उत्तर
प्रदेश के सबसे प्रतिष्ठित मेडिकल संस्थानों में से एक किंग जॉर्ज मेडिकल
यूनिवर्सिटी ने अपने सभी हॉस्टलों के मेस में मांसाहारी खाना पकाने और परोसने पर रोक लगा
दी है.
विश्वविद्यालय का कहना है कि यह केवल एक मौखिक एडवाइज़री है. स्टूडेंट्स चाहें
तो ऑनलाइन ऑर्डर कर अपने कमरों में नॉन वेज खा सकते हैं.
केजीएमयू
में कुल 18 हॉस्टल हैं, जिनमें क़रीब 2,500 स्टूडेंट्स रहते हैं.
बीबीसी
हिंदी से बातचीत में विश्वविद्यालय के प्रवक्ता डॉ. केके सिंह ने कहा,
"हमारे
यहां दो तरह के मेस चलते हैं. कुछ मेस स्टूडेंट्स सहकारी व्यवस्था (को-ऑपरेटिव) के तहत
ख़ुद संचालित करते हैं, जबकि
कुछ यूनिवर्सिटी द्वारा संचालित हैं."
"इसके अलावा डॉक्टर ऑफ़ मेडिसिन के स्टूडेंट्स के लिए सैटेलाइट फ्लैट जैसे हॉस्टल हैं, जहां उनके पास अपना किचन होता है,
वहां ऐसी कोई रोक
नहीं है.''
उन्होंने कहा, "हमने
यूनिवर्सिटी द्वारा संचालित मेस को मौखिक रूप से सलाह दी है कि वहां नॉन वेज न
बनाया जाए और उसकी जगह पनीर, चना जैसे विकल्प दिए जाएं. को-ऑपरेटिव मेस से भी ऐसा करने को कहा गया
है, लेकिन
कोई लिखित आदेश जारी नहीं किया गया है."
"न तो हमने कैंपस में नॉन-वेज खाने पर रोक
लगाई है और न ही सरकार या राजभवन ने ऐसा करने के लिए कहा है."
राज्यपाल की टिप्पणी से जोड़ा जा रहा है फ़ैसला
हालांकि यूनिवर्सिटी का यह फ़ैसला ऐसे समय आया है जब एक दिन पहले आयोजित केजीएमयू के 22वें दीक्षांत समारोह में उत्तर प्रदेश की राज्यपाल और विश्वविद्यालय की कुलपति आनंदीबेन पटेल ने छात्रावासों के मेस का ज़िक्र करते हुए नॉन वेज खाने पर टिप्पणी की थी.
13 जुलाई को आयोजित समारोह में आनंदीबेन पटेल ने कहा था, "राजभवन की टीम ने विश्वविद्यालय के तीन मेस का निरीक्षण किया और पाया कि वहां नॉन वेज बनता है. एक जगह एक्सपायर्ड मसालों का भी प्रयोग किया जा रहा था."
राज्यपाल ने अपने संबोधन में इसके आगे नॉन वेज पर किसी प्रतिबंध की बात नहीं कही. लेकिन अब चूंकि अगले ही दिन यूनिवर्सिटी ने नॉनवेज न बनाने को लेकर मेस में मौखिक एडवाइज़री जारी की है, तब दोनों घटनाओं को एक दूसरे से जोड़कर देखा जा रहा है.
हालांकि विश्वविद्यालय का कहना है कि यह निर्णय सीधे तौर पर राजभवन के किसी आदेश के आधार पर नहीं लिया गया.
डॉ. केके सिंह ने कहा, "15 जून को राम मनोहर लोहिया आयुर्विज्ञान संस्थान के दीक्षांत समारोह में भी राज्यपाल ने छात्रावासों में नॉन-वेज परोसे जाने पर नाराज़गी जताई थी. हमने उसी को ध्यान में रखते हुए यह एडवाइज़री जारी की है.''
यह पहली बार नहीं है जब आनंदीबेन पटेल ने किसी यूनिवर्सिटी के छात्रावास में परोसे जाने वाले नॉन-वेज खाने पर सवाल उठाए हों.
इससे पहले 15 जून को राम मनोहर लोहिया आयुर्विज्ञान संस्थान के तीसरे दीक्षांत समारोह में उन्होंने हॉस्टल में एक हफ़्ते में दो दिन नॉन-वेज खाना परोसे जाने की व्यवस्था पर भी टिप्पणी की थी.