श्रीलंका-ए की ओर से विजयकांत ने महज
छह ओवरों में 9 रन ख़र्च कर दो विकेट झटके.
ईरान-अमेरिका समझौते पर अब इन नेताओं और देशों की आई प्रतिक्रिया
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इमेज कैप्शन, दुनियाभर के नेता समझौते का स्वागत कर रहे हैं (फ़ाइल फ़ोटो)
ईरान और अमेरिका के बीच घोषित समझौते
पर दुनियाभर से प्रतिक्रियाएं आ रही हैं.
ब्रिटेन, फ़्रांस, जर्मनी और इटली के नेताओं की ओर से एक
संयुक्त बयान जारी होने के बाद अब संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस,
जापान की प्रधानमंत्री सनाए तकइची, ऑस्ट्रेलिया के प्रधानमंत्री एंथनी अल्बनीज़ और
न्यूज़ीलैंड के विदेश मंत्री विंस्टन पीटर्स की प्रतिक्रियाएं आई हैं.
यूएन महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने
अमेरिका और ईरान के बीच शांति समझौते पर सहमति बनने की घोषणा का स्वागत किया है.
उनके प्रवक्ता ने कहा, "यह संघर्ष के शांतिपूर्ण समाधान की दिशा में एक
अहम क़दम है."
जापान की प्रधानमंत्री सनाए तकइची
ने भी इस समझौते की सराहना की है.
उन्होंने कहा, "जापान को पूरी
उम्मीद है कि स्ट्रेट ऑफ़ होर्मुज़ से सुरक्षित और निर्बाध आवाजाही
सुनिश्चित की जाएगी, और ईरान के परमाणु मुद्दे समेत अन्य
मामलों पर अंतिम समझौता जल्द से जल्द किया जाएगा."
ऑस्ट्रेलिया के प्रधानमंत्री एंथनी
अल्बनीज़ ने कहा कि उन्हें उम्मीद है कि यह समझौता "मज़बूत और स्थायी
शांति" की ओर ले जाएगा.
उन्होंने कहा, "हालांकि पूरी तरह सामान्य स्थिति बहाल होने में
समय लगेगा, लेकिन इस अहम व्यापारिक मार्ग को फिर
से खोलना ऊर्जा क़ीमतों और अर्थव्यवस्थाओं पर दबाव कम करने के लिए ज़रूरी है,
जिसमें हमारा क्षेत्र भी शामिल है."
न्यूज़ीलैंड के विदेश मंत्री विंस्टन
पीटर्स ने इसे "निर्णायक और रचनात्मक समझौता" बताया.
उन्होंने कहा कि यह "तनाव कम
करने और उस क्षेत्र में स्थिरता को बढ़ावा देने की दिशा में एक क़दम है, जो वैश्विक आर्थिक सुरक्षा के लिए बेहद अहम
है."
अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने ईरान के साथ शांति समझौते पर क्या कहा
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इमेज कैप्शन, वेंस ने कहा कि अमेरिकी राष्ट्रपति 'ईरान से जुड़े ख़तरे को ख़त्म करने' में सफल रहे हैं
अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने
कहा है कि अमेरिका-ईरान शांति समझौता 'अगले 50 वर्षों के लिए मध्य-पूर्व को
बुनियादी तौर पर बदलने की क्षमता रखता है.'
जेडी वेंस ने यह बात रविवार को
फ़ॉक्स न्यूज़ से कही. उन्होंने कहा, "दुनिया के इस क्षेत्र को मैंने अपनी पूरी ज़िंदगी संकटों से घिरा देखा
है."
वेंस ने कहा कि अमेरिकी राष्ट्रपति
डोनाल्ड ट्रंप टईरान से जुड़े ख़तरे को ख़त्म करनेट में सफल रहे हैं.
उन्होंने कहा, "अब मध्य-पूर्व
में समृद्धि और सफलता के एक नए दौर की नींव रखना संभव होगा."
वेंस ने कहा, "साफ़ तौर पर कहें तो हम इस क्षेत्र से अमेरिकी
लोगों के लिए काफ़ी ख़ुशहाली ला सकते हैं."
रविवार देर रात (भारतीय समयानुसार
सोमवार तड़के) सबसे पहले पाकिस्तानी प्रधानमंत्री शहबाज़ शरीफ़ ने अमेरिका और ईरान
के बीच समझौते की घोषणा की.
इसके बाद अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड
ट्रंप ने समझौते की पुष्टि की. इस पर आधिकारिक तौर पर हस्ताक्षर शुक्रवार, 19 जून को स्विट्ज़रलैंड में होंगे.
ईरान के शीर्ष सैन्य कमान ने शांति समझौते को लेकर अमेरिका-इसराइल के बारे में क्या कहा, ग़ोंचेह हबीबीज़ाद, बीबीसी पर्शियन
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इमेज कैप्शन, ईरान में अमेरिका के साथ समझौते को जीत के तौर पर पेश किया जा रहा है (सांकेतिक तस्वीर)
अमेरिका-ईरान के बीच समझौते की घोषणा
के बाद ईरान के शीर्ष सैन्य कमान, ख़ातम
अल-अनबिया सेंट्रल हेडक्वार्टर की प्रतिक्रिया आई है.
शीर्ष सैन्य कमान ने कहा है, "ईरानी
जनता, देश की सशस्त्र सेनाओं और क्षेत्र
में तेहरान के सहयोगी समूहों ने अमेरिका और इसराइल को यह दिखा दिया है कि उनके पास हार स्वीकार करने और आत्मसमर्पण करने के अलावा कोई विकल्प नहीं बचा
था."
ख़ातम अल-अनबिया का यह बयान ईरान के सरकारी टेलीविज़न के रुख़ के मुताबिक़ है.
ईरानी सरकारी टेलीविज़न इस समझौते को
ईरान की जीत के रूप में पेश करने की कोशिश कर रहा है. समझौते का विरोध करने वाले
कट्टरपंथी धड़ों की ओर से ईरान के भीतर आलोचना भी बढ़ रही थी.
समझौते की आलोचना करने वाले कुछ
लोगों ने ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराग़ची और संसद के स्पीकर बग़र ग़ालिबाफ़
पर ईरान के दिवंगत सर्वोच्च नेता आयतुल्लाह अली ख़ामेनेई के साथ
'विश्वासघात' करने का आरोप लगाया.
अराग़ची और ग़ालिबाफ़ ने अमेरिका के
साथ वार्ता में अहम भूमिका निभाई है.
आयतुल्लाह अली ख़ामेनेई 28 फ़रवरी को
युद्ध के पहले दिन अमेरिका और इसराइल के हमलों में मारे गए थे. इससे कुछ हफ़्ते
पहले ख़ामेनेई ने कहा था कि अमेरिका के साथ बातचीत 'बुद्धिमानी नहीं' है
और इससे देश की समस्याओं का 'समाधान नहीं होगा.'
अमेरिकी सेना ने ओमान के तट पर बचाए गए 14 भारतीय नाविकों को लेकर क्या दावा किया
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इमेज कैप्शन, सेंटकॉम ने कहा कि रविवार को रेस्क्यू ऑपरेशन चलाया गया (सांकेतिक तस्वीर)
अमेरिकी सेंट्रल कमांड (सेंटकॉम) ने
दावा किया है कि उसने रविवार को उत्तरी अरब सागर में 14 भारतीय नाविकों को बचाने
में मदद की. सेंटकॉम ने इस ऑपरेशन से जुड़ा एक बयान साझा किया है.
इससे पहले ओमान स्थित भारतीय दूतावास ने कहा था कि रेस्क्यू ऑपरेशन ओमान के अधिकारियों के समन्वय में आसपास मौजूद
जहाज़ों के ज़रिए चलाया गया.
बाद में रविवार को ही भारतीय दूतावास ने बताया कि सभी 14 भारतीय नाविकों को सफलतापूर्वक बचा लिया गया और वे जबल अली 9 पर सवार होकर मुंबई के लिए रवाना हो गए हैं.
सेंटकॉम ने 'डिफ़ेंस विज़ुअल इन्फ़ॉर्मेशन डिस्ट्रिब्यूशन सर्विस' (डीवीआईडीएस) का एक बयान में रेस्क्यू अभियान के बारे में बताया है.
बयान में लिखा है, "अमेरिकी नौसेना के एक सर्च एंड रेस्क्यू
हेलिकॉप्टर ने 14 जून को उत्तरी अरब सागर में 14 भारतीय नाविकों को बचाने में मदद
की."
"फंसे हुए नाविकों की ओर से रविवार
दोपहर लगभग 12.30 बजे (भारतीय समयानुसार) डिस्ट्रेस
कॉल मिलने के बाद अमेरिकी नौसेना का एक पी-8 विमान सबसे पहले घटनास्थल पर पहुंचा. विमान ने खोज और बचाव किट गिराई,
जिसमें एक लाइफ़ राफ़्ट भी शामिल थी. 14 नाविक उसी लाइफ़ राफ़्ट पर सवार हो गए."
"इसके बाद मोटर वेसल (एम/वी) जबल अली 9 घटनास्थल पर पहुंचा और लाइफ़ राफ़्ट से 11 चालक दल के सदस्यों को सुरक्षित निकाल लिया
गया."
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इमेज कैप्शन, भारतीय दूतावास ने बचाए गए 14 भारतीय नाविकों की तस्वीर साझा की है
डीवीआईडीएस के मुताबिक़, अन्य तीन नाविकों की लाइफ़ राफ़्ट पलट गई थी और उन्हें अमेरिका के विमानवाहक पोत यूएसएस अब्राहम लिंकन के एक एमएच-60 सी हॉक हेलिकॉप्टर ने बचाया.
इसके बाद तीनों नाविकों को एम/वी जबल अली 9 पर पहुंचाया गया.
ईरान-अमेरिका के बीच समझौते पर ब्रिटेन, फ़्रांस, जर्मनी और इटली के नेताओं ने क्या कहा
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इमेज कैप्शन, ब्रिटेन, फ़्रांस, जर्मनी और इटली के नेताओं ने समझौते का स्वागत किया है (फ़ाइल फ़ोटो)
ईरान और अमेरिका के बीच समझौते पर
ब्रिटेन, फ़्रांस, जर्मनी और इटली के नेताओं ने एक संयुक्त बयान जारी किया है.
इन देशों के नेताओं ने कहा है कि वे
अमेरिका, ईरान और क्षेत्रीय साझेदारों के साथ
मिलकर इस "अवसर का पूरा लाभ उठाने" के लिए काम करेंगे.
ई4 समूह के नाम से जाने जाने वाले इन
देशों ने कहा, "हम इस कूटनीतिक सफलता के लिए अमेरिका,
ईरानी सरकार और इसमें शामिल सभी पक्षों को बधाई
देते हैं, जिनमें पाकिस्तान, क़तर और अन्य सभी मध्यस्थ शामिल हैं."
बयान में कहा गया, "यह क्षेत्रीय स्थिरता बहाल करने और वैश्विक
अर्थव्यवस्था को स्थिर करने का एक अवसर है."
ब्रिटेन, फ़्रांस, जर्मनी और इटली के नेताओं ने समझौते
को 'तेज़ी से और पूरी तरह लागू किए जाने' की अपील की है.
उन्होंने कहा कि "स्ट्रेट ऑफ़
होर्मुज़ को तत्काल फिर से खोलना और वहां बिना किसी शर्त और प्रतिबंध के नैविगेशन
की आज़ादी सुनिश्चित किया जाना बेहद ज़रूरी है."
इन नेताओं ने लेबनान की
'स्थिरता, संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता'
के प्रति अपने समर्थन को भी दोहराया.
अमेरिका-ईरान के बीच समझौते में किन बिंदुओं का ज़िक्र, ईरानी सरकारी मीडिया ने बताया
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इमेज कैप्शन, ईरानी सरकारी मीडिया ने बताया है कि अंतिम समझौता संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के एक प्रस्ताव के ज़रिए मंज़ूर किया जाएगा (फ़ाइल फ़ोटो)
ईरान के सरकारी मीडिया ने अमेरिका और
ईरान के बीच घोषित समझौते (एमओयू) के 14 बिंदुओं की जानकारी होने का दावा किया है.
हालांकि, इन बिंदुओं की आधिकारिक पुष्टि अब तक किसी भी देश की ओर से नहीं की गई
है.
ईरान के अर्द्ध सरकारी समाचार एजेंसी मेहर न्यूज़ के मुताबिक़ प्रस्तावित
बिंदुओं में लेबनान समेत सभी मोर्चों पर स्थायी
युद्धविराम का मुद्दा है.
इसके अलावा इन बिंदुओं का भी ज़िक्र है-
अमेरिका की ओर से ईरान के आंतरिक
मामलों में हस्तक्षेप नहीं करने की प्रतिबद्धता
30 दिनों के भीतर अमेरिकी नौसैनिक
नाकेबंदी हटाना
ईरानी क्षेत्र से अमेरिकी सैनिकों की वापसी
"ईरानी व्यवस्था" के तहत 30 दिनों के भीतर स्ट्रेट ऑफ़ होर्मुज़ को फिर से
खोलना
अमेरिका और उसके सहयोगियों की ओर से
ईरान के पुनर्निर्माण के लिए कम से कम 300 अरब डॉलर की योजनाएं
ईरानी तेल और ऊर्जा उत्पादों पर लगे
प्रतिबंधों को समाप्त करना
परमाणु हथियार नहीं बनाने की ईरान की
प्रतिबद्धता को दोहराना
अमेरिका की ओर से क्षेत्र में अपनी
सैन्य मौजूदगी नहीं बढ़ाने और नए प्रतिबंध नहीं लगाने की प्रतिबद्धता
मेहर न्यूज़ एजेंसी ने यह भी बताया
कि "अंतिम वार्ता तब तक शुरू नहीं होगी, जब तक ईरान की फ़्रीज़ की हुई संपत्तियों का कम से कम आधा हिस्सा
रिलीज़ नहीं किया जाता, ईरानी तेल पर लगे प्रतिबंध निलंबित
नहीं किए जाते और नौसैनिक नाकाबंदी नहीं हटाई जाती."
रिपोर्ट में कहा गया है कि अंतिम
समझौते को संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के एक प्रस्ताव के ज़रिए मंज़ूरी दी
जाएगी.
अमेरिका और ईरान के बीच डील की घोषणा के बाद तेल की क़ीमतों में गिरावट, पीटर हॉस्किन्स, बिज़नेस रिपोर्टर
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इमेज कैप्शन, रविवार को डोनाल्ड ट्रंप ने समझौते पर पहुंचने की घोषणा की, हालांकि इस पर हस्ताक्षर शुक्रवार को होगा
अमेरिका और ईरान के बीच समझौते की घोषणा के बाद एशिया में शुरुआती
कारोबार के दौरान तेल की क़ीमतों में गिरावट दर्ज की गई.
वहीं, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि इस समझौते के तहत अहम
समुद्री मार्ग होर्मुज़ स्ट्रेट को फिर से खोला जाएगा.
इसके बाद वैश्विक तेल मानक ब्रेंट
क्रूड की क़ीमत 3.8 फ़ीसदी गिरकर 84.02 डॉलर प्रति बैरल पर आ गई,
जबकि अमेरिका में कारोबार होने वाला तेल 4.1
फ़ीसदी गिरकर 81.40 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया.
पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज़
शरीफ़ ने कहा कि समझौते पर आधिकारिक तौर पर हस्ताक्षर शुक्रवार, 19 जून को स्विट्ज़रलैंड में होगा.
इसके बाद ट्रंप ने सोशल मीडिया पर
लिखा, "क्षेत्र में तेल की निर्बाध आवाजाही फिर से शुरू
होगी."
28 फ़रवरी को अमेरिका और इसराइल की ओर
से ईरान पर हवाई हमले शुरू किए जाने के कुछ समय बाद से होर्मुज़
प्रभावी रूप से बंद था.
दुनिया के लगभग 20 फ़ीसदी तेल और
लिक्विफ़ाइड नेचुरल गैस (एलएनजी) की आपूर्ति सामान्य तौर पर इसी समुद्री रास्ते से
होती है.
हाल के महीनों में वैश्विक ऊर्जा
बाज़ारों में तेज़ उतार-चढ़ाव देखने को मिला है. युद्ध शुरू होने से पहले ब्रेंट
क्रूड की क़ीमत लगभग 70 डॉलर प्रति बैरल थी, लेकिन संघर्ष के दौरान यह क़ीमत बढ़कर क़रीब 120 डॉलर प्रति बैरल तक
पहुंच गई थी.