भारत बायोटेक ने स्वदेशी वैक्सीन के इमरजेंसी इस्तेमाल की मंज़ूरी मांगी
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किसान क़ानूनों को वापस लो या सत्ता से हटो: ममता बनर्जी
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इमेज कैप्शन, ममता बनर्जी की फाइल फोटो
पश्चिम मिदनापुर की एक रैली में मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने कहा, "केंद्र की भारतीय जनता पार्टी सरकार को किसान क़ानूनों को वापस लेना चाहिए या सत्ता से हट जाना चाहिए."
समाचार एजेंसी पीटीआई के मुताबिक, पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने कहा, "बाहर के लोगों को बंगाल में कंट्रोल नहीं करने देंगे, लोग ऐसी कोशिशों का विरोध करेंगे."
ममता बनर्जी ने ये भी कहा है कि केंद्र सरकार को बताना चाहिए कि पीएम केयर्स फ़ंड में अभी तक कितना धन आया है, सरकार को इस पर श्वेत पत्र जारी करना चाहिए.
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राष्ट्रपति को अवॉर्ड लौटाने जा रहे खिलाड़ियों को पुलिस ने रोका
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नए किसान क़ानूनों के विरोध में राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद को अपने अवॉर्ड लौटाने राष्ट्रपति भवन जा रहे खिलाड़ियों को दिल्ली पुलिस ने रोका.
पहलवान करतार सिंह ने कहा, पंजाब के 30 खिलाड़ी और कुछ अन्य खिलाड़ी भी अपने अवॉर्ड लौटाना चाहते हैं.
ये सभी खिलाड़ी प्रदर्शनकारी किसानों का समर्थन करते हुए उनकी माँगों से सहमति जता रहे हैं.
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अकाल तख़्त अमृतसर में प्रदर्शनकारी किसानों के लिए अरदास
शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (एसजीपीसी) ने दिल्ली की सीमाओं पर डटे किसानों के लिए अमृतसर के अकाल तख़्त में सोमवार को अरदास की.
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"विपक्ष अपना वजूद बचाने के लिए किसी भी आंदोलन में शामिल हो जाता है"
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केंद्रीय मंत्री रविशंकर प्रसाद ने कहा है कि विपक्षी दल नए कृषि क़ानूनों के मामले में बीच में कूद गए हैं जिनका मक़सद अपना वजूद बचाना है.
उन्होंने दावा किया कि यूपीए सरकार के दौरान कृषि क्षेत्र में सुधारों के लिए उन्होंने जो किया था, वही मोदी सरकार आज कर रही है.
रविशंकर प्रसाद ने कहा कि विपक्ष अब चुनावों में हारता जा रहा है, इसलिए वो अपने अस्तित्व के लिए किसी भी प्रदर्शन में हिस्सा ले रहे हैं.
समाचार एजेंसी एएनआई के मुताबिक़, केंद्रीय मंत्री ने दावा किया, "अरविंद केजरीवाल की सरकार ने 23 नवंबर 2020 को नए क़ानून को नोटिफ़ाई करके दिल्ली में लागू कर दिया है. इधर आप विरोध कर रहे हैं और उधर आप गज़ट निकाल रहे हैं."
उन्होंने कहा, "आज हम विपक्षी दलों, विशेषकर कांग्रेस, एनसीपी और उनके सहयोगी दलों के शर्मनाक दोहरे चरित्र को देश के सामने बताने आए हैं. आज जब इनका राजनीतिक वजूद ख़त्म हो रहा है, तो अपना वजूद बचाने के लिए ये किसी भी विरोधी आंदोलन में शामिल हो जाते हैं."
केंद्रीय मंत्री ने कहा, "किसान आंदोलन के नेताओं ने साफ़-साफ़ कहा है कि राजनीतिक लोग हमारे मंच पर नहीं आएं. हम उनकी इन भावनाओं का सम्मान करते हैं. लेकिन ये सभी कूद रहे हैं, क्योंकि इन्हें भाजपा और नरेन्द्र मोदी का विरोध करने का एक और मौक़ा मिल रहा है."
समाचार एजेंसी एएनआई के मुताबिक, "भारतीय किसान यूनियन के प्रवक्ता राकेश टिकैट ने कहा है कि हम आम आदमी के लिए समस्या नहीं बनना चाहते, इसलिए हम अपना प्रदर्शन सुबह 11 बजे से शुरू करेंगे ताकि लोग ऑफिस जा सकें.''
उन्होंने कहा है कि भारत बंद सुबह 11 बजे से शुरू होकर दोपहर तीन बजे तक जारी रहेगा और इस दौरान एंबुलेंस और यहां तक कि शादी-ब्याह को भी नहीं रोका जाएगा.
किसान आंदोलन: अखिलेश यादव को लखनऊ में हिरासत में लिया गया
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उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और समाजवादी पार्टी के नेता अखिलेश यादव को लखनऊ के लोहिया पथ पर उनके समर्थकों के साथ हिरासत में लिया गया है.
अखिलेश यादव ने दिल्ली में प्रदर्शनकारी किसानों और उनके 8 दिसंबर को प्रस्तावित भारत बंद का समर्थन किया है.
इससे पहले उन्हें लखनऊ में नज़रबंद किया गया. उनके आवास से लेकर पार्टी कार्यालय तक बैरीकैटिंग की गई.
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इसके बाद अखिलेश यादव अपने आवास से निकले और सड़क पर ही धरने पर बैठ गये. समाजवादी पार्टी कन्नौज में किसान यात्रा निकालना चाहती थी जिसकी प्रशासन ने उन्हें अनुमति नहीं दी.
समाचार एजेंसी पीटीआई के मुताबिक़, समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ता राजेंद्र चौधरी ने किसान यात्रा निकालने पर लगाई रोक को अलोकतांत्रिक बताया है.
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किसान आंदोलन: सिंघु बॉर्डर पर बोले केजरीवाल 'सेवादार' बनकर आया हूं
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किसान आंदोलन के 12वें दिन सोमवार को सिंघु बॉर्डर पर पहुंचे दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने प्रदर्शनकारियों से मुलाकात की और कहा कि वो उनके पास "सेवादार" बनकर आए हैं.
प्रदर्शनकारी किसानों के लिए इंतज़ामों का जायज़ा लेते हुए मुख्यमंत्री केजरीवाल हालांकि सिंघु बॉर्डर पर मुख्य प्रदर्शन स्थल तक नहीं गए, लेकिन उसके नज़दीक गुरू तेग बहादुर मेमोरियल के नज़दीक प्रदर्शन उनके पास जुट गए.
केजरीवाल ने संवाददाताओं से कहा, "मैं यहां मुख्यमंत्री के तौर पर नहीं आया हूं. मैं यहां एक सेवादार के रूप में आया हूं. हम किसानों की सभी मांगों का समर्थन करते हैं. उन्हें मुद्दे और मांग जायज़ हैं. आम आदमी पार्टी और मैं शुरू से ही किसानों के अधिकारों के समर्थन में खड़े हैं."
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मुख्यमंत्री केजरीवाल ने दोहराया कि "केंद्र सरकार उनसे बहुत 'अपसेट' है क्योंकि उन्होंने शहर के नौ स्टेडियम को जेल में तब्दील करने की इजाज़त नहीं दी जहां वो किसानों को पकड़कर रखना चाहते थे."
मुख्यमंत्री केजरीवाल ने कहा कि उन पर मंज़ूरी के लिए दबाव बनाया गया लेकिन उन्होंने ऐसा नहीं किया.
उन्होंने कहा, "हमारी पार्टी, विधायक और नेता सेवादार बनकर किसानों की सेवा कर रहे हैं. किसान आज मुसीबत में हैं. हमें उनके साथ खड़ा होना चाहिए. आम आदमी पार्टी आठ दिसंबर को किसानों के भारत बंद का समर्थन करती है. पूरे देश में हमारी पार्टी के कार्यकर्ता भारत बंद में शामिल होंगे."
दिल्ली सरकार के इंतज़ामों के बारे में मुख्यमंत्री केजरीवाल ने कहा कि कम से कम 300 मोबाइल टॉयलेट और 350 वॉटर टैंकर्स को सिंघु सीमा पर लगाया गया है.
उन्होंने कहा, ''मैंने इंतज़ामों का जायज़ा लिया है. टॉयलेट साफ़ हैं, लेकिन हर जगह पानी नहीं पहुंच रहा है. इसलिए जल्द ही एक मोटर और पाइप लाइन की व्यवस्था की जा रही है. बातचीत के दौरान किसानों ने कहा है कि वो इन इंतज़ामों से संतुष्ट हैं. मैं उनके संपर्क में रहूंगा.''
'तृणमूल कांग्रेस किसानों के साथ, लेकिन भारत बंद का समर्थन नहीं'
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समाचार एजेंसी एएनआई के मुताबिक, "पश्चिम बंगाल में सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस के सांसद सौगत राय ने कहाहै कि उनकी पार्टी प्रदर्शनकारी किसानों के साथ खड़ी है, लेकिन पश्चिम बंगाल में भारत-बंद का समर्थन नहीं करेंगे क्योंकि ये हमारे सिद्धांतों के विपरीत है."
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हालांकि विपक्ष के शीर्ष नेताओं ने रविवार को एक संयुक्त बयान जारी करते हुए आठ दिसंबर को प्रदर्शनकारी किसानों के भारत बंद के आह्वान का समर्थन किया है और कहा है कि 'नए किसान क़ानून कार्पोरेट्स के हाथों खेती-किसानी को बर्बाद कर देंगे.'
किसानों के समर्थन में जंतर मंतर पर कांग्रेस सांसदों का प्रदर्शन
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दिल्ली की सीमाओं पर बीते कई दिनों से प्रदर्शन कर रहे किसानों के समर्थन में पंजाब से कांग्रेस सांसदों ने जंतर-मंतर पर बैठकर उनका समर्थन जताते हुए केंद्र सरकार की नीतियों का विरोध किया है.
कांग्रेस सांसद मनीष तिवारी ने कहा, "संसद का शीतकालीन सत्र बुलाया जाए, किसान विरोधी क़ानूनों पर दोबारा विचार किया जाए और उन्हें वापस लिया जाए. सरकार संसद सत्र से बच रही है. ये अलोकतांत्रिक है."
वहीं दिल्ली-हरियाणा के बीच सिंघु बॉर्डर पर किसानों का हुजूम सोमवार को भी उमड़ा जहां किसानों के समर्थन में पंजाब से लोगों का आने का सिलसिला जारी है.
इससे पहले, विपक्ष के शीर्ष नेताओं ने रविवार को एक संयुक्त बयान जारी करते हुए आठ दिसंबर को प्रदर्शनकारी किसानों के भारत बंद के आह्वान का समर्थन किया था और कहा था कि 'नए किसान क़ानून कार्पोरेट्स के हाथों खेती-किसानी को बर्बाद कर देंगे.'
इस संयुक्त बयान पर कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी, राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के प्रमुख शरद पवार, नेशनल कॉन्फ्रेंस के नेता फ़ारूक़ अब्दुल्ला, डीएमके अध्यक्ष एमके स्टालिन, समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव, सीपीआई (एम) के महासचिव सीताराम येचुरी, सीपीआई के डी राजा, आरजेडी के तेजस्वी यादव और सीपीआई (एमएल) के दीपांकर भट्टाचार्य समेत अन्य नेताओं ने दस्तख़त किए थे.
सीपीआई (एम) के दफ्तर से जारी संयुक्त बयान में कहा गया है, "ये नए क़ानून संसद में अलोकतांत्रिक तरीक़े से बिना किसी चर्चा, बिना वोटिंग के पारित किए गए. इन क़ानूनों से भारत की खाद्य सुरक्षा को ख़तरा पैदा हो गया है, इससे हमारी खेती-किसानी और किसानों की बर्बादी का ख़तरा पैदा हो गया है. इससे न्यूनतम समर्थन मूल्य प्रणाली ख़त्म करने का आधार बनेगा और खेती-किसानी बहुराष्ट्रीय कृषि-कारोबारी कार्पोरेट्स और घरेलू कार्पोरेट्स के हाथ में चली जाएगी.''
विपक्षी नेताओं ने केंद्र सरकार से अन्नदाता-किसानों की 'वैधानिक' मांगें सुनने के लिए कहा है और किसानों के प्रति अपना पूर्ण समर्थन जताया है.
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ब्रेकिंग न्यूज़, किसानों से मिलने सिंघु बॉर्डर पहुंचे दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल
दिल्ली-हरियाणा बॉर्डर के पास टिकरी में किसानों का विरोध-प्रदर्शन जारी है. किसानों का मोदी सरकार के तीन नए कृषि क़ानून के ख़िलाफ़ आज 12वें दिन भी विरोध-प्रदर्शन जारी है.
किसानों की मांग की है तीनों क़ानून सरकार वापस ले. किसानों का कहना है कि इस नए क़ानून के कारण उन्हें अपना अनाज औने-पौने दाम पर बेचना होगा और न्यूनतम समर्थन मूल्य की व्यवस्था ख़त्म हो जाएगी.
किसान यूनियनों ने अपने विरोध-प्रदर्शन के समर्थन में आठ दिसंबर को भारत बंद बुलाया है. इस बंद का समर्थन भारत की 18 राजनीतिक पार्टियों ने किया है.
इस बीच दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल सिंघु बॉर्डर पर किसानों से मिलने पहुंचे हैं. यहां उन्होंने गुरु तेगबहादुर मेमोरियल में प्रदर्शनकारी किसानों से मुलाक़ात की. केजरीवाल ने प्रदर्शनकारियों के लिए बुनियादी सुविधाओं की व्यवस्था भी मुआयना किया.
केजरीवाल ने कहा कि वो किसानों की मांग के साथ खड़े हैं. उन्होंने कहा कि उनकी पार्टी किसानों के साथ शुरू से ही खड़ी है.
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किसानों के आंदोलन में आख़िर बिहार के किसान सक्रिय क्यों नहीं हैं?
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हर साल भारत सरकार पंजाब और हरियाणा से लाखों टन चावल और गेहूँ ख़रीदने के लिए अरबों
रुपये ख़र्च करती है.
इसे दुनिया के सबसे महंगे ‘सरकारी खाद्य ख़रीद
कार्यक्रमों’ में से एक माना गया है. लेकिन यह कार्यक्रम अब किसानों के मौजूदा आंदोलन के
केंद्र में है, और इस आंदोलन को भी बीते कुछ दशकों में हुए सबसे बड़े किसान
आंदोलनों में से एक कहा जा रहा है.
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खाद्य पदार्थों की सरकारी ख़रीद और बिक्री कैसे होती है?
खेती की लागत की गणना करने के बाद, राज्य सरकार द्वारा संचालित कृषि लागत और मूल्य आयोग (सीएसीपी)एक बेंचमार्क सेट करने के लिए 22 से अधिक फ़सलों के न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) की घोषणा करता है.
सीएसीपी हालांकि, हर साल अधिकांश फ़सलों के लिए एमएसपी की घोषणा करता है, मगर राज्यों द्वारा संचालित अनाज ख़रीद की एजेंसियाँ और भारतीय खाद्य निगम (एफ़सीआई) भंडारन और धन-राशि की कमी के कारण, उन क़ीमतों पर केवल चावल और गेहूँ ही ख़रीदते हैं.
एमएसपी पर किसानों से चावल और गेहूँ ख़रीदने के बाद, एफ़सीआई ग़रीबों को रियायती मूल्यों पर राशन बेच पाता है और सरकार एफ़सीआई के नुक़सान की भरपाई करती है.
एफ़सीआई से मिलने वाली ‘क़ीमत की गारंटी’ किसानों को बड़ी मात्रा में चावल और गेहूँ के उत्पादन के लिए प्रोत्साहित करती हैं. लेकिन यह अधिक उत्पादन एफ़सीआई पर किसानों से अतिरिक्त आपूर्ति ख़रीदने के लिए दबाव भी डालता है, जिसके परिणामस्वरूप राज्य के गोदामों में अक्सर अनाज की बहुतायत रहती है. साथ ही उस पर सब्सिडी का जो बिल बनता है, वो अक्सर बजट घाटे को बढ़ाता है.
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चावल और गेहूँ का विशाल भंडार होने के बावजूद, एफ़सीआई के लिए इनका निर्यात करना एक बड़ी चुनौती रहा है. ऐसे में भंडारण की लागत और हर वर्ष बढ़ने वाली एमएसपी, एफ़सीआई के लिए गेहूँ और चावल की क़ीमतों को और अधिक महंगा बना देती है जिससे विदेशी बिक्री फ़ायदे का सौदा नहीं रह जाती.
कभी-कभार, भारत सरकार राजनयिक सौदों के माध्यम से दूसरे देशों को चावल और गेहूँ की थोड़ी मात्रा भेजती रहती है. फिर भी, एफ़सीआई के गोदाम भरे ही रहते हैं.
एफ़सीआई से किन्हें सबसे अधिक फ़ायदा?
एफ़सीआई मॉडल से किसानों को ‘कीमत की जो गारंटी’ मिलती है, उससे सबसे ज़्यादा फ़ायदा पंजाब और हरियाणा के बड़े किसानों को होता है, जबकि बिहार और अन्य राज्यों के छोटे किसानों को इसका ख़ास फ़ायदा नहीं मिल पाता.
हर साल, पंजाब और हरियाणा के किसान अच्छी तरह से विकसित मंडी व्यवस्था के ज़रिये न्यूनतम समर्थन मूल्य पर एफ़सीआई को अपनी लगभग पूरी उपज बेच पाते हैं जबकि बिहार और अन्य राज्यों के किसान ऐसा नहीं कर पाते क्योंकि वहाँ इस तरह की विकसित मंडी व्यवस्था नहीं है.
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इमेज कैप्शन, पंजाब और हरियाणा के किसानों ने की 'दिल्ली चलो' मार्च की शुरुआत
इसके अलावा, बिहार के ग़रीब किसानों के विपरीत – पंजाब और हरियाणा का समृद्ध और राजनीतिक रूप से प्रभावशाली किसान समुदाय यह सुनिश्चित करता है कि एफ़सीआई उनके राज्यों से ही चावल और गेहूँ की सबसे बड़ी मात्रा में ख़रीद जारी रखे.
समाचार एजेंसी रॉयटर्स की रिपोर्ट के अनुसार, एक ओर जहाँ पंजाब और हरियाणा एफ़सीआई को अपना लगभग पूरा उत्पादन (चावल और गेहूँ) बेच पाते हैं, वहीं बिहार में सरकारी एजेंसियों द्वारा की जाने वाली कुल ख़रीद दो प्रतिशत से भी कम है. इसी वजह से, बिहार के अधिकांश किसानों को मजबूरन अपना उत्पादन 20-30 प्रतिशत तक की छूट पर बेचने पड़ता है.
पहले से ही ‘सुनिश्चित आमदनी’ से वंचित, बिहार के किसानों ने नये क़ानूनों का स्पष्ट रूप से विरोध नहीं किया है. जबकि पंजाब और हरियाणा के किसानों को डर है कि उनकी स्थिति भी कहीं बिहार और अन्य राज्यों के किसानों जैसी ना हो जाये, इसलिए वो चाहते हैं कि एफ़सीआई मॉडल रहे और न्यूनतम समर्थन मूल्य पर उनका उत्पादन ख़रीदने की व्यवस्था भी बची रहे. वरना अगर यह व्यवस्था बदली, तो उन्हें भी प्राइवेट ख़रीदारों के सामने मजबूर होना पड़ेगा.
'खेती तो एक सीज़न की नष्ट होगी, क़ानून तो भविष्य चौपट कर देगा’
भारतीय किसानों के समर्थन में लंदन में प्रदर्शन, सैकड़ों लोग जुटे
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भारतीय किसानों के समर्थन में
सेंट्रल लंदन के सैकड़ों लोगों ने रविवार को (स्थानीय समयानुसार) एक प्रदर्शन
किया.
ये लोग सेंट्रल लंदन में स्थित भारतीय
दूतावास के बाहर एकत्र हुए. बाद में इन लोगों ने लंदन के ट्रफ़ैलगर स्क्वेयर तक एक
मार्च भी निकाला.
मार्च में शामिल लोगों का कहना था
कि मोदी सरकार दिल्ली की सीमाओं पर प्रदर्शन कर रहे किसानों की परेशानियों को सुने
और उनकी माँगों पर गंभीरता से विचार करे.
प्रदर्शन में शामिल 13 लोगों को
लंदन पुलिस ने गिरफ़्तार भी किया. बताया गया है कि मार्च के दौरान ये लोग कोविड-19
से जुड़ी गाइडलाइंस का पालन नहीं कर रहे थे. लंदन पुलिस के एक अधिकारी ने यह बताया
कि 13 में से चार लोगों को जुर्माना लेकर छोड़ दिया गया है.
समाचार एजेंसी रॉयटर्स ने लिखा है
कि भारतीय मूल के बहुत से लोग ब्रिटेन में रहते हैं और किसानों के इस आंदोलन के प्रति
इन लोगों की सहानुभूति है.
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लंदन में हुए इस प्रदर्शन के संबंध में भारतीय हाई कमिशन, लंदन के अधिकारी विश्वेश नेगी ने कहा, “भारतीय उच्चायोग के बाहर भारी संख्या में प्रदर्शनकारी जमा हो गये थे. वो सोशल डिस्टेन्सिंग का पालन नहीं कर रहे थे. इस स्थिति को देखते हुए लंदन पुलिस ने भीड़ तो तितर-बितर किया. कुछ प्रदर्शनकारियों ने हिंसा की भी कोशिश की. लेकिन कुछ देर में ही यह स्पष्ट हो गया कि भीड़ में शामिल बहुत से लोग भारत-विरोधी एजेंडे के तहत वहाँ आये थे. उन्होंने भारत विरोधी नारेबाज़ी की.”
किसान आंदोलन: मोदी सरकार झुकेगी या किसानों को मना लेगी?
18 राजनीतिक पार्टियों ने की किसानों के 'भारत बंद' के समर्थन की घोषणा
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कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी,
डीएमके चीफ़ एम के स्टालिन, एनसीपी प्रमुख शरद पवार, समाजवादी पार्टी के चीफ़
अखिलेश यादव, लेफ़्ट फ़्रंट के सीताराम येचुरी और डी राजा समेत भारत के 11 बड़े
राजनेताओं ने किसानों के भारत बंद का समर्थन किया है.
दिल्ली की सीमा पर, मोदी सरकार
द्वारा लाये गए तीन नये कृषि क़ानूनों के ख़िलाफ़ प्रदर्शन कर रहे किसानों ने
मंगलवार, 8 दिसंबर को भारत बंद का आह्वान किया है. किसान चाहते हैं कि सरकार इन
क़ानूनों को वापस ले. किसानों का यह आंदोलन
एक संयुक्त बयान जारी करते हुए,
भारत की 11 राजनीतिक पार्टियों ने कहा है कि मोदी सरकार ने ‘ग़ैर-लोकतांत्रिक तरीक़े से’ इन क़ानूनों को संसद में पास किया जिनपर कोई चर्चा नहीं की गई.
इन दलों ने अपने बयान में दावा
किया है कि इससे भारत में खाद्य संकट बढ़ेगा, किसानों की परिस्थितियाँ और बिगड़
जायेंगी, साथ ही न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) ना मिलने की वजह से भारतीय कृषि
क्षेत्र की दशा बिगड़ेगी.
वहीं शिवसेना, तृणमूल कांग्रेस,
राष्ट्रीय जनता दल, तेलंगाना राष्ट्र समिति, अकाली दल, आम आदमी पार्टी और बीजेपी
के सहयोगी – असम गण परिषद और राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी ने भी किसानों के भारत
बंद का समर्थन किया है. हालांकि, संयुक्त बयान पर इन पार्टियों के नेताओं के
हस्ताक्षर नहीं हैं.
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कांग्रेस ने कहा है कि 8 दिसंबर को पार्टी भारत के हर ज़िले में प्रदर्शन करेगी. पूर्व पार्टी अध्यक्ष राहुल गांधी ने भी किसानों की माँगों का समर्थन किया है और कहा है कि मोदी सरकार को किसानों की माँगें माननी चाहिए.
26 नवंबर को किसानों के आंदोलन की शुरुआत हुई थी. केंद्र सरकार समझती है कि किसानों को नये कृषि क़ानूनों पर भटकाया गया है और सरकार कहती रही है कि बातचीत से किसानों के ‘सभी भ्रम दूर’ किये जा सकते हैं.
किसान संगठनों से जुड़े लोगों और केंद्र सरकार के बीच पाँच चरण की बातचीत हो चुकी है. छठे चरण की बातचीत बुधवार, 9 दिसंबर को होनी है. दोनों पक्षों के बीच अब तक की बातचीत बेनतीजा रही है.
नमस्कार!
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