भारत में मार्च से जारी लॉकडाउन के बीच सिंगापुर और खाड़ी के देशों से प्रवासी भारतीयों का पहला जत्था शुक्रवार को स्वदेश वापस लौटा.
दिल्ली एयरपोर्ट पर डॉक्टरों ने इन यात्रियों के ट्रेम्प्रेचर की जांच की.
समाचार एजेंसी रॉयटर्स के मुताबिक़ सरकारी एयरलाइन्स कंपनी एयर इंडिया से अमरीका, ब्रिटेन, दक्षिण पूर्वी एशिया और खाड़ी के देशों से तकरीबन चार लाख भारतीयों को वापस लाए जाने का प्रस्ताव है.
इसके अलावा भारतीय नौसेना ने मालदीव में फंसे अपने नागरिकों को वापस लाने के लिए युद्धपोत भेजे हैं.
कोविड-19 की महामारी को रोकने से फैलने के लिए लगाए गए यात्रा प्रतिबंधों के कारण दुनिया भर में भारतीय फंसे हुए हैं.
गृह मंत्रालय की संयुक्त सचिव पुण्य सलिला श्रीवास्तव ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा, "विदेशों में फंसे भारतीयों को स्वदेश वापस लाने की प्रक्रिया शुरू हो गई है. इन्हें प्लेन और नौसेना के जहाज़ से लाया जा रहा है."
स्थानीय टेलीविज़वन चैनलों में एयर इंडिया के विमानों के चालक दल के सदस्यों को दिखाया गया. वे पर्सनल प्रोटेक्टिव इक्विपमेंट्स से लैस थे और आबू धाबी में भारतीयों के विमान में सवार होने का इंतज़ार कर रहे थे.
भारत में कोरोना वायरस से संक्रमण के मामलों की संख्या 56 हज़ार पार कर गई है. कम से कम 1886 लोग मारे गए हैं. गुरुवार की तुलना में शुक्रवार को 3390 नए मामले रिपोर्ट हुए थे.
अर्थव्यवस्था को नुक़सान पहुंचाने वाले लॉकडाउन के फ़ैसले के बावजूद संक्रमण के मामलों में ज़्यादा कमी आती हुई नहीं दिख रही है.
विदेशों में रह रहे भारतीय बड़ी संख्या में वापस लौटना चाहते हैं लेकिन यात्रा प्रतिबंधों के कारण वे ऐसा नहीं कर पा रहे हैं.
इस वजह से उनमें तनाव की स्थिति है.
उनकी तकलीफ़ों की कई कहानियां सामने आ रही हैं. कुछ लोगों की भावनात्मक समस्याएं हैं तो कुछ आर्थिक कारणों से लौटना चाहते हैं.
बीमार रिश्तेदारों से मिलने के लिए, किसी के घर में किसी की मृत्यु हो गई है तो किसी के यहां कोई मेहमान आया है, कुछ लोगों की नौकरियां चली गईं है और कुछ के पैसे ख़़त्म हो गए हैं.
सरकार ने बताया है कि पहले चरण में 15 मई तक ऐसे दो लाख लोगों को घर वापस घर लाए जाने का प्रस्ताव है और फिर 15 जून तक साढ़े तीन से चार लाख लोगों को लाए जाने की योजना है.
दिल्ली में सिंगापुर से आए 250 लोगों के जत्थे में कोविड-19 के लक्षणों की जांच की गई.
गृह मंत्रालय की संयुक्त सचिव ने बताया कि अगर किसी यात्री में लक्षण पाए गए तो उसे अस्पताल ले जाया जाएगा और बाक़ी लोगों को 14 दिनों के लिए सरकारी क्वारंटीन सेंटर में रखा जाएगा.
इस बात को लेकर भी चिंता जताई गई है कि विदेशों से बड़ी संख्या में लोगों को लाने पर भारत में संक्रमण के मामले और बढ़ सकते हैं.
स्वास्थ्य मंत्रालय के संयुक्त सचिव लव अग्रवाल ने इस पर कहा कि केंद्र सरकार ने बाहर से लौटने वाले लोगों के लिए राज्यों से होटल, कॉलेज हॉस्टल और खाली घरों को क्वारंटीन सेंटर में बदलने के लिए कहा है ताकि हेल्थ वर्कर्स उन पर निगरानी रख सकें.