राष्ट्रीय जाँच एजेंसी (एनआईए) द्वारा वहीद उर-रहमान पर्रा की
गिरफ़्तारी को जम्मू-कश्मीर की पूर्व मुख्यमंत्री महबूबा मुफ़्ती ने ‘ब्लैक-मेलिंग’ और पीडीपी समेत मुख्यधारा
की अन्य पार्टियों को ‘धमकाने के लिए की गई कार्रवाई’ बताया है.
महबूबा मुफ़्ती ने ट्विटर पर लिखा है, “सब जानते हैं कि दविंदर सिंह किसके निर्देशों पर काम करता था,
पर अब आरोप दूसरे लोगों पर लगाये जा रहे हैं. वहीद उर-रहमान पर्रा का दविंदर सिंह
से कोई वास्ता नहीं रहा. उनपर बेबुनियाद आरोप लगाये गये हैं. ये सभी आरोप फ़र्ज़ी
हैं.”
बुधवार को एनआईए के अधिकारियों ने बताया कि पीपुल्स डेमोक्रैटिक पार्टी (पीडीपी) के नेता वहीद उर-रहमान पर्रा को आतंकवाद से जुड़े एक मामले में दिल्ली से गिरफ़्तार किया गया है.
बताया गया है कि जम्मू-कश्मीर पुलिस के बर्ख़ास्त अधिकारी दविंदर सिंह को भी इसी मामले में गिरफ़्तार किया गया था.
वहीद उर-रहमान पर्रा महबूबा मुफ़्ती की पार्टी - पीडीपी के यूथ प्रेसिडेंट हैं.
जम्मू-कश्मीर में होने जा रहे डीडीसी चुनाव से पहले वहीद की गिरफ़्तारी को लेकर पीडीपी ने केंद्र सरकार की मंशा पर सवाल उठाये हैं.
पार्टी के अनुसार, डीडीसी चुनाव जो सभी पार्टियों के युवा नेताओं को एक मौक़ा देने के लिए आयोजित होते हैं, उसमें वहीद उर-रहमान पर्रा भी पुलवामा में अपने क्षेत्र से चुनाव लड़ने वाले थे, मगर उन्हें नामांकन के तुरंत बाद गिरफ़्तार कर लिया गया.
पार्टी ने कहा है कि वहीद की गिरफ़्तारी इस बात का संकेत है कि अपने राजनीतिक प्रतिद्वंद्वियों को निशाना बनाने के मामले में बीजेपी और आरएसएस किस हद तक जा सकते हैं.
महबूबा मुफ़्ती ने इस संबंध में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह का एक पुराना वीडियो भी ट्वीट किया है जिसमें उन्हें वहीद उर-रहमान पर्रा की तारीफ़ करते सुना जा सकता है. ट्वीट में मुफ़्ती ने लिखा है, “एक वक़्त था जब भारत के गृह मंत्री रह चुके राजनाथ सिंह पर्रा की तारीफ़ करते थे कि उन्होंने लोकतंत्र को मज़बूत करने में अहम भूमिका निभाई और आज उन्हें एनआईए ने बेबुनियाद आरोपों के आधार पर गिरफ़्तार कर लिया.”
एक अन्य ट्वीट में महबूबा ने लिखा है, “जम्मू-कश्मीर में अगस्त 2019 से पुरज़ोर तरीक़े से गुजरात मॉडल लागू किया गया है, मुसलमानों को फँसाया जा रहा है, यही नया कश्मीर है जिसमें वो हमें रखना चाहते हैं.”