कृषि क़ानूनों के ख़िलाफ़ प्रदर्शन कर रहे किसानों और केंद्र सरकार के बीच बैठक ख़त्म हो गई है.
विज्ञान भवन में 30 से ज़्यादा किसान संगठनों के साथ बैठक में केंद्र की तरफ़ से कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर, रेल मंत्री पियूष गोयल और केंद्रीय राज्य मंत्री सोम प्रकाश शामिल थे.
क़रीब तीन घंटों तक चली बैठक की समाप्ति के बाद कृषि मंत्री ने कहा कि बातचीत अच्छी हुई है और आगे भी बातचीत जारी रहेगी.
नरेंद्र सिंह तोमर ने कहा,"मीटिंग अच्छी रही. हमने तय किया है कि तीन दिसंबर को फिर बातचीत होगी. हमलोग चाहते थे कि किसान संगठन एक छोटा सा ग्रुप बना लें बातचीत को आगे बढ़ाने के लिए लेकिन किसान चाहते थे कि सब किसी से बातचीत की जाए. हमें इस पर कोई ऐतराज़ नहीं है."
बैठक में शामिल ऑल इंडिया किसान फ़ेडरेशन के अध्यक्ष एडवोकेट प्रेम सिंह भंगू ने बीबीसी संवाददाता वात्सल्य राय से बातचीत में कहा कि सरकार के मंत्रियों से बहुत अच्छी बातचीत रही लेकिन उनका मत साफ़ है कि यह तीनों क़ानून पूरी तरह ग़लत हैं.
प्रेम सिंह भंगू का कहना था, "मीटिंग के दौरान कृषि मंत्री ने कहा कि किसी क़ानून को बनाने में 10-12 साल लगते हैं लेकिन फिर भी कोई ज़रूरी नहीं कि वो सौ फ़ीसदी सही हो, उसमें कुछ कमियां हो सकती हैं. लेकिन हमने कहा कि हमने क़ानून का एक-एक क्लॉज़ पढ़ा है और यह आधा ठीक नहीं बल्कि पूरा ही ग़लत है, और आप मान जाएं कि इसे पूरा ही रद्द करना है."
प्रेम सिंह भंगू ने कहा कि इस सरकार ने पिछले छह साल में किसानों के लिए एक भी अच्छा काम नहीं किया है. उन्होंने कहा कि तीन दिसंबर को बैठक में सरकार की तरफ़ से वही लोग रहेंगे जो आज शामिल थे.
तीन दिसंबर को दोपहर 12 बजे बैठक शुरू होगी जिसमें तीनों क़ानून के एक-एक क्लॉज़ पर बहस होगी.उन्होंने कहा कि फ़िलहाल किसानों का आंदोलन जारी रहेगा.
बैठक में शामिल एक और किसान नेता कीर्ति किसान यूनियन के उपाध्यक्ष राजेंद्र सिंह दीप सिंह वाला नेबीबीसी संवाददाता दिलनवाज़ पाशाने कहा कि बैठक में शामिल किसान संगठन के प्रतिनिधियों ने सरकार की चाय भी नहीं पी.
उन्होंने कहा कि सरकार ने पाँच सदस्यों की कमेटी बनाने पर ज़ोर दिया लेकिन किसानों ने सरकार की पेशकश को यह कहते हुए ठुकरा दिया कि यह सांझा संघर्ष है, सांझा ही फ़ैसला होगा.
उन्होंने कहा कि सरकार अपनी बातों को लोगों तक पहुँचाने के लिए इतनी मेहनत करती है और इतना पैसा ख़र्च करती है, आज तो इतने लोग जमा हैं. सरकार जाकर क़ानून के बारे में उनको समझा दे.
राजेंद्र सिंह दीप ने कहा कि बीजेपी के किसी नेता में इन दिनों जनता के बीच आकर बात करने की जुर्रत नहीं है.
उन्होंने कहा कि किसानों ने बिल्कुल साफ़ कर दिया है कि पहले क़ानून वापस होंगे फिर किसान घर वापस होंगे.