भारत में एक दिन में कोरोना संक्रमण के क़रीब 49 हज़ार मामले

दुनिया भर में कोरोना मरीज़ों की संख्या एक करोड़ 56 लाख पार कर गई है और छह लाख 36 हज़ार से ज़्यादा लोग मारे जा चुके हैं.

लाइव कवरेज

  1. वैश्विक लॉकडाउन दोबारा लगाया जाना ग़ैर-ज़रूरी: डॉ. फ़ाउची

    फ़ाउची

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    अमरीका के शीर्ष संक्रामक रोग विशेषज्ञ डॉक्टर एंथनी फ़ाउची ने कहा है कि वैश्विक लॉकडाउन दोबारा लगाया जाना ग़ैर-ज़रूरी है.

    अमरीका में कोरोना वायरस के मामले लगातार बढ़ना जारी हैं और गुरुवार को अमरीका में रिकॉर्ड मामले पाए गए जिसके बाद कुल मामलों की संख्या 40 लाख से ऊपर जा चुकी है.

    वहीं, अमरीकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने डॉक्टरों द्वारा लिखी जाने वाली ज़रूरी दवाओं के दामों में कमी लाने के लिए चार कार्यकारी आदेशों पर हस्ताक्षर किए हैं.

    ट्रंप की अधिक दामों के लिए हमेशा से आलोचना होती रही है जिसके बाद उन्होंने कहा है कि यह आदेश ज़रूरी दवाओं के बाज़ारों का पुनर्गठन करेगा.

    नए आदेश के नियमों के तहत दवाओं पर छूट दी जा सकेगी और विदेशों से सस्ती दवाओं का आयात किया जा सकेगा.

  2. राजस्थान ने भी प्लाज़्मा बैंक खोलने का फ़ैसला किया

    समाचार एजेंसी एएनआई के अनुसार राजस्थान ने भी प्लाज़्मा बैंक खोलने का फ़ैसला किया है.

    राज्य के स्वास्थ्य मंत्री रघु शर्मा ने कहा कि जयपुर स्थित सवाई मानसिंह अस्पताल में राज्य का पहला प्लाज़्मा बैंक खोला जाएगा.

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    रघु शर्मा ने उन सभी लोगों से प्लाज़्मा डोनेट करने की अपील की है जो कोरोना संक्रमित हुए थे और अब ठीक हो गए हैं.

    इससे पहले दिल्ली सरकार ने देश का पहला प्लाज़्मा बैंक खोला था.

    दिल्ली के बाद तमिलनाडु सरकार ने भी प्लाज़्मा बैंक खोला है.

  3. स्वस्थ युवाओं को भी ठीक होने में हफ़्तों लगते हैं- सीडीसी

    अमरीका में कोरोना वायरस पर नज़र रखने वाली संस्था सेंटर फ़ॉर डिज़ीज़ कंट्रोल एंड प्रिवेंशन (सीडीसी) ने कहा है कि पहले से पूरी तरह स्वस्थ युवा भी अगर कोरोना से मामूली संक्रमित होते हैं तो उनको भी पूरी तरह ठीक होने में कई हफ़्ते लगते हैं.

    सीडीसी की एक सर्वे के मुताबिक़ 35 साल के कम उम्र के लोग जो मामूली रूप से कोरोना संक्रमित हुए थे, उनमें भी 20 फ़ीसद लोग ऐसे थे जिनको पूरी तरह ठीक होने में 21 दिन से ज़्यादा लगे थे.

    रिपोर्ट के अनुसार 35 फ़ीसदी लोग पॉज़िटिव होने के दो हफ़्ते बाद भी ठीक नहीं हुए थे और ठीक होने के कई हफ़्तों बाद भी उन्हें खांसी, थकावट और सांस की शिकायत होती थी.

  4. मैक्डॉनल्ड का अमरीका के लिए किया है मास्क नियम

    मैक्डॉनल्ड रेस्त्रां

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    फ़ास्ट फ़ू़ड चेन मैक्डॉनल्ड ने कहा है कि एक अगस्त से जो भी अमरीका भर में उसके 14 हज़ार रेस्त्रां में दाख़िल होगा उसे मास्क पहनना अनिवार्य होगा.

    इससे पहले वॉल मार्ट और स्टारबक्स जैसे फ़ास्ट फ़ूड चेन इसी तरह की घोषणा कर चुके हैं.

    एक बयान जारी कर मैक्डॉनल्ड ने कहा कि उसके क़रीब 82 फ़ीसद रेस्त्रां उन इलाक़ों में हैं जहां मास्क पहनना बहुत ज़रूरी है.

    विशेषज्ञ भी इस बात से सहमत हैं कि मास्क पहनने से कोरोना वायरस को फैलने से बहुत हद तक रोका जा सकता है.

    कंपनी ने कहा कि जो लोग मास्क पहनने से इनकार करते हैं या किसी वजह से मास्क नहीं पहन पाते हैं, उन ग्राहकों की मदद के लिए कंपनी ख़ास तैयारी कर रही है.

  5. पहले कुछ महीनों तक कोरोना की कोई समझ नहीं थी: जॉनसन

    बोरिस जॉनसन

    ब्रिटेन के प्रधानमंत्री बोरिस जॉनसन ने कहा है कि सरकार को पहले कुछ हफ़्तों और महीनों तक तो कोरोना के बारे में कुछ समझ ही नहीं थी.

    बीबीसी को दिए इंटरव्यू में प्रधानमंत्री ने इस बात को भी स्वीकार किया कि कोरोना वायरस से दूसरे तरीक़े से निपटा जा सकता था.

    उन्होंने कहा, "एक चीज़ जो हमने शुरू में नहीं देखी वो ये थी कि वायरस बिना किसी लक्षण के एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति को संक्रमित कर रहा है. मेरे विचार से ये कहना मुनासिब होगा कि हमें ये सीखने की ज़रूरत है कि शुरुआती दौर में कोरोना से कैसे निपटना है."

    उन्होंने कहा कि ये सवाल अब भी जायज़ है कि क्या हमनें लॉकडाउन लागू करने में देरी की, हालांकि उनके मंत्री कहते रहें हैं कि हमने सही समय पर सही फ़ैसले किए थे.

    जब उनसे साफ़ तौर पर पूछा गया कि क्या लॉकडाउन लागू करने में देरी की गई थी जिसकी वजह से बहुत मौतें हुईं तो उनका कहना था, "हो सकता है कि ऐसी चीज़ें हों जो हम अलग तरीक़े से कर सकते थे और निश्चित तौर पर इसको समझने के लिए वक़्त आएगा कि हमें असल में क्या करना चाहिए था या हम अलग क्या कर सकते थे."

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