हुए कहा कि प्रदेश में शराबबंदी ज़रुरी हो गई है.