कमला हैरिस को मिली चुनावी हार के बाद देश के नाम संबोधन में जो बाइडन ने क्या कहा?

अमेरिका के राष्ट्रपति जो बाइडन ने अमेरिकी राष्ट्रपति चुनावों के परिणाम को लेकर राष्ट्र को संबोधित किया है.

सारांश

लाइव कवरेज

अभिषेक पोद्दार और अश्वनी पासवान

  1. जम्मू-कश्मीर विधानसभा में हंगामे के बाद क्या बोले डिप्टी सीएम और बीजेपी के नेता

    जम्मू कश्मीर विधानसभा में हंगामे के वक़्त की तस्वीर

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    जम्मू-कश्मीर विधानसभा में हंगामे के बाद राजनीतिक प्रतिक्रियाएं भी आने लगी हैं.

    जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री सुरेंद्र कुमार चौधरी ने मीडिया के सामने एक बयान में कहा, "हम लोग भारत माता को मज़बूत करना चाहते हैं और ये लोग (बीजेपी) हैं जो ना भारत माता के हैं, ना देश के और ना किसी और के हैं. ये कवल अपने हित की बात सोचते हैं."

    राज्य के उपमुख्यमंत्री ने कहा, “हम बेरोज़गारी, अस्पताल, शिक्षा, पर्यटन और उद्योग की बात करते हैं. ये केवल अपनी कुर्सी चलाने की बात करते हैं. जो फ़ारूक़ अब्दुल्लाह, नेशनल कॉन्फ़्रेंस, उमर अब्दुल्लाह कह रहे हैं वो उनके हक़ की बात है.”

    सदन में अनुच्छेद 370 के समर्थन वाले पोस्टर दिखाने पर इंजीनियर रशीद के भाई और उनकी पार्टी आवामी इत्तेहाद के विधायक ख़ुर्शीद अहमद शेख़ ने कहा, “ये बिलकुल क़ानूनी है. कल भी भाजपा के लोग स्पीकर साहब की कुर्सी पर कब्ज़ा करना चाहते थे.”

    अवामी इत्तेहाद पार्टी के विधायक खुर्शीद अहमद शेख

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    ख़ुर्शीद ने कहा, “हमने लोकतांत्रिक तरीके से जब सदन के शेड्यूल का एलान किया गया था तभी यह बता दिया था कि हम 370 और 35ए के सिलसिले में एक प्रस्ताव लाना चाहते हैं. लेकिन हमें यह कह कर मना कर दिया गया कि इस वक़्त सदन की केवल एक छोटी कार्यवाही होगी. इसके बाद जब हमने बात करने की कोशिश की तो भी हमें मना कर दिया गया. तो हमारे पास क्या तरीका बचता था. बीजेपी के लोग टेबलों के ऊपर खड़े हो सकते हैं तो क्या हम एक बैनर नहीं दिखा सकते. इस बैनर में वही है जो कश्मीरियों के दिलों में है.”

    बीजेपी नेता कवींद्र गुप्ता ने कहा, “नेशनल कॉन्फ्रेंस और कश्मीर की पार्टियां राज्य का माहौल ख़राब कर रही हैं. स्पीकर नेशनल कॉन्फ्रेंस के एजेंट के तौर पर काम कर रहे हैं. उससे भी माहौल ख़राब हो रहा है. स्पीकर ने ध्वनिमत से 370 के प्रस्ताव को पास कर दिया. इससे भी स्थितियां बिगड़ी हैं. आज भी बीजेपी के विधायकों को मार्शलों ने ज़बरदस्ती सदन से बाहर निकाला है. इससे साफ है कि सरकार खुद चाहती है कि माहौल बिगड़े.”

  2. अनुच्छेद 370 के समर्थन वाले बैनर दिखाने के बाद जम्मू-कश्मीर विधानसभा में फिर हंगामा

    जम्मू कश्मीर विधानसभा

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    जम्मू-कश्मीर विधानसभा में बीजेपी विधायकों ने अनुच्छेद 370 की बहाली वाले प्रस्ताव को पास किए जाने का विरोध किया.

    इस दौरान हंगामा इतना बढ़ा कि कुछ देर के लिए सदन की कार्यवाही को रोकना पड़ा.

    समाचार एजेंसी एएनआई और पीटीआई के मुताबिक़, गुरुवार को सदन की कार्यवाही शुरू होते ही बीजेपी के सदस्यों ने पास हुए प्रस्ताव का विरोध शुरू कर दिया.

    इस प्रस्ताव में केंद्र सरकार से जम्म-कश्मीर के विशेष दर्जे की बहाली के लिए संवैधानिक व्यवस्था करने की मांग की गई है.

    लेकिन जब बीजेपी सदस्य सुनील शर्मा इस प्रस्ताव पर बोल रहे थे, उसी समय आवामी इत्तेहाद पार्टी के नेता और विधायक शेख़ खुर्शीद वेल में घुसे और उन्होंने अनुच्छेद 370 और 35ए के समर्थन वाले बैनर दिखाए.इसका बीजेपी ने विरोध किया और विपक्षी विधायक भी वेल में घुस गए.

    जम्मू-कश्मीर विधानसभा में नेशनल कॉन्फ़्रेंस की सरकार ने बुधवार को 370 की बहाली के लिए एक प्रस्ताव पास किया था.

    पाँच अगस्त 2019 को केंद्र सरकार ने जम्मू-कश्मीर को विशेष राज्य का दर्जा देने वाले अनुच्छेद 370 और 35ए को निरस्त कर के इसे दो केंद्र शासित प्रदेशों में बांट दिया था.

  3. अमेरिका के राष्ट्रपति चुनाव के नतीजों के बाद बाइडन ने किया ट्रंप को फ़ोन, क्या हुई बात?

    जो बाइडन (फ़ाइल फ़ोटो)

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    राष्ट्रपति चुनाव में जीत के बाद ट्रंप कैंपेन का कहना है कि अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडन ने ट्रंप को बधाई देने के लिए फ़ोन किया और सत्ता हस्तांरण की प्रक्रिया पर चर्चा के लिए व्हाइट हाउस आने का न्योता भी दिया है.

    ट्रंप अभियान के प्रवक्ता स्टीवन चांग ने कहा, "ट्रंप बैठक की प्रतीक्षा कर रहे हैं, जो जल्द ही होगी और उन्होंने इस कॉल की बहुत सराहना की है."

    अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव की परंपरा के तहत, राष्ट्रपति आमतौर पर आने वाले प्रशासन को व्हाइट हाउस में आमंत्रित करते हैं और उनका अभिवादन करते हैं.

    इसके बाद दोनों शपथ ग्रहण समारोह के लिए राजधानी वॉशिंगटन डीसी के लिए रवाना होते हैं.

    हालांकि, साल 2020 में डोनाल्ड ट्रंप ने अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव में हार के बाद इस परंपरा का पालन नहीं किया था.

  4. भारतीय उच्चायोग को कनाडा में क्यों रद्द करना पड़ा अपना कार्यक्रम

    टोरंटो में भारतीय दूतावास के बाहल उपद्रव की एक तस्वीर (यह फ़ोटो पिछले साल की है)

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    कनाडा के टोरंटो में भारतीय उच्चायोग ने पहले से निर्धारित अपने कुछ कैंपों को रद्द करने का फ़ैसला किया है.

    भारतीय उच्चायोग के मुताबिक़, “भारतीय कैंपो के आयोजन को न्यूनतम सुरक्षा मुहैया कराने में असमर्थता जताने के बाद पहले से निर्धारित कुछ शिविरों को हमने रद्द करने का फ़ैसला किया है.”

    भारत और कनाडा के बीच रिश्तों में लंबे वक़्त से तनाव जारी है. हाल ही में कनाडा के हिंदू मंदिर पर हमले की ख़बर भी आई थी.

    भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और विदेश मंत्री एस जयशंकर ने इस हमले की कड़ी निंदा करते हुए कनाडा सरकार से सख़्त कार्रवाई की मांग की थी.

  5. अफ़ग़ानिस्तान की तालिबान सरकार ने ट्रंप की जीत पर क्या कहा?

    डोनाल्ड ट्रंप (फ़ाइल फ़ोटो)

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    अमेरिका में डोनाल्ड ट्रंप की चुनावी जीत पर अफ़ग़ानिस्तान की तालिबान सरकार ने भी प्रतिक्रिया ज़ाहिर की है.

    अफ़ग़ानिस्तान की तालिबान सरकार के विदेश मंत्रालय ने संतुलित विदेश नीति की उम्मीद रखते हुए आशा व्यक्त की है कि आने वाली अमेरिकी सरकार दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय संबंधों में ठोस प्रगति सुनिश्चित करेगी.

    तालिबान सरकार के विदेश मंत्रालय ने उम्मीद जताई है, "नई अमेरिकी सरकार अफ़ग़ानिस्तान को लेकर व्यवहारिक नज़रिया अपनाएगी, जिससे दोनों देशों के बीच संबंधों का एक नया दौर शुरू हो सकेगा."

    तालिबान के विदेश मंत्रालय ने यह उम्मीद भी जताई है कि ट्रंप दुनिया भर में चल रहे संघर्ष ख़ास तौर पर ग़ज़ा और लेबनान में चल रहे तनाव को ख़त्म करने में अहम भूमिका निभाएंगे.

    ग़ौरतलब है कि साल 2016 में जब ट्रंप पहली बार राष्ट्रपति बने थे, उसी कार्यकाल में उन्होंने एलान कर दिया था कि वे अमेरिकी सेना को अफ़ग़ानिस्तान से वापस बुलाएंगे.

  6. ट्रंप की जीत पर फ़लस्तीनी अथॉरिटी और हमास ने क्या कहा?

    डोनाल्ड ट्रंप

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    फ़लस्तीनी अथॉरिटी के प्रमुख महमूद अब्बास ने अमेरिकी चुनाव में जीत हासिल करने पर डोनाल्ड ट्रंप को बधाई दी है और उनके क़ामयाबी की कामना की है.

    फ़लस्तीनी अथॉरिटी के नियंत्रण वाली समाचार एजेंसी वफ़ा की वेबसाइट पर बुधवार को पोस्ट किए गए अपने एक संदेश में महमूद अब्बास ने क्षेत्र में शांति और सुरक्षा के लिए ट्रंप के साथ काम करने की उम्मीद ज़ाहिर की.

    अपने संदेश में उन्होंने कहा कि दुनिया अंतरराष्ट्रीय क़ानून के मुताबिक़ चलनी चाहिए.

    अब्बास ने कहा, “हम शांति के लिए अपनी प्रतिबद्धता पर दृढ़ हैं और हमें यक़ीन है कि अमेरिका भी आपके नेतृत्व में फ़लस्तीनियों की वैध मांग का समर्थन करेगा.”

    पिछले एक साल से भी अधिक समय से ग़ज़ा में इसराइल और हमास के बीच संघर्ष जारी है.

    अमेरिकी चुनाव के दौरान इसराइल डेमोक्रेसी इंस्टीट्यूट के एक सर्वेक्षण के मुताबिक़, लगभग दो तिहाई इसराइली नागरिकों का मानना था कि ट्रंप इसराइली हितों के लिए हैरिस के मुक़ाबले बेहतर नेता हैं.

    बीबीसी के अमेरिकी सहयोगी सीबीएस न्यूज़ के मुताबिक़ ग़ज़ा के एक निवासी का कहना था, “अमेरिकी चुनाव में कोई भी जीते. रिपब्लिकन या डेमोक्रेट दोनों एक ही हैं. वे बस एक ही सिक्के के दो पहलू हैं.”

    हमास ने क्या कहा

    ट्रंप की जीत पर हमास के वरिष्ठ नेता बासम नैम ने इसे अमेरिकियों का निजी मामला बताया.

    हालांकि उन्होंने ग़ज़ा में जारी संघर्ष के समाप्ति की उम्मीद जताई है. इसके साथ ही उन्होंने फ़लस्तीन को एक स्वतंत्र देश और यरूशलम को उसकी राजधानी बनाए जाने में सहयोग की उम्मीद ज़ाहिर की है.

  7. अमेरिका में डोनाल्ड ट्रंप की जीत पर ईरान ने दी प्रतिक्रिया

    डोनाल्ड ट्रंप

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    अमेरिकी चुनाव में डोनाल्ड ट्रंप की जीत के बाद ईरान ने भी प्रतिक्रिया दी है.

    ईरानी सरकार की प्रवक्ता फ़तेमेह मोहजेरानी ने बुधवार को सरकारी टीवी चैनल आईआईबी पर ट्रंप की जीत के ईरान पर पड़ने वाले संभावित प्रभाव को ख़ारिज किया है.

    ईरान और इसराइल में इस वक़्त तनातनी है. इरानी सरकार की प्रवक्ता ने कहा, “अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव हमारे लिए मायने नहीं रखते. अमेरिका और ईरान में सरकारें बदलने से बहुत कुछ बदलने वाला नहीं है. व्हाइट हाउस में कोई भी बैठे, इससे हमारे लोगों के जीवन पर कोई भी प्रभाव नहीं पड़ेगा.”

    साल 2016 में डोनाल्ड ट्रंप ने अपने पहले कार्यकाल में अमेरिका के साथ ईरान के परमाणु समझौते को ख़त्म कर दिया था.

    ईरान और अमेरिका के बीच परमाणु समझौता बराक ओबामा के कार्यकाल में हुआ था.

    समाचार एजेंसी एपी के साथ बातचीत में तेहरान के एक छात्र ने ट्रंप की जीत पर कहा, “इस बात में कोई संदेह नहीं है कि ट्रंप ईरान पर लगे प्रतिबंधों को और बढ़ाएंगे.”

    ईरानी छात्र ने कहा, "जो चीजें हमारे पक्ष में नहीं हैं वे और भी बदतर होंगी. ज़हिर तौर पर इसका हमारी अर्थव्यवस्था और सामाजिक स्थिति पर असर पड़ेगा."

  8. अमेरिका में डोनाल्ड ट्रंप की जीत पर चीन ने क्या कहा?

    डोनाल्ड ट्रंप

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    एक बार फिर से अमेरिका का राष्ट्रपति चुने जाने पर चीन के विदेश मंत्रालय ने डोनाल्ड ट्रंप को बधाई दी है.

    चीन के विदेश मंत्रालय ने अपने आधिकारिक ‘एक्स’ अकाउंट से बुधवार को एक पोस्ट करते हुए लिखा, “हम अमेरिकी जनता के चुनाव का सम्मान करते हैं और डोनाल्ड ट्रंप को अमेरिकी राष्ट्रपति चुने जाने पर बधाई देते हैं.”

    चीनी विदेश मंत्रालय ने कहा, “अमेरिका को लेकर चीन की जो नीति है वह आगे भी जारी रहेगी. हम आपसी सम्मान, शांतिपूर्ण सह-अस्तित्व और दोनों देशों के फ़ायदे के सिद्धांतों के तहत अपने द्विपक्षीय संबंघों को आगे भी जारी रखेंगे.”

    5 नवंबर 2024 को अमेरिकी राष्ट्रपति के चुनावी नतीजों में रिपब्लिकन पार्टी के उम्मीदवार डोनाल्ड ट्रंप को जीत मिली थी.

    अमेरिकी इतिहास में ऐसा सिर्फ़ दूसरी बार हुआ, जब कोई राष्ट्रपति एक चुनाव हारने के बाद फिर से व्हाइट हाउस में लौटा है.

    अमेरिका में अभी कोई भी महिला राष्ट्रपति नहीं बन सकी है और कमला हैरिस भी इस परंपरा को तोड़ने में नाकाम रहीं.

  9. कमला हैरिस की हार पर बराक ओबामा ने क्या कहा?

    पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा

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    अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव के नतीजों के बाद पूर्व राष्ट्रपति बराक ओबामा और उनकी पत्नी मिशेल ओबामा ने डोनाल्ड ट्रंप और उपराष्ट्रपति पद के उम्मीदवार जेडी वेंस को बधाई दी है.

    ओबामा दंपती ने नतीजों के बारे में प्रतिक्रिया देते हुए कहा, "चुनाव के दौरान लाखों अमेरिकी जनता ने ना केवल राष्ट्रपति के लिए बल्कि एक नेता के लिए भी वोट किया है. अब नतीजा आ चुका है और हम राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और सीनेटर जेडी वेंस को उनकी जीत के लिए बधाई देते हैं."

    उन्होंने कहा, "स्पष्ट रूप से यह वो नतीजा नहीं है, जिसकी हमें उम्मीद थी. कई मुद्दों पर ट्रंप के साथ हमारे गहरे मतभेद हैं. लेकिन लोकतंत्र का मतलब यही है होता कि हमारा सोचना हमेशा सही नहीं हो सकता और सत्ता के हस्तांतरण के लिए शांतिपूर्वक तैयार रहना चाहिए.”

    डेमोक्रेटिक पार्टी की उम्मीदवार कमला हैरिस के लिए ओबामा दंपती ने कहा, “हमें कमला हैरिस और उनके साथी टिम वाल्ज़ पर गर्व है. ये दोनों असाधारण जनसेवक हैं, जिन्होंने कमाल का अभियान चलाया.”

    पूर्व राष्ट्रपति ओबामा का यह भी मानना था कि महामारी और उसके बाद के समय में मंहगाई जैसे मुद्दे दुनिया के कई देशों के लिए बड़ी समस्या थे और अमेरिका भी इससे अछूता नहीं था.

    ओबामा ने कहा, "इन समस्याओं को हल किया जा सकता है, लेकिन तभी जब एक दूसरे को सुना जाय और उन सिद्धांतों का पालन किया जाय, जिन्होंने अमेरिका को महान बनाया है.

    ओबामा के मुताबिक़, "अमेरिका जैसे विशाल और विविधता भरे देश में हमेशा एक बात पर एकमत नहीं हुआ जा सकता. लेकिन आगे बढ़ने के लिए सद्भावना और विनम्रता का विचार रखना होता है. उन लोगों के लिए भी जो हमसे सहमत नहीं होते हैं. इसी तरह हम यहां तक पहुंचे हैं और इसी तरह हम एक एसे देश का निर्माण करते रहेंगे जो कि अधिक निष्पक्ष, अधिक न्यायपूर्ण, अधिक समानता वाला और अधिक स्वतंत्र होगा."

  10. नमस्कार

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