विरोध प्रदर्शन का आज नौवां दिन
गुरुवार को किसानों के विरोध प्रदर्शन का आठवां दिन था. दिन ख़त्म होते-होते हज़ारों की संख्या में उत्तर प्रदेश के किसानों ने दिल्ली में यूपी गेट के पास राष्ट्रीय राजमार्ग 9 को ब्लॉक कर दिया. वहीं दूसरी तरफ राजधानी के कई रास्तों के पास हज़ारों की संख्या में पंजाब और हरियाणा के किसानों ने अपना विरोध प्रदर्शन जारी रखा.
इससे पहले बुधवार को किसानों ने कहा था कि कृषि क़ानून न वापिस लिए गए तो वो राजधानी के सभी रास्ते ब्लॉक कर देंगे.
दिल्ली-उत्तर प्रदेश की गाज़ीपुर सीमा के पास भारतीय किसान यूनियन के नेता नरेश टिकैत ने एक 'महा पंचायत' की और कहा कि एमएसपी के मुद्दे पर समझौते की गुंजाइश नहीं है, सरकार को किसानों को लिखित में इसका आश्वासन देना होगा.
कृषि क़ानूनों को हटाने की मांग कर रहे किसानों और सरकार के बीच गुरुवार को हुई अहम बैठक बेनतीजा ख़त्म हुई. इस संबंध में दोनों पक्षों के बीच अगली बैठक पाँच दिसंबर को होगी.
किसान हाल में लाए गए नए कृषि क़ानूनों को हटाने की मांग कर रहे हैं और एमएसपी (न्यूनतन समर्थन मूल्य पर) सरकारी खरीद जारी रखे जाने की मांग कर रहे हैं. किसानों का कहना है कि वो अपनी मांगों को लेकर समझौता नहीं करेंगे.
दिल्ली के विज्ञान भवन में गुरुवार को हुई बैठक आठ घंटे चली. बैठक में सरकार की तरफ़ से कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर, रेल मंत्री पीयूष गोयल और वाणिज्य और उद्योग राज्य मंत्री सोम प्रकाश शामिल थे, जबकि किसानों के प्रतिनिधिमंडल में कुल 40 किसान नेता शामिल थे.
इससे पहले मंगलवार को भी किसान प्रतिनिधियों और सरकार के बीच बातचीत हुई थी जो बिना किसी नतीजे के ख़त्म हो गई थी.
कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने कहा कि बैठक बहुत ही अच्छे माहौल में हुई और किसानों ने बहुत सारे मुद्दे उठाए थे जिन पर खुलकर चर्चा हुई.
उन्होंने कहा कि शनिवार को बैठक में शामिल होने से पहले सरकार शुक्रवार को किसानों के उठाए सभी मुद्दों पर विचार करेगी.
विवादित क़ानून में बदलाव करने के लिए क्या सरकार तैयार है, इस सवाल के उत्तर में कृषि मंत्री ने कहा, "मैं भविष्य नहीं बता सकता. मुझे उम्मीद है कि एक दिन बाद जब फिर बैठक होगी तो हम लोग किसी समाधान की तरफ बढ़ सकेंगे."
हालांकि एक दफ़ा फिर किसानों को उन्होंने विश्वास दिलाया कि एमएसपी और एपीएमसी में कोई बदलाव नहीं होगा.
उन्होंने कहा, "किसी के मन में इसे लेकर कोई संशय नहीं होना चाहिए. लेकिन फिर भी अगर किसानों को इन बातों की चिंता है तो मैं उन्हें आश्वस्त करना चाहता हूं कि नए क़ानून से एमएसपी की व्यवस्था को ख़तरा नहीं है."
किसान नेताओं का कहना है कि शुक्रवार को 11 बजे किसान इस मुद्दे पर बातचीत करने के लिए इकट्ठा होंगे और इस बैठक में सरकार के साथ अगले दौर की बातचीत के बारे में चर्चा होगी.
भारतीय किसान यूनियन के अध्यक्ष ऋषिपाल ने कहा, "सरकार ने हमारी सभी बातों को नोट किया है और कहा है कि वो इस मुद्दे पर विचार करेंगे. उन्हें इसके लिए एक दिन का वक्त चाहिए."
समाचार एजेंसी पीटीआई की रिपोर्ट के अनुसार बैठक के दौरान सरकार ने किसानों से लंच करने की पेशकश की जिसके किसानों ने ठुकरा दिया. किसानों ने कहा कि संघु बॉर्डर पर बैठे उनके साथी उन तक लंच पहुंचा देंगे.
इससे पहले किसानों ने सरकार की तरफ दी गई चाय और पानी लेने से भी इनकार कर दिया था.
'पंजाब की अर्थव्यवस्था पर पड़ रहा असर'
गुरुवार को किसानों और सरकार की बातचीत शुरू होने से पहले पंजाब के मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह ने गृह मंत्री अमित शाह से मुलाक़ात की. उन्होंने बताया कि गृह मंत्री से उन्होंने किसानों की समस्या का कोई हल जल्द निकालने के बारे में बात की है.
अमरिंदर सिंह ने किसानों से अपील की कि वो इस मुश्किल का हल जल्द निकालें क्योंकि इसका असर राज्य की अर्थव्यवस्था पर पड़ रहा है.
हालांकि उन्होंने इस मामले में किसानों और सरकार के बीच बीतचीत में मध्यस्थता करने से इनकार कर दिया और कहा कि फिलहाल सरकार और किसानों के बीच बातचीत चल रही है और वो इस समस्या का समाधान तलाशने की कोशिश कर रहे हैं.
पूर्व मुख्यमंत्री ने लौटाया पद्म विभूषण
इस बीच शिरोमणी अकाली दल नेता और पंजाब के पूर्व मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल ने किसानों का समर्थन करते हुए उन्हें मिला पद्म विभूषण सम्मान लौटा दिया है.
पूर्व अकाली दल नेता और राज्यसभा सांसद सुखदेव सिंह ढिंढसा ने कहा है कि वो भी उन्हें दिया गया पद्म भूषण सम्मान सरकार को लौटा देंगे. उन्हें बीते साल ही पद्म भूषण सम्मान से नवाज़ा गया था.
इससे पहले खेल जगत से जुड़ी पंजाब की कई हस्तियों ने भी उन्हें दिए अवॉर्ड लौटाने की बात की थी.
पंजाब में बीजेपी की सहयोगी रही शिरोमणी अकाली दल ने दो महीने पहले ने कृषि क़ानून पारित किए जाने का विरोध करते हुए खुद को एनडीए से बाहर कर लिया था.
शीतकालीन सत्र बुलाने की मांग
किसानों के मुद्दों पर चर्चा के लिए लोकसभा में कांग्रेस के नेता अधीर रंजन चौधरी ने स्पीकर ओम बिरला से संसद का शीतकालीन सत्र बुलाने की माँग की है.
इससे एक दिन पहले ही प्रदर्शनकारी किसानों के नेताओं ने ‘किसान विरोधी बिलों को ख़त्म करने के लिए’ संसद का विशेष सत्र बुलाने की माँग की थी.