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लोकसभा में भी पास हुआ जम्मू-कश्मीर पुनर्गठन विधेयक

अनुच्छेद 370 को निष्प्रभावी करने का प्रस्ताव और जम्मू-कश्मीर पुनर्गठन बिल राज्यसभा के बाद लोकसभा में भी पारित.

लाइव कवरेज

  1. वाईएसआर कांग्रेस पार्टी ने किया समर्थन

    लोकसभा में वाईएसआर कांग्रेस पार्टी के सांसद आर. आर. राजू कानुमुरू ने प्रस्ताव का समर्थन करते हुए कहा- आज ऐतिहासिक दिन है.

  2. ब्रेकिंग न्यूज़, जेडीयू ने सरकार के बिल का किया विरोध

    लोकसभा में अनुच्छेद 370 पर चर्चा में भाग लेते हुए जेडीयू नेता सांसद लल्लन सिंह ने कहा कि उनकी पार्टी अनुच्छेद 370 को लेकर स्पष्ट है कि उसके साथ छेड़छाड़ नहीं की जा सकती. लल्लन सिंह ने कहा कि आज की परिस्थिति में लड़ाई आपको आतंकवाद से लड़ना चाहिए था न कि इस विवाद से. हमारी पार्टी 1996 से ही अनुच्छेद 370 के ख़िलाफ़ रही है. हम इस अनुच्छेद के पास होने में भागीदार नहीं हो सकते हैं इसलिए इसका बहिष्कार करते हैं.

  3. ब्रेकिंग न्यूज़, अब अगला काम पाक अधिकृत कश्मीर को लेना है- जितेंद्र सिंह

    अनुच्छेद 370 को निष्प्रभावी बनाने वाले प्रस्ताव पर लोकसभा की चर्चा में कांग्रेस को जवाब देते हुए कार्मिक मंत्री जितेंद्र सिंह ने कहा कि अब अगला काम पाक अधिकृत कश्मीर को भारत में मिलाने का है.

  4. ब्रेकिंग न्यूज़, अलगाववादी अपने बच्चों को विलायत में पढ़ा रहे- जितेंद्र सिंह

    जितेंद्र सिंह ने कहा, ''कश्मीर में अलगाववादी सुविधा के हिसाब से अलगाववादी हैं न कि प्रतिबद्धता से. अगर प्रतिबद्धता से होते तो वे अपने बच्चों को विलायत पढ़ने के लिए नहीं भेजते और पड़ोसी के बच्चों को पत्थरबाज नहीं बनाते.''

  5. कश्मीर का स्टेकहोल्डर हर भारतीय- जितेंद्र सिंह

    जितेंद्र सिंह ने कांग्रेस के सवालों का जवाब देते हुए कहा, ''कश्मीर में जो पार्टी स्वायत्तता की बात करती है उसे पंचायत के चुनाव में यह बर्दाश्त नहीं होता. लोग कह रहे हैं कि आपने कश्मीर के स्टेकहोल्डर से बात नहीं की. क्या संसद और भारत का हर नागरिक स्टेकहोल्डर नहीं है? कश्मीर के पंडित स्टेकहोल्डर नहीं हैं? पश्चिमी पाकिस्तान के शरणार्थियों को वोट देने का अधिकार तक नहीं दिया गया. आप कह रहे हैं कि इसे जल्दी में ला रहे हैं. हमने कभी रात में राष्ट्रपति को जगाकर आपातकाल नहीं लगाया.''

  6. ब्रेकिंग न्यूज़, नेहरू की कामना थी जिसे पूरा किया- जितेंद्र सिंह

    जितेंद्र सिंह ने लोकसभा में जारी चर्चा में कहा, ''नेहरू से लोग अनुच्छेद 370 पर सवाल पूछते थे तो वो कहते थे कि सब्र रखो यह घिसते-घिसते ख़त्म हो जाएगा. हमने नेहरू का सपना पूरा किया क्योंकि उन्होंने ही इसकी कामना की थी.''

  7. ब्रेकिंग न्यूज़, नेहरू ने सरदार पटेल को काम नहीं करने दिया- जितेंद्र सिंह

    जितेंद्र सिंह ने लोकसभा में कहा, ''नहेरू ने सरदार पटेल को गृह मंत्री के तौर पर काम नहीं करने दिया. अगर नेहरू कश्मीर मामले में दख़ल नहीं देते तो न 370 अनुच्छेद होता और न इसे ख़त्म करने के लिए बिल लाना पड़ता और न ही पाक अधिकृत कश्मीर होता.''

    जितेंद्र सिंह ने मनीष तिवारी से कहा कि ये सच है कि स्वतंत्रता के बाद दो देश बना. जब भारत में सम्मिलन पर समझौता हो गया था तो नेहरू को यूएन जाने की क्या ज़रूरत थी. बाक़ी रियासतों का भारत में विलय हुआ तो इसमें भी वो संयुक्त राष्ट्र चले जाते.

  8. जितेंद्र सिंह ने कहा यह ऐतिहासिक घड़ी है

    मोदी सरकार के कार्मिक मंत्री जितेंद्र सिंह ने लोकसभा की चर्चा में भाग लेते हुए कहा कि हम जब इतिहास रच रहे होते हैं तो कुछ लोगों को अहसास नहीं होता है. लेकिन जो अनुच्छेद 370 को निष्प्रभावी बनाने में जो साथ दे रहे हैं, उन्हें इतिहास याद करेगा. 70 साल बाद यह ऐतिहासिक क्षण आया है. शायद ईश्वर को यही मंजूर था कि नरेंद्र मोदी पीएम बने और अमित शाह गृह मंत्री बनें.

  9. अनुच्छेद 370 को निष्प्रभावी बनाने पर पहली बार बोले राहुल गांधी

    कांग्रेस पार्टी के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी ने अनुच्छेद 370 को निष्प्रभावी करने पर पहली बार टिप्प्णी की है. उन्होंने ट्वीट कर कहा, ''राष्ट्रीय एकता का विस्तार जम्मू-कश्मीर को एकतरफ़ा बाँटने से नहीं होगा. चुने हुए प्रतिनिधियों को जेल में बंद करना हमारे संविधान का उल्लंघन है. इस राष्ट्र का निर्माण यहां के लोगों से हुआ है न कि धरती के टुकड़े से. यह कार्यकारी शक्तियों का दुरुपयोग है और हमारी राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए चिंताजनक है.

  10. टीआर बालू ने पूछा- इस बिल से क्या मिलेगा

    डीएमके सांसद टीआर बालू ने अमित शाह से पूछा कि वो इस बिल को पास कर क्या हासिल करना चाहते हैं? बालू ने कहा कि अनुच्छेद 370 ख़त्म होने से भविष्य में काफ़ी समस्याओं का सामना करना होगा.

  11. बीजेपी ने पूछा- अनुच्छेद 370 को ख़त्म करने के पक्ष में है कांग्रेस या ख़िलाफ़ में

    अमित शाह ने पूछा कि अनुच्छेद 370 को ख़त्म करने के पक्ष में कांग्रेस है या नहीं ये मनीष तिवारी बता दें. इस पर मनीष तिवारी ने कहा कि बग़ैर जम्मू-कश्मीर विधासभा की अनुमति के आप अनुच्छेद 370 को ख़त्म नहीं कर सकते. तिवारी ने कहा कि हर चीज़ काली और सफ़ेद नहीं होती. हर चीज़ की कई परतें होती हैं.

  12. मनीष तिवारी ने कहा कि 370 ख़त्म कर दिया तो 371 का क्या होगा?

    मनीष तिवारी ने कहा कि मोदी सरकार ने ख़ुद से राय-मश्विरा कर जम्मू-कश्मीर को तोड़ने का फ़ैसला कर लिया. गृह मंत्री ने अनुच्छेद 370 की धारा तीन को पढ़ा और इसी के आधार पर इसकी वैधता की बात कही. जम्मू-कश्मीर की विधानसभा का मतलब राष्ट्रपति शासन नहीं होता है. भारत के संविधान में केवल अनुच्छेद 370 नहीं है. इसमें 371 भी है जिसमें पूर्वोत्तर के राज्यों को स्वातत्ता मिली हुई है. आने वाले दिनों में आप यहां भी राष्ट्रपति शासन लागू कर स्वायतत्ता ले सकते हैं. प्रदेश तो दो हिस्सों मे ंबाँट दिया लेकिन वहां के संविधान का क्या होगा? क्या आप संविधान को ख़त्म करने के लिए भी विधेयक लाएंगे. इतिहास में यह पहली बार हुआ है कि किसी राज्य को केंद्र शासित प्रदेश में बदल दिया गया.

  13. संविधान के साथ खेल कर रही है सरकार- मनीष तिवारी

    अमित शाह के बिल पर कांग्रेस नेता मनीष तिवार ने कहा, ''जम्मू-कश्मीर राज्य को ख़त्म कर दो केंद्रशासित प्रदेश बनाने का प्रस्ताव लेकर यह सरकार सदन में आई है. ये जो आधुनिक जम्मू-कश्मीर है इसके निर्माण का अपना इतिहास है. भारत की आज़ादी के बाद दो मुल्क बने और 562 रियासतें. इन रियासतों को विकल्प दिया गया था कि वो भारत या पाकिस्तान में शामिल हो सकते है.''

    तिवारी ने कहा, ''जम्मू-कश्मीर, हैदराबाद और जूनागढ़ रियासतों को लेकर संवेदनशीलता थी. 22 अक्टूबर 1947 को पाकिस्तानी क़बाइलियों ने जम्मू-कश्मीर पर हमला कर दिया. हरि सिंह के पास दो विकल्प थे. या तो पाकिस्तान के सामने समर्पण कर देते या भारत के साथ आ जाते. हरि सिंह ने लड़ने और भारत से मदद लेने की अपील की. भीषण लड़ाई के बाद भारतीय फ़ौज ने पाकिस्तानी क़बाइलियों को खदेड़ा. 27 अक्टूबर 1947 को जम्मू-कश्मीर का भारत में सम्मिलन में हुआ.''

    उन्होंने कहा, ''सम्मिलन को लेकर भारत ने जम्मू-कश्मीर को लेकर कुछ वायदे किए थे. जुलाई 1952 में दिल्ली के साथ क़रार हुआ. इसी के तहत संविधान में अनुच्छेद 370 को शामिल किया गया. इसी दौरान जम्मू-कश्मीर का अपना संविधान बना. 24 फ़रवरी 1975 में इंदिरा गांधी और शेख अब्दुल्ला का क़रार हुआ. एक विशेष परिस्थिति में महाराजा हरि सिंह ने घुटने नहीं टेका बल्कि भारत से मदद लेने का फ़ैसला किया. संविधान की धारा तीन ये कहती है कि किसी भी प्रदेश को तोड़ने से पहले यह अनिवार्य है कि उस प्रदेश की विधानसभा के साथ राय-मश्वरा कीजिए.''

  14. अमित शाह ने बताया कि यह अधिकार क्यों वैध है

    अमित शाह ने कहा, ''अनुच्छेद 370 की धारा तीन में यह अधिकार निहित है और सभी सदस्य इस धारा को ध्यान से पढ़ लें कि राष्ट्रपति को यह अधिकार है. राष्ट्रपति इस पर फ़ैसला ले सकते हैं.

    शाह ने कहा इसका मतलब ये होता है अनुच्छेद 370 की धारा तीन का उपयोग कर अनुच्छेद 370 को ख़त्म किया जा सकता है. राष्ट्रपति ये अधिसूचना तभी निकाल सकते हैं जब जम्मू-कश्मीर की विधानसभा से ऐसी अनुशंसा आए. इस पर भी समझ लीजिए इसी प्रोविजन का इस्तेमाल कांग्रेस ने दो बार किया. इसी के तहत कांग्रेस ने महाराजा को ख़त्म कर सदर-ए-रियासत किया और बाद में सदर-ए-रियासत को हटाकर गवर्नर किया. जम्मू-कश्मीर में राष्ट्रपति शासन चल रहा है. धारा 356 के एक बी के अनुसार राज्यपाल के पास विधानसभा की सारी शक्तियां हासिल हैं और राज्यपाल की अनुशंसा से ये बिल लाया गया है.''

  15. जम्मू-कश्मीर पर यह बिल ऐतिहासिक- अमित शाह

    अमित शाह ने कहा कि ये प्रस्ताव और बिल भारत के स्वर्णिम इतिहास का हिस्सा होगा. इस बिल से आने वाले वक़्त में जम्मू-कश्मीर सदियों तक भारत का हो जाएगा.

  16. ब्रेकिंग न्यूज़, अमित शाह ने कहा जान दे देंगे

    अमित शाह ने कहा कि जम्मू-कश्मीर जब हम कहते हैं तो उसमें पाकिस्तान प्रशासित कश्मीर भी आता है. उन्होंने कांग्रेस के सवाल पर पूछा कि क्या आप पाकिस्तान वाले कश्मीर को अपना नहीं मानते हो? इसके लिए हम जान दे देंगे.

  17. जम्मू-कश्मीर भारत का अभिन्न अंग है इसे लेकर कोई भी क़ानून बनाने से नहीं रोक सकता- अमित शाह

    अमित शाह ने कहा कांग्रेस ने जम्मू-कश्मीर पर बिल को लेकर सदन के अधिकार पर सवाल उठाया है. अमित शाह ने कहा कि यह केवल राजनीतिक मामला नहीं है बल्कि क़ानूनी मामला भी है. जम्मू-कश्मीर भारत का अभिन्न अंग है और इसे लेकर कोई क़ानूनी और सियासी बाधा नहीं है.

  18. अधीर रंजन चौधरी की आपत्ति

    लोकसभा में कांग्रेस के नेता अधीर रंजन चौधरी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह में तीखी बहस. अधीर रंजन चौधरी ने अनुच्छेद 370 के निष्प्रभावी किए जाने पर उठाया सवाल.

  19. अमित शाह ने लोकसभा में रखा ये बिल

    लोकसभा में अमित शाह ने जम्मू-कश्मीर राज्य पुनर्गठन बिल का प्रस्ताव रखा. इस बिल के ज़रिए जम्मू-कश्मीर दो केंद्र शासित प्रदेश में विभाजित हो जाएगा. कल राज्यसभा में ये बिल पास हो गया था.

  20. अनुच्छेद 370 को निष्प्रभावी बनाने वाले प्रस्ताव के साथ कौन ख़िलाफ़ कौन

    राज्यसभा में अनुच्छेद 370 को निष्प्रभावी बनाने और जम्मू-कश्मीर राज्य पुनर्गठन बिल का कांग्रेस, आरजेडी, सीपीएम, सीपीआई, मुस्लिम लीग, केरल कांग्रेस और एमडीएमके ने सरकार के फ़ैसले का विरोध किया जबकि टीमएसी, जेडीयू और एनसीपी वॉकआउट कर गईं. बीजेपी के अलावा एआईएडीएमके, एलजेपी, आरपीआई, अकाली दल, शिव सेना, वाईएसआर कांग्रेस, बीजेडी, टीडीपी, आम आदमी पार्टी और बीएसपी ने बदलाव का समर्थन किया. अनुच्छेद 370 को निष्प्रभावी करने के प्रस्ताव और जम्मू-कश्मीर पुनर्गठन बिल के समर्थन में 125 सांसदों ने वोट किया और 61 सांसदों ने ख़िलाफ़ में वोट किया जो मुख्य रूप से कांग्रेस और वामपंथी पार्टियों के थे.