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  1. किसानों के साथ बातचीत रही बेनतीजा, गुरुवार को फिर होगी बैठक

    किसानों का विरोध प्रदर्शन

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    मंगलवार को किसान आंदोलन के प्रतिनिधियों और केंद्र सरकार के बीच विज्ञान भवन में बातचीत हुई.

    सरकार की तरफ से इस बैठक में कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर और रेल मंत्री पीयूष गोयल शामिल थे. वहीं किसानों की तरफ से 35 किसान संगठनों के प्रतिनिधियों ने बैठक में शिरकत की.

    सरकार ने किसानों की समस्या सुनने और उसका हल खोजने के लिए कमिटी बनाने की पेशकश की, जिसे किसानों ने ठुकरा दिया. ये मीटिंग बेनतीजा ख़त्म हुई.

    अब सरकार और किसानों के प्रतिनिधि गुरुवार को 12 बजे फिर मुलाक़ात करने वाले हैं.

    बैठक के बाद कृषि मंत्री ने कहा कि बैठक "अच्छी" रही और उन्होंने किसान आंदोलन के प्रतिनिधियों से कृषि क़ानून से जुड़े मुद्दे तीन दिसंबर को बताने के लिए कहा है. उन्होंने कहा कि आगे की बातचीत गुरुवार तीन दिसंबर को होगी.

    समाचार एजेंसी पीटीआई के अनुसा बैठक के बाद जम्हूरी किसान सभा के नेता कुलवंत सिंह संधु ने कहा कि बैठक में कृषि मंत्री ने उन्हें पीने के लिए चाय दी थी, जिसके जवाब में उन्होंने कृषि मंत्री को उनके साथ प्रदर्शनस्थल आने और लंगर की चाय, जलेबी और पकोड़े का नाश्ता करने का न्योता दिया.

    किसानों का विरोध प्रदर्शन

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    किसानों की मांगें माने सरकार - आम आदमी पार्टी

    आम आदमी के नेता और दिल्ली के परिवहन मंत्री कैलाश गहलोत ने मंगलवार को बुराड़ी के निरंकारी मैदान में प्रदर्शन कर रहे किसानों से मुलाक़ात की.

    उन्होंने कहा कि वो किसानों का मांगों का समर्थन करते हैं और सरकार को चाहिए कि वो किसानों से बातचीत कर इस समस्या का हल तलाशे.

    समाचार एजेंसी एएनआई के अनुसार किसानों से मुलाका़त के बाद कैलाश गहलोत ने कहा, "केंद्र सरकार को किसानों के साथ बातचीत करनी चाहिए और किसानों कीं मांगें मान लेनी चाहिए. मेरा दौरा मैदान में किसानों के रहने की व्यवस्था का जायज़ा लेने के लिए था."

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    इधर पार्टी की नेता आतिशा मार्लेना ने सिंघु बॉर्डर पर धरने पर बैठे किसानों से मुलाक़ात की और कहा कि, "किसानों के लिए एमएसपी की गारंटी को क़ानून के दायरे में लाया जाना चाहिए. सरकार ने वादा किया था कि वो स्वामिनाथन कमिटी रिपोर्ट की सिफारिशों को लागू करेगी और एमएसपी में देढ़ गुना का इज़ाफा करेगी, लेकिन अब इसे क़ानूनन हटा दिया गया है."

    किसान केंद्र सरकार के नए कृषि क़ानूनों का विरोध कर रहे हैं और मांग कर रहे हैं कि "न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) से कम कीमत पर ख़रीद को अपराध घोषित किया जाए और एमएसपी पर सरकारी ख़रीद लागू रहे."

    विरोध करने वाले सभी किसान नहीं हैं - केंद्रीय मंत्री

    केंद्रीय मंत्री वीके सिंह ने मंगलवार को कहा है कि कृषि क़ानूनों का विरोध करने वालों की जो तस्वीरें मिल रही हैं उन्हें देख कर लगता है कि विरोध करने वाले सभी किसान नहीं है.

    समाचार एजेंसी एएनआई के अनुसार उन्होंने आरोप लगाया कि इस आंदोलन के पीछे विपक्ष और कमीशन लेने वालों का हाथ है.

    उन्होंने कहा, "तस्वीरों में दिखने वाले सभी लोग किसान नहीं है. किसानों के हित में जो भी होगा वो किया जाएगा. कृषि क़ानूनों से किसानों को परेशानी नहीं है, बल्कि दूसरों को है. विपक्ष के अलावा जो लोग कमिशल लेते हैं वो इस विरोध के पीछे हैं."

    उन्होंने कहा, "स्वामिनाथन कमिटी की रिपोर्ट के अनुसार किसानों को अपनी फसल जिसे चाहे उसे बेचनी की आज़ादी होनी चाहिए. सरकार ने यही किया है. इससे किसानों को नहीं बल्कि दूसरों को परेशानी है."

    किसानों का विरोध प्रदर्शन

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    किसान आंदोलन के चलते कई ट्रेनें हुई कैंसिल

    किसान आंदोलन के चलते उत्तर रेलवे ने कुछ ट्रेनों को रद्द करने और कुछ की यात्रा कम दूरी पर ख़त्म करने का फ़ैसला किया है.

    बठिंडा-वाराणसी एक्सप्रेस ट्रेन के अलावा दो दिसंबर को शुरू होने वाली अजमेर-अमृतसर एक्सप्रेस और तीन दिसंबर को शुरू होने वाली अमृतसर-अजमेर एक्सप्रेस, डिब्रूगढ़-अमृतसर एक्सप्रेस और अमृतसर-डिब्रूगढ़ एक्सप्रेस को रद्द कर दिया गया है.

    वहीं ट्रेनों का रास्ता भी बदल दिया गया है.

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