You’re viewing a text-only version of this website that uses less data. View the main version of the website including all images and videos.

Take me to the main website

नाइजीरिया हमला: कम से कम 43 खेतिहर मज़दूरों की मौत - आज की बड़ी ख़बरें

नाइजीरिया के राष्ट्रपति ने इस हमले को ‘पागलपन’ करार दिया है. मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, हमलावरों ने धान के खेतों में काम कर रहे खेतिहर मज़दूरों को बांधकर उनके गले काट दिये.

लाइव कवरेज

  1. कृषि क़ानूनों और किसानों पर पीएम मोदी ने क्या कहा

    प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कृषि क़ानूनों के बारे में कहा है कि भ्रम और अफ़वाहों से दूर, क़ानून की सही जानकारी लोगों को होनी चाहिए.

    नए कृषि क़ानून का लाभ लेने वाले एक किसान का उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि "क़ानून की सही और पूरी जानकारी ही महाराष्ट्र के एक किसान के लिए ताकत बनी. क्षेत्र कोई भी हो, हर तरह के भ्रम और अफवाहों से दूर, सही जानकारी, हर व्यक्ति के लिए बहुत बड़ा सम्बल होती है."

    उन्होंने इन क़ानूनों के बारे में बात करते हुए कहा, "इन सुधारों से न सिर्फ किसानों के अनेक बन्धन समाप्त हुये हैं , बल्कि उन्हें नये अधिकार भी मिले हैं, नये अवसर भी मिले हैं."

    रविवार को 'मन की बात' में मोदी ने दो किसानों का उदाहरण देते हुए और कृषि क़ानून और पराली की समस्या के बारे में कहा.

    उन्होंने कहा कि नए कृषि क़ानूनों के ज़रिए किसानों को नए अधिकार मिले हैं. इन अधिकारों ने किसानों की समस्याएं कम करना शुरू कर दिया है.

    उन्होंने महाराष्ट्र के धुले ज़िले के किसान, जितेन्द्र भोइजी का ज़िक्र किया और कहा कि उन्होंने मक्के की खेती की थी और इसकी क़ीमत पाने के लिए उन्होंने नए कृषि क़ानूनों का इस्तेमाल किया है.

    उन्होंने कहा कि जितेंद्र ने अपनी फसल बेचने के लिए क़ीमत तय कर ली. फसल की कुल कीमत तय हुई करीब तीन लाख बत्तीस हज़ार रूपये, उन्हें पच्चीस हज़ार रुपये एडवांस भी मिल गए थे और तय हुआ था कि बाक़ी का पैसा उन्हें पन्द्रह दिन में चुका दिया जायेगा.

    मोदी ने कहा कि, "बाद में परिस्थितियां ऐसी बनी कि जितेंद्र को बाकी का पेमेन्ट नहीं मिला. चार महीने तक इंतज़ार करने के बाद जितेंद्र ने इन क़ानूनों की मदद ली. इस क़ानून के तहत फसल खरीदने के तीन दिन के भीतर ही किसान को पेमेन्ट दी जाएगी और ऐसा नहीं हुआ तो किसान शिकायत दर्ज कर सकता है. क़ानून में ये भी प्रावधान है कि क्षेत्र के एसडीएम को एक महीने के भीतर ही किसान की शिकायत का निपटारा करना होगा."

    मोदी ने कहा, ऐसे क़ानून की ताकत के साथ समस्या का समाधान होना ही था और चंद ही दिनों में उनका बकाया चुका दिया गया.

    मोदी ने कहा कि किसानों में जागरूकता बढ़ाने का काम करना बेहद ज़रूरी है ताकि किसानों को नए क़ानूनों के बारे में पता चले और वो उसका लाभ ले सकें.

  2. ब्रेकिंग न्यूज़, कथित लव जिहाद संबंधी अध्यादेश के तहत बरेली में पहला मामला दर्ज हुआ

    कथित लव जिहाद संबंधी ‘विधि विरुद्ध धर्म संपरिवर्तन प्रतिषेध अधिनियम-2020’ अध्यादेश को लागू हुए चौबीस घंटे भी नहीं बीते कि बरेली में इस क़ानून के तहत पहला मामला दर्ज कर लिया गया.

    लखनऊ में मौजूद बीबीसी के सहयोगी पत्रकार समीरात्मज मिश्र के अनुसार बरेली ज़िले के देवरनियां गांव के रहने वाले टीकाराम ने थाने में शिकायत दर्ज कराई है कि गांव का ही रहने वाला एक युवक उनकी बेटी को बहला-फुसलाकर धर्म परिवर्तन का दबाव बना रहा है. पुलिस ने टीकाराम की शिकायत पर मामला दर्ज कर लिया है.

    बरेली ज़िले के एसपी देहात डॉक्टर संसार सिंह ने बताया, “अभियुक्त लड़की को भगा ले गया था. पहले भी उसके ऊपर केस दर्ज किया गया था. पीड़ित लड़की के परिजनों की ओर से शिकायत की गई है कि लड़का धर्म परिवर्तन और शादी के लिए दबाव बना रहा है. नए अध्यादेश के तहत उसके ख़िलाफ़ मुक़दमा दर्ज कर लिया गया है. लड़का फ़रार है लेकिन जल्द ही उसकी गिरफ़्तारी कर ली जाएगी.”

    बरेली ज़िले के एसपी देहात डॉक्टर संसार सिंह ने बताया, “अभियुक्त लड़की को भगा ले गया था. पहले भी उसके ऊपर केस दर्ज किया गया था. पीड़ित लड़की के परिजनों की ओर से शिकायत की गई है कि लड़का धर्म परिवर्तन और और शादी के लिए दबाव बना रहा है. नए अध्यादेश के तहत उसके ख़िलाफ़ मुक़दमा दर्ज कर लिया गया है. लड़का फ़रार है लेकिन जल्द ही उसकी गिरफ़्तारी कर ली जाएगी.”

    बरेली ज़िले के एसपी देहात डॉक्टर संसार सिंह ने बताया, “अभियुक्त लड़की को भगा ले गया था. पहले भी उसके ऊपर केस दर्ज किया गया था. पीड़ित लड़की के परिजनों की ओर से शिकायत की गई है कि लड़का धर्म परिवर्तन और और शादी के लिए दबाव बना रहा है. नए अध्यादेश के तहत उसके ख़िलाफ़ मुक़दमा दर्ज कर लिया गया है. लड़का फ़रार है लेकिन जल्द ही उसकी गिरफ़्तारी कर ली जाएगी.”

  3. सुकमा में माओवादी हमला, एक असिसटेंट कमांडेंट की मौत और 9 जवान घायल

    आलोक प्रकाश पुतुल

    रायपुर से, बीबीसी हिंदी के लिए

    छत्तीसगढ़ के सुकमा में शनिवार की रात माओवादियों के हमले में घायल कोबरा 206 के असिसटेंट कमांडेंट नितिन भालेराव की आज रायपुर में मौत हो गई. इस हमले में घायल नौ जवानों का रायपुर में ही इलाज चल रहा है.

    बस्तर के आईजी पुलिस सुंदरराज पी के अनुसार, "शनिवार को चिंतलनार, बुरकापाल और चिंतागुफा बेस कैंप से कोबरा, एसटीएफ और डीआरजी के जवान चिंतागुफा व चिंतलनार में एंटी नक्सल ऑपरेशन में निकले थे. जहां वे माओवादियों की ओर से पहले से लगाई गई आईईडी की चपेट में आ गए."

    पुलिस का कहना है कि आईईडी विस्फोट की घटना ताड़मेटला के पास हुई. इस विस्फोट में कोबरा 206 बटालियन के सेकेंड इन कमांड दिनेश सिंह और असिसटेंट कमांडेंट नितिन भालेराव सहित 206 कोबरा के दस जवान गंभीर रुप से घायल हो गए.

    घायल जवानों को इलाज के लिए रायपुर रवाना किया गया, जहां रविवार को असिसटेंट कमांडेंट नितिन भालेराव की मौत हो गई. मारे गये नितिन भालेराव महाराष्ट्र के नासिक के रहने वाले थे.

    इस हमले में घायल अन्य जवानों में से तीन की हालत गंभीर बनी हुई है. इधर पुलिस ने इलाके में सर्चिंग ऑपरेशन तेज़ कर दिया है. शनिवार को जिस इलाके में माओवादियों ने जवानों को निशाना बनाया है,

    उसी इलाके में ताड़मेटला में छह अप्रैल 2010 को माओवादियों के अब तक के सबसे बड़े हमले में सीआरपीएफ के 76 जवान मारे गये थे.

  4. किसानों के साथ आतंकवादी जैसा बर्ताव किया गया – संजय राउत

    बीजेपी की पूर्व सहयोगी शिवसेना के नेता संजय राउत ने कहा है कि किसानों को दिल्ली आने से रोकने के लिए जो बर्ताव किया गया, वो किसानों का अपमान है.

    उन्होंने पत्रकारों से कहा, “जिस तरह से किसानों को दिल्ली में आने से रोका गया है ऐसा लगता है कि वो देश के किसान नहीं बल्कि बाहर के हैं. उनके साथ आतंकवादी जैसा बर्ताव किया गया. क्योंकि वो सिख हैं और पंजाब-हरियाणा से आए हैं, उन्हें खालिस्तानी कहा जा रहा है. इस तरह का बर्ताव करना देश के किसानों का अपमान करना है.”

  5. कोरोना वैक्सीन: एक अरब से ज़्यादा की आबादी तक कैसे पहुँचाएगा भारत?

  6. भारत: बीते 24 घंटे में संक्रमण के 41 हज़ार से ज़्यादा मामले, 496 मौतें

    भारत में बीते 24 घंटे में कोरोना संक्रमण के 41,810 नए मामले दर्ज किए गए हैं और 496 लोगों की मौत हुई है.

    इसी के साथ देश में संक्रमण के कुल मामलों की संख्या 93 लाख 92 हज़ार 920 पहुंच गई है और मरने वालों का कुल आंकड़ा 1 लाख 36 हज़ार 696 हो गया है.

    इस वक़्त कुल सक्रिय मामलों की संख्या 4 लाख 53 हज़ार 956 है.

    भारतीय स्वास्थ्य मंत्रालय के मुताबिक़, अब तक 88 लाख 2 हज़ार 267 लोग इस बीमारी से ठीक हो चुके हैं.

    बीते 24 घंटे में 42,298 लोग डिस्चार्ज हुए हैं.

  7. किसानों का सरकार से सवाल - बुराड़ी मैदान ही क्यों जाएं, रामलीला मैदान क्यों नहीं?

    केंद्र सरकार के नए कृषि क़ानूनों का विरोध कर रहे किसानों ने सवाल किया है कि उन्हें प्रशासन बुराड़ी के निरंकारी मैदान में जाने के लिए क्यों कह रहा है.

    समाचार एजेंसी एएनआई के अनुसार दिल्ली-गाज़ियाबाद बॉर्डर के पास विरोध कर रहे भारतीय किसान यूनियन के प्रवक्ता राकेश टिकैत ने रविवार को कहा, "विरोध प्रदर्शन रामलीला मैदान में होते हैं तो हम बुराड़ी के निरंकारी भवन क्यों जाएं जो एक निजी जगह है."

    इससे पहले केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने किसान संगठनों से अपील की थी कि वो विरोध प्रदर्शन के लिए निरंकारी समागम मैदान में जाएं. उन्होंने कहा था कि सरकार तीन दिसंबर को किसानों से बात करने के लिए तैयार है.

    इस बीच किसानों की बढ़ती संख्या देखते हुए दिल्ली हरियाणा बॉर्डर पर बड़ी संख्या में सुरक्षाबल तैनात किए गए हैं.

  8. किन क़ानूनों का हो रहा है विरोध

    किसान जिन तीन क़ानूनों का विरोध कर रहे हैं, वो हैं -

    कृषक उपज व्‍यापार और वाणिज्‍य (संवर्धन और सरलीकरण) क़ानून, 2020, कृषक (सशक्‍तिकरण व संरक्षण) क़ीमत आश्‍वासन और कृषि सेवा पर क़रार क़ानून, 2020, आवश्यक वस्तु (संशोधन) क़ानून 2020.

    किसान संगठनों का आरोप है कि नए क़ानून से कृषि क्षेत्र भी पूँजीपतियों या कॉरपोरेट घरानों के हाथों में चला जाएगा और इसका नुक़सान किसानों को होगा.

    तीन नए विधेयकों में आवश्यक वस्तु अधिनियम में संशोधन के साथ-साथ ठेके पर खेती को बढ़ावा दिए जाने की बात है और साथ ही राज्यों की कृषि उपज और पशुधन बाज़ार समितियों के लिए गए अब तक चल रहे क़ानून में भी संशोधन किया गया है.

    प्रदर्शनकारियों को यह डर है कि एफ़सीआई अब राज्य की मंडियों से ख़रीद नहीं कर पाएगा, जिससे एजेंटों और आढ़तियों को क़रीब 2.5% के कमीशन का घाटा होगा. साथ ही राज्य भी अपना छह प्रतिशत कमीशन खो देगा, जो वो एजेंसी की ख़रीद पर लगाता आया है.

    प्रदर्शनकारियों मानते हैं कि क़ानून जो किसानों को अपनी उपज खुले बाज़ार में बेचने की अनुमति देता है, वो क़रीब 20 लाख किसानों- ख़ासकर जाटों के लिए तो एक झटका है ही.

  9. सरकार कृषि क़ानूनों पर पुनर्विचार कर ले तो बेहतर - मायावती

    बहुजन समाज पार्टी की प्रमुख मायावती ने कहा है कि केंद्र के लाए नए कृषि क़ानूनों का किसान विरोध कर रहे हैं, सरकार को एक बार फिर इन क़ानूनों पर विचार करना चाहिए.

  10. प्रदर्शनकारी किसान बोले, हम हाइवे पर ही डटे रहेंगे

    सिंघु बॉर्डर पर जमा हज़ारों किसानों ने भारी सुरक्षा व्यवस्था के बीच शनिवार सुबह एक बैठक की और फ़ैसला किया कि वो सिंघु बॉर्डर पर ही अपना प्रदर्शन जारी रखेंगे. जबकि उन्हें प्रदर्शन करने के लिए उत्तरी दिल्ली में जगह देने की पेशकश की गई है.

    टिकरी बॉर्डर पर इकट्ठा किसान भी फिलहाल वहीं जमे हुए हैं. उम्मीद की जा रही है कि वो निर्धारित विरोध स्थल जाने को लेकर जल्द ही कोई फ़ैसला ले सकते हैं.

    पंजाब से दिल्ली आने वाले एक प्रमुख रास्ते, सिंघु बॉर्डर पर बैठक के बाद एक किसान नेता ने कहा कि वो वहां से हिलेंगे नहीं और वहीं प्रदर्शन जारी रखेंगे.

    उन्होंने कहा, "हम यहां (सिंघु बॉर्डर) से नहीं हिलेंगे और अपनी लड़ाई जारी रखेंगे. हम घर वापस नहीं लौटेंगे. प्रदर्शन में हिस्सा लेने के लिए पंजाब और हरियाणा से हज़ारों किसान आए हैं."

    रिपोर्ट: दिलनवाज़ पाशा और देवाशीष कुमार

  11. किसानों के लिए विपक्ष ने किस बेहतर सुविधाओं की मांग

    कांग्रेस नेता दीपेंदर सिंह हूडा ने बहादुरगढ़ में दिल्ली-हरियाणा बॉर्डर पर प्रदर्शनकारी किसानों से मुलाक़ात की और कहा कि केंद्र सरकार को तीन दिसंबर तक इंतज़ार नहीं करना चाहिए, बल्कि किसानों से तुंरत बात करनी चाहिए और उनकी मांगों को सुनना चाहिए.

    कांग्रेस सांसद हूडा ने कहा कि अगर केंद्र सरकार किसानों को ठंड में तीन दिसंबर तक बैठाकर रखना चाहती है, तो उनके रहने, खाने और दवा का इंतज़ाम करे.

    उन्होंने आरोप लगाया, “एक तरफ सरकार कह रही है कि लोगों को कोविड-19 के दौरान इकट्ठा नहीं होना चाहिए और दूसरी तरफ वो किसानों को तीन दिसंबर तक बैठाकर रखना चाहती है. सरकार ख़ुद कोरोना वायरस के प्रसार को बढ़ावा दे रही है.”

    केंद्र के कृषि क़ानूनों का विरोध कर रहे प्रदर्शनकारी किसानों के लिए विपक्ष ने दिल्ली में बड़ी जगह, खाने और रहने की बेहतर सुविधा की मांग की है.

    विभिन्न विपक्षी पार्टियों के नेताओं ने शनिवार को एक संयुक्त बयान जारी कर ज़ोर दिया कि दिल्ली के बाहरी इलाक़े में स्थित बुराड़ी मैदान ‘हज़ारों किसानों के लिए बहुत छोटा है’, इसलिए उन्हें प्रदर्शन के लिए बड़ी जगह दी जाए और साथ ही दिल्ली में खाने और रहने का सुविधा दी जाए.

    विपक्षी नेताओं ने “हमारे किसानों की आवाज़ सुनो, दमन बंद करो” शीर्षक से केंद्र सरकार के नाम बयान जारी किया. उन्होंने प्रदर्शनकारी किसानों के लिए दिल्ली में ‘राम लीला मैदान’ जैसा बड़ा ग्राउंड देने की मांग की है.

  12. पंजाब के किसानों को समर्थन देने यूपी किसान दिल्ली बॉर्डर पहुंचे

    उत्तर प्रदेश के किसानों के कुछ समूह शनिवार दोपहर अपने वाहनों के साथ गाज़ीपुर बॉर्डर पर जमा हो गए.

    उत्तर प्रदेश के ये किसान केंद्र के नए कृषि क़ानूनों के ख़िलाफ़ प्रदर्शन कर रहे पंजाब के किसानों को अपना समर्थन दे रहे हैं. दिल्ली के एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने कहा कि पंजाब के किसान संगठनों के ‘दिल्ली चलो’ मार्च के आह्वान पर क़रीब 200 किसान यूपी गेट (गाज़िपुर बॉर्डर) पर आए हैं और पुलिस अधिकारी उनसे बात कर रहे हैं.

    उन्होंने कहा कि प्रदर्शनकारी किसानों ने अपने वाहन निर्धारित जगह पर पार्क कर दिए हैं ताकि आम लोगों को कोई परेशानी ना हो और ट्राफिक सही तरह से चलता रहे.

    पुलिस उपायुक्त (पूर्व) जसमीत सिंह ने कहा, “किसान मांग कर रहे हैं कि वो दिल्ली की तरफ बढ़ना चाहते हैं लेकिन हम उनसे बात कर रहे हैं. इस वक़्त उनकी संख्या क़रीब 200 है. वो यूपी गेट पर बैठे हैं.”

    'सरकार क़ानून वापिस ले' - किसान अपनी मांग पर डटे

    दिल्ली के बुराड़ी में सरकार के लाए नए कृषि क़ानूनों का विरोध कर रहे किसानों का कहना है कि वो तब तक यहां से नहीं जाएंगे जब तक उनकी मांगे पूरी नहीं हो जातीं.

    विरोध प्रदर्शन में हिस्सा ले रहे एक किसान ने समाचार एजेंसी एएनआई को बताया, "हमें सरकार पर भरोसा नहीं है. इससे पहले भी सरकार के साथ बातचीत हुई है लेकिन कोई नतीजा नहीं निकला. हम चाहते हैं कि सरकार ये क़ानून वापिस ले."

    एक और किसान का कहना है, "हम तब तक विरोध प्रदर्शन करना जारी रखेंगे जब तक सरकार हमारी मांगें मान नहीं लेती. हम कई महीनों का राशन साथ लाए हैं. हमारी समस्या का हल किया जाना चाहिए."

    शनिवार को दिल्ली हरियाणा से सिंघु बॉर्डर को पार कर किसानों के बुराड़ी पहुंचने के बाद अब टिकरी बॉर्डर से भी किसान दिल्ली पहुंचने लगे हैं.

    हालांकि किसानों का एक समूह अभी सिंघु बॉर्डर पर ही प्रदर्शन कर रहा है. विरोध प्रदर्शन में हिस्सा ले रहे भारतीय किसान यूनियन का कहना है कि वो सिंघु बॉर्डर पर प्रदर्शन करना जारी रखेंगे और प्रशासन द्वारा बताई गई किसी जगह पर जा कर प्रदर्शन नहीं करेंगे.

    संगठन के पंजाब शाखा के महासचिव हरिन्दर सिंह ने कहा, "हम रोज़ सवेरे 11 बजे मिलकर आगे की रणनीति पर विचार करेंगे."

    किसान नेता के ख़िलाफ़ मामला दर्ज

    वहीं हरियाणा भारतीय किसान युनियन के अध्यक्ष गुरनाम सिंह चड़ूनी के ख़िलाफ़ किसानों के विरोध प्रदर्शन में हिस्सा लेने के आरोप में केस दर्ज किया गया है.

    समाचार एजेंसी एएनआई ने करनाल के डिप्टी पुलिस अधीक्षक राजीव कुमार के हवाले से कहा है कि विरोध कर रहे किसानों के ख़िलाफ़ दो मामले दर्ज किए गए हैं.

    उन्होंने कहा, "गुरनाम सिंह समेत अन्य किसान नेताओं के ख़िलाफ़ मामला दर्ज किया गया है. कुछ अज्ञात किसानों के ख़िलाफ़ भी मामला दर्ज किया गया है."

    सरकार बातचीत करने को तैयार - अमित शाह

    इधर गृह मंत्री अमित शाह ने शनिवार को कहा है कि केंद्र सरकार किसानों की "सभी समस्याओं और मांगों" को लेकर बातचीत करने के लिए तैयार है.

    उन्होंने कहा, "दिल्ली-हरियाणा और दिल्ली-पंजाब सीमा पर विरोध कर रहे किसानों से मैं कहना चाहता हूं कि कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने दिसंबर तीन तारीख को बातचीत की जो पेशकश की है उस दौरान केंद्र सरकार सभी मुद्दे पर किसानों बात करने के लिए तैयार है. हम उनकी सभी मांगें और चिंताओं के बारे में बात करने के लिए तैयार हैं."

    उन्होंने किसानों से अपील की कि वो विरोध प्रदर्शन करने के लिए उन्हें दी गई जगह बुराड़ी के निरंकारी ग्राउंड की तरफ जाएं ताकि इस कारण दूसरों को यातायात में परेशानी न हो.

    अमित शाह के प्रस्ताव से ख़ुश नहीं किसान, आज करेंगे फ़ैसला

    गृह मंत्री अमित शाह ने किसानों से विरोध प्रदर्श के लिए दिल्ली के बुराड़ी मैदान में शिफ़्ट होने की अपील है. लेकिन उनकी इस अपील पर ज़्यादातर किसान संगठन राज़ी नज़र नहीं आ रहे हैं.

    सिंघु बॉर्डर पर मौजूद भारतीय किसान संघ (पंजाब) के अध्यक्ष जगजीत सिंह ने भी गृह मंत्री के इस प्रस्ताव पर नाख़ुशी ज़ाहिर की है.

    उन्होंने समाचार एजेंसी पीटीआई से कहा, “अमित शाह जी ने जल्दी बातचीत के लिए एक शर्त रख दी है. ये ठीक नहीं है. उन्हें दिल खोलकर बातचीत का प्रस्ताव रखना चाहिए था. हम लोग कल सुबह एक मीटिंग करेंगे और फिर अपना फ़ैसला तय करेंगे.”

  13. नमस्कार! ये बीबीसी हिंदी का लाइव पन्ना है जहाँ हम आपको दिनभर की बड़ी ख़बरें और ज़रूरी लाइव अपडेट देंगे. शनिवार की ख़बरें पढ़ने के लिए यहाँ क्लिक करें.