दिलीप कुमार शर्मा, गुवाहाटी
से बीबीसी हिंदी के लिए
असम में कोविड-19 के बढ़ते मामलों औरक्वारंटीन सेंटर मेंस्वास्थ्यकर्मियों के काम में बाधा पहुँचाने वाले लोगों के ख़िलाफ़ राज्य सरकार ने कड़ी कार्रवाई करने का फ़ैसला लिया है.
प्रदेश के स्वास्थ्य मंत्री हेमंतबिस्वा सरमा ने स्पष्ट कहा है कि जो लोग जानबूझकर क्वारंटीन सेंटर के नियमों का उल्लंघन करेंगे, उनको ग़ैर-ज़मानती धाराओं के तहत गिरफ़्तार किया जाएगा. इसे 'हत्या की कोशिश' जैसा अपराध माना जाएगा.
दरअसल असम सरकार को क्वारंटीन सेंटर के नियमों को लेकर इतना सख़्त इसलिए होना पड़ रहा है क्योंकि पिछले कुछ दिनों में क्वारंटीन सेंटर से लोगों के भागने औरस्वास्थ्यकर्मियों के साथ बुरा व्यवहार करने की कुछ घटनाएं सामने आई हैं.
गोलाघाट ज़िले के एक सरकारी अस्पताल में क्वारंटीन कर रखे गए लोगों ने वहाँ आने जाने वालों पर थूक दिया था, ताकि प्रशासन के लोग तंग आकर उन्हें क्वारंटीन सेंटर से घर भेज दें.
असम में बीते कुछ दिनों में कोविड-19 के मामले तेज़ी से बढ़े हैं और इनमें 90 फ़ीसद मामले बाहरी राज्यों से रेल, सड़क और हवाई मार्ग से लौटे मज़दूरों के हैं.
इस समय प्रदेश में कोरोनावायरस के कुल 2,115 मामले हैं.
सरमा के अनुसार, "जब तक लोग क्वारंटीन में रहेंगे ये बीमारी सामजिकस्तर पर नहीं फैलेगी क्योंकि असम में जो मामले बढ़े हैं वे सारे क्वारंटीन में रखे गए लोगों की जाँच के बाद बढ़े हैं."
हाल ही में चिरांगज़िले के एक क्वारंटीन सेंटर से दो लोग भाग गए थे, लेकिन पुलिस ने उन्हें जल्द ही पकड़ लिया था.
इन लोगों की शिकायत थी कि क्वारंटीन सेंटर में उन्हें सुविधाएंनहीं मिल रही हैं.
इसी तरह बगांईगाँव ज़िले के एक क्वारंटीन सेंटर में रह रहे कुछ लोगों ने ख़राब खाना देने की शिकायत करते हुए स्वास्थ्यकर्मियों के साथ दुर्व्यवहार किया था.
हरियाणा से 25 मई को लौटे अहमद अली मंडल चिरांगज़िले के ढालीगाँव हाई स्कूल में मौजूद एक क्वारंटीन सेंटर में सात दिन बिता चुके हैं.
उन्होंने अपना अनुभव साझा करते हुए बीबीसी से कहा,"हम 23 लोग रेल से कोकराझाड़ उतरे थे. वहाँ स्टेशन पर मौजूद अधिकारी हमें चिरांग के एक सरकारी अस्पताल ले गए. हमारे स्वास्थ की जाँच की गई और मुझे ढालीगाँव क्वारंटीन सेंटर में भेज दिया गया. वहाँ सुबह का नाश्तामिलता था और उसके बाद दो टाइम का खाना मिलता था. मुझे वहाँ कोई तक़लीफ़ नहीं हुई."
क्वारंटीन सेंटर से जुड़ी ख़बरों पर अहमद अली मंडल कहते हैं, "हमें सबसे पहले अपने परिवार को इस बीमारी से बचाना है. अगर इसके लिए क्वारंटीन में थोड़ी असुविधा भी हो तो उससे घबराना नहीं चाहिए."