कोरोना अपडेट: एक जून से रोज़ाना 200 नॉन-एसी ट्रेन चलेंगी
भारत में अब तक कोरोना मरीज़ों की संख्या एक लाख पार कर चुकी है और मरने वालों की संख्या 3163 हो गई है.
लाइव कवरेज
कांग्रेस पार्टी ने मज़दूरों के लिए दिल्ली से भी 300 बसें चलाने की अनुमति माँगी
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दिल्ली प्रदेश कांग्रेस कमेटी के चीफ़ चौधरी अनिल कुमार ने
दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल को पत्र लिखकर कहा है कि ‘पलायन
को मजबूर श्रमिकों के लिए कांग्रेस पार्टी दिल्ली के विभिन्न बॉर्डरों से क़रीब 300
बसें चलवाना चाहती है जिनका ख़र्च कांग्रेस पार्टी वहन करेगी. दिल्ली सरकार इसकी
अनुमति दे.’
इस पत्र में अनिल चौधरी ने लिखा है, “ये बसें उनकी पार्टी को कुछ स्कूलों व अन्य स्रोतों से प्राप्त हो रही हैं जो लॉकडाउन के कारण फ़िलहाल काम नहीं कर रहीं.”
उन्होंने लिखा है कि कांग्रेस पार्टी की राष्ट्रीय अध्यक्षा सोनिया गांधी के निर्देश पर वे श्रमिकों की मदद के लिए प्रतिबद्ध हैं. उन्होंने केजरीवाल से सहयोग करने की अपील की है.
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असम सरकार ने मनरेगा की मज़दूरी बढ़ाई, अन्य राज्यों से लौटे श्रमिकों को मिलेंगे जॉब कार्ड
दिलीप कुमार शर्मा
गुवाहाटी से बीबीसी हिन्दी के लिए
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असम सरकार ने देश के अन्य राज्यों से घर लौटे प्रवासी मज़दूरों को जॉब कार्ड प्रदान करने के लिए सात दिन की समय सीमा तय की है.
राज्य के वित्त मंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने कहा है कि "कोविड-19 के चलते जारी लॉकडाउन के कारण जो मज़दूर देश के अन्य हिस्सों से लौट आये हैं उन्हें अगले सात दिन के भीतर जॉब कार्ड दिया जाएगा."
इसके साथ ही असम सरकार ने महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (मनरेगा) के तहत दिए जाने वाली दैनिक मज़दूरी को 182 रुपये से बढ़ाकर 202 रुपये कर दिया है.
मंत्री सरमा ने मज़दूरों से जुड़ी एक जानकारी साझा करते हुए बताया, "क़रीब 3.67 लाख लोग 24 अप्रैल से दैनिक मज़दूरी में लगे हुए हैं. हालांकि अभी यह सुनिश्चित नहीं किया गया है कि इनमें कितने प्रवासी मज़दूर हैं."
28 मार्च को जब केंद्र सरकार ने 4,431 करोड़ रुपये मनरेगा के लिए दिये थे तब अधिकारियों ने कहा था कि मनरेगा के तहत मज़दूरी में वृद्धि 1 अप्रैल से लागू होगी और मनरेगा के तहत राष्ट्रीय औसत मज़दूरी बढ़ाई जाएगी. तब ये भी बताया गया था कि मनरेगा के तहत 13.62 करोड़ जॉब कार्ड धारक हैंजिनमें से 8.17 करोड़ जॉब कार्ड धारक सक्रिय हैं.
असम सरकार ने यह भी घोषणा की है कि असम लौटने वाले मज़दूरों को अगले दो महीने तक प्रति व्यक्ति 5 किलो चावल मिलेगा.
नगालैंड की कोयला खदानों में मज़दूरी करने वाले और लॉकडाउन के चलते घर लौटे उरीयमघाट के राजेश थापा ने बीबीसी से कहा,"घर पर बेकार बैठे हुए हैं. पहले सरकार के अधिकारियों ने रास्ते में रोककर 10 दिन के क्वारंटीन में भेज दिया और गाँव आने पर यहाँ के लोगों ने 14 दिनों तक घर से निकलने के लिए मना कर दिया. ऐसी स्थिति में हमारे परिवार का ख़र्च कैसे चलेगा. जब काम ही नहीं होगा तो हम सब भूख से मर जाएंगे. सरकार की तरफ से थोड़ा चावल-दाल मिल रहा है लेकिन उससे गुज़ारा संभव नहीं है. हमें काम चाहिए. गाँव में करने को कुछ नहीं है इसलिए नगालैंड मज़दूरी करने गए थे. अगर जल्द ही काम नहीं मिला तो हमारा पूरा परिवार मुसीबत में आ जाएगा."
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चीन ने आरोप लगाया- 'अमरीका बदनाम करने के प्रयास कर रहा है'
स्टीफ़न मैकडॉनेल
चीन संवाददाता, बीबीसी न्यूज़
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विश्व स्वास्थ्य संगठन की भूमिका को लेकर चीन और अमरीका के बीच कूटनीतिक विवाद बढ़ता नज़र आ रहा है.
चीन के विदेश मंत्री ने ट्रंप प्रशासन पर आरोप लगाया है कि ‘वो कोरोना वायरस महामारी के ख़िलाफ़ जंग में अपनी ख़ामियों और ख़राब प्रबंधन से ध्यान हटाने के लिए विश्व स्वास्थ्य संगठन पर हमला कर रहे हैं.’
अमरीका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने पत्र लिखकर विश्व स्वास्थ्य संगठन को धमकी दी है कि ‘अगर वो 30 दिन के भीतर अपने कार्य-प्रणाली में बुनियादी बदलाव नहीं करते तो अमरीका सारे फ़ंड रोक देगा और अपनी सदस्यता भी छोड़ देगा.’
ट्रंप ने ये भी कहा है कि संगठन ने कोरोना वायरस महामारी के दौर में चीन से ‘स्वतंत्रता की चिंताजनक कमी’ दिखाई है.
बीजिंग में एक नियमित प्रेस वार्ता के दौरान विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता झाओ लिज़ियन ने कहा कि ‘अमरीका अपनी ज़िम्मेदारियों से बचने के लिए चीन पर धब्बा लगाने का प्रयास कर रहा है. अमरीका का अनुमान ग़लत है और वो ग़लत लोगों को निशाना बना रहा है.’
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कोरोना संकट: पश्चिम बंगाल नर्सों के सामूहिक पलायन से परेशान
राहुल गांधी ने जिन मज़दूरों की मदद की, वो कहाँ हैं
मुंबई के बांद्रा स्टेशन पर पहुँची सैकड़ों की भीड़, पुलिस को करना पड़ा लाठीचार्ज
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मुंबई के बांद्रा रेलवे स्टेशन पर मंगलवार सुबह सैकड़ों लोगों की भीड़ एक ‘श्रमिक
स्पेशल ट्रेन’ पर चढ़ने के लिए जमा हो गई थी जिसे अब पुलिस
ने खदेड़ दिया है.
पुलिस के अनुसार ‘यह स्पेशल ट्रेन मुंबई से बिहार जाने के लिए
प्लेटफ़ॉर्म पर पहुँची थी जिसमें बैठने के लिए वो लोग भी स्टेशन पहुँच गए
जिन्होंने इसके लिए पंजीकरण नहीं किया था.’
समाचार एजेंसी एएनआई के अनुसार पंजीकरण करके स्टेशन पहुँचे तक़रीबन हज़ार
यात्रियों को ही इस ट्रेन में चढ़ने दिया गया.
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मज़दूरों के लिए बसों को लेकर यूपी सरकार और प्रियंका-कांग्रेस में खींचतान
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कांग्रेस नेता प्रियंका गांधी की ओर से मज़दूरों के लिए हज़ार बसे चलवाने के
प्रस्ताव को उत्तर प्रदेश सरकार ने स्वीकार तो कर लिया है, लेकिन जितनी शर्तें
आधिकारिक रूप से इस प्रक्रिया में रखी जा रही हैं, उन्हें देखकर लगता नहीं है कि
मज़दूर जल्द से जल्द इन बसों का लाभ ले पाएंगे.
दोनों तरफ से ही पत्र-बाज़ी हो रही है. सोमवार को उत्तर प्रदेश सरकार के अपर
मुख्य सचिव (गृह) अवनीश अवस्थी ने प्रियंका गांधी को पत्र लिखकर सूचित किया था कि ‘उनके
एक हज़ार बस चलवाने के प्रस्ताव को यूपी सरकार ने स्वीकार कर लिया है, लेकिन इन
बसों के ड्राइवरों का नाम और बसों का डिटेल जल्द से जल्द यूपी सरकार को भेज दें.’
मंगलवार को एक अन्य पत्र में अवनीश अवस्थी ने लिखा है कि “प्रियंका
गांधी की टीम की ओर से 19 मई को लिखे गए एक पत्र में कहा गया है कि वो नोएडा और
गाज़ियाबाद में बसें उपलब्ध करा सकते हैं, मगर लखनऊ में बसें उपलब्ध नहीं करा
पाएंगे.”
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उन्होंने प्रियंका गांधी की टीम से कहा है कि “500 बसों के डिटेल दोपहर 12 बजे तक गाज़ियाबाद के डीएम को भेज दें. गाज़ियाबाद के डीएम को इसकी सूचना दी जा चुकी है. गाज़ियाबाद प्रशासन इन बसों को रिसीव करेंगा और प्रयोग करेगा.”
उन्होंने अपने पत्र में लिखा है कि बसें गाज़ियाबाद के साहिबाबाद और कौशाम्बी बस स्टैंड पर भेज दें.
इसके साथ ही प्रियंका गांधी की टीम से 500 बसों की लिस्ट गौतम बुद्ध नगर के डीएम को सौंपने के लिए कहा गया है जिन्हें अवनीश अवस्थी ने ग्रेटर नोएडा के एक्सपो मार्ट मैदान में भेजने का अनुरोध किया है.
अवनीश अवस्थी ने निर्देश दिया है कि सभी बसों का परमिट, फ़िटनेस, इंश्योरेंस, ड्राइवर का लाइसेंस और कंडक्टर के डिटेल जाँचने के बाद ही इन बसों का प्रयोग किया जाये.
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समाचार एजेंसी एएनआई के अनुसार अवनीश अवस्थी के इस पत्र के जवाब में प्रियंका गांधी के निजी सचिव संदीप सिंह ने यूपी सरकार को एक पत्र लिखा है.
उन्होंने कहा है कि “हमारी कुछ बसें राजस्थान से आ रही हैं और कुछ दिल्ली से, इनके लिए दोबारा परमिट दिलवाने की कार्यवाही जारी है. बसों की संख्या अधिक होने के कारण इसमें कुछ घंटे लगेंगे. आपके कहे अनुसार ये बसें गाज़ियाबाद और नोएडा बॉर्डर पर शाम 5 बजे पहुँच जाएंगी. आपसे आग्रह है कि 5 बजे तक आप भी यात्रियों की लिस्ट और रूट मैप तैयार कर लें ताकि इनके संचालन में हमें कोई आपत्ति ना आये.”
आख़िरकार वतन लौटे चीन के वुहान में फंसे पाकिस्तानी छात्र
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चीन के वुहान शहर में फंसे अपने यहाँ के छात्रों को पाकिस्तान सरकार आख़िरकार वापस
ले आई है.
पाकिस्तान इंटरनेशनल एयरवेज़ के एक स्पेशल विमान के ज़रिये इन छात्रों को वापस
लाया गया है.
दो सौ से ज़्यादा पाकिस्तानी छात्र इस फ़्लाइट के ज़रिये मंगलवार सुबह
पाकिस्तान के इस्लामाबाद पहुँचे हैं.
वुहान चीन का वही शहर है जहाँ से कोरोना वायरस संक्रमण की शुरुआत हुई और ये
पाकिस्तानी छात्र वुहान में कई महीनों से फंसे हुए थे.
सोशल मीडिया पर जनवरी के अंत में और फ़रवरी के शुरुआती हफ़्तों में ना सिर्फ़
पाकिस्तान, बल्कि भारतीय छात्रों ने भी अपनी-अपनी सरकारों से उन्हें वुहान से
निकालने की अपील की थी.
चीन के हूबे प्रांत में कोरोना वायरस संक्रमण बहुत तेज़ी से फ़ैलने के बाद चीन
में अन्य देशों से आने-जाने वाली तमाम उड़ानों को बंद कर दिया गया था.
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इसके बाद भारत सरकार ने वुहान समेत चीन के अन्य शहरों से भारत लौटने के इच्छुक छात्रों के लिए एयर इंडिया की स्पेशल फ़्लाइट्स भेजी थीं.
लेकिन पाकिस्तान ने यह कहते हुए छात्रों को वापस लाने से मना कर दिया था कि ‘उन्हें चीन की सरकार पर पूरा विश्वास है कि वो उनके छात्रों का ध्यान रखेगी.’
पाकिस्तान प्रशासन द्वारा यह दलील भी दी गई थी कि ‘जब महामारी फैले, तो एक जगह से दूसरी जगह पलायन करना उसे और बढ़ावा देता है.’
पाकिस्तान सरकार के इस फ़ैसले पर लोगों का गुस्सा फूट पड़ा था, सोशल मीडिया पर लोग पाकिस्तान की इमरान ख़ान सरकार की आलोचना कर रहे थे, इन लोगों का कहना था कि ‘पाकिस्तान चीन के राजनैतिक दबाव में ऐसा कर रहा है.’
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क्या चीन कोरोना वायरस को वैश्विक महामारी बनने से रोक सकता था?
बिहार: ट्रक हादसे में नौ मज़दूरों की मौत, पश्चिम बंगाल से घर लौट रहे थे
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बिहार के भागलपुर ज़िले में हुए एक ट्रक हादसे में घर लौट रहे नौ मज़दूरों की
मौत हो गई है.
स्थानीय पुलिस ने बताया है कि ‘ये सभी लोग एक ट्रक में सवार थे जिसकी टक्कर
एक बस से हुई और ट्रक पलट गया. ये हादसा मंगलवार सुबह 6 बजे नेशनल हाइवे नंबर 31 पर अम्भो चौक के
पास हुआ.’
पुलिस अधिकारी निधि रानी ने समाचार एजेंसी पीटीआई को बताया कि ‘इन
मज़दूरों ने छह दिन पहले कोलकाता शहर से कुछ साइकिलों पर अपनी यात्रा शुरू की थी
और रास्ते में ही कहीं से ये लोग ट्रक पर सवार हुए.’
पुलिस के अनुसार 'पश्चिम बंगाल से बिहार के कटिहार ज़िले को जा रहे इस ट्रक के
ड्राइवर और क्लीनर हादसे के बाद दुर्घटनास्थल से फ़रार हो गए हैं.'
पुलिस ने मृतकों के पास से मिले कागज़ात के आधार पर बताया है कि ये मज़दूर
चंपारण ज़िले के रहने वाले थे.
ट्रंप कोरोना के इलाज के लिए ख़ुद क्यों बन रहे हैं डॉक्टर
चीन ने ऑस्ट्रेलिया को दिया एक और झटका
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ऑस्ट्रेलिया को मंगलवार सुबह अपने सबसे बड़े व्यापारिक साझेदार चीन से एक और
झटका लगा है.
चीन की सरकार ने कहा है कि ऑस्ट्रेलिया को अब जौ के निर्यात पर 80 फ़ीसद सीमा-शुल्क
देना होगा.
ऑस्ट्रेलियाई बाज़ार के लिए यह वाक़ई एक बुरी ख़बर है, यह एक पुराना विवाद है
जिसका परिणाम अब सामने आया है और हो सकता है कि ऑस्ट्रेलिया इस मामले में विश्व
व्यापार संगठन से अपील करे.
ऑस्ट्रेलियाई पर्यवेक्षकों को लगता है कि यह क़दम सिर्फ़ दोनों देशों के
व्यापारिक मसलों तक सीमित नहीं है, बल्कि कोरोना वायरस के स्रोत को लेकर दोनों
देशों के बीच हुई तनातनी के बाद, प्रतिशोध के रूप में चीन ने यह निर्णय लिया है.
ऑस्ट्रेलिया ने कोरोना वायरस के स्रोत और इस वायरस के फ़ैलने में चीन की
भूमिका की निष्पक्ष और स्वतंत्र जाँच की माँग की है और उनकी इस माँग को वर्ल्ड
हेल्थ असेंबली में 60 से ज़्यादा देशों का समर्थन भी मिल चुका है. साथ ही यूरोपीय
संघ भी इसमें ऑस्ट्रेलिया के साथ खड़ा है.
हालांकि चीन ने साफ़ कहा है कि इस व्यापारिक निर्णय का कोरोना वायरस से संबंधित
ऑस्ट्रेलिया की माँग से कोई वास्ता नहीं है.
पिछले सप्ताह ही चीन ने ऑस्ट्रेलिया के चार सबसे बड़े बीफ़ निर्यातकों पर रोक
लगा दी थी और पिछले महीनेचीन के राजदूत ने चेतावनी दी थी कि अगर ऑस्ट्रेलिया कोरोना के संबंध में पूछताछ
की माँग जारी रखता है तो चीन उनके उत्पादों का बहिष्कार करेगा.
जबकि ऑस्ट्रेलिया ने इसे चीन की ‘आर्थिक ज़बरदस्ती’ बताया
है. साथ ही कहा है कि वो कोरोना वायरस के स्रोत से संबंधित अपनी माँग पर कायम है.