कांग्रेस नेता और पूर्व गृह मंत्री पी. चिदंबरम ने 26/11 हमलों से जुड़ा एक बयान दिया है. उन्होंने कहा कि मुंबई में जब ये हमले हुए उस वक्त दुनियाभर से यह दबाव था कि भारत कोई प्रतिक्रिया या कार्रवाई न करे.
एक न्यूज़ चैनल को दिए इंटरव्यू में पी. चिदंबरम ने यह बात कही है. मुंबई में जब ये हमले हुए थे, उस वक्त शिवराज पाटिल केंद्रीय गृह मंत्री थे. उन्होंने हमले के बाद इस्तीफ़ा दे दिया था. इसके बाद चिदंबरम ने देश के गृह मंत्री के तौर पर पद संभाला था.
पी. चिदंबरम से सवाल किया गया, "जब हमले हुए उस वक्त आपके दिमाग में क्या चल रहा था? क्या बदला लेने का विचार आपके मन में आया?"
इस पर उन्होंने कहा, "जब आतंकवादियों को मार दिया गया, उसके एक दिन बाद मैं गृह मंत्री बना... जब मैं गृह मंत्री बना मेरे पास सुरक्षा बलों और इंटेलिजेंस एजेंसियों की तैयारियों की कोई भी जानकारी नहीं थी. मेरे मन में आया कि हमें कुछ बदला लेना चाहिए. मैंने प्रधानमंत्री और दूसरे लोगों से इस बारे में चर्चा भी की."
"चर्चा का निष्कर्ष काफ़ी हद तक एमईए (विदेश मंत्रालय) और आईएफ़एस (इंडियन फ़ॉरेन सर्विस) से प्रभावित था कि हमें सीधे तौर पर प्रतिक्रिया नहीं देनी चाहिए, बल्कि इसके लिए कूटनीतिक तरीके़ अपनाने चाहिए. उस समय यही निष्कर्ष निकला था और मुझे यही बताया गया था."
चिदंबरम ने कहा, "लेकिन, उस समय पूरी दुनिया हमसे कह रही थी कि जंग शुरू मत करिए. जैसे कोंडोलीज़ा राइस, जो उस समय अमेरिका की विदेश मंत्री थीं. मेरे कार्यभार संभालने के दो या तीन दिन बाद वो मुझसे और प्रधानमंत्री से मिलने आईं और उन्होंने कहा कि प्लीज़ प्रतिक्रिया न दें. मैंने कहा यह फ़ैसला सरकार लेगी."
पी. चिदंबरम के इस बयान पर भारतीय जनता पार्टी के नेता और केंद्रीय मंत्री प्रह्लाद जोशी ने प्रतिक्रिया दी है. उन्होंने चिदंबरम के बयान का क्लिप भी सोशल मीडिया पर साझा किया है.
प्रह्लाद जोशी ने कहा, "17 साल बाद पूर्व गृह मंत्री चिदंबरम ने वही माना जो देश जानता था. 26/11 की घटना को विदेशी ताकतों के दबाव की वजह से ग़लत तरीक़े से संभाला गया."