कृषि से जुड़े केंद्र सरकार के तीन क़ानूनों के विरोध में पंजाब, हरियाणा के किसान
'दिल्ली चलो' के आह्वान के साथ
गुरुवार को राजधानी दिल्ली पहुंचेंगे.
इस बीच हरियाणा ने पंजाब से लगने वाली सीमा दो दिन यानी
गुरुवार और शुक्रवार के लिए सील कर दिया है.
बुधवार को अंबाला में किसानों को
रोकने के लिए प्रशासन की ओर से उनपर पानी की बौछारें की गई. हालांकि इसके बावजूद
किसाने आगे बढ़ते रहे.
हरियाणा ने दो दिन के लिए पंजाब से चलने वाली सभी बस सेवाएं
रोक दी हैं. राज्य में कही भी भारी संख्या पर भीड़ जुटने पर रोक लगा दी गई है.
दिल्ली पुलिस ने भी किसी भी तरह के प्रदर्शन पर रोक लगा दी है.
समाचार एजेंसी एनएनआई के मुताबिक़ बुधवार को दिल्ली पुलिस ने कहा है कि 'किसी भी प्रदर्शनकारी
को दिल्ली में दाख़िल होने की इजाज़त नहीं है, अगर कोई भी प्रदर्शनकारी दिल्ली आते
हैं तो उन्हें कानूनी कार्रवाई का सामना करना होगा. दिल्ली पुलिस ने विरोध
प्रदर्शन करने वाली संस्थाओं को ये जानकारी लिखित और सोशल मीडिया के हवाले से दे
दी है.'
वहीं इन संगठनों का कहना है कि जहां भी किसानों को दिल्ली में जाने से रोका जाएगा, वे वहीं पर बैठकर
विरोध-प्रदर्शन करेंगे.
मेट्रो के टाइम में तब्दीली
किसानों के इस प्रदर्शन को देखते हुए दिल्ली मेट्रो ने अपनी
टाइमिंग में कुछ तब्दीलियां की है.
दिल्ली मेट्रो ने ट्वीट कर बताया है कि गुरूवार दोपहर 2 बजे
तक दिल्ली से नोएडा, फ़रीदाबाद, गाजियाबाद और गुरुग्राम
तक मेट्रो सेवाओं पर रोक रहेगी.
सितंबर महीने में संसद में पास हुए केंद्र सरकार के तीन कृषि
क़ानूनों का देशभर के किसान संगठनों विरोध कर रहे है. इसके अलावा, विपक्षी पार्टियों
ने भी इन कानूनों को लेकर कड़ा एतराज जताया है.
किसान संगठनों का आरोप है कि नए क़ानून के लागू होते ही कृषि क्षेत्र भी पूँजीपतियों या कॉरपोरेट घरानों के हाथों में चला जाएगा और इसका नुक़सान किसानों को होगा.
उनका कहना है कि जिन उत्पादों पर किसानों को एमएसपी नही मिलती, उन्हें वो कम दाम पर बेचने को मजबूर हो जाते हैं.
पंजाब में होने वाले गेहूँ और चावल का सबसे बड़ा हिस्सा या तो पैदा ही एफ़सीआई द्वारा किया जाता है, या फिर एफ़सीआई उसे ख़रीदता है.
साल 2019-2020 के दौरान रबी के मार्केटिंग सीज़न में, केंद्र द्वारा ख़रीदे गए क़रीब 341 लाख मीट्रिक टन गेहूँ में से 130 लाख मीट्रिक टन गेहूँ की आपूर्ति पंजाब ने की थी.
प्रदर्शनकारियों को यह डर है कि एफ़सीआई अब राज्य की मंडियों से ख़रीद नहीं कर पाएगा, जिससे एजेंटों और आढ़तियों को क़रीब 2.5% के कमीशन का घाटा होगा.
साथ ही राज्य भी अपना छह प्रतिशत कमीशन खो देगा, जो वो एजेंसी की ख़रीद पर लगाता आया है.