असम के दीमा हसाओ ज़िले के उमरांगशु इलाक़े की एक कोयला खदान में फंसे मजदूरों को तलाशने के लिए भारतीय नौसेना के गोताखोरों ने बुधवार सुबह से कई प्रयास किए, लेकिन कोई सुराग हाथ नहीं लगा.
विशाखापत्तनम से आए भारतीय नौसेना के गोताखोरों की टीम सोनार इमेजिंग उपकरण के साथ कैमरे लगे हुए रिमोट ऑपरेटेड वाहन लेकर खदान के अंदर गए थे.
हालांकि सुबह जब एनडीआरएफ और सेना की 21 पैरा के गोताखोर नीचे खदान में गए थे तो कुछ समय बाद ही उन्हें एक मजदूर का शव मिल गया था.
इस बचाव अभियान में काम कर रहे एनडीआरएफ के डिप्टी कमांडेंट एन के तिवारी ने बीबीसी से कहा, "पहले आज सुबह एनडीआरएफ और सेना की 21 पैरा के गोताखोर नीचे खदान में उतरे थे. वो करीब 9 बजे एक शव को लेकर बाहर निकल कर आए."
"इसके बाद सेना, एनडीआरएफ और नेवी के गोताखोरों की एक टीम वापस खदान के अंदर गई. इस तरह आज दिन भर अलग-अलग समय में बारी-बारी से मजदूरों को तलाशा गया. करीब 6 बार गोताखोरों की टीम अंदर गई, लेकिन मजदूरों का कोई सुराग नहीं मिला."
इस बचाव अभियान की जटिलता के बारे में डिप्टी कमांडेंट तिवारी ने बताया, "इस अभियान में मुश्किल इसलिए आ रही है क्योंकि जो कुआं है उसकी गहराई करीब 320 फीट है. इसमें करीब 100 फीट पानी भरा है. हमारे गोताखोर अधिकतम 40 फीट तक जाते हैं. नौसेना गोताखोर और नीचे तक जाते हैं, लेकिन पानी में मलवा काफी है. इस कारण सतह तक जाना काफी मुश्किल है."
एनडीआरएफ अधिकारी की माने तो नौसेना के गोताखोरों ने खदान के बिल्कुल नीचे तक कैमरे लगे उपकरण से तलाश की, लेकिन वहां विजिबिलिटी नहीं होने के कारण कोई चीज पता नहीं चल सकी. फिलहाल खदान से उच्च क्षमता वाले पंप और कुछ लोकल पंप के जरिए पानी निकालने का काम शुरू किया गया है.
असम के दीमा हसाओ ज़िले के तीन किलो इलाक़े में स्थित एक कोयला खदान में सोमवार की सुबह करीब 8 बजे कुछ मजदूर कोयला निकालने गए थे, लेकिन खदान में पानी भर जाने से कई मजदूर अंदर फंस गए.
असम सरकार ने खदान के अंदर फंसे 9 मजदूरों की एक सूची जारी की है, लेकिन वहां काम करने वाले मजदूरों के अनुसार यह संख्या ज्यादा हो सकती है.