अमेरिका-ईरान के बीच 'न युद्ध, न शांति', फिर भी जारी है जवाबी कार्रवाई, लीस डुसेट का विश्लेषण

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अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने हाल ही में ईरान के साथ हुए नाज़ुक युद्धविराम के बारे में कहा, "यह युद्धविराम दुनिया के दूसरे हिस्सों में हुए युद्धविरामों से बहुत अलग है."
पिछले महीने हुए इस युद्धविराम और अंतरिम समझौते की अब भी परीक्षा हो रही है. दोनों पक्ष इसकी शर्तों को अपने-अपने तरीके से समझ रहे हैं.
ऐसा लगता है कि इस क्षेत्र को फ़िलहाल 'न युद्ध, न शांति' जैसी स्थिति के साथ जीना होगा. इसकी वजह एक छोटा और अस्पष्ट भाषा में लिखा गया समझौता है, जिसकी अलग-अलग व्याख्या की जा रही है.
ईरान मानता है कि इस समझौते के तहत उसे होर्मुज़ स्ट्रेट के मैनेजमेंट में भूमिका मिली है. वह यह भी मानता है कि जहाज़ों को उन्हीं मार्गों से गुज़रना चाहिए, जिन्हें ईरान तय करे.
वहीं, अमेरिका का कहना है कि इस समझौते से समुद्री यातायात की आज़ादी बहाल हुई है. उसके मुताबिक़, अब जहाज़ों की आवाजाही सामान्य रूप से हो सकती है.
दोनों पक्ष पूर्ण युद्ध में लौटना नहीं चाहते. लेकिन अपनी स्थिति मज़बूत करने के लिए दोनों जवाबी कार्रवाई जारी रखने को तैयार हैं.
ईरान और अमेरिका, दोनों के भीतर ऐसे कट्टरपंथी और युद्ध समर्थक समूह मौजूद हैं जो सरकारों पर दबाव बना रहे हैं.
तनाव के इस माहौल के बीच ट्रंप ने एक बार फिर कहा है कि "वे किसी समझौते के लिए बेताब हैं."
उनका इशारा ईरान की ओर था.
आमतौर पर ऐसे बयान इस बात का संकेत माने जाते हैं कि पर्दे के पीछे मध्यस्थ सक्रिय हैं. वे दोनों पक्षों के बीच किसी नए समझौते या बातचीत का रास्ता निकालने की कोशिश कर रहे हैं.



























