कृषि क़ानूनों और किसानों पर पीएम मोदी ने क्या कहा

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कृषि क़ानूनों के बारे में कहा है कि भ्रम और अफ़वाहों से दूर, क़ानून की सही जानकारी लोगों को होनी चाहिए.
नए कृषि क़ानून का लाभ लेने वाले एक किसान का उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि "क़ानून की सही और पूरी जानकारी ही महाराष्ट्र के एक किसान के लिए ताकत बनी. क्षेत्र कोई भी हो, हर तरह के भ्रम और अफवाहों से दूर, सही जानकारी, हर व्यक्ति के लिए बहुत बड़ा सम्बल होती है."
उन्होंने इन क़ानूनों के बारे में बात करते हुए कहा, "इन सुधारों से न सिर्फ किसानों के अनेक बन्धन समाप्त हुये हैं , बल्कि उन्हें नये अधिकार भी मिले हैं, नये अवसर भी मिले हैं."
रविवार को 'मन की बात' में मोदी ने दो किसानों का उदाहरण देते हुए और कृषि क़ानून और पराली की समस्या के बारे में कहा.
उन्होंने कहा कि नए कृषि क़ानूनों के ज़रिए किसानों को नए अधिकार मिले हैं. इन अधिकारों ने किसानों की समस्याएं कम करना शुरू कर दिया है.

उन्होंने महाराष्ट्र के धुले ज़िले के किसान, जितेन्द्र भोइजी का ज़िक्र किया और कहा कि उन्होंने मक्के की खेती की थी और इसकी क़ीमत पाने के लिए उन्होंने नए कृषि क़ानूनों का इस्तेमाल किया है.
उन्होंने कहा कि जितेंद्र ने अपनी फसल बेचने के लिए क़ीमत तय कर ली. फसल की कुल कीमत तय हुई करीब तीन लाख बत्तीस हज़ार रूपये, उन्हें पच्चीस हज़ार रुपये एडवांस भी मिल गए थे और तय हुआ था कि बाक़ी का पैसा उन्हें पन्द्रह दिन में चुका दिया जायेगा.
मोदी ने कहा कि, "बाद में परिस्थितियां ऐसी बनी कि जितेंद्र को बाकी का पेमेन्ट नहीं मिला. चार महीने तक इंतज़ार करने के बाद जितेंद्र ने इन क़ानूनों की मदद ली. इस क़ानून के तहत फसल खरीदने के तीन दिन के भीतर ही किसान को पेमेन्ट दी जाएगी और ऐसा नहीं हुआ तो किसान शिकायत दर्ज कर सकता है. क़ानून में ये भी प्रावधान है कि क्षेत्र के एसडीएम को एक महीने के भीतर ही किसान की शिकायत का निपटारा करना होगा."
मोदी ने कहा, ऐसे क़ानून की ताकत के साथ समस्या का समाधान होना ही था और चंद ही दिनों में उनका बकाया चुका दिया गया.
मोदी ने कहा कि किसानों में जागरूकता बढ़ाने का काम करना बेहद ज़रूरी है ताकि किसानों को नए क़ानूनों के बारे में पता चले और वो उसका लाभ ले सकें.









