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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंगलवार को 20 लाख करोड़ के आर्थिक पैकेज की घोषणा की थी.
लेकिन मज़दूरों का पलायन लगातार जारी है. अंबाला से दिल्ली पहुँचे कुछ मज़दूरों से बात की बीबीसी संवाददाता सलमान रावी ने.
देखिए उनकी बातचीत.
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण की प्रेस कॉन्फ़्रेंस थोड़ी देर में
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वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण देश के लिए आर्थिक पैकेज की विस्तार से जानकारी देंगी.
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंगलवार को देश के नाम अपने संबोधन में कोरोना संकट से निबटने के लिए बीस लाख करोड़ के राहत पैकेज की घोषणा की थी.
हालांकि उन्होंने ये नहीं बताया था कि इस पैकेज में किसके लिए क्या होगा.
निर्मला सितारमण आज से ये बताना शुरू करेंगी कि पैकेज में किसके लिए क्या है.
माना जा रहा है कि इस आर्थिक पैकेज में भूमिहीन श्रमिकों और मध्यम एवं लघु उद्योगों को प्राथमिकता दी जाएगी.
ऑस्ट्रेलिया में सुरक्षाबलों की ताक़त बढ़ाने के लिए विधेयक
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ऑस्ट्रेलिया
सरकार ने संसद में एक बिल पेश किया है जिससे वहाँ सुरक्षा और ख़ुफ़िया एजेंसियाँ और
ताक़तवर बन सकती हैं.
इस
विधेयक की कुछ ख़ास बातें:
14
साल के बच्चों तक को भी पूछताछ के लिए हिरासत में लेना संभव
और
ज़्यादा निगरानी के अधिकार
ट्रैकिंग
डिवाइस के इस्तेमाल के लिए वॉरंट की ज़रूरत नहीं, संस्था के भीतर से ही आदेश देना
पर्याप्त
वॉरंट
जारी करना आसान
ऑस्ट्रेलिया
के विपक्षी राजनेताओं और नागरिक अधिकार कार्यकर्ताओं ने इस बिल को लाए जाने के समय
को लेकर चिंता जताई है.
उनका कहना है कि सरकार कोरोना संकट से मची हलचल के बीच इसे
पास करवाना चाहती है क्योंकि लोगों का ध्यान कहीं और है.
ऑस्ट्रेलिया
में कल मंगलवार से संसद की कार्यवाही दोबारा शुरू हुई. बहुत कम सांसदों ने इसमें
हिस्सा लिया है. संसद में हर व्यक्ति एक-दूसरे से डेढ़ मीटर की दूरी पर रख रहा है.
ब्रेकिंग न्यूज़, पीएम मोदी की 'लोकल' अपील पर अमित शाह ने किया अमल
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केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कहा है कि 1 जून,
2020 से केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों (CAPF) की कैंटीनों में सिर्फ़ भारत में बने यानी स्वदेशी उत्पादों की ही बिक्री होगी.
उन्होंने अपने आधिकारिक ट्विटर हैंडल से ट्वीट किया, “आज गृह मंत्रालय ने यह निर्णय लिया है कि सभी केंद्रीय सशस्त्र
पुलिस बलों (CAPF) की कैंटीनों में अब सिर्फ़ स्वदेशी उत्पादों की ही बिक्री होगी. इससे लगभग 10 लाख CAPF कर्मियों के 50 लाख परिजन स्वदेशी उपयोग करेंगे.”
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंगलावर रात आठ बजे राष्ट्र के नाम संबोधन में घरेलू कारोबारों और स्थानीय उत्पादों को बढ़ावा देने की अपील की थी.
उन्होंने लोगों से 'लोकल को लेकर वोकल' होने की अपील की थी.
कोरोना वायरस के संक्रमण के बाद से ही दुनिया भर में संरक्षणवाद को बल मिलने की बात कही जा रही थी.
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कोरोना वायरसः 1918 के स्पैनिश फ़्लू को कैसे रोका गया था?
एक तरफ़ पीएम मोदी का 20 लाख करोड़ का पैकेज, दूसरी तरफ़ रोते मज़दूर
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंगलवार को 20 लाख करोड़ के आर्थिक पैकेज की घोषणा की थी ताकि लॉकडाउन के कारण अर्थव्यवस्था में आई मंदी को संभाला जा सके.
लेकिन तत्काल राहत के लिए उन्होंने कुछ नहीं कहा था और देश भर में प्रवासी मज़दूरों की हालत बद से बदतर होती जा रही है.
काम छूट जाने से निराश और दर-दर की ठोकरे खाने को मजबूर कुछ परेशान श्रमिकों से बीबीसी संवाददाता सलमान रावी ने बात की. एक मज़दूर तो अपना दर्द सुनाते हुए रो पड़े. देखिए, ये वीडियो.
अपडेट: पिछले कुछ घंटों में भारत का हाल
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रेलवे के अधिकारयों ने बताया है कि स्पेशल श्रमिक ट्रेनें अब पुरानी दिल्ली
रेलवे स्टेशन से चलेंगी. आज दिल्ली से बिहार के भागलपुर, दरभंगा और बरौनी के लिए
ट्रेनें चलेंगी.
नागरिक उड्डयन मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने कहा है कि वंदे भारत मिशन के फ़ेज-2
में 31 देशों से 149 विमानों में कुल 30 हज़ार भारतीय वतन वापस लौटेंगे.
स्वास्थ्य मंत्रालय के ताज़ा आंकड़ों के अनुसार भारत में कोविड-19 संक्रमण की वजह से होने वाली मौतों की कुल संख्या अब
2,415 हो गई है.
इसके अलावा संक्रमण के मामलों में भी बढ़त दर्ज की गई
है. देश में अब कोरोना वायरस संक्रमण के कुल 74,281 मामलों की पुष्टि हो चुकी है.
स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुसार 24,386 लोग इलाज के बाद ठीक भी हुए हैं.
'तीन दिन काम किये तभी लॉकडाउन हो गया, सब ठीक होगा तो फिर जाएंगे'
18 साल के दिनेश को बिहार से दिल्ली आए महज तीन दिन हुए थे कि देश में लॉकडाउन का ऐलान हो गया. इसके बाद वो सैकड़ों किलोमीटर का फ़ासला तय करके वापस अपने घर पहुंचे. मगर दिनेश ने हिम्मत नहीं हारी है.
वो कहते हैं, "कभी तो लॉकडाउन हटेगा, कभी तो बाज़ार खुलेगा, फिर वापस जाएंगे."
प्रधानमंत्री मोदी के आर्थिक पैकेज के ऐलान के बारे में पूछे जाने पर उन्होंने कहा, "हम मोदी जी से नाराज़ होकर क्या करेंगे. मोदी एक सरकार हैं. वो क्या करेेंगे. अपने लिए जो करेंगे, वो हम ख़ुद करेंगे."
दक्षिण कोरिया के प्रधानमंत्री चुंग सी-क्यूं ने उन सभी लोगों से तुरंत टेस्ट
कराने को कहा जो राजधानी सोल के क्लबों में गए थे.
सोल के नाइट-क्लब जाने वालों में कम से कम 119 संक्रमण के मामले सामने आए हैं
और अब तक कम से कम 22 हज़ार लोगों का टेस्ट किया जा चुका है.
फ़िलहाल सोल के कम से कर 10 बार और क्लब जांचकर्ताओं की निगरानी में है. यहां
संक्रमण का एक मामला तब सामने आया था जब अप्रैल के आख़िर में नाइटक्लब दोबारा खुले थे.
स्वास्थ्य अधिकारी अब उस इलाक़े में रहने वाले लोगों के मोबाइल के जीपीएस और
क्रेडिट कार्ड के रिकॉर्ड से हज़ारों लोगों को ट्रेस कर रहे हैं.
ट्रेस किए जाने
वालों में से एक व्यक्ति ने अपनी आवाजाही और नौकरी के बारे में स्वास्थ्य
अधिकारियों से झूठ बोला था. इस शख़्स पर आपराधिक मुक़दमा चलाया जा सकता है. 25 वर्षीय इस शिक्षक से छह छात्रों समेत आठ लोगों संक्रमित हुए हैं.
इस व्यक्ति को उनके मोबाइल फ़ोन के जरिए ट्रेस किया गया. उन्होंने अपने शिक्षक
होने की बात छिपाई जिससे स्वास्थ्य अधिकारियों को अन्य संक्रमित लोगों को ढूंढने
में परेशानी हुई.
उनसे संक्रमित हुए दो लोग सप्ताहांत में चर्च गए थे और अब शहर के 700 लोग
क्वारंटीन में हैं. दक्षिण कोरिया के संक्रामक रोग
क़ानूनों के मुताबिक़ इस शख़्स को दो साल की जेल और तकरीबन 12 लाख रुपए ज़ुर्माने
की सज़ा हो सकती है.
एलजीबीटीक्यू (लेस्बियन, गे, बाइसेक्शुअल, ट्रांसजेंडर और क्वीयर) समुदाय के
कई लोग भी इन क्लबों में गए लेकिन अब वो भेदभाव के डर से सामने आने से कतरा रहे
हैं.
प्रधानमंत्री चुंग सी-क्यूं ने कहा है कि अगर कोई कोविड-19 पॉज़िटिव पाया भी
जाता है तो अधिकारी उसका निजी डेटा डिलीट कर देंगे.
भारत से वैक्सीन की उम्मीदें क्यों? देखिए यह रिपोर्ट
वीडियो कैप्शन, पूरी दुनिया को इस वक़्त एक चीज़ का पूरी शिद्दत से इंतज़ार है - वैक्सीन.
कोरोना के बहाने लोगों पर निगाह रख रहा है इसराइल?
वीडियो कैप्शन, भारत में भी आरोग्य सेतु ऐप को लेकर इसी तरह के सवाल उठाए जा रहे हैं
इसराइल में सरकार पर लोगों पर निगाह रखने के आरोप लग रहे हैं.
भारत में भी आरोग्य सेतु ऐप के ज़रिए कोरोना संक्रमण को नियंत्रित करने की कोशिश की जा रही है और सरकार का दावा है कि इससे काफ़ी मदद मिली है.
लेकिन इसराइल के क़दम की आलोचना भी हो रही है.
देखिए, ये वीडियो रिपोर्ट.
कोरोना वार्ड की देखरेख करने वाली एक नर्स और उनके बेटे की कहानी
तस्वीरों में: कोरोना के दौर में भारत
कोरोना संकट और लॉकडाउन के बीच भारत के अलग-अलग हिस्सों से कुछ इस तरह की तस्वीरें देखने को मिलीं.
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इमेज कैप्शन, हर मां को अपने बच्चे की फ़िक्र है. ये तस्वीर जयपुर की है.
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इमेज कैप्शन, कोलकाता के हावड़ा रेलवे स्टेशन पर स्पेशल एसी ट्रेन का इंतज़ार करती एक महिला.
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इमेज कैप्शन, लॉकडाउन में भूख को तो नहीं रोक सकते! भुवनेश्वर के खेतों में काम करने जुटी कुछ महिलाएं.
क्या पुतिन ने भी की ट्रंप वाली 'ग़लती'?
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दुनिया का एक और ताक़तवर देश कोरोना वायरस संक्रमण की चपेट में बुरी तरह से आ चुका है.
दुनिया की तीन बड़ी ताक़तें कोरोना वायरस की चपेट में बारी-बारी से आईं. चीन से कोरोना वायरस के संक्रमण शुरुआत हुई और अमरीका में 83 हज़ार लोगों की जान ले चुका है.
अब रूस इसकी चपेट में है.
कोरोना वायरस के कारण चीन की वैश्विक छवि बुरी तरह से प्रभावित हुई और अमरीका में पिछले एक महीने से हर दिन सैकड़ों लाशें क़ब्रिस्तान पहुंच रही हैं.
मार्च महीने में रूस में संक्रमण के कम मामले आने के बाद अब यहां तेज़ी से लोग संक्रमित हो रहे हैं.
संक्रमण दर के मामले में रूस दूसरे नंबर पर आ गया है.
कहा जा रहा है कि अमरीकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप की तरह राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने भी कोरोना की गंभीरता को कमतर आँका.
18 मार्च को राष्ट्रपति पुतिन ने कहा था कि हालात पूरी तरह से नियंत्रण में हैं.
पुतिन ने यह भी कहा था कि रूस इस मामले में बाक़ी देशों की तुलना में बहुत अच्छी स्थिति में है. उसके बाद से रूस में कोरोना वायरस के मामले लगातार बढ़ते गए. रूस में कोरोना संक्रमितों की कुल तादाद दो लाख 20 हज़ार से भी ज़्यादा हो गई है. अभी रूस से केवल अमरीका, स्पेन और ब्रिटेन में संक्रमितों की तादाद ज़्यादा है. आज शाम तक बहुत संभव है कि रूस संक्रमण के मामले में ब्रिटेन से भी आगे निकल जाए.
रूस के नंबर पर उठ रहे सवाल
संक्रमितों की बढ़ती तादाद के बावजूद बाक़ी देशों की तुलना में मरने वालों की संख्या रूस में बहुत कम है. कई लोग इस पर हैरानी जता रहे हैं. रूस दो हज़ार के क़रीब मौत बता रहा है जबकि ब्रिटेन में अब तक 32 हज़ार से ज़्यादा लोगों की मौत हो चुकी है. रूस में मृतकों की कम तादाद होने के पीछे एक वजह वहां की गिनने की प्रक्रिया है.
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अमरीका में अगर कोई व्यक्ति कोरोना पॉजिटिव पाए जाने के बाद मरता है तो उसे कोरोना वायरस से मरने वालों की श्रेणी में रखा जा रहा है. वहीं रूस में कोरोना पॉजिटिव पाए जाने के बाद भी सभी मृतकों को इस श्रेणी में नहीं रखे जाने की बात कही जा रही है. हालांकि मॉस्को टाइम्स से अधिकारियों ने ऐसे आरोपों को ख़ारिज किया है.
रूस में पुतिन की लोकप्रियता कम हुई है. लेवाडा सेंटर के पोल से पता चला है कि पुतिन का रूस में समर्थन कम हुआ है. जब पुतिन अभी और कार्यकाल के लिए सोच रहे हैं ऐसे में कम होती लोकप्रियता और ऊपर से कोरोना वायरस कहीं भारी न पड़ जाए. कहा जा रहा है कि रेटिंग में आई गिरावट के कारण ही पुतिन ने लॉकडाउन में ढील देने का फ़ैसला किया था.
ब्रेकिंग न्यूज़, भारत में कोविड-19 से मरने वालों की संख्या 2,415 हुई
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स्वास्थ्य मंत्रालय के ताज़ा आंकड़ों के अनुसार भारत में कोविड-19 की
वजह से मरने वालों की संख्या अब बढ़कर 2,415 हो गई है.
इसके अलावा संक्रमण के
मामलों में भी बढ़त दर्ज की गई है.
देश में बुधवार तक कोरोना वायरस संक्रमण के कुल 74,281 मामलों की पुष्टि हो चुकी है.
स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुसार 24,386 लोग इलाज के बाद ठीक भी हुए हैं.
हमेशा के लिए घर से काम कर सकेंगे ट्विटर के कर्मचारी
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ट्विटर ने कहा है कि अगर उसका स्टाफ़ चाहे और उनका काम इजाज़त दे तो वो हमेशा के लिए ‘वर्क फ़्रॉम होम’ यानी घर से काम कर सकते हैं.
ट्विटर का मुख्यालय अमरीका के सैन फ्रैंसिस्को में है. कंपनी ने कहा है कि उसके
5,000 के क़रीब कर्मचारी मार्च की शुरुआत से ही घर से काम कर रहे हैं.
चूंकि अब तक काम अच्छी तरह होता आ रहा है इसलिए
ट्विटर ने कहा है कि वो अपने स्टाफ़ को घर से काम जारी रखने की इजाज़त दे रहा
है.
ट्विटर के सीईओ जैक डोर्सी ने अपने कर्मचारियों को
भेजे एक ईमेल में कहा, “पिछले कुछ महीनों ने साबित
कर दिया है कि हम घर से सफलतापूर्वक काम कर सकते हैं. इसलिए अगर हमारे स्टाफ़ का पद और काम इजाज़त दे तो वो हमेशा के लिए घर से काम कर सकते हैं.”
जो कर्मचारी हमेशा के लिए घर से काम नहीं कर सकते
है, उनके लिए ऑफ़िस को इस साल के आख़िर तक (लेकिन सितंबर से पहले नहीं) खोला
जाएगा.
नई दिल्ली, लंदन और सिंगापुर समेत दुनिया भर में
ट्विटर के 35 ऑफ़िस हैं.
फ़ेसबुक और गूगल जैसी कंपनियों ने भी अपने कई
कर्मचारियों को पूरे साल तक घर से काम की मंज़ूरी दी है.
मोदी के 20 लाख करोड़ के पैकेज से मर रहे ग़रीब मज़दूरों का कितना भला होगा?
सिगरेट पीने वालों को कोविड-19 से ज़्यादा ख़तरा: अध्ययन
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इमेज कैप्शन, विश्व स्वास्थ्य संगठन के मुताबिक़ धूम्रपान से जुड़ी बीमारियों से हर वर्ष 80 लाख से अधिक लोगों की मौत होती है
अमरीका स्थित यूनिवर्सिटी ऑफ़ कैलिफ़ॉर्निया में हुए एक नए
अध्ययन से पता चला है कि धूम्रपान करने वाले और कभी धूम्रपान कर चुके लोगों में
कोविड-19 के गंभीर लक्षण विकसित होने की आशंका सामान्य लोगों से काफ़ी ज़्यादा
है.
शोधकर्ताओं के अनुसार ऐसे लोगों में इस महामारी की वजह से
मरने की आशंका भी ज़्यादा पाई गई है.
यूसीएसएफ़ सेंटर फ़ॉर टोबैको कंट्रोल रिसर्च एंड एजुकेशन के
एक प्रोफ़ेसर स्टैन्टन ग्लांज़ ने कहा है कि “कोविड-19
धूम्रपान करने वाले लोगों का जोखिम बढ़ा सकता है.”
शोधकर्ताओं ने इस नतीजे पर पहुँचने के लिए चीन, दक्षिण
कोरिया और अमरीका से रिव्यू के लिए आए 19 रिसर्च पेपरों का अध्ययन किया और पाया
कि 30 प्रतिशत सिगरेट पीने वाले लोगों में, 17.6 प्रतिशत धूम्रपान ना करने वालों
की तुलना में कोविड-19 का अधिक गंभीर रूप देखने को मिला.
शोधकर्ताओं ने लिखा है कि “आमतौर
पर धूम्रपान और ई-सिगरेट का उपयोग साँस
से जुड़े संक्रमण की गंभीरता को बढ़ाता है. हालांकि इसका कोविड-19 के मामलों में
किस तरह का प्रभाव होता है, यह अध्ययन अभी नहीं किया गया है.”
उन्होंने लिखा है कि ‘एक अन्य
कोरोना वायरस से होने वाली बीमारी - MERS-COV के संक्रमण के समय देखा गया था कि धूम्रपान करने वालों की मृत्यु दर सामान्य
लोगों की तुलना में अधिक थी और सिगरेट पीने वालों में संक्रमण की दर भी अधिक थी.’
शोधकर्ताओं ने कहा है कि सिगरेट
पीने वाले लोगों से संबंधित और डेटा जुटाने की कोशिश की जानी चाहिए ताकि कोविड-19
के मामलों में धूम्रपान के प्रभाव पर कुछ पुख्ता समझ विकसित की जा सके.
कोरोना: क्या खाएं, क्या न खाएं?
विश्व स्वास्थ्य संगठन ने कोरोना संकट के दौर में खाने-पीने को लेकर गाइडलाइन जारी की है. वीडियो में देखिए, क्या हैं ये टिप्स.
वीडियो कैप्शन, कोरोना से बचना है तो खाना बनाते समय सावधान रहिए
तीन लाख 23 हज़ार विदेशी कामगारों का टेस्ट करेगा सिंगापुर
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सिंगापुर प्रशासन ने कहा है कि वो अपने यहां रहने
वाले सभी तीन लाख 23 हज़ार विदेशी कामगारों का कोविड-19 टेस्ट कराएगा.
शुरुआत में कोरोना संक्रमण के मामलों पर काबू पाने
के लिए सिंगापुर मॉडल की तारीफ़ की जा रही थी. लेकिन अब वहां के प्रवासी मज़दूर बड़े
स्तर पर कोविड-19 संक्रमित पाए गए.
सिंगापुर में पूरे दक्षिण एशिया से लाखों मज़दूर
काम करने जाते हैं. इनमें से बड़ी संख्या में मज़दूर कंस्ट्रक्शन का काम करते हैं
और घनी आबादी वाली डॉरमेटरी (रूम शेयरिंग) में रहते हैं.
कई बार तो एक कमरे में
16-16 मज़दूर भी रहते हैं. अब ऐसे हज़ारों मज़दूरों को क्वारंटीन में रखा गया है
लेकिन अभी भी रोज़ सैकड़ों मज़दूर पॉज़िटिव पाए जा रहे हैं.
अब तक यहां डॉरमेटरी में रहने वाले 32 हज़ार से
ज़्यादा मज़दूर कोरोना पॉज़िटिव पाए हैं, जो सिंगापुर की कुल पॉज़िटिव आबादी का 10
फ़ीसदी है.
सिंगापुर के नेशनल डेवलपमेंट मिनिस्टर लॉरेंस वॉन्ग ने कहा कि यहां
रोज़ 3,000 के लगभग टेस्ट किए जा रहे हैं.
सिंगापुर में अब तक 24,671 कोरोना मामलों की पुष्टि
हो चुकी है और संक्रमण की चपेट में आकर 21 लोगों की मौत हो गई है. मरने वालों में
लगभग सभी मज़दूर हैं.