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कोरोना: भारत में सीबीएसई ने सिलेबस घटाया, इस देश ने साल के अंत तक स्कूलों को किया बंद
कोरोना संक्रमण को देखते हुए सीबीएसई ने छात्रों को राहत देते हुए नौवीं से 12वीं कक्षा के सिलेबस कम भारत में सीबीएसई ने सिलेबस घटाया, इस देश ने साल के अंत तक स्कूलों को किया बंदकरने का एलान किया है.
लाइव कवरेज
महाराष्ट्र: कोरोना से निपटने के लिए रेस कोर्स में बनाया गया अस्पताल
मुंबई में कोरोना संक्रमण के लगातार बढ़ते मामले को देखते हुए चार फील्ड अस्पताल बनवाए गए हैं. इनमें से एक अस्पताल हॉर्स रेसिंग ट्रैक पर बनाया गया है.
भारत की वित्तीय राजधानी मुंबई कोरोना संक्रमण का हॉटस्पॉट है.
देश भर में मंगलवार तक कोरोना वायरस से 20,100 लोगों की मौत हुई है, इनमें से एक चौथाई मौतें महाराष्ट्र के मुंबई शहर में ही हो चुकी हैं.
मुंबई में संक्रमण के बढ़ने के चलते सरकार को मेक-शिफ्ट अस्पताल और क्वारंटीन सेंटर विकसित करने की ज़रूरत पड़ रही है. इसके लिए स्कूल की इमारतें, होटल और प्लेनेटेरियमों का इस्तेमाल किया जा रहा है.
इसी दिशा में मंगलवार को चार नए फील्ड अस्पताल बनाए गए हैं, इनमें से एक अस्पताल मुंबई महालक्ष्मी रेसकोर्स में बनाया गया है.
समाचार एजेंसी एएफ़पी के मुताबिक़ यहां बनाए गए मेक-शिफ्ट अस्पताल में कोरोना संक्रमितों के लिए 700 बेड की व्यवस्था की गई है.
इन चार अस्पतालों के बनाए जाने से दो करोड़ की आबादी वाली मुंबई में कोरोना संक्रमितों के लिए 3500 अतिरिक्त बेड उपलब्ध होंगे.
महाराष्ट्र सरकार के एक प्रवक्ता के मुताबिक़ इन चारों फील्ड अस्पताल में कोरोना संक्रमितों के इलाज के लिए हर तरह की सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी.
दक्षिण अफ़्रीका में कोरोना संक्रमण के मामले दो लाख पार
दक्षिण अफ़्रीका में कोरोना वायरस संक्रमण के मामलों की संख्या दो लाख से अधिक हो गयी है.
स्वास्थ्य मंत्री ज़वेली मख़ीज़े ने कहा है कि चार प्रांतों में संक्रमण ज़्यादा देखा जा रहा है. ये हैं – गोटेंग, वेस्टर्न केप, ईस्टर्न केप और क्वाज़ुलु-नाटल.
दक्षिण अफ़्रीका में रोज़ के हिसाब से हज़ारों केस दर्ज किये जा रहा हैं.
स्वास्थ्य मंत्री ने कहा है कि अगर देश में लॉकडाउन लागू नहीं किया गया होता तो संक्रमण के मामले और भी अधिक होते.
फ़िलहाल दक्षिण अफ़्रीका में लॉकडाउन के प्रतिबंधों में ढील देने की चरणबद्ध प्रक्रिया जारी है. हाल ही में सरकार ने स्कूल खोलने का निर्णय लिया है.
स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुसार, दक्षिण अफ़्रीका मौजूदा समय में ऑक्सफ़ोर्ड यूनिवर्सिटी द्वारा विकसित कोविड-19 की वैक्सीन के ह्यूमन ट्रायल में शामिल है.
कोरोना वायरस: जीवन रक्षक दवाओं की भारत में काला बाज़ारी
अभिनव शर्मा के चाचा को बहुत तेज़ बुख़ार था और सांस लेने में भी उन्हें परेशानी हो रही थी. उन्हें दिल्ली के एक अस्पताल में भर्ती कराया गया.
उनकी जाँच हुई, तो वे कोरोना पॉज़िटिव पाए गए. डॉक्टरों ने उनके परिजनों से रेमडेसिविर लाने को कहा.
रेमडेसिविर एक एंटी वायरल ड्रग है. भारत में क्लीनिकल ट्रायल के लिए इस दवा को मंज़ूरी मिली है.
साथ ही इमर्जेंसी में इसके इस्तेमाल की भी अनुमति दी गई है यानी डॉक्टर्स इसे विशेष परिस्थिति में मरीज़ों को दे सकते हैं.
लेकिन रेमडेसिविर ख़रीदना एक असंभव काम साबित हुआ. रेमडेसिविर कहीं भी उपलब्ध नहीं थी.
ब्रेकिंग न्यूज़, इरान की मुद्रा में गिरावट जारी, एक डॉलर की क़ीमत 2,15,000 रियाल पहुंची
ईरान की मुद्रा रियाल में भारी गिरावट का सिलसिला जारी है. Bonbast.com के अनुसार सोमवार को एक डॉलर की क़ीमत 2,15,000 रियाल थी. ये रियाल की आधिकारिक दर 42,000 रियाल से क़रीब पांच गुना अधिक है.
समाचार एजेंसी रॉयटर्स के मुताबिक पिछले कुछ हफ़्तों से जारी गिरावट के कारण सेंट्रल बैंक को क़दम उठाने पड़े. बैंक ने लाखों डॉलर बाज़ार में डाले ताकि थोड़ी स्थिरता आए. सेंट्रल बैंक के गवर्नर अब्दुलननसीर हेमत्ती ने इस क़दम को “बुद्धिमानी और सही दिशा वाला” बताया है.
उन्होंने बिना रक़म की जानकारी दिए बताया कि बैंक के पास पास पर्याप्त विदेशी मुद्रा का भंडार था. अर्थशास्त्रियों के मुताबिक़ कोरोना वायरस से उपजे आर्थिक संकट के दौर में चालू खाता और राजकोषीय घाटे पर हो रहे असर के कारण उन भंडारों का इस्तेमाल ज़रूरी हो गया है.
इस्टिट्यूट ऑफ़ इंटरनेशनल फाइनैंस में मिडिल ईस्ट एंड नॉर्थ अफ्रीका के मुख़्य आर्थिक सलाहकार गैब्रिस इरैडियन के मुताबिक़, “बाज़ार में निवेश के लिए उनके पास सीमित विदेशी मुद्रा का भंडार है और अमरीका के प्रतिबंधों के अलावा अंतर्राष्ट्रीय समुदाय से अलग-थलग पड़ने के कारण अब आगे होने वाले किसी तरह की गिरावट को रोक पाना मुमकिन नहीं होगा.”
साल 2015 में ईरान ने अमरीका समेत 6 देशों के साथ एक न्यूक्लियर डील साइन की थी, लेकिन साल 2018 में अमरीका ने डील रद्द कर दी और ईरान पर फिर से प्रतिबंध लगा दिए. इसके कारण ईरान की मुद्रा का मूल्य लगभग 70 प्रतिशत कम हो गया.
सरकार ने आयातकों के वित्तीय बोझ को कम करने के लिए कई एक्सचेंज दर तय करने की कोशिश की. लेकिन फ्री मार्केट में सेंट्रल बैंक के दख़ल के बाद भी रियाल की गिरावट जारी रही.
संयुक्त राष्ट्र वॉचडॉग ने ईरान को कहा है कि वो दो संदिग्ध पुराने परमाणु ठिकानों पर जाने की इज़ाजत दे. इसके अलावा कोरोना माहामारी के कारण व्यापक आर्थिक गिरावट से पैदा हुई नकारात्मकता के कारण हाल की गिरावट दर्ज की गई है. लेकिन ये भी बड़े बदलाव की ओर ले जा सकते हैं.
कोरोना महामारी: यूरोप से ताज़ा अपडेट
- जर्मन शहर गुटरलोह में स्थित एक मीट फैक्ट्री के आसपास कोरोना संक्रमण के कई मामले सामने आने के बाद, स्थानीय प्रशासन ने पूरे ज़िले में तालाबंदी के आदेश दिए थे. जिसे अब एक स्थानीय अदालत ने यह कहते हुए पलट दिया है कि तालाबंदी का आदेश अनुपातहीन था और एक साथ कुछ मामले आने पर पूरे ज़िले को बंद नहीं किया जा सकता.
- बेल्जियम सरकार ने स्पष्ट किया है कि जिन देशों में कोरोना संक्रमण की रोकथाम के लिए सख़्त लॉकडाउन अब भी लागू है, वहाँ से लौट रहे पर्यटकों को 14 दिन के क्वारंटीन में रहना होगा.
- स्वीडन की सरकार ने बार, पब और रेस्त्रां में लोगों के बीच कम से कम एक मीटर की दूरी रखने का नया नियम लागू किया है. आलोचकों का कहना है कि महामारी के दौरान स्वीडन सरकार का सलाहें ताज़े आदेश जितनी ही अस्पष्ट और असंगत रही हैं.
- पेरिस का रोडिन संग्रहालय एक बार फिर से खुल रहा है. फ़्रांस में लॉकडाउन के प्रतिबंधों में ढील के बाद यह नवीनतम पर्यटन स्थल है जिसे खोला गया है.
वायरस न होता तो इंसान बच्चे को जन्म देने के बजाय अंडा देता
ब्रेकिंग न्यूज़, दो ऑस्ट्रेलियाई राज्यों की सीमा बंद करने के लिए सेना की तैनाती
कोरोना वायरस के बढ़ते मामलों को देखते हुए ऑस्ट्रेलिया के दो सबसे अधिक आबादी वाले राज्यों के बीच व्यस्त सीमा को बंद करने के लिए सैकड़ों पुलिस अधिकारियों और सेना के जवानों को तैनात किया जा रहा है.
न्यू साउथ वेल्स और विक्टोरिया के बीच 100 किलोमीटर से ज़्यादा लंबी सीमा को को मंगलवार रात 11 बजकर 59 मिनट पर बंद कर दिया जाएगा.
बीते 100 सालों में ये पहला मौक़ा होगा जब दोनों राज्यों की सीमा को बंद किया जाएगा.
विक्टोरिया राज्य में गुरुवार को कोविड के मामलों में रिकॉर्ड बढ़ोतरी दर्ज की गई और संक्रमितों की संख्या तीन महीने के उच्चतम स्तर पर पहुंच गई.
विक्टोरिया में सोमवार को 123 नए मामले दर्ज किए गए, एक दिन में दर्ज की गई ये अभी तक की सबसे बड़ी बढ़ोतरी है.
न्यू साउथ वेल्स के पुलिस मंत्री डेविड इलियट ने चेतावनी देते हुए कहा कि आदेश का पालन नहीं करने पर “भारी जुर्माना और जेल की सज़ा” हो सकती है.
दोनों राज्यों को जोड़ने वाली 55 सड़कों के अलावा नदी और जंगल के रास्ते से भी बिना इजाज़त सीमा पार करने पर 11 हज़ार ऑस्ट्रेलिया डॉलर (क़रीब 5 लाख 72 हज़ार रुपए) और 6 महीने जेल की सज़ा का प्रावधान है.
सीमावर्ती इलाक़ों में रहने वाले लोगों को ट्रैवल परमिट दिया जाएगा. हालांकि सीमा को बंद करने में अब कुछ ही घंटे बचे हैं और परमिट के लिए एप्लीकेशन सिस्टम बनकर तैयार नहीं हुआ है.
सीमा पर न्यू साउथ वेल्स की तरफ़ बसे एलबरी शहर के मेयर केविन मैक के मुताबिक़ रह रोज़ क़रीब 50,000 गाड़ियां सीमा पार करती हैं.
भारत में अब तक कोविड-19 से 20 हज़ार से ज़्यादा की मौत
भारत में कोरोना संक्रमण के मामलों की कुल संख्या 7 लाख से अधिक हो गई है. हालांकि इनमें से 4 लाख 39 हज़ार 948 लोग संक्रमण के बाद पूरी तरह ठीक हो चुके हैं.
केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुसार बीते 24 घंटे में कोरोना संक्रमण के 22,252 नए मामलों की पुष्टि हुई है जिन्हें मिलाकर भारत में कोरोना संक्रमण के एक्टिव मामले अब दो लाख 59 हज़ार 557 हो गए हैं.
मंत्रालय ने बताया है कि बीते 24 घंटे में 467 लोगों की कोविड-19 से मौत हुई है. इनके बाद कोविड से मरने वालों की कुल संख्या 20,160 हो गई है.
इंडियन काउंसिल ऑफ़ मेडिकल रिसर्च के अनुसार 6 जुलाई तक भारत में कोविड-19 के एक करोड़ दो लाख 11 हज़ार 92 सैंपल लिये जा चुके हैं.
आईसीएमआर का कहना है कि भारत में प्रति दिन दो लाख से औसत से कोविड-19 के सैंपलों की जाँच की जा रही है.
पर्यटक न आने से बेहाल सिंगापुर का होटल उद्योग
भारतीय कंपनियों के सामने सस्ती रेमडेसिविर लेकर भारत आई एक अमरीकी कंपनी
अमरीकी दवा कंपनी मायलिन एनवी ने कहा है कि ‘वो एक अन्य अमरीकी दवा निर्माता गिलिएड साइंसेज़ की एंटी-वायरल दवा रेमडेसिविर का जेनेरिक वर्ज़न भारतीय बाज़ार में लॉन्च करेगी जिसकी क़ीमत 4,800 रुपए होगी.’
कोविड-19 के रोगियों पर परीक्षण के बाद डॉक्टरों ने पाया था कि एंटी-वायरल दवा रेमडेसिविर संक्रमित लोगों को जल्द ठीक होने में मदद करती है.
मायलिन एनवी ने भारतीय बाज़ार के लिए रेमडेसिविर की जो क़ीमत तय की है, वो अमीर देशों की तुलना में क़रीब 80 प्रतिशत कम है.
कैलिफ़ोर्निया स्थित गिलिएड साइंसेज़ ने कई जेनेरिक दवा निर्माताओं के साथ क़रार किया है ताकि रेमडेसिविर को क़रीब 127 विकासशील देशों में मुहैया कराया जा सके.
पिछले महीने ही, दो भारतीय दवा निर्माता कंपनियों – सिप्ला और हेटेरो लैब्स ने रेमडेसिविर का जेनेरिक वर्ज़न भारत में लॉन्च किया था. सिप्ला ने अपनी दवा सिपरेमी की क़ीमत पाँच हज़ार से कुछ कम तय की जबकि हेटेरो लैब्स ने अपनी दवा कोविफ़ोर की क़ीमत 5,400 रुपये तय की है.
पिछले सप्ताह ही गिलिएड साइंसेज़ ने बताया था कि विकसित देशों के लिए इस दवा को महंगा रखा गया है और अगले तीन महीने तक लगभग सारी रेमडेसिविर अमरीका में ही बेचने का क़रार हुआ है.
मायलिन एनवी के अनुसार, यह क़ीमत 100 मिलीग्राम वायल (शीशी) की है. लेकिन यह अभी स्पष्ट नहीं है कि एक मरीज़ के इलाज में ऐसी कितनी वायल लगेंगी.
गिलिएड साइंसेज़ के अनुसार, एक मरीज़ को अगर पाँच दिन का कोर्स दिया जाता है तो उसके लिए कम से कम रेमडेसिविर की छह वायल लगती हैं.
कोविड के मरीज़ों में इस दवा के बेहतर नतीजे दिखने के बाद से ही इसकी डिमांड बढ़ी हुई है.
मायलिन एनवी ने कहा है कि वो जेनेरिक रेमडेसिविर का निर्माण भारतीय प्लांट में ही करने वाले हैं और इस कोशिश में भी लगे हैं कि कम आय वाले क़रीब 127 देशों के लिए भी लाइसेंस लेकर दवा सप्लाई कर सकें.
ड्रग कंट्रोलर जनरल ऑफ़ इंडिया ने मायलिन की रेमडेसिविर को डेसरेम (DesRem) के नाम से मंज़ूर किया है.
भारत इस समय दुनिया का तीसरा ऐसा देश है जहाँ संक्रमण के सबसे ज़्यादा मामले दर्ज किये गए हैं.
हवा में कोरोना वायरस की मौजूदगी पर बोला WHO
विश्व स्वास्थ्य संगठन का कहना है कि सार्स-कोविड-2 वायरस जो लोगों में कोविड-19 बीमारी की वजह बनता है, मुख्य रूप से संक्रमित व्यक्ति के नाक और मुँह से निकली सूक्ष्म बूंदों के माध्यम से फैलता है.
लेकिन क्लीनिकल इंफ़ेक्शियस डिज़ीज़ जर्नल में सोमवार को प्रकाशित हुए एक खुले ख़त में, 32 देशों के 239 वैज्ञानिकों ने इस बात के प्रमाण दिए हैं कि ये फ़्लोटिंग वायरस है जो हवा में ठहर सकता है और सांस लेने पर लोगों को संक्रमित कर सकता है.
विश्व स्वास्थ्य संगठन को लिखे इस खुले खत में वैज्ञानिकों ने गुज़ारिश की है कि अंतरराष्ट्रीय संस्था को कोरोना वायरस के इस पहलू पर दोबारा विचार करना चाहिए और नए दिशा-निर्देश जारी करने चाहिए.
विश्व स्वास्थ्य संगठन के प्रवक्ता तारिक जसारेविक ने अब कहा है कि ‘संस्था इस लेख से अवगत है और अपने तकनीकी विशेषज्ञों के साथ इसकी सामग्री की समीक्षा कर रही है.’
यह अभी स्पष्ट नहीं है कि कोरोना वायरस हवा में कैसे फैलता है. लेकिन अगर ऐसा हुआ तो विश्व स्वास्थ्य संगठन द्वारा वायरस से बचाव के अब तक जो सुझाव दिये गए हैं, उनमें बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है.
विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार, लोगों में कम से कम 3.3 फुट की दूरी होने से कोरोना वायरस संक्रमण की रोकथाम संभव है.
जो देश विश्व स्वास्थ्य संगठन के इस सुझाव को गंभीरता से लागू करने का प्रयास कर रहे थे, उन्हें भी अपने दिशा-निर्देशों में तब्दीली करनी पड़ सकती है.
हालांकि विश्व स्वास्थ्य संगठन फ़िलहाल अपनी पुरानी समझ को ही पुख्ता और सही मान रहा है.
अमरीका की मिनेसोटा यूनिवर्सिटी के डॉक्टर माइकल ओस्टरहोम ने विश्व स्वास्थ्य संगठन से कहा है कि ‘WHO मौजूद डेटा को भी नहीं मान रहा है जो इस बात का संकेत देता है कि कोरोना संक्रमण हवा में फैलता है.’
कैम्ब्रिज यूनिवर्सिटी के प्रोफ़ेसर बाबेक जावेद जो संक्रामक बीमारियों के विशेषज्ञ हैं, उनका कहना है, “हवा में वायरस का फैलना काफ़ी संभव है, लेकिन जाँच इस बात की होनी चाहिए कि हवा में यह वायरस कितनी देर तक रह सकता है. इससे संबंधित सबूतों का अभी अभाव है.”
अगर ये वायरस लंबे समय तक हवा में ठहर सकता है तो इसका मतलब ये होता है कि संक्रमित व्यक्ति किसी स्थान को छोड़ भी दे तो भी ये वायरस वहाँ हवा में मौजूद रह सकता है. यानी हेल्थवर्करों और मरीज़ों की सेवा में लगे लोगों को और अधिक सावधान रहने की ज़रूरत होगी.
हार्वर्ड स्कूल ऑफ़ पब्लिक हेल्थ के डॉक्टर विलियम हेंज मानते हैं कि इसकी गंभीर पड़ताल होना ज़रूरी है.
वे कहते हैं, “अगर हवा के माध्यम से संक्रमण होने की संभावना न्यूनतम है, तब भी इस बात को लोगों की जानकारी में ना लाना, या इसे ना मानने से कोई फ़ायदा नहीं है.”
महामारी से लड़खड़ाते मिस्र के अस्पताल, देखिए यह वीडियो रिपोर्ट
ब्रेकिंग न्यूज़, जानिए इस बार कौन-कौन बनेंगे हाजी, सऊदी अरब ने जारी की चयन प्रक्रिया
इस साल कोरोना वायरस के संक्रमण के कारण सऊदी अरब ने हाजियों की संख्या सीमित कर दी है लेकिन इस सीमित संख्या में भी कौन लोग होंगे इसे लेकर चयन प्रक्रिया जारी की गई है.
सऊदी अरब की सरकारी न्यूज़ एजेंसी सऊदी प्रेस एजेंसी के अनुसार हाजी और उमराह मंत्रालय ने हाजियों की चयन प्रक्रिया के आधार की घोषणा की है.
इस साल 70 फ़ीसदी हाजी सऊदी में रह रहे ग़ैर-सऊदी नागरिक होंगे. केवल 30 फ़ीसदी हाजी सऊदी के नागरिक होंगे. इसमें भी उन लोगों को जगह मिलेगी जो स्वास्थ्यकर्मी और सुरक्षाकर्मी हैं और ये कोरना से संक्रमित होने के बाद ठीक हुए हैं.
सऊदी प्रेस एजेंसी के अनुसार जिन्होंने कोरोना वायरस की लड़ाई में अपनी जान की फ़िक्र नहीं की उनके लिए यह तोहफ़ा है. प्रशासन फ़्रंटलाइन पर काम करने के दौरान संक्रमित होने और फिर ठीक होने वाले लोगों की पहचान करेगा.
सऊदी में रहने वाले 20 से 50 साल की उम्र वाले ग़ैर-सऊदी नागरिकों को प्राथमिकता दी जाएगी. हालांकि उन्हें ये शर्तें पूरी करनी होंगी-
- पीसीआर टेस्ट सर्टिफिकेट होना चाहिए और इसमें निगेटिव रिजल्ट होना अनिवार्य है
- इसके पहले कभी हाजी न बना हो
- स्वास्थ्य मंत्रालय के उस नियम का पालन करना होगा जिसमें हज से पहले और बाद में क्वॉरंटीन अनिवार्य है
सऊदी में रह रहे ग़ैर सऊदी नागरिक इन अहर्तओं को पूरा करते हैं तो वो इस लिंक पर localhaj.haj.gov.sa जाकर रजिस्टर कर सकते हैं. एसपीए के अनुसार रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया पाँच दिनों के लिए उपलब्ध रहेगी.
यह छह जुलाई से शुरू हुई है और 10 जुलाई तक रहेगी. मंत्रालय का कहना है कि ग़ैर-सऊदी नागिरकों का चयन रैन्डमली इलेक्ट्रॉनिक सिस्टम से होगा. जिनका चयन हो जाता है उन्हें तय समय सीमा के भीतर सारे दस्तावेज़ जमा करने होंगे.
अमरीका में नहीं रह पाएंगे ऑनलाइन क्लास वाले विदेशी छात्र
अब उन विदेशी छात्रों को अमरीका में रहने की अनुमति नहीं होगी, जिनके विश्वविद्यालयों में कक्षाएं पूरी तरह ऑनलाइन हो गई हैं.
अमरीका की प्रवासन एजेंसी (यूएस इमिग्रेशन एंड कस्टम एजेंसी) ने कहा है कि ऐसे छात्रों का वीज़ा भी वापस ले लिया जाएगा. एजेंसी का कहना है कि अगर छात्र नए नियमों का उल्लंघन करते पाए तो उन्हें वापस उनके देश भेजा जा सकता है.
अमरीका के कई नामी विश्वविद्यालयों ने कोरोना वायरस महामारी की वजह से अपनी कक्षाएं पूरी तरह ऑनलाइन कर दी थीं. अभी ये साफ़ नहीं है कि नई प्रवासन नीति से कितनी बड़ी संख्या में विदेशी छात्र प्रभावित होंगे.
अमरीका की प्रतिष्ठित हार्वर्ड यूनिवर्सिटी ने भी अपनी सभी कक्षाएं ऑनलाइन करने का ऐलान किया था. इस नए ऐलान के बाद अब छात्रों के सामने दुविधा की स्थिति पैदा हो गई है.
भारत में कोरोना को लेकर क्या-क्या ख़बरें हैं?
अगर आप हमसे अभी-अभी जुड़े हैं, तो एक नज़र भारत में कोरोना से जुड़े अपडेट पर
- मानव संसाधन विकास मंत्रालय ने कहा है कि फ़ाइनल इयर के जो छात्र कोरोना संकट की वजह से परीक्षा नहीं दे पाए हैं, उन्हें एक मौका और दिया जाएगा. मंत्रालय ने कहा है कि जब भी उपयुक्त होगा, विश्वविद्यालय छात्रों के लिए ख़ास तौर पर परीक्षा आयोजित करेंगे.
विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) ने भी अपने नए दिशा-निर्देश जारी कर कहा है कि फ़ाइनल इयर के छात्रों की स्थगित हुई परीक्षाएं सितंबर के आख़िर में होंगी.
सोशल मीडिया पर इस ख़बर से जुड़े कई हैशटैग और ख़बरें ट्रेंड कर रही हैं. इनमें #UGCGuidelines #cancelfinalyearexams #ugc_cancel_exam #Cancel _Exam2020 #exams2020 और #StudentsLivesMatter शामिल हैं. बहुत से छात्र और अभिभावक यूजीसी की नई गाइडलाइंस का विरोध कर रहे हैं और परीक्षाएं रद्द किए जाने की मांग कर रहे हैं.
- भारत में सोमवार को कोरोना वायरस संक्रमण के मामलों में 24,248 की बढ़त दर्ज की गई. पिछले 24 घंटों में कम से कम 425 लोगों की कोविड-19 संक्रमण की वजह से मौत हुई है. स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुसार, देश में कोविड-19 संक्रमण के कुल 6,97,213 मामले हो गए हैं. इनमें से 2,53,287 मामले सक्रिय हैं. संक्रमण की वजह से अब तक कुल 19,693 लोगों की मौत हुई है. वहीं, 4,24,433 लोग इलाज के बाद ठीक भी हो गए हैं.
- असम के कई बड़े शहरों में कोरोना संक्रमित ऐसे मरीज सामने आ रहे हैं जिनकी ट्रैवल हिस्ट्री का पता नहीं चल पाने से प्रशासन की परेशानियां बढ़ने लगी है. गुवाहाटी के बाद प्रदेश के सबसे बडे़ शहर जोरहाट में नौ जुलाई से अगले सात दिनों के लिए संपूर्ण लॉकडाउन की घोषणा की गई है. दक्षिण भारतीय केरल ने भी राजधानी तिरुवनंतपुरम में दो हफ़्तों के लिए लॉकडाउन लगा दिया है.
कोरोना राउंड: दुनिया का अब तक का हाल
- अमरीका में फ़ूड एंड ड्रग रेग्युलेटर (FDA) के प्रमुख स्टीवेन हान ने कहा है कि उन्हें राष्ट्रपति ट्रंप के इस अनुमान पर संदेह है कि इस साल तक कोरोना की वैक्सीन तैयार हो जाएगी.
- एक रिसर्च से पता चला है कि लैटिन और अफ़्रीकी अमरीकी नागरिकों के गोरे अमरीकियों की तुलना में कोरोना वायरस से संक्रमित होने का ख़तरा तीन गुना ज़्यादा है.
- ऑस्ट्रेलियाई राज्य न्यू साउथ वेल्स ने कोविड-19 संक्रमण के बढ़ते मामलों को देखते हुए पड़ोसी विक्टोरिया राज्य से सटी अपनी सीमा बंद कर दी है. 100 वर्षों में ये पहली बार है जब दोनों राज्यों की सीमाएं बंद की गई हैं.
- वियतनाम में कोरोना वायरस संक्रमण के 14 नए मामले सामने आए हैं. संक्रमित होने वाले सभी लोग वो वियतनामी नागरिक हैं जो हाल के दिनों में विदेशों से लौटे हैं. वियतनाम में कोविड-19 की वजह से किसी की मौत नहीं हुई है.
कोरोना वायरस: गोरों की तुलना में काले अमरीकियों को ख़तरा ज़्यादा
ब्रेकिंग न्यूज़, कोरोना संकट की मार एड्स की जीवनरक्षक दवाओं पर
विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने कहा है कि कोरोना संकट की वजह से एड्स की जीवनरक्षक दवाओं की आपूर्ति बाधित हुई है.
डब्ल्यूएचओ के एक सर्वे के अनुसार 73 देशों ने चेताया है कि कोविड-19 महामारी के कारण उनके यहां एड्स की जीवनरक्षक दवाओं का स्टॉक ख़त्म होने वाला है.
वहीं, 24 देशों ने कहा कि उनके यहां एड्स की ज़रूरी दवाएं या तो बहुत कम हैं या उनकी सप्लाई बुरी तरह बाधित हुई है.
विश्व स्वास्थ्य संगठन के महानिदेशक डॉक्टर टेड्रस एडहॉनम गेब्रियेसुस ने इस स्थिति को ‘बेहद चिंताजनक’ बताया है.
उन्होंने कहा, “दुनिया के देशों और उनके सहयोगियों को ये सुनिश्चित करना होगा कि एचआईवी से ग्रसित लोगों को जीवनरक्षक दवाएं मिलती रहें. कोविड-19 की वजह से एड्स की वो जंग नहीं हार सकते जिस पर हमने मुश्किल से जीत हासिल की थी.”
ब्रेकिंग न्यूज़, जंगली जीवों को मारते रहे तो कोरोना जैसे और संक्रमण की आशंका: UN
संयुक्त राष्ट्र की पर्यावरण से जुड़ी एक संस्था का कहना है कि अगर इंसानों ने इसी तरह जंगली जीवों को मारना और उनका उत्पीड़न जारी रखा तो उसे कोविड-19 जैसी अन्य बीमारियों का सामना करना पड़ सकता है.
यूनाइटेड नेशंस इन्वायरमेंट प्रोग्राम ऐंड इंटरनेशनल लाइवस्टॉक रिसर्च इन्स्टीट्यूट की एक रिपोर्ट के अनुसार पर्यावरण को लगातार पहुंचने वाला नुक़सान, प्राकृतिक संसाधनों का बेतहाशा दोहन, जलवायु परिवर्तन और जंगली जीवों का उत्पीड़न कोरोना वायरस जैसे ख़तरनाक संक्रमण के पीछे ज़िम्मेदार है.
संयुक्त राष्ट्र के विशेषज्ञों का कहना है कि पिछले कुछ वर्षों में जानवरों और पक्षियों से इंसानों में फैलने वाली बीमारियां लगातार बढ़ी हैं. विज्ञान की भाषा में ऐसी बीमारियों को ‘ज़ूनोटिक डिज़ीज़’ कहा जाता है.
पर्यावरण और स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि अगर इंसानों ने पर्यावरण और जंगली जीवों को नहीं बचाया तो उसे ऐसी ही और बीमारियों का सामना करना पड़ सकता है.
संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट के मुताबिक़ प्रोटीन की बढ़ती मांग के लिए जानवरों को मारा जा रहा है और इसका ख़ामियाज़ा आख़िरकार इंसान को ही भुगतना पड़ रहा है.
विशेषज्ञों का कहना है कि जानवरों से होने अलग-अलग तरह की बीमारियों के कारण दुनिया भर में हर साल तकरीबन 20 लाख लोगों की मौत हो जाती है.