कोरोना: अमरीका में संक्रमण मामलों की संख्या 10 लाख से ज़्यादा हुई
अमरीका में कोरोना वायरस संक्रमण मामलों और इससे हुई मौतों की संख्या दुनिया में सबसे ज़्यादा है.
लाइव कवरेज
यूरोप का ताज़ा हाल
-फ़्रांसीसी प्रधानमंत्री एडवार्ड फ़िलिप ने मंगलवार को
संसद में कहा कि फ़्रांस में लॉकडाउन की पाबंदियां धीरे-धीरे हटाई जाएंगी. दुकानें,
बाज़ार और प्राइमरी स्कूल आगामी 11 मई से दोबारा खुल सकेंगे.
हालांकि ‘वर्क फ़्रॉम होम’ की सुविधा वाले
लोगों को घर से ही काम करना जारी रखने की सलाह दी गई है. वहीं, फ़्रांस के
म्यूज़ियम सितंबर से पहले नहीं खुलेंगे.
प्रधानमंत्री फ़िलिप ने कहा, “हमें फ़्रांस को बचाना ही होगा. और इस तरह बचाना होगा कि ये बिखरने न पाए.”
-रूसी राष्ट्रपति व्लादीमिर पुतिन
ने स्वीकार किया है रूस में सुरक्षा किट की कमी है. उन्होंने मंगलवार को कहा, “उत्पादन और आयात बढ़ाए जाने के बावजूद हर तरह की चीज़ों की कमी है.” पुतिन के कहा कि रूस शायद संक्रमण के ‘सबसे बुरे दौर’ से गुज़र रहा है.
-इटली में कोरोना वायरस संक्रमण के कुल मामलों की संख्या मंगलावर को दो लाख से
भी ज़्यादा हो गई. पिछले 24 घंटों में इटली में कुल 382 मौतें हुई हैं और संक्रमण
के 333 नए मामले सामने आए हैं.
ब्रितानी स्वास्थ्य मंत्रालय की दैनिक ब्रीफ़िंग की प्रमुख बातें
-ब्रिटेन में अब मेडिकल
निगरानी में रखे गए हर मरीज़ और वहां कार्यकर्त हर स्वास्थ्यकर्मी का टेस्ट होगा.
भले ही उनमें कोरोना के लक्षण हों या नहीं.
-बुधवार से 65 साल से अधिक
उम्र के हर उस व्यक्ति और घर से बाहर निकलने वाले हर उस व्यक्ति का टेस्ट होगा
जिसमें कोरोना के लक्षण है.
-ब्रिटेन में हर रोज़ अब
73,400 टेस्ट किए जा सकेंगे और सरकार इस महीने के आख़िर में यह क्षमता 1 लाख तक
लाने का प्रयास कर रही है.
-बुधवार से सरकार केयर
होम्स में होने वाली उससे इतर मौतों का आंकड़ा भी प्रकाशित करेगी, न कि सिर्फ़ अस्पतालों
में होने वाली मौतों का आंकड़ा.
-कोरोना संक्रमण के इलाज
के लिए एक मौजूदा दवा का क्लीनिकल ट्रायल किया जाएगा.
ग़रीबों पर कोरोना की दोहरी मार
कोरोना वायरस संक्रमण पर रोक लगाने के लिए दुनिया के लगभग हर देश में लॉकडाउन लागू है.
इससे अमरीका, ब्रिटेन और फ्रांस जैसे देशों के साथ भारत में भी बेरोज़गारी बढ़ी है.
भारत के लिए चिंता ज़्यादा बड़ी इसलिए है कि कई संगठनों ने आगाह किया है कि अगर स्थिति नहीं बदली तो सबसे ज़्यादा नुकसान ग़रीब मज़दूरों को उठाना होगा.
ब्रिटेन: केयर होम्स में बढ़ती मौतों आंकड़ा चिंताजनक
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ब्रिटेन के स्वास्थ्य मंत्री मैट हैनकॉक ने मंगलवार को दैनिक ब्रीफ़िंग में बताया कि ब्रिटेन में कोरोना संक्रमण की वजह से करीब 22 हज़ार लोगों की मौत हो चुकी है.
उन्होंने बताया कि सोमवार को शाम पांच बजे तक संक्रमित पाए गए कुल लोगों में से 21678 लोगों की मौत हो गई है. यह आंकड़ा ठीक एक दिन पहले के आंकड़ों से 586 ज़्यादा था.
हैनकॉक ने बताया कि केयर होम्स में ईस्टर के बाद से अब तक 4343 मरीज़ों की संक्रमण की वजह से मौत हो चुकी है.
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Corona Virus पर बीबीसी हिंदी का विशेष डिजिटल बुलेटिन 'कोरोना दिनभर', फ़ेसबुक पर लाइव
दुनियाभर में एक अरब लोग हो सकते हैं कोरोना संक्रमित: आईआरसी
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दुनियाभर में कोरोना वायरस संक्रमण की चपेट में करीब एक अरब लोग हो सकते हैं, अगर कमज़ोर देशों को तत्काल मदद नहीं दी गई. यह चेतावनी एक मददगार समूह ने जारी है.
इंटरनेशनल रेस्क्यू कमिटी (आईआरसी) ने कहा कि कोरोना वायरस संक्रमण के वैश्विक असर को रोकने के लिए आर्थिक और मानवीय सहायता की ज़रूरत है.
आईआरसी ने कहा कि अफ़ग़ानिस्तान और सीरिया जैसे युद्ध से तबाह हुए देशों को तत्काल फंडिंग की ज़रूरत है और इसके लिए समय बेहद कम है वरना संक्रमण से तबाही बढ़ेगी.
जॉन हॉपकिन्स यूनिवर्सिटी के आंकड़ों के मुताबिक, अब तक दुनियाभर में कोरोना संक्रमण के 30 लाख से अधिक मामले सामने आ चुके हैं और दो लाख से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है.
विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) और इंपीरियल कॉलेज लंदन के आंकड़ों के आधार पर तैयार की गई आईआरसी की रिपोर्ट में कहा गया है कि दुनियाभर में कोरोना वायरस संक्रमण के मामले 50 करोड़ से एक अरब के बीच हो सकते हैं.
रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि संक्रमण की वजह से संघर्ष प्रभावित और अस्थिर देशों करीब 30 लाख लोगों की जान जाने की भी आशंका है.
कोरोना वायरस के दौर में क्या है स्मार्ट मनी का फ़ंडा?
देश में 24 घंटों में कोरोना संक्रमण के 1674 नए मामले
देश में कोरोना वायरस संक्रमण के कुल मामले बढ़कर 29974 हो गए हैं.
स्वास्थ्य मंत्रालय के मुताबिक, बीते 24 घंटों में कोरोना संक्रमण के 1674 नए मामले आए हैं.
कोरोना संक्रमण की वजह से अब तक देशभर में 937 लोगों की मौत हुई है. जबकि 7027 लोग इलाज के बाद ठीक हो चुके हैं.
रूस में एक दिन में कोरोना संक्रमण के 6411 नए मामले
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रूस में एक दिन में कोरोना संक्रमण के 6411 नए मामले सामने आए हैं. इसी के साथ रूस में संक्रमित लोगों की कुल संख्या चीन और ईरान से भी अधिक हो गई है.
इसके साथ रूस में कोरोना संक्रमित लोगों का कुल आंकड़ा 93,558 हो गया है.
मॉस्को में कोरोना संक्रमण के मामले किसी भी अन्य क्षेत्र के मुकाबले सबसे ज़्यादा हैं.
रूस में संक्रमण से मरने वालों की संख्या 867 हो गई है.
असमः क्वारंटीन सेंटर को 'शेल्टर होम' क्यों बता रहा है प्रशासन?
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दिलीप कुमार शर्मा
असम के नौकचारी से, बीबीसी हिंदी के लिए
असम
के स्वास्थ्य मंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने बीते दिनों साफ़ तौर पर कहा था कि अन्य
राज्यों में फंसा कोई भी असमिया नागरिक अपने प्रदेश में वापस लौटता है तो उसे 14
दिनों
के लिए होम क्वारंटीन या सरकार के बनाए क्वारंटीन सेंटर में रहना होगा. लेकिन
नागालैंड सेसटे जोरहाट के एक ऐसे ही सेंटर की कहानी कुछ और
ही बयां करती हैं. आलम यह है कि रातोंरात इसकी पहचान बदल कर इसे शेल्टर होम बना
दिया गया है.
दरअसल
यह वो सेंटर है जहां नागालैंड से पैदल चल कर पहुंचे असम के 361
मजदूरों
को रखा गया है. ये मजदूर नागालैंड से चल कर पैदल ही असम पहुंचे थे. असम की सीमा
में घुसने पर इन्हें जोरहाट ज़िले के नौकचारी में रोका गया और वहीं की एक इमारत
में ठहराया गया. इसी इमारतको अब ज़िला प्रशासन
क्वारंटीन सेंटर नहीं बल्कि शेल्टर होम पता रहा है.
भारत
सरकार के स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय समेत राष्ट्रीय रोग नियंत्रण
केंद्र और गृह मंत्रालय ने कोरोना वायरस की महामारी को देखते हुए क्वारंटीन
सुविधाओं को लेकर कुछ दिशानिर्देश तय कर रखे है. ऐसे किसी भी सेंटर में साफ़-सफाई
से लेकर वहां काम करनेवाले सभी कर्मियों को पीपीई किटउपलब्ध करवाना,
सोशल
डिस्टेंसिंग का पालन करना, मनोचिकित्सक, लैब टेकनीशियन की मौजूदगी
जैसी बातें दिशानिर्देशों में है. हालांकि नौकचारी की जिन तीन स्कूलों में इन
मजदूरों को ठहराया गया है वहां क्वारंटाइन सेंटर की येसुविधाएं देखने को
नहीं मिलती.
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स्थानीय
विधायक क्या कहते हैं?
मरियानी
के स्थानीय विधायक रूपज्योति कुर्मी ज़िला प्रशासन की व्यवस्था पर सवाल खड़ा करते
हुए आरोप लगाते हैं कि प्रशासन क्वारंटीन की सुविधाओं को लेकर दिशानिर्देशों का
पालन नहीं कर पा रहा है लिहाजा इन क्वारंटीन सेंटर्स को 'शेल्टर होम'
बता
रहा है.
विधायक
रूपज्योति कुर्मी ने बीबीसी से कहा, "क्वारंटीन को लेकर प्रशासन
की तैयारियां बहुत कमज़ोर दिख रही हैं. इतने दिनों तक प्रशासन ने ऐसी कोईतैयारी
नहीं की जिससे ऐसा लगे कि संकट के समय स्थिति को संभाल लिया जाएगा. ज़िला प्रशासन
महज साढ़े तीन सौ मजदूरोंके लिए क्वारंटाइन सेंटर की
व्यवस्था नहीं कर पा रहा है. जबकि हम सबने कोरोना वायरस के प्रभाव को रोकने के लिए
असम के मुख्यमंत्री राहत कोष में अपनी तनख़्वाह दी है. राज्य सरकार के कर्मचारियों
से लेकर प्राइवेट सेक्टर के लोगों ने वित्तीय मदद की है ताकि की महामारीसे
मुक़ाबला कर सकें."
विधायक
ने कहा, "ये मजदूर भूखे-प्यासे इतनी दूर पैदल चलकर यहां पहुंचे हैं
लेकिन बीते पांच दिनों तक प्रशासन ने इनको गंभीरता से नहीं लिया. यहां न खाने-पीने
की कोई अच्छी सुविधा थी और न ही रहने के लिए आवश्यक चीज़ें इन्हें दी गई. जब मैंने
मीडिया के जरिए प्रशासनके कामकाज पर सवाल खड़े किए तब जाकर आज छठे दिन
ज़िला उपायुक्त इनका हाल जानने यहां आई हैं. कोरोना महामारी के संकट के दौर में
हमने शेल्टर होम में रखने की बात कहीं नहीं सुनी है. नियम कहते हैं कि नागालैंड से
वापस अपने राज्य में लौटे इन सभी मजदूरों को 14 दिनों केलिए
क्वारंटीन सेंटर में रखना ज़रूरी है ताकि अगर इनमें से कोई संक्रमित हो तो उसके
जरिए बाकी समाज में यह संक्रमण न फ़ैले."
ज़िला
प्रशासन क्या कह रहा है?
इन
आरोपों के बारे में पूछने पर जोरहाट ज़िले की उपायुक्त रोशनी कोराती कहती हैं,
"यह
क्वारंटीन सेंटर नहीं है, ये 'शेल्टर होम'
है.
यहांं ऐसे कुल तीन सेंटर हैं जिनमें 361 लोगों को रखा गया है. ज़िला
प्रशासन इनके खाने-पीने की सारी सुविधाएं कर रहा है. दरअसल इससमय
राज्य के भीतर लोगों को आने-जाने की अनुमति दी जा रही है. ये सभी लोग असम से ही आ
रहे हैं. इनमें से अधिकतर लोग गेलेकी नामक जगह से आए हैं. नागालैंड से नहीं आए
हैं. देखा जाए तो तकनीकी तौर पर यह राज्य के भीतर ही मूवमेंट कर रहे हैं. लिहाजा
सरकार के साथ इस विषयमें बात हो रही है. हम जल्द ही इनको घर भेजने
की व्यवस्था करेंगे. फिलहाल ये सार लोग स्वस्थ हैं. किसी एक व्यक्ति में भी कोई
लक्षण देखने को नहीं मिला है."
इस
रिपोर्टर ने क्या देखा?
जब
मैं बुधवार की रात क़रीब 10 बजे अपनी कार से मरियानी के रेलवे फाटक को पार
कर रहा था उस समय मैंने कई मजदूरों को रेल पटरियों के बीच पैदल चलते हुए देखा. इन
मजदूरों ने अपनी पीठ पर कपड़ों से भरेबैग टांग रखे थे.
मैंने
देखा कि वहां पहरा दे रहे दो होम गार्ड के जवानों नें भी उन्हें नहीं रोका. इसके
बाद मैंने मरियानी थाने के प्रभारी को फ़ोन कर इन मजदूरों के बारे में जानकारी दी
तब जाकर 28 मजदूरों
को रोका गया और फिर बस में बैठाकर इन लोगों को नौकचारी ले जाया गया. ये मजदूरएक सौ
किलोमीटर से ज़्यादा पैदल चलकर यहां तक आ गए थे लेकिन रास्ते में पुलिस ने इन्हें
कहीं नहीं रोका.
मजदूरों
का क्या है कहना?
नागालैंड
में कोयला खुदाई का काम करने गए अधिकतरमजदूर असम के गोलाघाट और
कार्बी-आंग्लोंग ज़िले के रहने वाले है. लॉकडाउन के कारण कोयला खदानों के मालिकों
ने काम बंद कर दिया था और इस तरह ये सारे मजदूर वहां फंस गए थे.
इन
मजदूरोंमें से कई ने बीबीसी से बातचीत में साफ़ कहा है कि वे 22
अप्रैल
को नागालैंड की अनाकी बस्ती से सुबह 3 बजे अपने घर के लिए पैदल
निकले थे. बावजूद इसके ज़िलाउपायुक्तइनके मूवमेंट को असम के भीतर
बता रही है.
नौकचारी
उच्चतर माध्यमिक विद्यालय में बने एक अस्थाई 'शेल्टर होम'
में
पिछले छह दिनों से ठहरे मनोज थापा (बदला हुआ नाम) ने फ़ोन पर बताया,
"लॉकडाउन
के कारण नागालैंड में हमारा काम बंद हो गया था. इसलिए हम सबने नागालैंड से पैदल
चलकर घर पहुंचने का निर्णय लिया.हम 22
अप्रैल
की सुबह क़रीब 3 बजे नागालैंड से चले थे लेकिन उसी दिन शाम को
नौकचारी में हमें लोगों ने रोक लिया. हमारे कुछ साथियों को मरियानी में रोका गया.
हम खुद क्वारंटीन सेंटर में आना चाहते थे. क्योंकि तेज़ हवा औरबारिश के कारण नगा पहाड़ में
हमारी तंबू की बनीझोपड़ियां टूट गई थीं. हमें मालूम था कि असम
में आएंगे तो हमें 14 दिनों के लिए क्वारंटीन में रखा जाएगा. लेकिन
हम अपने राज्य में आना चाहते थे ताकि अगर कोई बीमारी हो तो इलाज मिल सके."
क्वारंटाइन
सुविधाओं से जुड़े एक सवाल का जवाब देते हुए मनोज ने कहा,"हम मजदूर है हमें यह नहीं
मालूम की क्वारंटीन सेंटर कैसे होते है. पहले दो दिन तो यहां खाने-पीने की थोड़ी
असुविधा हुई थी लेकिन अब धीरे-धीरे दो टाइम खाना मिल रहा है. हम अपना खाना खुद ही
बनातेहै और
कमरे-टॉयलेट की साफ़ सफाई भी ख़ुद ही करते हैं. चिकित्सकों की एक टीम बीच -बीच में
हमारी जांच करने भी आती है. दरअसल पैदल चलने से कई मजदूरों के पैर कट गए थे. यहां
आने वालेचिकित्सक उन्हीं लोगों का इलाज कर रहे हैं और अब कुछ लोग
ठीक भी हुए हैं."
इसी 'शेल्टर होम'
में
रह रहे एक और मजदूरसंजयलिंबू (बदला हुआ नाम) ने
फ़ोन पर बताया, "हम नागालैंड की अनाकी बस्ती से पैदल घर के लिए निकले थे.
रास्ते में पुलिस मिली परंतु किसी ने रोका नहीं. लेकिन नौकचरीमें रोकने के बाद सरकार के
लोग हमें यहां 14 दिन के लिएक्वारंटीन
में लेकर आ गए. हम यहां के एक कमरे में 13 लोग रहते हैं. यहां तैनात
अधिकारी नहीं बता पा रहे हैं कि हमें कब घर भेजा जाएगा."
एक
सवाल का जवाब देते हुए संजय ने बताया, "नागालैंड में कोयला खुदाई का
काम करने वाला एक मजदूरहफ़्ते में क़रीब दो हज़ार रुपये कमा लेता है.
लेकिन लॉकडाउन के कारण जब काम बंद हो गया तो खदान मालिक ने हमारा पूरा हिसाब नहीं
किया."
असम
सरकार लॉकडाउन के बाद राजस्थान के कोटा शहर में फंसे प्रदेश के 391
छात्रों
को वापस लेकर आई है और उन सभी को गुवाहाटी केसरूसजाइ स्टेडियम में बनाए
गए क्वारंटाइन सेंटर में 14 दिनों के लिए भेजा गया है.
कोरोना
से लड़ाई के फ्रंट पर मुस्तैदी से डटे हुए स्वास्थ्य मंत्री सरमा ने उन छात्रों से
मुलाक़ात के बाद एक ट्वीट कर इस बात की जानकारी दी थी. लेकिन नागालैंड से आए इन
मजदूरों को क्वारंटाइन सेंटर में रखने को लेकर प्रशासन का जवाब दिशानिर्देशों के
बिलकुल उलट दिखता है.
स्पैनिश फ़्लू: भारत में जब दाह संस्कार के लिए लकड़ियाँ कम पड़ गई थीं
कोरोना टेस्टिंग किट ख़रीद में मुनाफ़ाख़ोरी का पूरा सच
देश में कोरोना संक्रमण के कुल मामले 29435
इमेज स्रोत, ANI
स्वास्थ्य मंत्रालय के संयुक्त सचिव लव अग्रवाल ने मंगलवार को बताया कि देश में कोरोना वायरस संक्रमण के कुल मामले 29435 हो गए हैं. हालांकि संक्रमित लोगों के रिकवरी की दर में तेज़ी आई है.
लव अग्रवाल ने बताया-
देश में फिलहाल कोरोना के सक्रिय मामले 21632 हैं.
कोरोना से अब तक 934 लोगों की मौत हुई है.
कोरोना का रिकवरी रेट 23.3 फ़ीसदी हुआ.
कोरोना संक्रमित 6869 मरीज़ों का इलाज हुआ.
बीते 24 घंटों में देश में संक्रमण के 1543 नए मामले सामने आए हैं.
17 ज़िलों में 28 दिनों से संक्रमण का कोई नया मामला नहीं.
कोरोना के इलाज के लिए अब तक कोई तय थेरेपी दुनिया में नहीं है.
प्लाज़्मा थेरेपी को बतौर प्रैक्टिकल इस्तेमाल किया जा रहा है.
आईसीएमआर जब तक यह तय न कर दे कि प्लाज़्मा थेरेपी इलाज में कारगर है तो इसे इलाज न माना जाए और किसी भी तरह का दावा न किया जाए.
ब्रिटेन: प्रधानमंत्री समेत कई लोगों ने स्वास्थ्यकर्मियों के लिए एक मिनट का मौन रखा
ब्रितानी प्रधानमंत्री बोरिस जॉनसन कोरोना के मरीज़ों के इलाज के दौरान मारे गए डॉक्टरों और स्वास्थ्यकर्मियों की याद में मंगलवार को एक मिनट का मौन रखा.
प्रधानमंत्री कार्यालय 10 डाउनिंग स्ट्रीट में प्रधानमंत्री जॉनसन के साथ कैबिनेट सेक्रेटरी सर मार्क सेडविल और वित्त मंत्री ऋषि सुनक भी थे.
नेता प्रतिपक्ष लेबर पार्टी के सर स्टार्मर ने भी मारे गए लोगों को श्रद्धांजलि देते हुए एक मिनट का मौन रखा.
स्वास्थ्य मंत्री मैट हैनकॉक के अनुसार ब्रिटेन में अब तक 114 स्वास्थ्यकर्मी मारे जा चुके हैं. इनमें 59 पुरुष हैं और 54 महिला.
मारे गए 114 स्वास्थ्यकर्मियों में से 70 का संबंध BAME यानी काले, एशियन और अल्पसंख्यक नस्ल से है.
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कोरोना के मरीज़ों का इलाज कर रहीं डॉक्टर ने की आत्महत्या